2015 ~ Balaji Kripa

Welcome to www.balajikripa.com

May Baba fullfill all the wishes of the Devotees.

जय श्रीराम

भगवान रामभक्त हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। जहां मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

ॐ हं हनुमंतये नम:

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान म‍ंदिर में जाकर रामभक्त हनुमान का गुणगान करें और उनसे अपने पापों के लिए क्षमायाचना करें।

Thursday, 31 December 2015



प्रिय भक्तो/मित्रों आप लोगो बालाजी कृपा परिवार की ओर से नव वर्ष 2016 की हार्दिक शुभ कामनाये, बालाजी सरकार की कृपा से आप लोगो को नव वर्ष में सुख शान्ति ओर सम्रद्धि प्राप्त हो, कभी आप लोगो को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े ! बालाजी कृपा परिवार यही कामना करता है ईश्वर से जय श्री राम !! आस्ट्रो गजेंद्र दीक्षित और समस्त बालाजी कृपा परिवार !!

Wednesday, 30 December 2015

जानिए 206 मीन राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


मीन राशि वालो जनवरी से मार्च के बीच आपके जीवन में सुख, शांति, धन वृद्धि, ऐश्वर्य की अधिकता रहेगी। माता- पिता से अनबन संभव है। आपका मन विचलित होगा। व्यापार में मेहनत के बावजूद भी परिणाम हितकार नहीं आएंगे। सरकारी काम पूर्ण होंगे। आप जनहित में कोई काम करेंगे। नौकरीपेशा भी अपने काम को सही ढंग से अंजाम देंगे। वाहन खरीदने की योजना बन सकती है। आपको कहीं से अप्रिय समाचार मिल सकते हैं। मन भटकेगा। कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होगी। कार्यक्षेत्र में डांट सुननी पड़ सकती है। चापलूसों से सावधान रहें। रिश्तेदारों व परिवार के लोगों के बीच रिश्तों में मधुरता आएगी । बच्चो की पढ़ाई अच्छी चलेगी। किसी दुर्घटना के शिकार हो सकते है।

मीन राशि वालो आप का अप्रैल से जून के बीच समय उत्साह बढ़ाने वाला रहेगा। स्वयं के लिए खरीदारी करेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा, बुद्धिमत्ता से किए गए निवेश आगे चलकर लाभ देंगे। के अगुआकार रुप में उभरकर आएंगे। किसी अप्रिय घटना के कारण मन भी अशांत रहेगा। भाई-बहन के मध्य किसी बात को लेकर तनाव या मनमुटाव हो सकता है। घर में किसी का स्वास्थ्य गड़बड़ा सकता है। आपको कमजोरी महसूस होगी। कानूनी दांवपेंच में फंस सकते हैं। किसी रिश्तेदार के संबंध में अशुभ समाचार प्राप्त होंगे।

मीन राशि वालो जुलाई से सितंबर के बीच पुराने वाहन तथा घर में पड़ी खराब चीजों को ठीक करवाएंगे। आपके जीवनसाथी की तबीयत बिगड़ सकती है। परेशान हो सकते हैं। सहनशक्ति की कमी रहेगी। पैसा, प्रेम व परिवार के साथ विचारो का आदान-प्रदान होगा। आपके पक्ष में काफी चीजें होगी। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। परिवार में किसी के लिए रिश्ते आ सकते हैं। प्रेम प्रसंगो में सफलता मिलेगी। वैवाहिक सुख मिलेगा। संबंध सुधरेंगे। मिलकर काम करने का मजा तो आएगा ही, लाभ भी मिलेगा। जीवन साथी से मतभेदों या गलतफहमियों का निराकरण समय रहते हो जाएगा।

मीन राशि वालो अक्टूबर से दिसंबर के बीच रोजगार व व्यक्तिगत लाभ से जुड़े काम अधूरे रह सकते हैं। हाथ आता पैसा रुक सकता है। मन दुखी रहेगा। नई योजना पर आप काम शुरू कर सकते हैं। व्यवहार अच्छा रहेगा। सकारात्मक उर्जा रहेगी। कानूनी मामलों में किसी की सलाह फायदेमंद रहेगी। नए काम शुरू कर सकते हैं। आय बढ़ सकती है। नौकरी बदलने का फैसला ले सकते हैं। ज्यादा भावुक होने से नुकसान हो सकता है। घर-परिवार के साथ वक्त बिताएंगे। आपके कामों की तारीफ होगी। दोस्तों का साथ मिलेगा। अचानक धन लाभ भी होगा।

स्वास्थ्य- मीन राशि वालो आप का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। हालांकि वर्ष के मध्य में मधुमेह, रक्तचाप व हृदय रोग जैसी बीमारियों से परेशानी हो सकती है। खान-पान व पाचन तंत्र का ध्यान रखें, अन्यथा पेट में तकलीफ हो सकती है। वर्ष के मध्य में वाहन से चोट भी संभव है। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। अपनी नियमित दिनचर्या में महत्वपूर्ण बदलाव अमल में लाकर उत्तम स्वास्थ्य को पाएंगे।

रोजगार - इस वर्ष पढ़ाई में मीन राशि के जातको को अल्पकालीन सफलता मिलेगी। तकनीक शिक्षा, विधिक क्षेत्र व प्रतियोगी परीक्षा देने वाले जातकों के लिए यह वर्ष 2016 उत्तम रहेगा। जहां तक करियर व नौकरी की बात है, उसमें स्थितियां इतनी प़क्ष में नहीं रहेंगी। नौकरी से संतुष्ट नही रहेंगे। टारगेट का दबाव बना हुआ रहेगा। लक्ष्य को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने दें, क्योंकि यही समर्पण अन्ततः आपको मंजिल तक पहुंचाएगा। इस वर्ष आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे।

पारिवारिक जीवन - मीन राशि वालो इस वर्ष प्रेम-प्रसंगो में सफलता की स्थितियां थोड़ी सी कमजोर ही हैं। यदि प्रेम संबंध की स्थिति हल्की फुल्की बनती भी है, तो उसके उजागर होने का खतरा बना हुआ है। सच्चे मित्रों का इस वर्ष साथ रहेगा। वे ही मुश्किल क्षणों में आपके साथ रहेंगे। पति-पत्नी में आपसी सामंजस्य बढ़ेगा। जीवनसाथी आपकी भावनाओं को समझकर उसके अनुरुप आचरण करेंगे। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके काम आएगी, करियर को सही दिशा देने में सार्थक भूमिका रहेगी। पति-पत्नी में आपसी प्रेम व सौहार्द बना रहेगा।

जानिए 2016 कुंभ राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


कुंभ राशि वालो जनवरी से मार्च के बीच धन आने के उत्तम संकेत मिल रहे हैं। काम काज में कोई खास सफलता के योग नही है। आपका दिमाग किसी बात से ठीक नहीं रहेगा। सम्पत्ति पर कब्जा मिल जाएगा। आराम करेंगे व सुकून महसूस करेंगे। स्वास्थ्य का इस समय पूरा ध्यान रखें। वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें। आप अपना ही नुकसान कर बैठेंगे। कोई महत्वपूर्ण काम आपके हाथ से निकल सकता है। विद्यार्थी मेहनत करेंगे। प्रतियोगी, विभागीय व अन्य किसी नौकरी संबंधी परीक्षा का परिणाम आपके पक्ष में आएगा। आपकी रचनात्मकता व योग्यता खुलकर लोगों के सामने आएगी। किसी भी काम को पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करेंगे, इसका लाभ भी मिलेगा।

कुंभ राशि वालो अप्रैल से जून के बीच आपकी तरक्की का स्तर उपर उठेगा। लेन-देन व रुपए पैसे के मामले में अजनबियों पर बिलकुल भी भरोसा नहीं करें। कर्मचारी व भागीदार की गतिविधि पर नजर रखें। काम में नया तरीका अमल में लाएंगे। प्रयासों के अनुपात में प्रतिफल नहीं मिल पाने के कारण मन में कुछ झुंझलाहट व छटपटाहट रहेगी। कामकाज में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाएगी। प्रभाव व पराक्रम आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ जाएगा। विद्यार्थियो की पढ़ाई में अवरोध आएंगे। जीवनसाथी से मतभेदो व गलतफहमियों का निराकरण होगा। कोई विश्वासघात कर सकता है। थकान व आलस हो सकता है। मानसिक या शारीरिक रुप से स्फूर्ति का अहसास होगा। लंबे समय से चले आ रहे तनाव खत्म हो सकते हैं। आत्मविशवास व मनोबल के सहारे आप हर चीज हासिल कर लेंगे। स्वास्थ्य में गिरावट होगी ।

कुंभ राशि वालो जुलाई से सितंबर के बीच शत्रु हानि पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। वाहन से गिर सकते हैं। अपने साहस व सकारात्मक सोच के दम पर कठिनाइयों का मुकाबला करेंगे। परिवार व बच्चों के साथ यात्रा का कार्यक्रम बना सकते हैं। कोई आपको फंसाने की पूरी कोशिश करेगा। अहंकार को हावी नही होने दें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। व्यापार में भी आपको सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर लेंगे। किसी मुसीबत या उलझन से निकलने का रास्ता दिखाई देगा। आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। राजकीय काम रुक सकता है। परिवार में सुख शांति बनी रहेगी। काम- काज में नया तरीका प्रयोग में लाएंगें। सरकारी नौकरी से जुड़े लोगों का मनचाही जगह स्थानांतरण या पदोन्नति हो सकती है। घर या दुकान में सामान खराब हो सकता है।

कुंभ राशि वालो अक्टूबर से दिसंबर के बीच बनते कामों में बाधाएं आ सकती हैं। आर्थिक तंगी का दौर रहेगा। आत्मविश्वास व मनोबल बढ़ेगा। नए लोगों से मुलाकात होगी। आपका दायरा विस्तृत होगा। रोजगार के अवसर मिलेंगे। आपके मन में दया का भाव रहेगा। वाहनादि से नुकसान की संभावना है। लम्बे समय से रुका हुआ काम पूरा हो जाएगा। व्यापार में नया प्रयोग व परिर्वतन धन लाभ करवाएगा। जमीन जायदाद की खरीद फरोख्त या भवन निर्माण के काम होंगे। मनचाही प्रगति करने के लिए उचित वातावरण का निर्माण करेंगे। पति-पत्नी में आपसी समझ विकसित होगी। शारीरीक व मानसिक कष्ट हो सकता है। व्यापार में तरक्की हो सकती है। आप तेज गति से और पूरे जोश के साथ आगे बढ़ते जाएंगे।आजीविका को लेकर थोड़ी समस्या आ सकती है।

स्वास्थ्य - कुंभ राशि वालो शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। इस वर्ष गम्भीर बीमारी की स्थिति दिखाई नहीं पड़ रही है। हालांकि पेट से संबंधित बीमारियों, खान-पान, पाचन तंत्र आदि का विशेष ध्यान रखें। वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं, अन्यथा दुर्घटना होने के योग हैं। मौसम के संक्रातिकाल में (परिवर्तन के समय) स्वास्थ्य का जरुर ध्यान रखें।

रोजगार - कुंभ राशि वाले मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर व तकनीकी शिक्षा से जुड़े जातकों के लिए यह वर्ष अच्छा है। आपकी राशि पर गुरु की दृष्टि के कारण कामर्स, आर्थिक शिक्षा, मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को निरंतर सफलता मिलेगी। विभागीय, प्रतियोगी व नौकरी से संबंधित परीक्षा में इस वर्ष जरुर सफलता के योग दिखते हैं। करियर व इंटरव्यू आदि में सफलता मिलेगी। कुंभ राशि के जातकों में व्यापार के उत्तम गुण होते हैं। खूब मेहनत करेंगे व उसका प्रतिफल भी आपको मिलेगा। व्यापार में किसी पर भी भरोसा आपको ले डूबेगा।

पारिवारिक जीवन - कुंभ राशि वालो आप भावुक हैं। इस वर्ष कुंभ राशि के जातको को प्रेम निवेदन प्राप्त होंगे। प्रेम-प्रसंगो के उजागर होने से घर-परिवार में तनाव हो सकता है। मित्र से आपको सहयोग जरुर कम मिलेंगे। संतान के अध्ययन, करियर, विवाह आदि को लेकर चिंता रहेगी, हालांकि चिंता का समाधान भी समय रहते हो ही जाएगा। पति-पत्नी में खट्टी-मीठी नोंकझोक हो सकती है। रिश्तेदारों से इस वर्ष अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाएगा। बल्कि, रिश्तेदारों को आप जरुर इस वर्ष आर्थिक, सामाजिक व भावनात्मक सहयोग प्रदान करेंगे।



