रामयण की चोपाई में जीवन के सफल मन्त्र !! ~ Balaji Kripa

Sunday, 19 October 2014

रामयण की चोपाई में जीवन के सफल मन्त्र !!

आप लोगो को रामायण की चोपाई के माध्यम से कुछ जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए जा रहे है जिनके जाप से सत्-प्रतिशत सफलता मिलती है मेरा आप से अनुरोध है इन मंत्रों का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्री राम और श्री बालाजी सरकार आप के जीवन को सुख मय बना देगे !!
रक्षा के लिए
मामभिरक्षक रघुकुल नायक !
घृत वर चाप रुचिर कर सायक !!
विपत्ति दूर करने के लीए
राजिव नयन धरे धनु सायक !
भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक !!
सहायता के लिए
मोरे हित हरि सम नहि कोऊ !
एहि अवसर सहाय सोई होऊ !!
सब काम बनाने के लिए
बंदौ बाल रुप सोई रामू !!
सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू !!
वश मे करने के लिए
सुमिर पवन सुत पावन नामू !!
अपने वश कर राखे राम !! 
संकट से बचने के लिए
दीन दयालु विरद संभारी !!
हरहु नाथ मम संकट भारी !!
विघ्न विनाश के लिए
सकल विघ्न व्यापहि नहिं तेही !!
राम सुकृपा बिलोकहि जेहि !
रोग विनाश के लिए
राम कृपा नाशहिं सव रोगा !
जो यहि भाँति बनहिं संयोगा !!
ज्वार ताप दूर करने के लिए
दैहिक दैविक भोतिक तापा !
राम राज्य नहि काहुहि व्यापा !!
दुःख नाश के लिए
राम भक्ति मणि उस बस जाके !
दुःख लवलेस न सपनेहु ताके !
खोई चीज पाने के लिए
गई बहोरि गरीब नेवाजू !
सरल सबल साहिब रघुराजू !!
अनुराग बढाने के लिए
सीता राम चरण रत मोरे !
अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे !!
घर में सुख लाने के लिए
जै सकाम नर सुनहि जे गावहि !
सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं !!
सुधार करने के लिए
मोहि सुधारहि सोई सब भाँती !
जासु कृपा नहि कृपा अघाती !!
वविद्या  पाने के लिए
गुरू गृह पढन गए रघुराई !
अल्प काल विधा सब आई !!
सरसवती निवास के लिए
जेहि पर कृपा करहिं जन जानी !
कवि उर अजिर नचावहिं बानी !
निर्मल बुध्दि के लिए
ताके युग पदं कमल मनाऊँ !!
जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ !!
मोह नाश के लिए
होय विवेक मोह भ्रम भागा !
तब रघुनाथ चरण अनुरागा !!
प्रेम बढाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती !
चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती !!
प्रीती बढाने के लिए
बैर न कर काह सन कोई !
जासन बैर प्रीति कर सोई !!
सुख प्रप्ति के लिए
अनुजन संयुत भोजन करहीं !
देखि सकल जननी सुख भरहीं !!
भाई का प्रेम पाने के लिए
सेवाहिं सानुकूल सब भाई !
राम चरण रति अति अधिकाई !!
बैर दूर करने के लिए
बैर न कर काहू सन कोई !
राम प्रताप विषमता खोई !!
भाई से प्रीति बढाने के लिए
राम करहिं भ्रातन पर प्रीति !
नाना भाँति सिखावहिं नीती !!
मेल कराने के लिए
गरल सुधा रिपु करहिं मिलाई !
गोपद सिंधु अनल सितलाई !!
शत्रु नाश के लिए
जाके सुमिरन ते रिपु नासा !
नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा !!
रोजगार पाने के लिए
विश्व भरण पोषण करि जोई !
ताकर नाम भरत अस होई !!
मोह दूर करने के लिए
जासु कृपा छूटै मद मोहा !
ता कहं उमा कीं सपनेहु कोहा !!
इच्छा पूरी करने के लिए
राम सदा सेवक रूचि राखी !
वेद पुराण साधु सुर साखी !!
पाप विनाश के लिए
पाफि जाकर नाम सुमिरहीं !
अति अपार भव भवसागर तरहीं !!
अल्प मृत्यु न होने के लिए
अल्प मृत्यु नहिं कबजिहूँ पीरा !
सब सुन्दर सब निरूज शरीरा !!
दरिद्रता दूर के लिए
नहिं दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना !
नहिं कोऊ अबुध न लक्षण हीना !!
दर्शन पाने के लिए
अतिशय प्रीति देख रघुवीरा !
प्रकते ह्रदय हरण भव पीरा !!
शोक दूर करने के लिए
नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी !
आए जन्म फल होहिं विशोकी !!
विनती भगवान के चरणो में
मोरे तुम प्रभु गुरू पितु माता !
जाऊँ कहाँ तजि पद जल जाता !!
भजन भगवान की चरण वनदना के लिए
अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँति !
सब तजि भजन करौं दिन राती !!
क्षमा माँगने के लिए
अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता !
क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता !!
अर्जी देने के लिए
कहाँ वचन सब आरत हेतु !
रहत न आरत के चित चेतू !!

4 comments:

  1. लंकापति रावण की सभी बाते उसकी बुराई तथा उसकी अच्छाई इन सभी को तो हम बचपन से ही सुनते आ रहे है. परन्तु शायद ही आप रावण की पत्नी मन्दोदरी के सम्बन्ध में यह बात जानते होंगे जो आज हम आपको बताने जा रहे है क्योकि यह न पहले किसी ने आपको बताई होगी और न ही आपने किसी से सुनी होगी.

    मंदोदरी के बारे में पुराणों में जो बाते बताई गयी है उसके अनुसार वह पहले हेमा नाम की एक अप्सरा की बेटी थी. एक बार स्वर्गलोक में जब देवराज इंद्र की सभा लगी हुई थी उस सभा में ऋषि कश्यप के पुत्र वहां उपस्थित अप्सरा माया को देखकर मोहित हो गए.


    लंकापति रावण के पत्नी की 6 विचित्र बाते, जान रह जाओगे आप भी हैरान !

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  2. Premika ko manane ki chaupayi bataye

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