पंडित ,पुजारी ,भगवान् के भक्तों के लिये नसीहत !! ~ Balaji Kripa

Saturday, 8 November 2014

पंडित ,पुजारी ,भगवान् के भक्तों के लिये नसीहत !!


एक समय की बात है !राम राज्य चल रहा था तो किसी को भी किसी भी प्रकार की समस्या नहीं थी ! एक दिन राम दरबार में कोई फरियादी अपनी समस्या लेकर नहीं आया तो प्रभु रामचंद्र जी ने भरत जी ,लक्ष्मण जी ,शत्रुघ्न जी और हनुमान जी से कहा की देखो आज कोई फरियादी नहीं आया है दरबार में फरयाद लेके ! भरत,शत्रुघ्न और लक्ष्मण जी ने आकर कहा ,कोई फरियादी नहीं आया है लेकिन हनुमान जी ने आकर कहा प्रभु  ! एक कुकर (कुत्ता) आया है उसके सिर से खून निकल रहा है ! तो सुनकर प्रभु रामचंद्र जी ने आदेश दिया की जाओ उसको बुलाकर अन्दर ले आओ !सभी कई बार बुलाने गये लेकिन कुकर अन्दर नहीं आया क्यों कि सब ने जा कर कहा प्रभु ने बुलाया है अंदर चलो ! अन्त में जब सब परेशान हो गए तो प्रभु से प्रार्थना करने लगे की क्या करें जो कुकर अन्दर अ जाये ! यह सुनकर प्रभु मुस्कुराये और बोले जाओ कुकर से बोलना कि राजा रामचन्द्र जी ने बुलाया है ! हनुमान जी ने जाकर कहा तो कुकर उठकर चल दिया ! हनुमान जी ने कुकर से पूछा की जब हम लोग तुमको बुलाने आये तो तुम अन्दर क्यों नहीं आए तो कुकर बोला-मुर्ख वानर इतना भी नहीं जानते की कुकर को भगवान् के दरबार में जाने का अधिकार नहीं होता है कुकर के भगबान के दरबार में जाने से दरबार अशुद्ध हो जाता है और तुमने तथा सभी लोगों ने आकर हमसे कहा चलो प्रभु ने बुलाया है ! मैं इसलिए अन्दर नहीं आया जब तुमने आकर कहा कि चलो राजा रामचंद्र ने बुलाया है तो मैं चल दिया क्योंकि राजा के दरबार में किसी भी फरियादी को जाने का अधिकार होता है ! कुकर जब अन्दर पहुंचा तो रामचन्द्र जी ने पूछा कि कुकर तुम्हारी क्या फरियाद है ! कुकर बोला महाराज मैं रास्ते में धुप में सो रहा था कि वहां से एक ब्राह्मण देव निकले और उन्होंने मेरे सिर में डंडा मार दिया मुझे न्याय चाहिये ! रामचंद्र जी ने सैनिकों को भेजकर ब्राह्मण देव को बुलवाया और पूंछा कि आप ने इस कुकर के सिर में डंडा क्यों मारा ! ब्राह्मण बोला महाराज  में तीन दिन से भूंखा अपने और अपने बच्चों के लिये खाने की तालाश में घूम रहा था लेकिन खाने को कुछ न मिला तो निराश होकर घर लौट रहा था तो रास्ते में यह कुकर लेता था इसको देखकर गुस्सा बर्दाश्त नहीं हुआ तो ,मेने इसके सिर में डंडा मार दिया मैं अपना गुनाह स्वीकार करता हूँ ! यह सुनकर दरबार में बैठे सभी दरबारी और मंत्री परेशान हो गये कि रामचन्द्र जी क्षत्रिय हैं और यह ब्राह्मण है, इसको दंड कैसे देंगे? क्योंकि क्षत्रिय को ब्राह्मण को दंड देने का अधिकार नहीं होता है ब्राह्मण की बात को सुनकर प्रभु रामचंद्र जी ने कहा कि ! हे ब्राह्मण देव मैं तुमको दंड दूं तो आप स्वीकार करेंगे यह सुनकर ब्राह्मण- 'बोला जी महाराज' तो रामचंद्र जी बोले मैं तुमको दक्षिण मठ का मठाधीश नियुक्त करता हूँ .इसको सुनकर कुकर खुशी से नाचने लगा अन्य दरबारी आश्चर्यचकित रह गए कि यह कैसा न्याय और दंड है, तो सभी लोग रामचंद्र जी से पूछने लगे प्रभु यह कैसा न्याय है?.प्रभु रामचंद्र जी ने कहा कि इसका जवाब यह कुकर ही देगा जब सबने मिलकर कुकर से पूछा तो कुकर बोला पहले राज्य वैध को बुलाओ मेरा इलाज करवाओ उसके बाद मैं आप लोगों को बताता हूँ ! जब कुकर का इलाज हो गया तो कुकर बोला सुनो -इससे पहले मैं ही दक्षिण मठ का मठाधीश था, मैंने जिसने अधिक पैसा दिया उसको पहले दर्शन वा पूजा करवाई और जिसने पैसे नहीं दिए उसकी पूजा भी ठीक से नहीं करवाई न दर्शन ठीक से करने दिए, यह बहुत भूंखा और नंगा ब्राह्मण है यह हमसे भी अधिक पाप करेगा वहां जाकर इसलिए हमसे भी अधिक खतरनाक कुत्ता बनेगा !

सार-; दोस्तों भगवान् के दरबार में या भगवान् के भक्तों की पूजा पाठ या दर्शन में कोई द्वेष भावना रखता है ठीक से न करवाता है न करने देता है व्यवधान पैदा करता है तो उसको अवश्य ही कुकर का जन्म प्राप्त होता है !
                                            

0 comments:

Post a Comment