जानिए 2016 मकर राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


मकर राशि वालो की जनवरी से मार्च के बीच नए लोगों से मुलाकात होगी। पदाधिकारी व राजनीतिक लोगों से सहयोग मिलेगा। धन कमाने की धुन सवार होगी। आत्मविश्वास गजब का रहेगा। कहीं से कोई अशुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। धनागम का रास्ता खुलेगा, पुराना उधार रुपया वसूल होगा। प्रेम प्रसंग उजागर होने से परिवार में तनाव हो सकता है। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। किसी भी लापरवाही के घातक परिणाम हो सकते हैं। जरुरतमंद मित्र की तरफ आप सहायता का हाथ बढ़ाएंगे। धन हानि के भी योग बने हुए हैं। घर में पूजा पाठ या धार्मिक आयोजन की स्थिति बन सकती है। सामाजिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाएंगे। अजनबी पर भरोसा नहीं करें। लंबे समय से आ रही चिंताओं व बाधाओं से मुक्ति का समय आ गया है।

मकर राशि वाले अप्रैल से जून के बीच सावधान रहें। व्यापार में लाभ की संभावना नही है। आप जी तोड़ मेहनत करेंगे व उसके सकारात्मक परिणाम भी आपको मिलेंगे। अशुभ फलों के साथ-साथ आपको कुछ शुभ फल भी प्राप्त होंगे। किसी रिश्तेदार या मित्र से संबंधित कोई अशुभ समाचार प्राप्त होगा। स्वास्थ्य में सुधार आएगा। बुजुर्गों का स्वास्थ्य गड़बड़ होगा। रोजगार व नौकरी में नई संभावनाओं का जन्म होगा। विद्यार्थियों के लिए यह समय उचित फल देने वाला है। व्यापार की योजनाओं में अवरोध आएंगे। आकस्मिक धन लाभ के झांसे में न आएं। नौकरी में सभी आपके काम से खुश रहेंगे। पदोन्नति के अवसर मिलेंगे। वाहन व मशीनों का उपयोग सावधानी से करें।

मकर राशि वाले जुलाई से सितंबर के बीच मनोरंजन में समय गुजरेगा। कामों में सफलता मिलेगी। आगे बढ़ने का उत्साह व उर्जा प्राप्त होगी। अपरिचितों पर विश्वास नही करें। आपके अपने लोग ही विश्वासघात कर सकते हैं। व्यवसाय व नौकरी में परिवर्तन संभव है। ससुराल पक्ष में सम्बन्धों में मधुरता रहेगी। नवीन वस्तु की खरीददारी संभव है। किसी पुराने मित्र से आपकी मुलाकात होगी। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के योग हैं। धन हानि की आशंका है। अशुभ समाचार भी मिल सकते हैं। पदोन्नति सम्बन्धी जो मामला अटका हुआ था या विचाराधीन था, उसमें उन्नति होने की संभावना है।
 

मकर राशि वाले अक्टूबर से दिसंबर के बीच धार्मिक कामों में व्यस्तता रहेगी। कोई नया काम शुरू करने की इच्छा होगी। अपनी मेहनत से आप वो हर मुकाम हासिल कर लेंगे जिसकी इच्छा है। भौतिक सुख- संसाधनो में बढोत्तरी होगी। पारिवारिक संबंधों में कटुता आ सकती है। लम्बे समय से चली आ रही चिंता से निवृत्ति मिलेगी। नौकरी मे मजबूत निर्णय लेंगे। भावुकता में आकर कुछ गलत निर्णय भी लेंगे। कुछ अप्रिय घटना हो सकती है। भाइयों में मतभेद संभव है।

स्वास्थ्य - मकर राशि वालो के लिए 2016 स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उत्तम है। कोई पुराना रोग समाप्त होगा। रक्तचाप, मधुमेह जैसी बीमारियों में भी लाभ होगा। यात्राओं में खान-पान का ध्यान रखें। गरिष्ठ भोजन, भारी भोजन व अव्यवस्थित दिनचर्या से पाचन तंत्र के रोग पेट के रोगादि हो सकते हैं। नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, प्राकृतिक चिकित्सा से आप हर मुश्किल का डटकर सामना करेंगे।

रोजगार - यह साल मिले-जुले परिणाम देने वाला है। प्रेम-प्रसंगो व फालतू के कामों मे पड़कर आप अपने अध्ययन व करियर को चौपट कर सकते हैं। करियर व नौकरी में आप अपने मधुर स्वभाव, विनम्रता व काम से सभी पर अपना जादू चलाने में कामयाब रहेंगे। लक्ष्यों को समय से पहले ही पूरा कर लेने से मन में आत्मविश्वास बना रहेगा। व्यापार में विस्तार की जो योजना काफी लम्बे समय से अटकी हुई थी, वह इस वर्ष पूरी होने जा रही है। कोई नया अनुबंध अमल में ला सकते हैं, जिसके परिणाम दूरगामी रहेंगे।

पारिवारिक जीवन - ये साल प्रेम- प्रसंगो के लिहाज से अच्छा रहेगा। किसी मित्र की आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक हर प्रकार से मदद करेंगें व मित्र भी आपके इस संकट के समय किए गए कार्य को भूल नहीं पाएगा। पति-पत्नी के बीच समझ का अभाव रहेगा। दाम्पत्य संबंधों में हल्का-फुल्का तनाव रह सकता है। संतान की शिक्षा, विषय व कॉलेज का चयन, करियर, शादी के कारण मन में तरह-तरह की चिंताएं रहेंगी।


जानिए 2016 धनु राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


धनु राशि वालो जनवरी से मार्च के बीच आपके कार्यों की प्रशंसा होगी । आपका वर्चस्व बढ़ेगा । श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होगी । घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा। राजनीतिक फायदे की स्थिति बनेगी । आपको लाभ के अवसर प्राप्त होंगे । लोग आपके बारे में गलतफहमियां पैदा कर सकते हैं। अप्रिय घटना हो सकती है । आप में साहस रहेगा । इस समय नए मुकाम हासिल करेंगे। अजनबी लोगों से न उलझे। अतिरिक्त कमाई से खुश हो सकते हैं। कम्प्यूटर आदि की खरीदी कर सकते हैं । वातावरण पूरी तरह आपके अनुरुप रहेगा। पति-पत्नी के बीच मधुरता रहेगी ।

धनु राशि वालो के अप्रैल से जून के बीच रुकावटों के बावजूद काम पूरे हो जाएंगें । किसी शुभ या महत्वपूर्ण काम में पैसा खर्च कर सकते हैं । समय विद्यार्थी के लिए बहुत बढ़िया साबित होगा । किसी रिश्तेदार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। नवीन वस्तु की खरीददारी संभव है। नए लोगो से सम्पर्क बनेगा , जो कि आगे चलकर आपके लिए मददगार साबित होंगे । आर्थिक गतिविधि में व्यस्त रहेगें । घर परिवार को समय देंगे । प्रिय व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। आप खान-पान का आनंद लेंगे। प्रेम संबंधों की गलतफहमियों का निराकरण हो जाएगा । पति-पत्नी के संबंधों में मधुरता रहेगी। पड़ोसियों से भी संबंध मधुर बनेगें । आप असमंजस की स्थिति में रहेगें ।

धनु राशि वालो की जुलाई से सितंबर के बीच धर्म-कर्म में रुचि रहेगी । घर-परिवार में प्रेम बना रहेगा। भागीदारी में लाभ रहेगा । मित्र से आशातीत सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सक के पास जाना पड़ सकता है। सब कुछ सामान्य ही रहेगा। वाहन सावधानी से चलाएं। भविष्य को लेकर सार्थक योजनाएं बनेगी । आर्थिक या शारीरिक नुकसान हो सकता है। कोई गलती हो सकती है । आपको इसका पश्चाताप भी रहेगा । परिजनों के मध्य प्रेम भाव बढ़ेगा । आपके हृद्य में दुःखी जनों के प्रति सेवा तथा सहयोग की भावना जाग्रत होगी । अत्यधिक काम के चलते बीमार हो सकते हैं। स्वास्थ्य में लापरवाही न बरते । लोग आपकी कमजोरी सीधेपन का गलत फायदा उठा सकते हैं।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच आप कामकाज को लेकर प्रयासरत रहेंगे। कामों में अनुकुल लाभ के अवसर मिलेंगे। दुश्मनों पर जीत मिलेगी । सकारात्मक घटनाएं होंगी। ईश्वर का साथ रहेगा । महंगी वस्तुओं की खरीददारी संभव है। कारोबार से जुड़े लोग सफल रहेंगे। किसी वस्तु के चोरी होने की संभावना है। रुके काम गति पकड़ेंगे। मन में अभिमान भी आ सकता है। घर में वरिष्ठ लोगों का सहयोग मिलेगा। जीवनसाथी से प्रेम बढ़ेगा। दोनों एक दूसरे की भावना को समझ पाएंगे । किसी मुसीबत में फंस सकते हैं । धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र में वर्चस्व बढ़ेगा । पुरानी परेशानी सुलझा लेंगे ।
 

स्वास्थ्य- धनु राशि के लोगों को अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए । इस साल राशि स्वामी गुरु भी वक्री रहेगा। इसके प्रभाव से किसी शल्य चिकित्सा व आपरेशन आदि की स्थिति रहेगी । हृद्य रोग जैसी गम्भीर बीमारियों में लापरवाही न होने दें। छोटी-मोटी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें ।

रोजगार - धनु राशि वालो के लिए रोजगार के नजरिए से विद्यार्थियों के लिए नया साल काफी महत्वपूर्ण है । इस साल आपको करियर में नई संभावनाएं मिल सकती हैं। विद्याध्ययन में भी कुछ नया हो सकता है। अधिकारियों से आपके संबंध अच्छे रहेंगे। विदेश में जाकर अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी सफलता भी मिलेगी । फालतू कामों में पड़कर अपने करियर को प्रभावित नहीं करें । आपकी उदारता व भावुकता व्यापार में नुकसान का कारण बन सकती है। धोखा हो सकता है। अपने कर्मचारी की गतिविधि पर नजर रखें। कारोबार में छोटी-छोटी घटनाओं पर भी ध्यान दें।

पारिवारिक जीवन - धनु राशि वाले लोगों इस साल आपको लव प्रपोजल भी खूब मिलेंगे। प्रेम संबंधों को लेकर सावधान रहें। गुप्त प्रेम-प्रसंग उजागर होने से परेशानी हो सकती है। परिवार में तनावपूर्ण वातावरण निर्मित हो सकता है । मुश्किल समय में जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा । पति-पत्नी दोनों ही एक दूसरे की छोटी मोटी जरुरतों का ध्यान रखेंगे। इससे संबंधों में मधुरता आएगी। रिश्तेदार मात्र रिश्तों की औपचारिकता निभाने तक ही सीमित रहेंगे ।

जानिए 2016 वृश्चिक राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


वृश्चिक राशि जनवरी से मार्च के बीच आप में सक्रियता का अभाव रहेगा । जल्दबाजी से काम करेंगे। जिससे आपको वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे। रिश्तों को नई दिशा देंगे। प्रेरणा शक्ति का संचार होगा । संतान की गतिविधियां चिंता में डालेगी । धन व सुख शांति में कमी आएगी। काम में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं । कानूनी मामलों पर विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं । कोई प्रिय वस्तु चोरी हो सकती है । लापरवाही से काम बिगड़ सकता है । दुर्घटना के शिकार हो सकते हो । विद्यार्थी अपनी मेहनत से सफलता पाएंगे।

वृश्चिक राशि वाले अप्रैल से जून के बीच आप नवीन वस्तुओं की खरीददारी कर सकते है । कम दाम में या वाजिब दाम में अपने लिए अच्छा सामान खरीदेंगे। आप परोपकार के कामों में लगे रह सकते है । सरकारी कामों में आ रही रुकावटें दूर होंगी। घर में वातावरण अच्छा रहेगा। भौतिक सुख-सुविधा मिलेगी। नौकरी और विवाह की परेशानी रहेगी। समय सावधानी रखने योग्य है । घरेलू सुख शाति और काम के बीच अच्छा तालमेल रहेगा । व्यवसायिक यात्रा लाभप्रद रहेगी । नौकरी में तरक्की के आसार है । जटिल कानूनी मसले उलझ सकते हैं।

