नव ग्रहों के मंत्र जाप और उनको प्रसन्न करने के लिए दान !! ~ Balaji Kripa

Friday, 3 October 2014

नव ग्रहों के मंत्र जाप और उनको प्रसन्न करने के लिए दान !!

जिस के भी ग्रह शुभ ना हो और कुद्रष्टी डाल रहे हो ! वो नवग्रह मंत्रो का जाप और दान करके ग्रहों को शान्त कर के शुभ लाभ प्राप्त कर सकता है
सूर्य :==
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सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:। एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:
जप संख्या- 7000।
दान- माणिक्य, गेहूं, धेनु, कमल, गुड़, ताम्र, लाल कपड़े, लाल पुष्प, सुवर्ण।
चंद्र : ==
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चंद्र तांत्रिक मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:'। चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सो समाय नम:।
जप संख्या- 11,000।
दान- वंशपात्र, तंदुल, कपूर, घी, शंख।
भौम(मंगल ):==
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भौम मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'। भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।
दान- प्रवाह, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, गुड़, सुवर्ण ताम्र।
वृषभ जप संख्या- 1000।
बुध :==
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बुध मंत्र- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'। बुध का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ बु बुधाय नम:'।
जप संख्या- 9,000।
दान- मूंग, हरा वस्त्र, सुवर्ण, कांस्य।
गुरु :==
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गुरु मंत्र- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:'। गुरु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:'।
जप संख्या- 19,000।
दान- अश्व, शर्करा, हल्दी, पीला वस्त्र, पीतधान्य, पुष्पराग, लवण।
शुक्र :==
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शुक्र मंत्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:'। शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शुं शुक्राय नम:'।
जप संख्या- 16,000।
दान- धेनु, हीरा, रौप्य, सुवर्ण, सुगंध, घी।
शनि :==
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शनि मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:'। शनि का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:'
जप संख्या- 23000।
दान- तिल, तेल, कुलित्‍थ, महिषी, श्याम वस्त्र।
राहु :==
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राहु मंत्र- 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों स: राहवे नम:'। राहु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ रां राहुवे नम:'।
जप संख्या- 18,000
दान- गोमेद, अश्व, कृष्णवस्त्र, कम्बल, तिल, तेल, लोहा, अभ्रक।
केतु ;==
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केतु का तांत्रिक मंत्र- 'ॐ स्रां स्रीं स्रों स: केतवे नम:'। केतु का एकाक्षरी मंत्र- 'ॐ के केतवे नम:'।
जप संख्या- 17,000।
दान- तिल, कंबल, कस्तूरी, शस्त्र, नीम वस्त्र, तेल, कृष्णपुष्प, छाग, लौहपात्र।


2 comments:

  1. Me garib brhman hu.hamara jamin makan vapas mile.muje puri madad kare.shri

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