ईश्वरकी कृपा से प्राप्त प्रसाद जिसे हम जानते भी नहीं है !! ~ Balaji Kripa

Sunday, 30 November 2014

ईश्वरकी कृपा से प्राप्त प्रसाद जिसे हम जानते भी नहीं है !!


मेरे अतिशय प्रिय पाठकगण ! मैं  अपनी धुन में  आपको अपने निजी अनुभव के आधार पर कलिकाल से ग्रस्त मानव  को "श्री हनुमान बालाजी " की विशेष कृपा से प्राप्त भक्ति करने के सरलतम साधन "भजन कीर्तन" की महत्ता समझाने में व्यस्त हूँ ! प्रियजन ! इस संसार में जन्म लेने के बाद अपने मानव तन से "जीव" जो कुछ भी करता है ,जो कुछ भी देखता है ,जो कुछ भी सीखता है और उसे जो कुछ भी "अनुभव" होते हैं ,वे सब ,सच पूछो तो, उस परम पिता परमात्मा की करुणा और अनुकम्पा जनित "कृपा" के कारण ही होते हैं !  दुर्भाग्य यह है क़ि अक्सर सफल मानव अपनी सफलताओं का श्रेय या तो अपनी निजी कार्यकुशलता को या किसी अन्य सांसारिक व्यक्ति या परिस्थिति के सह्योग को देता है ! अपने सम्पूर्ण जीवन में मैंने जो कुछ भी कर्म किये और उन कर्मों के फलस्वरूप मुझे जो भी यश-अपयश ,सुख-दुःख या अनुकूल-प्रतिकूल फल प्राप्त हुए ,वे सब ही मेरे प्यारे प्रभु की मुझ पर कीं हुईं असंख्य "कृपा अनुभवोँ" के उदहारण स्वरूप हैं ! मैं तो अपनी प्रत्येक सांस को, अपने हृदय की प्रत्येक धड़कन को उनकी "कृपा का  प्रसाद" ही समझता हूँ ! मेरे लिए ,संसार में मेरा जो है वह सब मुझे "हनुमत कृपा प्रसाद" स्वरुप ही प्राप्त हुआ है ! यदि आप भी हनुमत कृपा प्रसाद समझेगे तो तो परमपिता परमेश्वर की कृपा प्राप्त होगी और आप की हर साँस से प्रभु का नाम निकलेगा !!

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