वृश्चिक राशि वाले जुलाई से सितंबर के बीच में किसी झगड़े को खत्म करने की पुरजोर कोशिश करेंगे व उसमें कुछ हद तक सफल भी होगें । आप खूब पैसा कमाएंगे । घर में स्थिति पहले से बेहतर होगी । परिवार में विवाह का शुभ प्रसंग आ सकता है। बच्चो को अनुशासन में रख पाएंगें । नई नौकरी लग सकती है । घर का कोई सदस्य आपकी चिंता का कारण बन सकता है । अचानक लाभ की संभावना बन रही है। आप पर कोई कलंक लग सकता है । आपके सामने कई काम बाकी रहेंगे और आप हर काम के लिए स्वयं को तैयार रखेंगे। अधिकारियों की चापलूसी करेंगे।

वृश्चिक राशि वाले अक्टूबर से दिसंबर के बीच आप किसी से मदद मांगेगे और वह पूरी हो जाएंगी । आर्थिक हालात सुधरेंगे । सेहत में गिरावट हो सकती है। संतान कि किसी गतिविधि से आप चिंता में पड़ जाएंगे । पति- पत्नी के बीच विवाद हो सकते हैं। गलत वचनों के कारण आप झंझट में पड़ सकते है । जिस काम में हाथ डालेंगे, उसमें सफलता मिलेगी। उधारी वसूली के हिसाब से दिन अच्छे हैं। आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत रहेगी। लोक कल्याण का काम करेंगे । आपकी उन्नति से कुछ लोगों को जलन हो सकती है। आपके प्रेम संबंध मजबूत हो सकते हैं । वाहन चलाने में सावाधानी रखें। अचानक फायदा मिलेगा।


स्वास्थ्य- वृश्चिक राशि वालो की सेहत के नजरिए से यह वर्ष अच्छा नहीं रहेगा। यात्रा में खान-पान का विशेष ध्यान रखें । पैरो में तकलीफ हो सकती है । बुरी आदतों से दूर रहें । रक्तचाप, मधुमेह , हृद्य रोग जैसी बीमारियों को लेकर सावधान रहें। हालांकि, इस वर्ष भाग-दौड़ के चलते अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देंगे । योग , प्रणायाम और कसरत के साथ दिनचर्या को बिलकुल व्यवस्थित रखें ।

रोजगार - वृश्चिक राशि वाले विद्यार्थियों को परिणाम अच्छे मिलेंगे । यह वर्ष सफलता व उपलब्धियां देने वाला है । करियर में नई दिशा व नई राह प्राप्त होगी । तकनीकी शिक्षा, प्रबंधन, कॉमर्स से जुड़े विद्यार्थियों के लिए यह साल फायदा देने वाला रहेगा। पूरी गम्भीरता के साथ अपने अध्ययन व लक्ष पर ध्यान दें । व्यापार के विस्तार के लिए आप जो योजना बना रहे है, उसके लिए आपको एक्स्ट्रा कोशिश करनी पड़ सकती हैं। मेहनत ज्यादा रहेगी, लेकिन परिणाम इतने ठोस नहीं मिलेंगे। आर्थिक संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। आपको इस साल प्रयास व परिश्रम ज्यादा करना पड़ेगा।

पारिवारिक जीवन - वृश्चिक राशि वालो की प्यार की जिंदगी अच्छी रहेगी। मतभेद खत्म हो जाएंगें । प्यार की जिंदगी में किसी पुराने दोस्त का सहयोग मिलेगा। संतान को लेकर चिंता रह सकती है। जीवनसाथी से भावनात्मक सहयोग मिलेगा ।



जानिए 2016 तुला राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !



तुला राशि वालो की जनवरी से मार्च के बीच आय से अधिक खर्चो की स्थिति रहेगी । मानसिक चिंता से राहत महसूस करेंगे । व्यापार में स्थितियां सामान्य रहेगी। आर्थिक रुप से उन्नति होगी। कुछ काम बनते-बनते रुक भी सकते हैं। भाइयों से छोटे-मोटे विवाद हो सकते हैं। पति-पत्नी के संबंध मधुर बने रहेगें । पारिवारिक मसलो पर एक दूसरे से खुलकर चर्चा करेंगे । मान-सम्मान मिलेगा। समय सामान्य रहेगा । वाद-विवाद होने की संभावना है। नवीन वस्तु की खरीददारी संभव है। नौकरी पेशा लोगों को पदोन्नति मिल सकती है। अचानक यात्रा का कोई कार्यक्रम बन सकता है । जमीन-जायदाद या कीमती वस्तुओं की खरीदारी हो सकती है।

तुला राशि वालो की अप्रैल से जून के बीच कुछ नए काम करने की इच्छा होगी। कामों में रुकावटें भी आएंगी। किसी शत्रु या विरोधी की हरकत से परेशान हो सकते हैं। नई जानकारियां और सूचना मिलेंगी । आय के नए साधन मिलेंगे। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहेगी । किसी गुप्त योजना या साजिश का शिकार हो सकते हैं। वाहनों से सावधान रहें। संतान का सूख मिलेगा । गृहस्थ जीवन में चले आ रहे है विवाद कम होंगे। किसी मांगलिक काम की रुपरेखा बन सकती है या हो सकता है ।

तुला राशि वालो का जुलाई से सितंबर के बीच का समय व्यवसायिक मामलो के लिए सामान्य रहेगा। हाथ में आता पैसा रुक भी सकता है। परिवार में व्यस्तता अधिक रहेगी । संतान संबंधी चिंता समाप्त होगी । लम्बे समय से जो काम रुका हुआ था, वह पूरा हो जाएगा। वाहन पर खर्च होगा। नए वाहन खरीदने का विचार कर सकते हैं। निजी क्षेत्र में काम करने वालों को प्रोत्साहन के रुप में कुछ धन प्राप्त हो सकता है। व्यापार में गम्भीर व ठोस निर्णय लेंगे जिसके सकारात्मक परिणाम आने वाले दिनों में मिलेंगे। किसी नेता या मंत्री से मुलाकात हो सकती है। शेयर बाजार , तेजी-मंदी को देख कर सोच-समझकर निवेश करें। कुछ पारिवारिक मामले परेशान कर सकते हैं। कोर्ट कचहरी व मुकदमों में भी जीत मिल सकती है। महिलाओं को भी वांछित सफलता पारिवारिक मामलों में प्राप्त होगी । कर्मचारी वर्ग के लोगो को पदोन्नति के अवसर मिलेंगे।

तुला राशि वालो को अक्टूबर से दिसंबर के बीच घर परिवार को लेकर थेड़ी सी चिंता व तनाव की स्थितियां रहेंगी । आपके लोग ही आपके साथ विश्वासघात कर सकते हैं। मान-सम्मान घर-परिवार की दृष्टि से आपको उचित परिणाम मिलेंगे । दोस्तों से सहयोग और लाभ मिलेगा। धन प्राप्ति में रुकावटें आ सकती हैं। सरकारी कार्यों में किसी की मदद मिल सकती है। कर्मचारियों के लिए समय अनुकुल रहेगा। कोई अशुभ समाचार भी मिल सकता है सावधान रहें। व्यवसायिक हलचल कोई खास नहीं रहेगी । भाइयों के प्रति विशेष भाव रहेगा । प्रेम प्रसंग में सफलता मिल सकती है। आगे बढ़ने के लिए नई योजनाएं शुरू कर सकते हैं।

स्वास्थ्य- तुला राशि वालो का बीमारी पर धन खर्च होगा । योग, प्राणायाम, शारीरिक आसन, पैदल चलना, ध्यान जैसी चीजों के लिए आपको व्यावसायिक व्यस्तताओं के बावजूद समय निकालना चाहिए । वाहन द्वारा क्षति के भी योग इस वर्ष बने हुए है अतः वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं ।

रोजगार - तुला राशि के जातकों को इस वर्ष विद्याध्ययन में वांछित सफलता मिलेगी । कभी - कभार मन डांवाडोल होगा, विचलित होगा । रोजगार व नौकरी में बेहतर अवसर व मिलेंगे। रोजगार में नई नौकरी का प्रस्ताव आपकी प्रतीक्षा कर रहे है । इस वर्ष काई बड़ा काम , अनुबंध या करार आपके हाथ से फिसल सकता है । व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी व प्रतिस्पर्धियों से सावचेत रहें, थोड़ी सी चूक होने पर व्यवसाय में नुकसान हो सकता है । वाणी पर नियंत्रण रखे , अन्यथा आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है । कर्मचारी पर भरोसा नहीं करें

पारवारिक जीवन -
तुला राशि के जातकों को इस वर्ष प्रेम - प्रसंग के मौके आपको खूब मिलेंगे । प्रेमी-प्रमिका से मेल जोल व संबंधों की स्थिति अच्छी रहेगी। पति - पत्नी के मध्य चले आ रहे मतभेदों व गलतफहमियों का निराकरण होगा । इस वर्ष भाई - बहनों से जरूर थोड़ा सा तनाव रह सकता है । जीवनसाथी से आपको भावनात्मक सहयोग मिलेगा । संतान भी मुश्किल परिस्थिति में आपके साथ रहेगी ।

Tuesday, 29 December 2015

जानिए 2016 कन्या राशि वालो के लिए कैसा रहेगा !!



कन्या राशि वालो को जनवरी से मार्च के बीच शुभ संकेत या कोई अच्छी खबर मिल सकती है। दोस्तों और सहयोगियो से सहयोग मिलेगा । खर्चो पर नियंत्रण रखें । घर व दफ्तर के बीच में बेहतर तालमेल बिठाने में आप कामयाब होंगे । आपके कार्यों की तारीफ होगी । राजकीय कार्यों में सफलता के योग बने हुए हैं। किसी रिश्तेदार से संबंधित कोई अच्छी खबर मिल सकती है। यात्राओं की योजना बनेगी। धार्मिक कार्यों मे आपकी रुचि रहेगी । भावनाओं में या दबाव में आकर कोई निर्णय न लें ।

कन्या राशि वालो को अप्रैल से जून के बीच कोई अच्छी खबर मिल सकती है। आर्थिक मामलो में आपका हाथ जरा तंग रहेगा । इस समय आपको निवेश का फायदा नहीं मिल पाएगा। पिछले समय में किए गए निवेश के सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। राजनीतिक संपर्कों के कारण आप परेशानी में पड़ सकते हैं। रोजगार व शिक्षा के लिए किए गए प्रयास सफल होंगे। आप इस समय अपने व्यवसाय व कार्यक्षेत्र का दायरा बढ़ाएंगे। गैर कानूनी कार्यों से दूर रहें । आपसे कुछ गलत फैसले भी कर सकते हैं। जिसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। रोजगार के उचित अवसर मिलेंगे। घूमने-फिरने या पिकनिक आदि में भी जा सकते है । भाइयों से उचित सहयोग भी मिलेगा ।

कन्या राशि वालो को जुलाई से सितंबर के बीच में कार्यों में शुरुआती तौर से तो सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन आखिरी में जीत आपकी ही होगी । अधिकारी आपके काम से खुश होंगे । संतान की गतिविधि आपकी चिंता का कारण बनेगी । आपके अपने लोग ही आपके साथ धोखा कर सकते हैं। राजकीय कार्यों में भी रुकावटें आ सकती है। संबंधों में मधुरता रहेगी । गम्भीरता से काम निपटाएं । कोई बुरी खबर भी मिल सकती है। किसी अनिष्ट कि आशंका बनी हुई रहेगी । आर्थिक पक्ष अच्छा रहेगा। विवाह प्रस्ताव मिल सकता है ।

कन्या राशि वालो की अक्टूबर से दिसंबर के बीच दिनचर्या बदलेगी। रिश्तों में मधुरता रहेगी । दूसरों की लड़ाई-झगड़ो में फंसकर या उलझकर अपना ही नुकसान करवा सकते हैं। कोई विश्वासघात, धोखा या षडयंत्र के शिकार हो सकते हैं। गरीब और असहाय लोगों की मदद करेंगे। नौकरी में सहकर्मियों के साथ मनमुटाव की स्थिति बनेगी। सुख के साधनों में वृद्धि होगी।

स्वास्थ्य- कन्या राशि वालों के लिए यह वर्ष स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम रहेगा । पाचनतंत्र के रोग, ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों से परेशानी की संभावना है। शारीरिक कमजोरी, हड्डियों की बीमारी से ग्रसित हो सकते है । वाहन द्वारा नुकसान संभव है । वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं । स्वास्थ्य में लापरवाही बिल्कुल भी नहीं बरतें । घर के बुजुर्गों की सेवा करें। उनकी सेहत से जुड़े चेक-अप करवाते रहें।

