क्या आप हनुमान बालाजी सरकार का जन्म स्‍थान के बारे मै जानते है ?!! ~ Balaji Kripa

Sunday, 12 October 2014

क्या आप हनुमान बालाजी सरकार का जन्म स्‍थान के बारे मै जानते है ?!!


सभी जानना चाहते हैं कि हनुमानजी बालाजी सरकार का जन्म भारत में कहां हुआ था। हनुमानजी बालाजी सरकार के माता-पिता कौन हैं। हनुमानजी की माता का नाम अंजना है इसीलिए उन्हें आंजनेय भी कहा जाता है। उनके पिता का नाम केसरी है इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जता है। केसरी को कपिराज भी कहा जाता था, क्योंकि वे कपिक्षेत्र के राजा थे। अब सवाल यह उठता है कि यह कपि क्षे‍त्र भारत में कहां स्थित था? इस विषय में विद्वानों में मतभेद हैं।
हनुमानजी की जन्म स्थान :=
हनुमानजी बालाजी सरकार का जन्म कल्पभेद से कोई भक्त चैत्र सुदी 1 मघा नक्षत्र को मानते हैं। कोई कार्तिक  वदी 14, कोई कार्तिक  सुदी 15 को मानते हैं। कुछ चैत्र माह की पूर्णिमा को उनके जन्म का समय मानते हैं और कुछ कार्तिक, कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा को, लेकिन ज्यादातर ग्रंथो में चैत्र माह की पूर्णिमा को मान्यता मिली हुई है। हनुमानजी की जन्मतिथि को लेकर मतभेद हैं। कुछ हनुमान जयन्ती की तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मानते हैं तो कुछ चैत्र शुक्ल पूर्णिमा। इस विषय में ग्रंथों में दोनों के ही उल्लेख मिलते हैं, किंतु इनके कारणों में भिन्नता है। पहला जन्मदिवस है और दूसरा विजय दिवस के रूप में ।
अंजनी पर्वत := कुछ विद्वान मानते हैं कि नवसारी (गुजरात) स्थित डांग जिला पूर्व काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। इस दंडकारण्य में राम ने अपने जीवन के 10 वर्ष गुजारे थे। डांग जिला आदिवासियों का क्षेत्र है। हालांकि आदिवासियों के प्रमुक देव राम हैं। आदिवासी मानते हैं कि भगवान राम वनवास के दौरान पंचवटी की ओर जाते समय डांग प्रदेश से गुजरे थे। डांग जिले के सुबिर के पास भगवान राम और लक्ष्मण को शबरी माता ने बेर खिलाए थे। शबरी भील समाज से थी। आज यह स्थल शबरी धाम नाम से जाना जाता है। शबरी धाम से लगभग 7 किमी की दूरी पर पूर्णा नदी पर स्थित पंपा सरोवर है। यहीं मातंग ऋषि का आश्रम था। डांग जिले के आदिवासियों की सबसे प्रबल मान्यता यह भी है कि डांग जिले के अंजना पर्वत में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी बालाजी सरकार का जन्म हुआ था। कुछ विद्वानों का मानना है कि कैथल हरियाणा प्रान्त का एक शहर है इस में हनुमान का जन्म स्थान भी माना जाता है। इसका प्राचीन नाम था कपिस्थल। कपिस्थल कुरू साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था। आधुनिक कैथल पहले करनाल जिले का भाग था।पुराणों के अनुसार इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है। कपि के राजा होने के कारण हनुमानजी के पिता को कपिराज कहा जाता था। कैथल में पर्यटक ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़े अवशेष भी देखे जा सकते हैं। इसके अलावा यहां पर हनुमानजी बालाजी सरकार की माता अंजनी का एक प्राचीन मंदिर भी और अंजना किला भी।

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