श्रीरामचरित मानस के अनुसार श्रेष्ठ पुरुष में क्या गुण होने चाहिए !! ~ Balaji Kripa

Wednesday, 3 December 2014

श्रीरामचरित मानस के अनुसार श्रेष्ठ पुरुष में क्या गुण होने चाहिए !!

हर इंसान में कुछ गुण होते हैं तो कुछ अवगुण भी होते हैं। हर पुरुष के गुण और अवगुण अलग-अलग ही होते हैं, लेकिन तीन अवगुण ऐसे हैं जो अधिकांश पुरुषों में समान रूप से रहते हैं। जिन पुरुषों में ये तीन अवगुण नहीं होते हैं, वे श्रेष्ठ पुरुष कहलाते हैं। श्रीरामचरित मानस के अनुसार ये तीन काम कौन-कौन से हैं जो बहुत कम पुरुष नहीं करते हैं...
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के बालकाण्ड में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि-
जिन्ह कै लहहिं न रिपु रन पीठी। नहिं पावहिं परतिय मनु डीठी।।
मंगन लहहिं न जिन्ह कै नाहिं। ते नरबर थोरे जग माहिं।।
इस दोहे में श्रीराम ने तीन ऐसे काम बताए हैं जो बहुत कम पुरुषों द्वारा नहीं किए जाते हैं। संसार में ऐसे पुरुष बहुत ही कम हैं, जिनमें ये तीनों अवगुण नहीं होते हैं।

पहला काम- रण में शत्रु को पीठ नहीं दिखाना !!
ऐसे पुरुष बहुत कम हैं जो अपने से बलवान शत्रु और परेशानियों के सामने भी युद्ध का मैदान छोड़कर नहीं भागते हैं। आज के दौर में काफी अधिक ऐसे लोग हैं जो प्राणों का संकट देखकर तुरंत ही भाग निकलते हैं। व्यक्ति को स्वयं के प्राणों की चिंता अधिक होती है और वे शत्रु के सामने आते ही पीठ दिखाकर भाग जाते हैं।
दूसरा काम- पराई स्त्री की ओर आकर्षित नहीं होना !!
काफी अधिक पुरुष ऐसे हैं जो विवाहित हो या अविवाहित, पराई स्त्रियों की सुंदरता देखकर उनसे आकर्षित हो जाते हैं। आज के समय में कई पुरुष इस आदत के कारण परेशानियों का सामना भी करते हैं। इनका वैवाहिक जीवन भी संतोषजनक नहीं रहता है। पराई स्त्रियों की ओर आकर्षित होना बुरी आदत है, यह जानते हुए भी अधिकतर पुरुष ये काम करते हैं। संसार में बहुत कम पुरुष ऐसे हैं, जिन्हें कोई भी पराई स्त्री कभी भी आकर्षित नहीं पाती है।
तीसरा काम- किसी भी भिखारी को खाली हाथ नहीं जाने देना !!
शास्त्रों में दान की विशेष महिमा बताई गई है। दान से ही कुंडली के सभी ग्रह दोष दूर हो सकते हैं, दान से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त की जा सकती है, दान से ही बुरे समय में आने वाली परेशानियों से जल्दी मुक्ति पाई जा सकती है। दान का इतना महत्व होने के बाद भी संसार में काफी कम पुरुष ऐसे हैं जो घर आए हर भिखारी को दान देते हैं। ऐसे दानवीर पुरुष किसी भी भिखारी को कभी भी ना नहीं कहते हैं। जबकि, आज के दौर में अधिकांश पुरुष दान करने से बचते हैं, भिखारियों को डांटकर भगा देते हैं, मंदिरों में भी दान नहीं करते हैं। दान करना एक श्रेष्ठ गुण है, लेकिन काफी कम लोग इसे ग्रहण कर पाते हैं।
 

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