रोजगार - कन्या राशि वालो से नौकरी व रोजगार में अधिकारी आपके काम से खुश रहेगें । काम काज में बेहतर पैकेज वाले नौकरी का प्रस्ताव मिल सकता है । व्यापार में नया प्रयोग व नई तकनीक का उपयोग करेंगे। नौकरी में छोटी-मोटी परेशानियां तो आएंगी, परंतु समय रहते उस परेशानी का समाधान भी हो जाएगा । जमीन, भवन निर्माण, रियल स्टेट से संबंधित लोगों के लिए समय लाभप्रद रहेगा ।

पारवारिक जीवन - आप भावुक प्रवृत्ति के हैं। प्यार के जीवन में इस वर्ष कन्या राशि के जातकों को सफलता मिलेगी । प्यार के कारण परिवार में तनावपूर्ण वातावरण बन सकता है । भावुकता में कोई काम नहीं करें ।

जानिए 2016 सिंह राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


सिंह राशि वालो की जनवरी से मार्च के बीच लम्बे समय से चली आ रही चिंता और परेशानियां खत्म हो सकती है। नए काम शुरू हो सकते हैं। बुद्धिमता से किए गए निवेश आगे चलकर फायदा देंगे। नई योजनाएं गति पकडेंगी । जिम्मेदारियों को समझेंगे और समय अनुसार निभा भी लेंगे। संतान और परिवार को लेकर चिंता की स्थिति बन सकती है। आर्थिक रुप से भी उतार चढ़ाव की स्थितियां रहेंगी। काम के बेहतर नतीजों के फलस्वरुप आप थोड़ी राहत महसूस करेंगे। पुराने दोस्तों के साथ समय बीतेगा। राजकीय क्षेत्र में सफलता मिलेगी ।

सिंह राशि वालो को अप्रैल से जून के बीच व्यापार में लापरवाही नुकसानदायक साबित होगी। कोई बढ़ा काम हाथ से निकल सकता है। भविष्य से संबंधित योजना गति पकड़ेगी । मानसिक व शारीरिक क्षमता में सुधार आएगा । कहीं से शुभ समाचार मिलेंगे । जीवनसाथी से तकरार और मतभेद भी हो सकते हैं। मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। पैसा आने से पहले खर्चा होने की योजना बन सकती है। आर्थिक लाभ की दिशा में महत्वपूर्ण काम होंगे। नौकरी में अधिकारियों से किसी बात पर बोलचाल या कहासुनी हो सकती है। आपका पराक्रम बढ़ेगा। जल्दबाजी व हड़बड़ाहट में अपना ही नुकसान कर लेंगे ।

सिंह राशि वालो को जुलाई से सितंबर के बीच व्यापार में महत्वपूर्ण फैसले लेंगे जिससे आपको फायदा भी होगा। कार्यों का उचित परिणाम आएगा । भविष्य के लिए नए प्रयोग कर सकते हैं। दुश्मनों से सावधान रहें। व्यापार में अजनबी व्यक्तियों पर विश्वास नहीं करें। भाग-दौड़ व परिश्रम ज्यादा रहेगा। जीवनसाथी से मतभेद व गलतफहमियों का निराकरण होगा।

सिंह राशि वालो को अक्टूबर से दिसंबर के बीच जमीन जायदाद संबंधी मामलों में सफलता मिलेगी। भाई-बहनों से संबंध मधुर रहेंगे। खरीददारी में व्यस्त रहेंगे । किसी तीसरे व्यक्ति के कारण आप मुसीबत में पड़ जाएंगें । कुछ कामों में असफलता व निराशा ही हाथ लगेगी । साझीदार से संबंध मधुर बनेंगे । नरम रुख व उदारवादी दृष्टिकोण से आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे । खान पान का विशेष ध्यान रखें । किसी षडयंत्र का शिकार भी हो सकते हैं।

स्वास्थ्य - सिंह राशि वालो का इस वर्ष स्वास्थ्य थोड़ा सा मिला-जुला रहेगा । इस वर्ष मौसमी बीमारियां, सर्दी, जुकाम, खांसी, सिर दर्द व पेट दर्द जैसी तकलीफ हो सकती है। दीर्घकालीक बीमारियों, जैसे - मधुमेह, रक्तचाप, ह्रदय रोग आदि में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। कामकाज के दबाव के कारण कई बार आपकी नींद भी पूरी नही हो पाएगी । शरीर को पूरा आराम दे।

आने वाले जीवन के अवसर - सिंह राशि वाले विद्यार्थी इस वर्ष परिश्रम व मेहनत तो खूब करेंगे, परंतु उतने सकारात्मक परिणाम आपको मिल नहीं पाएंगे। नौकरी करियर में स्थितियां लाभ देने वाली है । अतः नौकरी में तयशुदा लक्ष्यों को आसानी से सरलता व सुगमता से हासिल कर लेंगे । विभागीय परीक्षा, प्रतियोगिता, नौकरी व करियर से संबंधित किसी परीक्षा का फार्म आप भर सकते है । व्यापार व कारोबार में विस्तार के लिए बनाई गई योजना धरी रह जाएगी। शेयर्स, दलाली, जुआ, सट्टे से नुकसान होने का खतरा है। इन चीजों से दूर ही रहे । कामकाज में विस्तार की नई योजनाओं के बारे में विचार करेंगे ।

पारिवारिक जीवन - सिंह राशि वाले प्रेम - संबंधों में दूरी बनाएं रखें, दायरे व मर्यादा के अन्तर्गत किया गया प्रेम आपके व्यक्तित्व को ऊंचाइया देगा । इस वर्ष प्रेम-प्रसंग गुप्त नहीं रख पाएंगे, इस कारण परिवार में माता - पिता, भाई बहनों आदि से तनाव की स्थिति बनेगी।

जानिए 2016 कर्क राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !


कर्क राशि वालो के लिए जनवरी से मार्च के बीच समय अच्छा रहेगा। धन लाभ होगा। किस्मत भी साथ रहेगी। पदोन्नति होगी। तनाव मुक्त रहेंगे। नौकरी- बिजनेस में फायदे के योग हैं। पारिवारिक लोगों का साथ मिलेगा। नवीन वस्तु की खरीददारी संभव है। मेहनत से फायदा मिलेगा। कमाई के साथ खर्चा भी ज्यादा रहेगा। परिवार के साथ जुड़ाव महसूस होगा। विरोधियों पर जीत मिलेगी। यात्रा संभव है।

कर्क राशि वालो के लिए अप्रैल से जून के बीच नए काम की रुप रेखा बन सकती है । किसी भी तरह अपना काम पूरा कर ही लेंगे । रुका हुआ या उधार दिया पैसा मिलेगा। जीवन शैली में बदलाव आएंगे। पति-पत्नी में गलतफहमियां दूर होंगी। आपसी सामंजस्य बना रहेगा। कुछ आर्थिक मामलों में निराशा मिल सकती है। अविवाहितों के विवाह की संभावना है । भाग-दौड़ के कारण जल्दबाजी में खुद का ही नुकसान करवा सकते हैं। नेता या बड़े अधिकारी से मुलाकात फायदेमंद रहेगी। भूमि, भवन से जुड़े सौदे होने की संभावना है।

कर्क राशि वालो के लिए जुलाई से सितंबर के बीच बिना सोचे-समझे कोई भी फैसला न लें। किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करे । पैसा कमाने का पूरा अवसर मिलेगा । सेहत पहले से ठीक रहेगी। ससुराल पक्ष से फायदा हो सकता है। बड़ा निवेश करने की योजना बन सकती है। पैतृक संपत्ति वसीयत और उत्तराधिकारी संबंधी मामले सुलझ जाएंगे। किसी खास काम की तैयारी करेंगे। फालतू खर्चे बढ़ सकते हैं। बात-बात पर गुस्सा करने से बचें। रुके काम पूरे होंगे। ऐश-आराम के साधनों पर पैसा खर्चा होगा। बड़ा फायदा भी मिलेगा।

कर्क राशि वालो के लिए अक्टूबर से दिसंबर के बीच दोस्तों से मनमुटाव हो सकता है। कार्यक्षमता और आत्मबल में कमी आ सकती है। बनते काम बिगड़ भी सकते हैं। सकारात्मक विचारों से खुद को संभालेंगे। दूसरों के साथ विचारों का आदान-प्रदान का सिलसिला बना रहेगा। लक्ष्य प्राप्ति में कुछ रुकावट भी आ सकती है। कामकाज में जोखिम उठाने के लिए तैयार रहें । कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है।

स्वास्थ्य -कर्क राशि वालो के लिए शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा । यात्राओं में खान-पान के कारण स्वास्थ्य में हल्की - फुल्की समस्याएं आ सकती है । बड़े- बुजुर्गों व माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार होगा । अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित व सुनियोजित रखें। इस वर्ष आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना चाहिए ।

आने बाले जीवन के आवसर - कर्क राशि वालो को विद्यार्थियों का ध्यान लक्ष्य से विचलित होगा । विद्याध्ययन में बाधा व रुकावट आएगी । मेहनत व परिश्रम करके लक्ष्यों को हासिल कर ही लेंगे । साक्षात्कार, इंटरव्यू व नौकरी आदि को लेकर होने वाली परीक्षा में भी सफलता के योग बने हुए है । कामकाज को स्थापित करने व जमाने के लिए आपको इस वर्ष काफी मेहनत करनी पड़ेगी। मेहनत के बाद आप आर्थिक मुनाफा प्राप्त कर ही लेंगे । जमीन, कपड़ा, तेल, कमीशन व व्यापार से जुड़े लोगों को मुनाफा होगा ।

पारिवारिक जीवन - कर्क राशि वालो को प्रेम निवेदन भेजेगे । प्रेम-प्रसंग में थोड़ी सी सावधानी रखें। घर में हल्का-फुल्का तनाव पति-पत्नी के बीच रह सकता है । विवाह को लेकर चिंता की स्थितियां रहेगी । भाईयों व बहनों से विवाद हो सकता है। किसी की मध्यस्थता से विवाद आप समय रहते सुलझा सकते है । प्रेम-प्रसंग के कारण परिवार में तनावपूर्ण वातावरण बन सकता है ।

जानिए 2016 मिथुन राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !!


मिथुन राशि वालो को जनवरी से मार्च के बीच सेहत संबंधी परेशानी रहेगी। आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। किसी पर हद से ज्यादा भरोसा करना ठीक नही होगा। अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखकर काम करें। कुछ परेशानियां अपने आप ही खत्म हो जाएगी । सही दिशा में आगे बढ़ेंगे। शारीरिक रुप से समय अच्छा नहीं है । खींचतान और दबाव भी रहेगा। धन के मामलो में सफलता मिलेगी। प्रगति, निजी मकसद और महत्वाकांक्षाओं को लेकर चिंता हो सकती है। काम का दबाव अधिक रहेगा। पति-पत्नी के बीच संबंध मधुर होंगे। स्वास्थ्य में परेशानी हो सकती है।
 

मिथुन राशि वालो को अप्रैल से जून के बीच वित्तीय मामलो में जरा सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है। हाथ में आता पैसा रुक भी सकता है। परिवार में भी तनावपूर्ण माहौल रहेगा। सहकर्मी वरिष्ठजन व निचले वर्ग के लोगों से सहयोग नहीं मिल पाएगा। व्यापार में उचित फायदा मिलेगा। आर्थिक समस्याओं पर ध्यान देंगे। दुर्घटना की संभावना है, वाहन सावधानी से चलाएं । रोजमर्रा के कामों में समय बीतेगा। कुछ नया करने की कोशिश करेंगे, लेकिन हो नहीं पाएगा। रिश्तों में मिठास बनी रहेगी।
 

मिथुन राशि वालो को जुलाई से सितंबर के बीच अचानक परेशानियां आ सकती हैं। मौसमी परेशानियां हो सकती हैं। दिन सामान्य बीतेंगे। करियर में आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। गलतियां सुधारेंगे। बेरोजगारों की काम की तलाश खत्म होगी। रुका हुआ या उधार दिया गया पैसा मिलेगा। वैवाहिक जीवन में मधुरता रहेगी। राजनीति से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा है। कोई अप्रिय घटना होने की भी पूरी संभावना है । पति-पत्नी में तालमेल बना रहेगा। सरकारी, कोर्ट आदि के काम पूरे होंगे।
 

मिथुन राशि वालो को अक्टूबर से दिसंबर के बीच किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है। कुछ खास कामों की रुकावटें दूर होंगी। समय का ध्यान रखें। कोई खास काम पूरा करने में समय की कमी हो सकती है। इस वजह से आप परेशान भी हो सकते हैं। किसी प्रकार का जोखिम लेने के लिए भी तैयार रहें। कोशिशों या नए कामों की पहल से सफलता मिलेगी। परिवार को प्राथमिकता देंगे। बिजनेस में नए सौदे मिल सकते हैं। संपत्ति की खरीदी-बिक्री भी हो सकती है।
 

स्वास्थ्य - इस वर्ष शारीरिक स्वास्थ्य आपका अच्छा रहेगा । कभी-कभार पुराना रोग उठ सकता है । अपनी आदतों, खान-पान, दिनचर्या आदि का आपको विशेष ध्यान रखना पड़ेगा । उदर विकार, मधुमेह, रक्तचाप जैसी बीमारियों से परेशानी हो सकती है । माता-पिता या घर के बड़े-बुजुर्गों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव चलता रहेगा व उस पर व्यय भी होगा ।

आने बाले जीवन के आवसर - मिथुन राशि वालो को विद्याध्ययन, पढ़ाई व भविष्य बनाने की दृष्टि से यह वर्ष अनुकूल फलों को देने वाला है । तकनीक, कानून विधि, इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष लाभप्रद है । व्यापार व कारोबार में आप सही समय पर सही निर्णय लेंगे। जिससे आपको मुनाफा हासिल होगा । मिथुन राशि के लोग व्यापार में निपुण होते है । उसी निपुणता व बौद्धिक क्षमता का सही उपयोग करके आप अपने व्यापार को नई उन्नति की तरफ ले जाएंगे।

पारिवारिक जीवन - मिथुन राशि वालो का प्रेमी या प्रेमिका से मेल- जोल होगा। कई बार प्यार में छोटी - मोटी तकरार या कहासुनी हो सकती है , लेकिन समय रहते वह सुलझ भी जाएंगें । जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता की स्थितियां रहेगी । दाम्पत्य संबंधों में मधुरता आएगी । पति - पत्नी में आपसी गलतफहमियों व मतभेदों का निराकरण होगा । किसी रिश्तेदार से सम्बन्धित अशुभ व अप्रिय समाचार की स्थिति बन सकती है ।

Friday, 25 December 2015

जानिए 2016 वृषभ राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !!


