कुंडली में मंगली दोष कैसे होता है और उसके प्रभाब क्या होते हैं !! ~ Balaji Kripa

Wednesday, 29 October 2014

कुंडली में मंगली दोष कैसे होता है और उसके प्रभाब क्या होते हैं !!


जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12 वें स्थान पर हो तो यह मंगल दोष है और ऐसे ब्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है। हमारे समाज में मंगल दोष की उपस्थिति एक बहुत बड़ा डर या भ्रम बन गया है। मंगल दोष को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह वैवाहिक जीवन में समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए विवाह से पहले मंगल दोष के लिए कुंडली मिलाना अनिवार्य है। यह भी जरुरी है कि कुंडली का विश्लेषण करें और यह पता लगाएं कि कुंडली में मंगल दोष है या नहीं।

जाने कैसे होते है मंगली दोष से पीड़ित !!

यदि मंगल पहले स्थान पर हो तो 4, 7 और 8 घर पर दृष्टि करता है। तो वो घर व्यक्ति के चरित्र व को दर्शाता है। इस कारण से व्यक्ति बहुत आवेगी और तुरंत गुस्सा करनेवाला हो सकता है। मंगल की द्रष्टि से चतुर्थ स्थान ,घर, गाड़ी, अग्नि, रसायन या बिजली से दुर्घटना को दर्शाता है। मंगल कि द्रष्टि से सप्तम स्थान में वैवाहिक जीवन में बाधायें आती हैं। अष्टम स्थान में होने से भयंकर दुर्घटना हो सकती है। इस प्रकार लग्न में मंगल का बैठना अशुभ माना जाता है। यदि मंगल चतुर्थ स्थान में बैठा है तो यह 4 के साथ 7, 10 और 11 घर को भी प्रभावित करेगा। हमने 4 और 7 घरों के प्रभावित प्रभावों को जाना है। मगल से प्रभावित दशम घर व्यवसाय में तेजी से बदलाव, अनिद्रा और पिता से तनाव का कारण हो सकता है। ग्यारहवें घर के प्रभावित होने से चोरी या दुर्घटना में हानि हो सकती है। इसलिए चतुर्थ घर में मंगल बहुत अच्छा नहीं है। यदि मंगल सात बे घर में हो तो यह 10, 1 और 2 घर को प्रभावित करता है। सात बा घर वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी का स्थान होता है। इसलिए यहां मंगल का होना वैवाहिक जीवन में कठिनाइयों का सूचक है। दूसरे घर में मंगल पारिवारिक सदस्यों के बीच विवाद पैदा करता है। मतभेद के कारण परिवार में ख़ुशी की कमी और समस्याएं आ सकती हैं। पैसे खो सकते हैं या खर्च की अधिकता हो सकती है। इसलिए 7 वें भाव में मंगल कठिनाइयों को बढ़ा सकता है। यदि मंगल अष्ट्म घर में बैठा है तो यह 11, 2 और 3 घर को प्रभावित करेगा। व्यक्ति आग, रसायन या बिजली से जानलेवा दुर्घटना का शिकार हो सकता है। यदि तीसरा घर मंगल से दृष्ट है तो भाई बहन में तनाव होता है। यह व्यक्ति को बहुत कठोर और हठी बना देता है। इसलिए अष्टम घर में मंगल का होना अच्छा नहीं है। अगर मंगल 12 वें घर में हो तो यह 3, 6 और 7 घर को प्रभावित करता है। 12 वां घर व्यक्ति की आदतों को दर्शाता है। इससे व्यक्ति खर्च की अधिकता के बोझ तले दब जाता है। व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेसर और टेंसन के साथ ही पेट से जुड़ी और खून से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए 12 बे घर में मंगल का होना भी अशुभ है।इस प्रकार मंगल दोष कई तरह की समस्यायों का कारण है जो सभी नहीं दी गयी है यहाँ जिन के परिणाम और भी खराब है । लेकिन परेशान होने की आवश्यकता नहीं हैं। प्रतियेक समस्या का समाधान जरुर होता हैं लेकिन कुडली की समग्र शक्ति, ग्रहों की शक्ति, उपयोगी पहलू और मंगल की शक्ति पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए।

मंगल दोष के लिए  पूजन , व्रत और अनुष्ठान !!
 

जिनकी राशि में मंगल अशुभ फल देने वाला है उनके लिए हम यहां कुछ अचूक उपाय बता रहे हैं जिन्हें अपनाने से मंगल आपके अनुकूल हो जाएगा व्यवसाय और जीवन में चार चांद लग जाएंगे:—-
मंगल शांति के लिए मंगल का दान (लाल रंग का बैल, सोना, तांबा, मसूर की दाल, बताशा, लाल वस्त्र आदि) किसी गरीब जरूरतमंद व्यक्ति को दें।
मंगल का मंत्र: ऊँ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताये धीमहि तन्नौ भौम: प्रचोदयात्। इस मंत्र का नित्य जप करें।
मंगलवार का व्रत रखें।
मंगलवार को किसी गरीब को पेटभर खाना खिलाकर तृप्त करें।
अपने घर में भाई-बहनों का विशेष ध्यान रखें। मंगलवार को उन्हें कुछ विशेष उपहार दें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल हमारे शरीर के रक्त में स्थित माना गया है। अत: ऐसा खाना खाएं जिससे आपका रक्त शुद्ध बना रहे।
मंगल प्रभावित व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का, चिढ़-चिढ़ा हो जाता है, अत: प्रयत्न करें की क्रोध आप पर हावी न हो।
लाल बैल दान करें।
मंगल परम मातृभक्त हैं। वह सभी माता-पिता का सेवा-सम्मान करने वाले लोगों पर विशेष स्नेह रखते हैं अत: मंगलवार को अपनी माता को लाल रंग का विशेष उपहार दें।
मंगल से संबंधित वस्तुएं उपहार में भी ना लें।
लाल रंग मंगल का विशेष प्रिय रंग हैं अत: कम से कम को मंगलवार खाने में ऐसा खाना खाएं जिसका रंग लाल हो, जैसे इमरती, मसूर की दाल, सेवफल आदि।
अगर कुण्डली में मंगल दोष का निवारण ग्रहों के मेल से नहीं होता है तो व्रत और अनुष्ठान द्वारा इसका उपचार करना चाहिए. मंगला गौरी और वट सावित्री का व्रत सौभाग्य प्रदान करने वाला है. अगर जाने अनजाने मंगली कन्या का विवाह इस दोष से रहित वर से होता है तो दोष निवारण हेतु इस व्रत का अनुष्ठान करना लाभदायी होता है.
जिस कन्या की कुण्डली में मंगल दोष होता है वह अगर विवाह से पूर्व गुप्त रूप से घट से अथवा पीपल के वृक्ष से विवाह करले फिर मंगल दोष से रहित वर से शादी करे तो दोष नहीं लगता है.
प्राण प्रतिष्ठित विष्णु प्रतिमा से विवाह के पश्चात अगर कन्या विवाह करती है तब भी इस दोष का परिहार हो जाता है.
मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमान जी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है.
कार्तिकेय जी की पूजा से भी इस दोष में लाभ मिलता है.
महामृत्युजय मंत्र का जप सर्व बाधा का नाश करने वाला है. इस मंत्र से मंगल ग्रह की शांति करने से भी वैवाहिक जीवन में मंगल दोष का प्रभाव कम होता है.
लाल वस्त्र में मसूर दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिष्टान एवं द्रव्य लपेट कर नदी में प्रवाहित करने से मंगल अमंगल दूर होता है.

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