जीवन में अपनी इच्छा अनुसार सफलता पाने के मंत्र !! ~ Balaji Kripa

Friday, 3 October 2014

जीवन में अपनी इच्छा अनुसार सफलता पाने के मंत्र !!


सफलता हर इंसान की चाहत होती है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सफलता सभी को नहीं मिलती है ! ऐसा क्यों होता है? इस संबंध में कई कारण ढूंढे जा सकते हैं ! किंतु मोटे तौर कामयाबी नसीब न होने के पीछे लक्ष्य को लेकर उदासीनता, विचार और कर्म में सही तालमेल का अभाव बड़ा कारण नजर आता है !
यही नहीं, सफलता में निरंतरता भी अहम होती है, क्योंकि उसके बिना तरक्की संभव नहीं ! किंतु अगर मकसद साफ हो, सही विचार हो और कर्मशक्ति भी मौजूद हो तब भी सफलता और तरक्की दूर रह जाए तो फिर इसके क्या कारण हो सकते हैं ? इस सवाल का जवाब हिन्दू धर्म ग्रंथ महाभारत में बताए सफलता व तरक्की के सटीक सूत्रों में मिलता है ! सफलता व तरक्की के ये सूत्र जीवन में उतार साधारण इंसान भी असाधारण बन मनचाही ऊंचाइयों को पा सकता है-
महाभारत में लिखा गया है कि-
उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृति: स्मृति: !
समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तु !!
इस श्लोक में जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार से जुड़ी बातें उन्नति का मूल मंत्र मानी गई है !
पमरिश्र : - अक्सर सफलता पाने की जल्दबाजी या बेचैनी में कई लोग आसान और छोटे रास्ते या तरीकों को चुन तो लेते हैं ! लेकिन मनचाही सफलता से दूर रहने पर निराशा के दौर से गुजरते हैं। असल में सफलता के लिए संकल्प, कर्म के साथ परिश्रम की भावना के तय पैमानों को अपनाए बिना कामयाबी की मंजिल को छूना व उस पर कायम रहना मुश्किल है !
संयम : - छोटी या थोड़ी सी सफलता मिलने पर मन व विचार पर काबू या उतावलेपन से बचना, क्योंकि बिना धैर्य और संयम के सफलता साथ छोड़ देती है, बल्कि तरक्की के रास्ते भी बंद हो जाते हैं !
दक्षता :- सफलता को अवसरों को भुनाने व जल्द लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किसी भी कार्य या कला में कुशलता या महारत बड़ी मददगार होती है ! इसलिए बिना अहंकार के सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें !
धैर्यता  :- तमाम कोशिशों के बाद भी अगर मनचाहे परिणाम न मिलने या अपेक्षा पूरा न होने पर लक्ष्य से न भटकें या न उसे छोडऩे का विचार करें ! बल्कि मजबूत संकल्प और दोगुनी मेहनत के साथ उसे पाने में जुट जाएं !
सावधानी : - किसी भी तरह की सफलता के रास्ते में कई बाधाएं भी मुमकिन है !
इसलिए सारी संभावनाओं और स्थितियों के आंकलन और विश्लेषण के साथ विषय, कार्य और स्थिति के प्रति जागरुकता व सावधानी रखें !  
स्मरण शक्ति: - इसकीस्मरण शक्ति अलग-अलग अर्थों व परिस्थितियों में अलग-अलग अहमियत है ! जैसे ज्ञान व स्मरण शक्ति के अलावा दूसरों के उपकारों, सहयोग या प्रेम को न भूलना आदि !
सोच-विचार : - विवेक का साथ न छोडऩ ! सफलता व तरक्की के लिए कोई भी कदम बढ़ाने से पहले सही और गलत की विचार शक्ति अहम होती है, जिसके लिए अधिक से अधिक ज्ञान व अनुभव बंटोरें !

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