आप की जनवरी से मार्च के बीच चिन्ता की स्थिति बन सकती है। कुछ कार्यों में सफलता नहीं मिलेगी। समस्याओं के निवारण की कोशिशें असफल हो सकती हैं। अपने अन्दर उर्जा की कमी महसूस करेंगे। परिवार मे कोई विवाद बढ़ सकता है। वाहन खराब हो सकता है। बाहन को सावधानी से चलाए । इंटरव्यू(साछात्कार) आदि में सफलता मिलेगी। किसी शुभ कार्य की तैयारियां शुरू हो सकती है। अतिरिक्त काम से परेशान हो सकते हैं। नौकरी में अनचाहे स्थान्तरण का डर बना रहेगा। पेट संबंधित रोग परेशान करेंगे। पुरानी समस्या का समाधान मिल सकता है।

अप्रैल से जून के बीच मेहनत ज्यादा होगी। नौकरी में बदलाव हो सकता है । इस समय की गई यात्रा शुभ रहेगी। अपनों का साथ मिलेगा। समाज कल्याण के कार्यों में आप बढ़ - चढ़कर हिस्सा लेंगे। विशेष आयोजनों की तैयारियां होंगी। किसी नए पद पर काम कर सकते हैं। वैवाहिक संबंधों में मजबूती रहेगी। अविवाहितों के विवाह भी होंगे। कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलेगी। फालतू कामों में समय निकल सकता है। कामों की तारीफ होगी।

जुलाई से सितंबर के बीच नौकरी में अच्छे से काम कर लेंगे। कोई व्यापार करते है तो, काम में सुधार भी होगा। घर व दफ्तर में काम सबंधी मामलों में बड़े फैसले ले सकते हैं। अच्छे परिणाम भी मिलेंगे। अविवाहितों को विवाह प्रस्ताव मिलेंगे। जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। इस समय कोई खास काम निपटा लेंगे। कारोबार में फायदा होगा। व्यापार साझेदार से सावधान रहें।कमाई बढ़ेगी। कोई नया काम शुरू कर सकते हैं। कुछ अच्छे कामों का नतीजा धन प्राप्ति या कमाई के रूप में मिल सकता है।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच में उत्साह ज्यादा रहेगा। घर की मरम्मत संबंधी काम करेंगें। नई वस्तुएं विशेषकर सजावटी सामान की खरीददारी भी होगी । कमाई के तरीको पर् तलाश करेंगे। घर का माहौल अच्छा रहेगा। यात्रा हो सकती है। नए लोगों से मुलाकात हो सकती है। करियर(जीवन के अवसर)और काम को लेकर आप गम्भीर होंगे। मेहनत का पूरा फल भी समय मिलेगा।

स्वास्थ्य -शारीरिक दृष्टि से वर्ष 2016 आपके लिए उत्तम है । खान-पान का ध्यान रखें । योग, व्यायाम, शारीरिक श्रम जैसी चीजों को अहमियत दें । वृषभ राशि के जातकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, अतः आप आसानी से संक्रमित हो सकते हैं। घर के किसी बुजुर्ग या वरिष्ठ सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर आपको अस्पताल जाना पड़ सकता है । स्वास्थ्य पर खर्च भी हो सकता है ।

करियर(जीवन के अवसर)- नौकरी व कार्यक्षेत्र मे तयशुदा लक्ष्यों की प्राप्ति कर लेंगे। अधिकारी आप पर मेहरबान रहेगें। वेतन वृद्धि या पदोन्नति मिल सकती है । करियर(जीवन के अवसर) में नई नौकरी का प्रस्ताव मिल सकता है । पैसा कमाएंगे, लेकिन टिक नहीं पाएगा। आय से अधिक खर्च की स्थिति रहेगी । व्यापार तथा नौकरी में अनुकूल परिणामों व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आप जी तोड़ मेहनत करेंगे। और उसका प्रतिफल भी आपको प्राप्त होगा ।
पारिवारिक जीवन -पारिवारिक जीवन के साथ प्रेमी- प्रेमिका के लिए भी समय ठीक है। परिवार के लोग एक - दूसरे के दुःख को समझेंगे । भाइयों से बंटवारे व सम्पत्ति सम्बन्धी मामले में अनबन हो सकती है। पारिवारिक सदस्य की मध्यस्थता से विवाद सुलझ भी जाएंगे । पति-पत्नी में आपसी तालमेल व सामंजस्य ठीक ही रहेगा । दोनों एक-दूसरे की भावना को समझ कर उसके अनुरुप ही आचरण करेंगे ।

कमजोर ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए पेड़-पौधों का सरल उपाय :-


1. सूर्य कमजोर हो तो उन्हें तप्त लाल रंग के फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।
2. चंद्रमा कमजोर हो, तो उन्हें तुलसी या अन्य छोटे-छोटे औषधीय पौधे अपने अहाते में लगाकर उसमें प्रतिदिन पानी देना चाहिए।
3. मंगल कमजोर हो तो उन्हें लाल फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।
4. बुध कमजोर हो तो उसे बिना फल फूलवाले या छोटे छोटे हरे फलवाले पौधे लगाने से लाभ पहुंच सकता है।
5. बृहस्पति कमजोर हो तो उन्हें पीले फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।
6. शुक्र कमजोर हो तो उन्हें सफेद फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।
7. शनि कमजोर हो तो उन्हें बिना फल-फूल वाले या काले फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

विशेष :- ये सभी छोटे-बड़े पेड़-पौधे पूरब की दिशा में लगे हुए हों, इसके अतिरिक्त ग्रह के बुरे प्रभाव से बचने के लिए पश्चिमोत्तर दिशा में भी कुछ बड़े पेड़ लगाए जा सकते हैं, किन्तु अन्य सभी दिशाओं में आप शौकिया तौर पर कोई भी पेड़ पौधे लगा सकते हैं। उपरोक्त समाधानों के द्वारा जहॉ ग्रहों के बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है, वहीं अच्छे प्रभावों को बढा़ पाने में भी सफलता मिल सकती है।

जानिए 2016 मेष राशि बालो के लिए कैसा रहेगा !!


जनवरी से लेकर मार्च तक मेष राशि वालों के अधूरे काम पूरे होंगे। आप के परिवार में माहौल आपके अनुकूल रहेगा। आप थोडे आलस मे रहेगे। कुछ नया करने की इच्छा तो होगी, लेकिन कुछ खास कर नहीं पाएंगे। आपकी इच्छाएं पूरी होंगी। आप अपने कार्यक्षेत्र में अधिक जोश एवं सकारात्मकता से कोशिश करेंगे। पति-पत्नी के संबंध अच्छे रहेंगे। बीमार, ज़रुरतमंद की सेवा करेंगें। रुके हुए कामकाज पूरे होंगे।

अप्रैल से जून बीच आप के दुआरा किए गए कार्यों की तारीफ होगी। नया काम शुरु कर सकते हैं। किसी के साथ मिलकर काम करेंगे तो अच्छे नतीजे आएंगे। किसी को दिया उधार पैसा वापस मिल सकता है। पुराने दोस्तों से मुलाकात होगी। जिस काम में हाथ डालेंगे फायदा ही होगा। दोस्तों के सहयोग से फायदा मिलेगा। समय आपके पक्ष में रहेगा। धन संबंधी चिंताएं दूर होंगी। अतिरिक्त कमाई भी होगी। आप को अपने भविष्य बनाने में सफलता मिलेगी।

जुलाई से सितंबर के बीच में आप का ज्यादातर समय परिवार के साथ बीतेगा। घरेलू समस्याएं खतम होगी । आसपास या साथ के लोगों की मदद करेंगे। सकारात्मक सोच रखेंगें। अचानक फायदा भी मिलेगा। मेहनत का पूरा लाभ मिलेगा। किसी अनजान पर जरूरत से ज्यादा भरोसा न करें। आने वाले दिनों के लिए थोड़ी परेशान  भी हो सकते है। व्यापार में फायदा मिलेगा। सेहत में भी सुधार होगा।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच में आप का कामकाज बढ़ेगा और आप को उन्नति के मौके भी मिलेंगे। आप को खुशी भी मिलेगी। आप अपने खुद के लिए समय भी निकाल पाएंगे। घर में नया सामान ला सकते हैं। बेरोजगारों के लिए समय अच्छा है। नया काम मिलेगा। किसी बड़े नेता या समाजसेवी से मुलाकात हो सकती है। पूजी संबंधी काम पूरे होंगे। रुका हुआ पैसा भी मिलेगा। भावनाओं में न बहे। लापरवाही से बचें। किस्मत साथ देगी। धन बढ़ेगी। विवाद और मुकदमों में उलझ सकते हैं। कुछ मामलों को समझौता कर के निपटाएं।
पारिवारिक जीवन - जीवनसाथी को आपके साथ संबंध अच्छे होंगे। विवाह व व्यवहार, मुख्य रुप से आपकी चिंता का कारण बनेगा। इन सभी के बीच परिवार में कोई मांगलिक अवसर व शुभ कार्य के आयोजन की रुपरेखा बनेगी।
 

स्वास्थ्य - स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। आपको अस्पताल के चक्कर भी काटने पड़ सकते हैं। योग, प्राणायाम, शारीरिक व्यायाम, ध्यान करें। आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी चिकित्सा में भी विश्वास बढ़ेगा। खान-पान पर नियंत्रण रखें, अनियमित दिनचर्या के कारण कब्ज, एसिडिटी , सिर दर्द व पैरों में तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है।

आने बाले जीवन के आवसर - विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अच्छा कहा जा सकता है। तकनीक व विज्ञान से जुड़े विद्यार्थियों के लिए इस वर्ष सफलता के योग बने हुए हैं। आने बाले जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। व्यापार में आप बड़े-बड़े व साहसपूर्ण निर्णय तो लेंगे, परंतु उन निर्णयों के अधिक लाभकारी परिणाम नहीं आएंगे। नौकरी व पेसा में अधिकारी से तनाव होने की संभावना है। व्यापार में आप नई तकनीक, हुनर, मशीनरी या तरीके का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Wednesday, 16 December 2015

क्या आप को पता है किस ग्रह के लिए कौन से मंत्र का जप करना चाहिए !!



