श्री प्रेतराज जी चालीसा !! ~ Balaji Kripa

Friday, 31 October 2014

श्री प्रेतराज जी चालीसा !!

 श्री प्रेतराज जी का चालीसा का नित्य पाठ करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते है !
|| दोहा ||
गणपति की कर वंदना , गुरू चरनन चित लाय !
प्रेतराज जी का लिखूँ, चालीसा हरषाय !!
जय जय भूतादिक प्रबल, हरण सकल दुख भार !
वीर शिरोमणि जयति , जय प्रेतराज सरकार !!
चालीसा:=========

जय जय प्रेत्रराज जगपावन, महा प्रबल त्रय ताप नसावन !
विकट वीर करूणा के सागर , भक्त कष्ट हर सब गुण आगर !!
रतन जडित सिहासन सोहे , देखत सुर नर मुनि मन मोहे !
जगमग सिर पर मुकुट सुहावना, कनन कुण्डल अति मनभावन !!
धनुष कृपाण बाण अरु भाला, वीर वेष अति भृकुटि कराला !
गजारूढ संग सेना भारी, बाजत ढोल मृदंग जुझारी !!
छ्त्र चँवर पंखा सिर डोले , भक्त वृंद मिल जय जय बोले !
भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा, दुष्ट दलन शोभीत भुजदण्डा !!
चलत सैन कांपत भूतलहूँ , दर्शन करत मिटत कलिमलहूँ !
घाटा मेहदीपुर मे आकर, प्रकटे प्रेतराज गुण सागर !!
लाल ध्वजा उड रही गगन मे, नाचत भक्त मगन हो मन मे !
भक्त कामना पुरन स्वामी, बजरंगी के सेवक नामी !!
इच्छा पुरन करने वाले , दुख संकट सब हरने वाले !
वो जिस इच्छा से आते है , वे सब मनवाछित फल पाते है !!
रोगी सेवा मे जो आते , शीघ्र स्वस्थ होकर घर जाते !
भूत, पिशाच, जिन्न बेताला, भागे देखत रुप कराला !!
भौतिक शारीरिक सब पीडा, मिटा शीघ्र करते है क्रीडा !
कठिन काज जग मे है जेते, रटत नाम पूरा सब होते !!
तन मन धन से सेवा करते , उनके सकल कष्ट प्रभू हरते !
हे करुणामय स्वामी मेरे, पडा हुआ हूँ चरण में तेरे !!
या विधि अरज करे तन मन से , छूटत रोग शोक सब तन से !
मेहदीपुर अवतार लिया है, भक्तो का दुख दूर किया है !!
रोगी पागल सान्ति हीना, भूत व्याधि अरु धन छीना !
जो जो तेरे द्वारे आते , मनवांछित फल पा घर जाते है !!
महिमा भूतल पर छाई है, भक्तो ने लीला गाई है !
महंत गणेश पूरी तपधारी, पूजा करते तन मन वारी !!
हाथो मे ले मुगदर घोटे , दूत खडे रहते है मोटे !
लाल देह सिन्दूर बदन मे, कापत थर- थर भूत भवन में !!
जो कोई प्रेतराज चालीसा, पाठ करत नित एक अरु बीसा !
प्रतः काल स्नान करावै, तेल और सिन्दूर लगावै !
चंदन इत्र फुलेल चढावै, पुष्पन की माला पहनावै !!
चंदन इत्र फुलेल चढावै, पुष्पन की माला पहनावै !
ले कपूर आरती उतारे, करे प्रार्थना जयति उचारे !!
इच्छा पूरण करते जन की , होती सफल कामना मन की !
भक्त कष्ट हर अरि कुल घातक, ध्यान करत छूटत सब पातक !!
जय जय जय प्रेताधिराज जय, जयति भूपति संकट हर जय !
जो नर पढत प्रेत चालीसा, रहत न कबहुँ दु:ख लवलेशा !!
कह सुखराम ध्यानधर मन मे , प्रेतराज पावन चरनन में !
दोहा ---
दुष्ट दलन जग अध हरन, समन सकल भव शूल !
जयति भक्त रक्षक प्रबल, प्रेतराज सुख मूल !!
कष्ट हरो सब जनन के , प्रेतराज बल धाम !
बसु निरंतर मम ह्रदय, कहत दास सुखराम !!


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