हनुमान जयंती विशेष ~ Balaji Kripa

Tuesday, 21 October 2014

हनुमान जयंती विशेष

निशीथव्यापिनी कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हनुमान जयंती का महोत्सव मनाया जाता है. इस 
वर्ष 22 अक्तूबर 2014 को बुधवार के दिन अर्धव्यापिनी होने से हनुमान जयंती इसी दिन मनाई जाएगी. इस दिन भक्तों को चाहिए की वह प्रात: स्नानादि से निवृत होकर संकल्प लेकर भगवान हनुमान जी का षोडशोपचार पूजन करें पूजन के पश्चात चमेली के सुगंधित तेल में सिन्दूर मिलाकर उसे भगवान हनुमान जी को अर्पित कर के चोला चढ़ाये !लाल पुष्पों और कनेर के फूल से पूजन करें ! धूप, अगरबती, शुद्ध घी का दीपक जलाते है ! लाल वस्त्र, ध्वजा आदि चढाते है नवैद्य के लिए गाय के घी का चूरमा, बेसन के लड्डू, फलों का उपयोग करें ! रात्रि समय चमेली के तेल का दीया जलाएं और सुंदरकाण्ड का पाठ करें ! यह जयंती उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार है ! परंतु दक्षिण भारत में यह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है ! श्री हनुमान जयंन्ती पौराणिक महत्व भी बहुत है जिसके अनुसार शिवजी के अवतार रुप में भगवान श्री हनुमान जी का जन्म अंजना माँ के गर्भ से हुआ था ! इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान करने से पूरे मास की शुभता बनी रहती है ! इस तिथि में भगवान लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिये व्रत भी किया जाता है ! उदय काल पूर्णिमा में सत्यनारायण देव के लिये भी व्रत किया जाता है. वायु-पुराण के अनुसार कार्तिक मास की नरक चौदस के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था !
हनुमान जयंती महत्व !!!
हनुमान जी का जन्म दिवस होने के कारण इस दिन भगवान श्री हनुमान जी का मंत्र का पाठ और मंत्र जाप करना इस दिन विशेष कल्याणकारी कहा गया है ! हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिये हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ रहता है ! इस दिन ये सभी कार्य करने से व्यक्ति के समस्त कष्टों का निवारण होता है ! मान्यता है कि लंका का दहन भी इसी दिन हुआ था ! श्री हनुमान जयंती तिथि में कई जगहों, पर मेला भी लगता है ! जिन स्थानों पर मेला लगता है, उन स्थानों में सालासर, मेंहदीपुर, चांदपोल स्थान प्रमुख है !
हनुमान जयंती पर हनुमान जी का भोग !!!
कसार, बेसन के लड्डू, खीर ,नारियल और पेडों का भोग भी लगाने से भगवान श्री हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते है. इसके अतिरिक्त दाख-चूरमे का प्रयोग भोग में किया जा सकता है. केला आदि फल भी चढायें, जाते है. कपूर से श्री राम भक्त की आरती की जाती है. प्रदक्षिणा करके, नमस्कार किया जाता है. भजन कीर्तन और जागरण कराने का विशेष महत्व है.
हनुमान जयंती पर बृत !!!
इस व्रत को सभी द्वारा किया जा सकता है. इस व्रत को करने से सभी भक्तों कि मनोकामनाएं पूरी होती है. भगवान श्री हनुमान जी प्रत्यक्ष देव है वह सभी के संकट दूर करते है. हनुमान जयंती के उपलक्ष्य पर सब ओर उत्साह का माहौल रहता है. मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कराई जाती है तथा भक्तों को प्रसाद बांटा जाता है और भंडारा किये जाते है !!

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