ज्योतिष में नौ ग्रह बताए गए हैं और सभी ग्रहों का अलग-अलग फल होता है। कुंडली में जिस ग्रह की स्थिति अशुभ होती है, उससे शुभ फल प्राप्त करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय ये है कि अशुभ ग्रह के मंत्र का जप किया जाए। ग्रहों के मंत्र जप से अशुभ असर कम हो सकता है।

मंत्र जप की सामान्य विधि:-

जिस ग्रह के निमित्त मंत्र जप करना चाहते हैं, उस ग्रह की विधिवत पूजा करें। पूजन में सभी आवश्यक सामग्रियां अर्पित करें। ग्रह पूजा के लिए किसी ब्राह्मण की मदद भी ली जा सकती है। पूजा में संबंधित ग्रह के मंत्र का जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग किया जा सकता है।

सूर्य मंत्र - ॐ सूर्याय नम:। सूर्य अर्घ्य देकर इस मंत्र के जप से पद, यश, सफलता, तरक्की सामाजिक प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य, संतान सुख प्राप्त हो सकता है और इस मंत्र से दरिद्रता दूर हो सकती है।

चंद्र मंत्र - ॐ सोमाय नम:। इस मंत्र जप से मानसिक परेशानियां दूर होती हैं। पेट व आंखों की बीमारियों में राहत मिलती है।

मंगल मंत्र- ॐ भौमाय नम:। इस मंत्र जप से भूमि, संपत्ति व विवाह बाधा दूर होने के साथ ही सांसारिक सुख मिलते हैं।

बुध मंत्र- ॐ बुधाय नम:। यह मंत्र जप बुद्धि व धन लाभ देता है। घर या कारोबार की आर्थिक समस्याएं व निर्णय क्षमता बढ़ाता है।

गुरु मंत्र - ॐ बृहस्पतये नम:। इस मंत्र जप से सुखद वैवाहिक जीवन, आजीविका व सौभाग्य प्राप्त होता है।

शुक्र मंत्र- ॐ शुक्राय नम:। यह मंत्र जप वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाता है। वैवाहिक जीवन में कलह व अशांति को दूर करता है।

शनि मंत्र- ॐ शनैश्चराय नम:। ये मंत्र तन, मन, धन से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर करता है। भाग्यशाली बनाता है।

राहु मंत्र- ॐ राहवे नम:। यह मंत्र जप मानसिक तनाव, विवादों का अंत करता है। आध्यात्मिक सुख भी देता है।

केतु मंत्र - ॐ केतवे नम:। यह मंत्र जप हर रिश्तों में तनाव दूर कर सुख-शांति देता है।

भाग्योदय के लिए राशि अनुसार इन पेड़ों को करें एक लोटा जल अर्पित !!



पुण्य और शुभ फल पाने के लिए कई परंपरागत उपाय आज भी प्रचलित हैं। सर्वाधिक प्रचलित उपायों में से एक उपाय है देवी-देवताओं को जल अर्पित करना। यदि आपके घर के आसपास कोई मंदिर नहीं है या आप मंदिर जा नहीं पाते हैं, तो घर के मंदिर में इष्टदेवी-देवताओं की मूर्तियों पर हर रोज जल अर्पित करें। देवी-देवताओं पर जल चढ़ाने के साथ ही एक लोटा पानी अपनी राशि से संबंधित वृक्ष को अर्पित करें। ऐसा करेंगे तो कुंडली के दोषों का निवारण हो जाएगा। भाग्योदय में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं और धन संबंधी परेशानियां समाप्त हो सकती हैं।

ज्योतिष में सभी ग्रहों के लिए अलग-अलग वृक्ष बताए गए हैं। इन वृक्षों की विधि-विधान से पूजा करने पर कुंडली में स्थित सभी नौ ग्रहों के दोष दूर होते हैं। यदि आप विधिवत पूजा नहीं करवा पा रहे हैं तो प्रतिदिन केवल एक लोटा जल अपनी राशि से संबंधित वृक्ष में चढ़ाएं। ऐसा करने पर भी आपको सकारात्मक फल प्राप्त होंगे। जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करना चाहिए।
राशि और वृक्ष :-
मेष एवं वृश्चिक- खैर
वृषभ एवं तुला- गूलर
मिथुन एवं कन्या- अपामार्ग
कर्क- पलाश
सिंह- आंकड़े का पौधा
धनु एवं मीन- पीपल
मकर एवं कुंभ- शमी

क्या आप को पता है किस प्रकार की तस्वीर या फोटो घर में नहीं लगाना चाहिए !!



हर इंसान के साथ एक समस्या होती है। वह मार्केट जाता है तो हर चीज हमें आकर्षित करती है। इसी कारण हम कभी-कभी हम घर को सजाने के लिए ऐसी वस्तुएं ले आते है। जो हमारे लिए अशुभ भी होती है। ऐसी वस्तुओं को घर में लाने से हमारे परिवार में बहुत बुरा असर पड़ता है। जिस बात का ध्यान हम नहीं देते है। वास्तुशास्त्र के अनुसार ऐसी वस्तुए हमारे घर में नकारात्मक ऊर्जा भी ला सकती है। जिससे हमारे घर में परेशानियांआती रहती है। जिसके बारें में हम जान नहीं पाते है। इन परेशानियों से निकलने के लिए न जाने क्या-क्या उपाय करते रहते है। जिससे कि हमें परेशानी से निजात मिल जाए। आज कें हम आपको ऐसी वस्तुए के बारें में बता रहे है। अगर ये चीजे आपके घर में मौजूद है तो तुरंत हटा दे। जिससे कि आपके घर में हमेशा सुख-शांति रहे।

1. किसी युद्ध की तस्वीर या फिर महाभारत ग्रंथ :-
माना जाता है कि महाभारत जैसे ग्रंथ को घर में रखने से हर समय क्लेश होता रहता है। क्योंकि महाभारत को परिवारिक झगड़े का कारण माना गया है। जिससे परिवार के लोग परिवार के ही सदस्यों की हत्या कर देते है। इसलिए इसे घर
पर नहीं रखना चाहिए। जिससे आपके घर में कभी भी लड़ाई या झगड़ा न हो।
**********
2. डूबती हुई नाव :-
डूबती हुई नाव यानि की निराशा। इस चीज को घर में रखने से आपके घर नकारात्मक चीजें आएगी। जिससे आपके घर की सुख-शांति सब चली जाएगी। आप किसी भी काम को करेगे तो उसमें आपको असफलताही प्राप्त होगी। साथ ही यह आपके रिश्तों में मन-मुटाव भी ला सकती है। इसलिए ऐसी तस्वीर को घर में नहीं रखना चाहिए। अगर है तो इसे तूरंत हटा देना चाहिए।
*****************
3. नटराज की मूर्ति :-
नटराज जिसे नृत्य कला का देवता माना जाता हैं। जो लोग नृतक होते है। उसके घर में
यह मूर्ति आसानी से मिल जाती है। नटराज जो भगवान शिव तांडव नृत्य करते हुए की मुद्रा में हैं। जब भी भगवान ने इस नृत्य को किया तब संसार में प्रलय हुई है। इसलिए इस मूर्ति को घर में नहीं रखना चाहिए। इससे आपका ही विनाश होगा। और आपके घर में परेशानी आती
रहेगी। इसे विनाश का सूचक माना जाता है। अगर आपके घर पर यह मूर्ति है तो उसे तुरंत हटा दे।
*************************
4. हिंसक जानवरों की तस्वीरें :-
हम अपने घर को सजाने के लिए क्या नहीं करते है। घर में सुंदर-सुंदर तस्वीरें लगाते हैं। जिससे कि हमारा घर सुंदर लगे, लेकिन क्या आप यह बात जानते है कि घर में हिसंक पशुओं की तस्वीर लगाने से आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। जिसके कारण आपके घर में लडाई-झगड़े होने लगते है। शांति नाम की कोई चीज नहीं रह जाती । जिसके कारण आपके घर रिश्तों में दरार पड़ जाती है। साथ ही आपके सेहत में भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए हिंसक जानवरों की तस्वीरें घर में नहीं लगानी चाहिए।
*************************
5. ताजमहल:-

 ताजमहल जिसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसकी तस्वार को हर व्यक्ति अपने घर में लगाना चाहता है। आपको यह बात पता होगी। कि शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में इसे बनवाया था। साथ ही दोनों की कब्र यहां पर मौजूद है। इसे घर में रखने से आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा बढती है।जिससे आपके जीवन से परेशानियां जाने क नाम नहीं लेती है। क्योंकि यह चीज किसी की मृत्यु से जुडी है। इसलिए इसे अपने घर में नहीं रखना चाहिए।

Monday, 14 December 2015

हनुमान जी का नवग्रह बाधा निवारण प्रोयोग !!


सम्पूर्ण जगत नव ग्रह के आधीन हैं, और जो भी अच्छा या बुरा, हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश जो भी होता हैं ! उसको सामने लाने में इनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता हैं, अब यह तो सर्व भौमिक तथ्य हैं की जब भी सूर्य में सौर कलंको का समय आता हैं पर हमारी धरती पर अनेको उथल पुथल कारक घटनाये घटने लगती हैं ! पिछले सैकड़ों सालो का   इतिहास इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं ! ग्रह ही राज्य देते हैं और ग्रह ही राज्य का भी हरण करते हैं !    .
वास्तव में ग्रह तो एक उत्प्रेरक का कार्य करते हैं और मानव मात्र के जैसे कर्म फल हैं उनको सामने लाने का कार्य करते हैं ज्योतिष में नव ग्रह और कुडली का योगदान तो सर्व विदित हैं एक  कुशल ज्योतिषी अपने अनुभव और सटीक विश्लेषण से आपके जीवन के भूतकाल या भविष्य काल रहस्य को आपके सामने रखने का प्रयास करता हैं ! जीवन में आने वाली हर वाधा के पीछे इनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता हैं ! और जब कोई भी उपाय काम न दे रहा हो फिर वह चाहे साधना में सफलता न मिल पाना हो या कोई और बात तो फिर गृह अनुकूलता  पर ध्यान देना ही चाहिए ! पर क्या हम इन सबका परिणाम सिर्फ सहन करते जाए क्या कोई रास्ता नहीं हैं ! तो साधना एक ऐसा तरीका आपके सामने रखती हैं जिसके माध्यम से आप  अपने कितने न विगत जन्मो के अर्जित कर्म फल को कम कर सकते हैं ! और अपने जीवन में अनुकूलता लायी जा सकती हैं ! और यह संभव होता हैं नव गृह की अनुकूलता से एक ऐसा ही प्रयोग जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगा ! भगवान् हनुमान की सामर्थ्य तो जग विख्यात हैं, और उनकी कृपा से तो जीवन की समस्त वाधाओ का निर्मूलन  होता हैं !
 

साधना के नियम इस प्रकार हैं:-
 

१.लाल आसन पर लाल वस्त्र धारण कर के बैठे !
२. दिशा पूर्व या उत्तर कोई भी हो सकती हैं !
३. प्रात: काल का समय कही जयादा अच्छा होगा !
४. जप लाल मूंगा की माला से करे और सामने सदगुरुदेव और हनुमान जी का चित्र अवश्य हो !
५. सदगुरुदेव का पूजन कर उनसे मानसिक आज्ञा प्राप्त कर ले किसी भी मगलवार या शनिवार से यह प्रयोग प्रारंभ कर सकते हैं ! और आपको सवा लाख मंत्र जप करना हैं इसमे दिन  निर्धारित नहीं हैं फिर भी ११ या २१ दिनों में करे फिर जाप का दसवा हिस्सा  हवन करना हैं अगर यह नहीं हो पाए तो जितना मंत्र जप किया हैं उसका एक चौथाई मंत्र जप और कर सकते  हैं !
6.साधना काल में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करे !
 

मंत्र :-
 

ॐ ह्राँ सर्व दुष्ट ग्रह निवारणाय स्वाहा ||

इतरयोनी (अद्रश्य शक्ति) से सुरक्षा प्राप्ती हेतु रूद्र साधना !!


