भगवान जगन्नाथ जी मन्दिर का सक्षिप्त परिचय !! ~ Balaji Kripa

Sunday, 26 October 2014

भगवान जगन्नाथ जी मन्दिर का सक्षिप्त परिचय !!


उड़ीसा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी शहर में जगन्नाथ मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। जगन्नाथ मंदिर एक हिन्दू मंदिर है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। पुरी के महान मन्दिर में तीन मूर्तियाँ हैं -
मन्दिर में मूर्तियाँ : -
भगवान जगन्नाथ,(श्री कृष्ण )
बलभद्र व( बलराम )
उनकी बहन सुभद्रा की।
मूर्तियों की विशेषता :=
ये सभी मूर्तियाँ काष्ठ की बनी हुई हैं।
मन्दिर की स्थापना :=
 इन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा राजा इन्द्रद्युम्न ने मंत्रोच्चारण व विधि - विधान से की थी। महाराज इन्द्रद्युम्न मालवा की राजधानी अवन्ति से अपना राज–पाट चलाते थे।
रथ यात्रा :=
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास में शुक्ल द्वितीया को होती है। यह एक विस्तृत समारोह है। जिसमें भारत के विभिन्न भागों से आए लोग सहभागी होते हैं। दस दिन तक यह पर्व मनाया जाता है। इस यात्रा को 'गुण्डीय यात्रा' भी कहा जाता है। गुण्डीच का मन्दिर भी है। 
पुरी में जगन्नाथ मंदिर के 8 अजूबे इस प्रकार हैं :-
1.मन्दिर के ऊपर झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।
2.पुरी में किसी भी जगह से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सामने ही लगा दिखेगा।
3.सामान्य दिन के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है।
4.पक्षी या विमानों को मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पायेगें।
5.मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य है.
6.मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी यह व्यर्थ नहीं जाएगी, चाहे कुछ हजार लोगों से 20 लाख लोगों को खिला सकते हैं.
7. मंदिर में रसोई (प्रसाद)पकाने के लिए 7 बर्तन एक दूसरे पर रखा जाता है और लकड़ी पर पकाया जाता है. इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक पकती जाती है।
8.मन्दिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित कोई भी ध्वनि नहीं सुन सकते. आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें जब आप इसे सुन सकते हैं. इसे शाम को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
कुछ और विशेषता भी जाने :-
मन्दिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोइ घर है। प्रति दिन सांयकाल मन्दिर के ऊपर लगी ध्वजा को मानव द्वारा उल्टा चढ़ कर बदला जाता है।मन्दिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट में है।मन्दिर की ऊंचाई 214 फिट है।विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद को बनाने 500 रसोईये एवं 300 उनके सहयोगी काम करते है।
" जय जगन्नाथ जय जय जगन्नाथ "

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