तनावपूर्ण (डिप्रेशनमें ) जीवन नहीं जीना है तो इस प्रकार जीवन जिए !! ~ Balaji Kripa

Thursday, 27 November 2014

तनावपूर्ण (डिप्रेशनमें ) जीवन नहीं जीना है तो इस प्रकार जीवन जिए !!

आज के समय जितनी शिक्षा का स्तर बढा है, उतनी ही उलझने भी बढ़ रही है। पढ़े-लिखे लोग अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए इस कदर उलझनों में होते जा रहे हैं कि जरा-सी रुकावट या देरी उन्हें तनाव की ओर ले जाती है। जो थोड़े हिम्मत वाले हैं, वे अपने आप को तनाव से तो बचा लेते हैं, लेकिन चिड़चिड़े हो जाते हैं।कुल मिलाकर शिक्षा ने आदमी को बुद्धिमान बनाया, पर बेताब भी बना दिया। हर पढ़े-लिखे आदमी को यह बात जरूर समझनी चाहिए कि कुछ घटनाये ऐसी होती  ही रहती है जो घट जाती है आप चाहें या न चाहें। उस समय शिक्षा को समझ का काम करना चाहिए। प्रिय लोगों की मृत्यु, बिछड़ना, अचानक नुकसान हो जाना, दुर्घटनाएं इत्यादि पर आपका सीधा वश नहीं चलता। ऐसे वक्त में पढ़े-लिखे होने का अर्थ है कि हिम्मत न हारें। जैसे निरोगी काया एक सुख है, वैसे ही समझ देने वाली शिक्षा भी अपने आप में बहुत बड़ा सुख है।अत: यह उपलब्धि हमारे लिए काम की होनी चाहिए। दो वक्त की रोटी को पढ़ाई-लिखाई तो जुटा ही देगी, लेकिन शरीर और मन के स्वास्थ्य के अलावा एक और स्वास्थ्य होता है, जिसे नैतिक स्वास्थ्य कहते हैं। इसकी अनुभूति शिक्षा कराती है। नैतिक रूप से निरोगी व्यक्ति दूसरों के प्रति प्रेम, सेवा, परोपकार, उदारता और मधुरता का व्यवहार करता है। दरअसल शिक्षा एक समझ की तरह बननी चाहिए, जो मनुष्य के शरीर और आत्मा के संयोग को समझा सके, क्योंकि मनुष्य पूरी दुनिया में आत्मा और शरीर का अद्भुत संयोग है और इस अनुभूति को शिक्षा परिपक्व कर देती है।
जीवन की कुछ आदते ही मनुष्य की दुश्मन जिनको छोड़ना जरूरी !! 
जीवन में हम कुछ ऐसी आदतों को अपने जीवन पर लागू कर लेते हैं जिनका ना तो कोई मतलब होता है ना कोई अर्थ और उन को जीने लगते हैं। आदतों का स्वभाव होता है कि उसे बार-बार करने की इच्छा होती है। पुनरावृत्ति आदत का मूल स्वभाव है। देर से उठने की आदत है तो अगले दिन फिर देर से उठने की इच्छा होगी। लोग बोलते व्यापार में घाटा होगया इसलिए तनाव में हूँ तो शराब पीने लगते है क्या शराब पीने से घाटा कम होता है या तनाब ! ये नहीं पता की आदत अतीत से जुड़कर अतीत को ही भविष्य में पटकने पर उतारू होती है। इसीलिए आदत से बचने के लिए अपने भीतर के स्वभाव को समझना होगा। अभी तो हमने भक्ति को भी आदत बना लिया है, जबकि भक्ति स्वभाव का विषय है। सामान्य रूप से ऐसा समझा जाता है कि जो लोग भक्ति कर रहे हैं वे या तो कमजोर लोग हैं या छोटे ओहदे के व्यक्ति हैं। यह एक भ्रम है। जिनके पास मिटने की क्षमता है वे ही भक्ति कर सकेंगे, क्योंकि जितना हम मिटेंगे उतने ही हमारे भीतर के परमात्मा को रूप लेने कर अवसर मिलेगा।जितना हमने अपने को बचाया, समझ लें उतना ही उसको खोया। भक्ति एक आत्मघाती कला है। इसलिए जैसे-जैसे भक्ति जीवन में उतरेगी हमें भीतर उतरने में सुविधा होगी। मन को निष्क्रिय करने में सहारा मिलेगा। अभी मन मालिक है और शरीर गुलाम। लेकिन भक्ति के उतरते ही परमात्मा प्रकट होने लगता है और ईश्वर की अनुभूति के सामने मन मौन हो जाता है।मन मौन हुआ और हमारी सारी मस्ती, तमाम शौर-शराबे, धूमधाम भौतिक सफलताओं के बाद भी हमें खूब शांत रखेंगी, प्रकाश ही प्रकाश होगा और इसी प्रकाश को आंतरिक उत्सव कहा गया है। जब हर काम आनंद हो जाए तो फिर जिन्दगी के अर्थ ही बदल जाते हैं।
भगबान का ध्यान हमारे जीवन में क्या परिवर्तन ला सकता है !!
चौबीस घंटे में एक बार भगबान का ध्यान आवश्य करें। आप जितना श्रद्धालु होंगे आपके भीतर सकारात्मकता उतनी अधिक बढ़ जाएगी। श्रद्धा नकारात्मकता को समाप्त करती है !ध्यान करते ही हम ईश्वर रूपी दिव्य शक्ति से जुडऩे लगते हैं जो अपने आपमें एक उपलब्धि है। दूसरी महत्वपूर्ण बात होती है हमारे भीतर एक रासायनिक परिवर्तन आरंभ हो जाता है यह रासायनिक परिवर्तन हमें विपरित परिस्थितियों से जूझने में हमारी शक्ति को बढ़ाता है। सहनशक्ति और सरलता हमारे जीवन के सारथी बन जाते हैं।ध्यान (प्रार्थना )एक और बोध कराती है। ध्यान करने वाले लोग समझ जाते हैं कि संसार नहीं छोडऩा है, जो व्यर्थ है उसे त्यागना है। ध्यान हमें उस परम शक्ति से जोड़ती है जिसने यह दुनिया बनाई, जब हम ईश्वर से जुड़ रहे हैं तो उसकी बनाई दुनिया से कैसे नफरत कर सकते हैं। दुनिया में जो व्यर्थ है उसका विस्मरण करें तो ध्यान  में जो स्मरण होगा वह अपने आपमें दिव्यानुभूति होगी।जब भी ध्यान किया जाए इसे केवल कर्मकांड न मानें, इसे अनुभव समझें, आत्मविश्वास का अनुभव। आज के दौर में हमें दूसरों के मामले में दुनियाभर का अनुभव होता है बस एक खुद की अनुभूति को छोड़कर। ध्यान आपको आपके होने का एहसास न कराए तो समझें ध्यान नहीं मात्र कर्मकांड किया है। कभी कभी आप पाएंगे ध्यान में आपकी चेतना शिखर पर होगी और यहीं से आप मन से खुश तथा तन से स्वस्थ होना महसूस करेंगे।

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