यह अनंत ब्रह्माण्ड में हम अकेले नहीं है इस तथ्य को अब विज्ञान भी स्वीकार करने लगा है ! आधुनिक विज्ञान में भी कई प्रकार के परीक्षण इससे सबंधित होने लगे है तथा एसी कई शक्तियां है जिनके बारे में विज्ञान आज भी मौन हो जाता है क्यों की विज्ञान की समज के सीमा के दायरे के बाहर वह कुछ है ! खेर, आधुनिक विज्ञान का विकास और परीक्षण अभी कुछ वर्षों की ही देन है लेकिन इस दिशा में हमारे ऋषि मुनियों ने सेंकडो वर्षों तक कई प्रकार के शोध और परिक्षण किये थे तथा सबने अपने अपने विचार प्रस्तुत किये थे, मुख्य रूप से सभी महर्षियों ने स्वीकार किया था की ब्रह्माण्ड में मात्र मनुष्य योनी नहीं है, मनुष्य के अलावा भी कई प्रकार के जिव इस ब्रहमाड में मौजूद है, निश्चय ही मनुष्य से तात्विक द्रष्टि में अर्थात शरीर के तत्वों के बंधारण में ये भिन्न है लेकिन इनका अस्तित्व बराबर बना रहता है ! इसी क्रम में मनुष्य के अंदर के आत्म तत्व जब मृत्यु के समय स्थूल शरीर को छोड़ कर दूसरा शरीर धारण कर लेता है तो वह भी मनुष्य से अलग हो जाता है. वस्तुतः प्रेत, भूत, पिशाच, राक्षश, आदि मनुष्य के ही आत्म तत्व के साथ लेकिन वासना और दूसरे शरीरों से जीवित है ! इसके अलावा लोक लोकान्तरो में भी अनेक प्रकार के जिव का अस्तित्व हमारे आदि ग्रन्थ स्वीकार करते है जिनमे यक्ष, विद्याधर, गान्धर्व आदि मुख्य है ! अब यहाँ पर बात करते है मनुष्य के ही दूसरे स्वरुप की ! जब मनुष्य की मृत्यु अत्यधिक वासनाओ के साथ हुई है तब मृत्यु के बाद उसको सूक्ष्म की जगह वासना शरीर की प्राप्ति होती है क्यों की मृत्यु के समय जिव या आत्मा उसी शरीर में स्थित थी ! जितनी ही ज्यादा वासना प्रबल होगी मनुष्य की योनी इतनी ही ज्यादा हीन होती जायेगी ! जेसे की भुत योनी से ज्यादा प्रेत योनी हीन है ! यह विषय अत्यंत वृहद है लेकिन यहाँ पर विषय को इतना समजना अनिवार्य है ! अब इन्ही वासनाओ की पूर्ति के लिए या अपनी अधूरी इच्छाओ की पूर्ति के लिए ये ये जिव एक निश्चित समय तक एक निश्चित शरीर में घूमते रहते है, निश्चय ही इनकी प्रवृति और मूल स्वभाव हीनता से युक्त होता है और इसी लिए उनको यह योनी भी प्राप्त होती है ! कई बार यह अपने जीवन काल के दरमियाँ जो भी कार्यक्षेत्र या निवास स्थान रहा हो उसके आसपास भटकते रहते है, कई बार ये अपने पुराने शत्रु या विविध लोगो को किसी न किसी प्रकार से प्रताडित करने के लिए कार्य करते रहते है ! इनमे भूमि तथा जल तत्व अल्प होता है इस लिए मानवो से ज्यादा शक्ति इसमें होती है ! कई जीवो में यह सामर्थ्य भी होता है की वह दूसरों के शरीर में प्रवेश कर अपनी वासनाओ की पूर्ति करे ! इस प्रकार के कई कई किस्से आये दिन हमारे सामने आते ही रहते है !
इन इतरयोनी से सुरक्षा प्राप्ती हेतु तंत्र में भी कई प्रकार के विधान है लेकिन साधक को इस हेतु कई बात विविध प्रकार की क्रिया करनी पड़ती है जो की असहज होती है, साथ ही साथ ऐसे प्रयोग के लिए स्थान जेसे की स्मशान या अरण्य या फिर मध्य रात्री का समय आदि आज के युग में सहज संभव नहीं हो पता है !
प्रस्तुत विधान एक दक्षिणमार्गी लेकिन तीव्र विधान है जिसे व्यक्ति सहज ही संपन्न कर सकता है तथा अपने और अपने घर परिवार के सभी सदस्यों को इस प्रकार की समस्या से मुक्ति दिला सकता है तथा अगर समस्या न भी हो तो भी उससे सुरक्षा प्रदान कर सकता है ! यह पारदशिवलिंग से सबंधित भगवान रूद्र का साधना प्रयोग है ! मूलतः इसमें पारद शिवलिंग ही आधार है पुरे प्रयोग का, इस लिए पारद शिवलिंग विशुद्ध पारद से निर्मित हो तथा उस पर पूर्ण तंत्रोक्त प्रक्रिया से प्राणप्रतिष्ठा और चैतन्यकरण प्रक्रिया की गई हो यह नितांत आवश्यक है अशुद्ध और अचेतन पारद शिवलिंग पर किसी भी प्रकार की कोई भी साधना सफलता नहीं दे सकती है ! यह प्रयोग साधक किसी भी सोमवार को कर सकता है !
साधक रात्रीकाल में यह प्रयोग करे तो ज्यादा उत्तम है, वैसे अगर रात्री में करना संभव न हो तो इस प्रयोग को दिन में भी किया जा सकता है ! साधक स्नान आदि से निवृत हो कर लाल वस्त्रों को धारण करे तथा लाल आसान पर बैठ जाए, साधक का मुख उत्तर की तरफ हो, साधक अपने सामने पारदशिवलिंग को स्थापित करे, साधक गुरु तथा पारद शिवलिंग का पूजन करे तथा गुरुमंत्र का जाप करे और फिरं निम्न मंत्र की ११ माला मंत्र जाप पारदशिवलिंग के सामने करे, यह जाप रुद्राक्ष माला से करना चाहिए !!
मंत्र :=
ॐ नमो भगवते रुद्राय भूत वेताल त्रासनाय फट् !!

Thursday, 3 December 2015

क्या आप के अन्दर आत्मविश्वास कम है तो वृद्धि के लिए करे ये उपाय !!


कोई भी व्यक्ति के जीवन किस प्रकार से आगे बीतेगा उसका एक अति महत्वपूर्ण आधार उसका व्यक्तित्व है ! हमारे जन्म से ले कर हमारी मृत्यु तक हमारे सारे क्रिया कलापों का एक बड़ा आधार हमारा ही व्यक्तित्व होता है, वस्तुतः व्यक्तित्व शब्द भले ही छोटा हो लेकिन इसका वृहद वृत्तांत हो सकता है जो की हर एक व्यक्ति के जीवन में ब्रहद रूप से सभी कार्यमें असर करता है ! हमारे अंदर की भावनात्मक एवं व्यवहारात्मक प्रक्रिया को ही हमारा व्यक्तित्व कहते है ! निःसंदेह एक उच्चतम व्यक्तित्व का व्यक्ति जीवन में ज्यादा से ज्यादा सफलता की प्राप्ति कर सकता है, वहीँ दूसरी तरफ नकारात्मक व्यक्तित्व अर्थात अपने मानस में हिन् भावनाओं को ले कर चलने वाले व्यक्तित्व पूर्ण व्यक्ति अपने जीवन में सफलता का उतना स्वाद नहीं ले पाते है ! देखा जाए तो हमारे मानस के विचार एवं विचार पर होने वाली प्रतिक्रिया ही हमारे सारे कार्यों की सफलता या असफलता का निर्धारण करती है क्यों की कहीं न कहीं सकारात्मक एवं नकारात्मक विचारों का असर हमारे मस्तिस्क से हमारे शरीर एवं शरीर से हमारे कार्यों के ऊपर एक निश्चित ऊर्जा का आघात तो करता ही है ! हमारे अंदर जितनी ही ज्यादा नकारात्मक उर्जा का संग्रह होगा उतना ही हमारे व्यक्तित्व के ऊपर उसका नकारात्मक प्रभाव होगा ! हम तनाव में रहें या अवसाद से घिरे रहें तो निश्चय ही हमारे कार्य योग्य रूप से नहीं होते, वहीँ कई बार आत्मविश्वास की कमी के कारण भी कई प्रकार के कार्य हम कर नहीं पाते है !

प्रस्तुत साधना प्रयोग से व्यक्तित्व के विकास के सन्दर्भ में है जहां पर साधना के माध्यम से नकारात्मक उर्जा को दूर कर हमारे अंदर स्पष्ट एवं पूर्ण उर्जा को भरा जा सकता हैं ! यह साधना यूँ तो सभी साधको के लिए उपयोगी ही है क्यों की इस साधना से कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते है जो की न सिर्फ भौतिक परन्तु अध्यात्मिक जीवन के लिए भी आवश्यक है ! साधक के अंदर ही हिन् भावना का शमन होता है फल स्वरुप उसे जीवन सबंधित नयी द्रष्टि की प्राप्ति होती है तथा जीवन को पूर्ण रूप से जीने की एक उमंग व्याप्त होती है ! साधक के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है फल स्वरुप उसे हमेशा प्रगतिमय रहने के लिए आतंरिक प्रेरणा मिलती रहती है ! कई साधक भाई बहेनो को संकोच की समस्या होती है, इसी कारण उनका व्यक्तित्व उभर कर सब के मध्य नहीं आ पता है इस साधना से साधक के अंदर के संकोच आदि से धीरे धीरे मुक्ति मिलती है ! इस प्रकार यह प्रयोग सभी के लिए एक पूर्ण लाभदायक प्रयोग है ! यूँ तो यह एक दिवसीय प्रयोग है लेकिन साधक इसको अपने सामर्थ्य अनुसार एवं अपनी स्थिति के अनुसार जितने दिन करना चाहे कर सकता है ! यह साधना साधक किसी भी शुभ दिन शुरू कर सकता है. साधक यह विधान दिन या रात्रि के किसी भी समय में कर सकता है !

साधना करने की विधि :-

साधक को स्नान कर सफ़ेद वस्त्र को धारण कर सफ़ेद आसन पर बैठना चाहिए ! साधक का मुख पूर्व दिशा की और हो ! सर्व प्रथम साधक गुरु पूजन सम्प्पन करे तथा सदगुरु से साधना में सफलता के लिए आशीर्वाद प्राप्त करे ! साधक सर्व प्रथम एक भोजपत्र पे या सफ़ेद कागज़ पे त्रिगंध से (केसर, कुमकुम, कपूर) उपरोक्त यंत्र का निर्माण करे ! साधक किसी भी कलम का प्रयोग कर सकता है. अनार की कलम श्रेष्ठ है ! इस यंत्र को साधक अपने सामने स्थापित करे तथा अक्षत, पुष्प आदि समर्पित करे ! पूजन में साधक को तेल का दीपक प्रज्वालित्त करना चाहिए ! इसके बाद साधक गणेश पूजन आदि सम्प्पन कर न्यास करे !

करन्यास

ऐं क्लीं श्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ऐं क्लीं श्रीं तर्जनीभ्यां नमः
ऐं क्लीं श्रीं मध्यमाभ्यां नमः
ऐं क्लीं श्रीं अनामिकाभ्यां नमः
ऐं क्लीं श्रीं कनिष्टकाभ्यां नमः
ऐं क्लीं श्रीं करतल करपृष्ठाभ्यां नमः

हृदयादिन्यास

ऐं क्लीं श्रीं हृदयाय नमः
ऐं क्लीं श्रीं शिरसे स्वाहा
ऐं क्लीं श्रीं शिखायै वषट्
ऐं क्लीं श्रीं कवचाय हूं
ऐं क्लीं श्रीं नेत्रत्रयाय वौषट्
ऐं क्लीं श्रीं अस्त्राय फट्

न्यास के बाद साधक निम्न मन्त्र का जाप करे ! साधक को २१ माला मन्त्र का जाप करना है !
मंत्र :-  ॐ ऐं ऐं क्लीं क्लीं श्रीं श्रीं नमः

विशेष :- साधक को यह जाप स्फटिक माला से करना चाहिए ! अगर साधक के पास स्फटिक माला उपलब्ध न हो तो साधक रुद्राक्ष माला से या कर माला से यह मन्त्र जाप करे ! इस प्रकार यह एक दिवसीय प्रयोग पूर्ण होता है ! साधक ने जिस यंत्र का निर्माण किया है उसे पूजा स्थान में स्थापित कर दे ! माला का विसर्जन नहीं करना है, यह माला आगे भी साधनाओ में मन्त्र जाप के लिए उपयोग की जा सकती है !

Wednesday, 2 December 2015

ग्रह बाधा और कस्ट निवारण का एक जड़ी बूटियों का घरेलू उपाय !!


आज के समय में आप और हम में से शायद कोई ही ऐसा व्यक्ति होगा जो किसी न किसी ग्रह बाधा या घर के क्लेश से पीड़ित नहीं होगा ! ग्रहों के खेल में ही इंसान की पूरी जिंदगी उलझी रह जाती है ! ग्रह बाधा दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय उपलब्ध हैं, कुछ तंत्र से , कुछ मंत्र से , और कुछ रत्नों से जुड़े हुए ! लेकिन इन सब से हटकर एक जड़ीबूटियाँ से ग्रह बाधा निवारण प्रयोग आज दिया जा रहा है जिसका आप सभी लाभ उठा सकते हैं ! ग्रह बाधा व घर से क्लेश को हटाने के लिए एक स्नान विधि बताई जा रही है, जिसके बहुत ही धनातम्क परिणाम और शान्ति प्राप्त हुई हैं ! इस स्नान के लिए निम्नांकित पदार्थों को एक मिटटी की नई हांडी में रखकर उस हांडी को जल से भर दिया जाता है ! जल भरकर हांडी के मुख को एक मिट्टी के ढक्कन से ढँक दिया जाता है. नियमित स्नान के समय इस हांडी में से एक कटोरी जल भर कर के आप अपने स्नान के जल में मिला लें ! हांडी में से जल निकालने के पश्चात उसमे उतना ही बाहरी शुद्ध जल डाल दें ! इस प्रकार ४१ दिन तक यह प्रयोग करें ! प्रयोग के दौरान ही अच्छे परिणाम दिखाई देने लगेंगे !

स्नान के लिए नीचे लिखे पदार्थ प्रयोग करे !!

१-      चावल         - एक मुट्ठी भर
२-      सरसों          - एक मुट्ठी भर
३-      नागर मोथा     - एक मुट्ठी भर
४-      सुखा आँवला    - एक मुट्ठी भर
५-      दूर्वा(दूब घाँस)   - २१ नग
६-      तुलसी पत्र      - २१ नग
७-      बेल पत्र        - २१ नग (३-३ पर्ण वाले)
८-      हल्दी          - २ गाँठ
९-      काले तिल      - एक मुट्ठी भर
१०-     जों            - एक मुट्ठी भर
११-    सुपारी          - ५ नग
 

नोट: इन पदार्थों के सड़ने से कभी कभी अत्यधिक दुर्गन्ध आती है. यदि वह असहनीय प्रतीत हो तो संपूर्ण पदार्थ किसी वृक्ष की जद में डालकर पुनः उक्त पदार्थों को उसी हांडी में नए सिरे से ले लें ! इस में किसी की आवश्कता न होते हुए यह एक सरल प्रयोग है !

Thursday, 26 November 2015

क्या आप को पता है मानव जीवन के लिए अवतारी देवो ने क्या संदेश दिए !!



सनातन धर्म में सर्वोच्च सत्ता 'ब्रह्म' को माना गया है। सभी देवी और देवता उस एक सर्वोच्च सत्ता के प्रतिनिधि मात्र हैं। 'भगवान' उसे कहते हैं जिसने मानव रूप में जन्म लेकर चेतना के सर्वोच्च शिखर को छू लिया है। हम आपको बताएंगे ऐसे ही 5 भगवानों के बारे में जिनका जीवन पंच तत्व (आकाश, अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी) से मेल रखता है और जिनका जीवन कुछ संदेश देता है। बताए जा रहे सभी 5 भगवानों के जीवन के छोटे से संदेश को अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है। उल्लेखनीय है कि हम उनके विचारों की या अनमोल वचन की बात नहीं कर रहे हैं।

भगवान शंकर : जीवन में जल, पानी या नीर जरूरी है। यह नहीं होगा तो जीवन नहीं चलेगा। जल की शुद्धता उतनी ही जरूरी है जितनी कि मन की। जल से मन शुद्ध होता है। जल हमारे शरीर और मन को शीतलता और शांति प्रदान करता है। जल का गुण है शांत रहना, लेकिन इसी जल में धरती को जलप्रलय से नष्ट करने की क्षमता भी है।
संदेश : अहिंसक और शांतिप्रिय बनो। प्रकृति में दखल मत दो। बदलाव के लिए जरूरी है ध्यान। ध्यान करो। ध्यान विचारों की मृत्यु है और मृत्यु ही जीवन है इसलिए मरना सीखो।
सर्वप्रथम जीवन की उत्पत्ति जल में ही हुई थी। जल को मन का कारक माना गया है। जल से मन शांत रहता है। मस्तिष्क में 80 प्रतिशत जल ही रहता है। शरीर में जल का संतुलन जरूरी है। भगवान शंकर को हिन्दू धर्म में सर्वोच्च और प्रथम माना गया है। पंच तत्वों में जल तत्व प्रधान देव को जलाभिषेक प्रिय है। इनका स्थान भी हिमालय में कैलाश पर्वत पर है, जहां शीतलता प्रधान है। वरुणदेव को जल तत्व का अधिपति माना गया है।
 

भगबान राम : राम एक आदर्श पुत्र हैं। पिता की आज्ञा उनके लिये सर्वोपरि है। पति के रूप में राम ने सदैव एकपत्नीव्रत का पालन किया। राजा के रूप में प्रजा के हित के लिये स्वयं के हित को हेय समझते हैं। विलक्षण व्यक्तित्व है उनका। वे अत्यन्त वीर्यवान, तेजस्वी, विद्वान, धैर्यशील, जितेन्द्रिय, बुद्धिमान, सुंदर, पराक्रमी, दुष्टों का दमन करने वाले, युद्ध एवं नीतिकुशल, धर्मात्मा, मर्यादापुरुषोत्तम, प्रजावत्सल, शरणागत को शरण देने वाले, सर्वशास्त्रों के ज्ञाता एवं प्रतिभा सम्पन्न हैं।
संदेश : भगबान राम ने मानव अवतार लेकर मृत्युलोक में मानवजाति को आदर्श जीवन का संदेश दिया ।

भगबान हनुमान : जगत में वायु नहीं होगी, तो प्राण चले जाएंगे। वायु का आधार है जल और जल का आधार है वायु। जल कुछ दिन नहीं मिलेगा तो चलेगा, लेकिन वायु तो पल-प्रतिपल चाहिए। वायु पर संयम से अपार शक्ति और सिद्धि मिलती है। अपार शक्ति और सिद्धि को संयमित रखने के लिए भक्ति जरूरी है।
संदेश : यदि शक्तिशाली हो तो भक्त बनो। खुद के भीतर की बुराइयों से लड़ो। कार्य शुरू करो तो खत्म करके ही उठो। सक्षम और योग्य व्यक्ति वह है, जो समझदार, सजग और सक्रिय है।
वायु का एक गुण यह भी है कि उससे शरीर और मन में शीतलता और बल का संचार होता है। वायु से ही बल मिलता है। वायु की शुद्धता से शरीर के सभी अंग पुष्ट और संतुष्ट रहते हैं। संपूर्ण शरीर में वायु से ही बल और शक्ति का संचार होता है। मस्तिष्क को जल से ज्यादा वायु की जरूरत होती है। पवनदेव को वायु का अधिपति माना गया है। हनुमानजी पवनपुत्र और राम के भ‍क्त हैं। उनकी बुद्धि वायु की गति से भी तेज है और उनका बल वायु के वेग से भी अधिक है। जब तूफान उठता है तो धरती के पहाड़ तक हिल जाते हैं, समुद्र उफनने लगता है, क्योंकि धरती पर जल से 10 गुना ज्यादा वायु तत्व ही मौजूद है।

भगवान श्रीकृष्ण : यह दिखाई देने वाला जगत जड़ तत्व है जिसे पृथ्वी तत्व भी कहते हैं। व्यावहारिक ज्ञान यही कहता है कि जीवन धरती के बिना अधूरा है। धरती नहीं होगी तो जीवन नहीं होगा। धरती पर जो भी व्यक्ति जीवित है, वह हर पल खुद को जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहा है या कर्म कर रहा है।
संदेश : जीवन एक संघर्ष है इसीलिए योग्य और कर्मवान बनो। कला, विद्या और शिक्षा से प्रेम करो। यही हर तरह के जीवन में काम आएगी।
जीवन में कर्म की प्रधानता को समझना जरूरी है। कर्म से ही भाग्य जाग्रत होता है। उन कर्महीन लोगों का भाग्य सोया रहता है, जो किसी चमत्कार की आशा करते हैं या जो अयोग्य हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार परिणाम की चिंता किए बगैर श्रेष्ठ और उत्तम कर्म करना चाहिए। कर्म से ही जीवन चलता है। कर्म एक जड़त्व प्रक्रिया है।

भगवान बुद्ध : पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि का आधार है आकाश। आकाश स्वरूप है आत्मा। शून्य, निराकार, निर्विकार और निर्मल। आकाश का आधार आत्मा है। कोई व्यक्ति कितना ही हासिल कर ले लेकिन उसने खुद को हासिल नहीं किया है तो सब कुछ व्यर्थ है।
संदेश : अपना दीया खुद बनो अर्थात आत्मवान बनो। अपना रास्ता खुद चुनो। निर्विचार हो जाना ही आत्मवान बनने की ओर उठाया गया पहला कदम है।
भगवान बुद्ध दर्शन और धर्म का अंतिम वक्तव्य हैं। भगवान बुद्ध कहते हैं कि विचार से कर्म की उत्पत्ति होती है, कर्म से आदत की उत्पत्ति होती है, आदत से चरित्र की उत्पत्ति होती है और चरित्र से आपके प्रारब्ध की उत्पत्ति होती है। अत: आप जैसा सोचते हैं, वैसा ही बनते जाते हैं। कोई कर्ता-धर्ता नहीं है। तुम ही हो तुम्हारे कर्म और भाग्य के निर्माता इसीलिए खुद को समझो और मुक्त हो जाओ। आकाश समान हो जाओ।

क्या आप को पता है देवी अपराजिता साधना की साधना कैसे करे !!


अपराजिता का अर्थ है जो कभी पराजित नहीं होता।देवी अपराजिता के सम्बन्ध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य भी जानने योग्य हैं जैसे कि उनकी मूल प्रकृति क्या है ?देवी अपराजिता के पूजनारम्भ तब से हुआ जब देवासुर संग्राम के दौरान नवदुर्गाओं ने जब दानवों के संपूर्ण वंश का नाश कर दिया तब माँ दुर्गा अपनी मूल पीठ शक्तियों में से अपनी आदि शक्ति अपराजिता को पूजने के लिए शमी की घास लेकर हिमालय में अन्तरध्यान हुईं। क्रमशः बाद में आर्यावर्त के राजाओं ने विजय पर्व के रूप में विजय दशमी की स्थापना की। जो कि नवरात्रों के बाद प्रचलन में आई। स्मरण रहे कि उस वक्त की विजय दशमी मूलतः देवताओं द्वारा दानवों पर विजय प्राप्त के उपलक्ष्य में थी। स्वभाविक रूप से नवरात्र के दशवें दिन ही विजय दशमी मनाने की परंपरा चली। इसके पश्चात पुनः जब त्रेता युग में रावण के अत्याचारों से पृथ्वी एवं देव-दानव सभी त्रस्त हुए तो पुनः पुरुषोत्तम राम द्वारा दशहरे के दिन रावण का अंत किया गया जो एक बार पुनः विजयादशमी के रूप सामने आया और इसके साथ ही एक सोपान और जुड़ गया दशमी के साथ।अगर यह कहा जाये कि विजय दशमी और देवी अपराजिता का सम्बन्ध बहुत हद तक क्षत्रिय राजाओं के साथ ज्यादा गहरा और अनुकूल है तो संभवतः कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी किन्तु इसे किसी पूर्वधारणा की तरह नहीं स्वीकार करना चाहिए कि अपराजिता क्षत्रियों की देवी हैं और अन्य वर्ण के लोग इनकी साधना-आराधना नहीं कर सकते ।बहुत से स्थलों में देवी अपराजिता के सम्बन्ध में विभिन्न कथाएं और विधियां मिल जाती हैं लेकिन उनमे मूल भेद बहुत परिलक्षित होते हैं अस्तु उनका साधन करने से पूर्व किसी जानकार व्यक्ति से सलाह अवश्य ही कर लेनी चाहिए जिससे अशुद्धिओं और गलतियों से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सके हालाँकि शत प्रतिशत शुद्धता ला पाना सर्वसाधारण के वश की बात नहीं हैं किन्तु अल्प अशुद्धियाँ सफलता के मापदंडों को बढ़ा ही देती हैं साथ ही भावयुक्त साधना भी अशुद्धिओं को तिरस्कृत कर देती है जिससे अधिक अच्छे परिणाम मिल ही जाते हैं -!देवी अपराजिता शक्ति की नौ पीठ शक्तियों में से एक हैं जिनका क्रम निम्न प्रकार है एवं जया और विजया से सम्बंधित बहुत सी कथाएं भी प्रचलित हैं जो देवी पार्वती की बहुत ही अभिन्न सखियों के रूप में जानी जाती हैं - शक्ति की बहुत ही संहारकारी शक्ति है अपराजिता जो कभी अपराजित नहीं हो सकती और ना ही अपने साधकों को कभी पराजय का मुख देखने देती है - विषम परिस्थिति में जब सभी रास्ते बंद हों उस स्थिति में भी हंसी-खेल में अपने साधक को बचा ले जाना बहुत मामूली बात है अपराजिता के लिए।

अपराजिता की साधना के सम्बन्ध में" धर्मसिन्धु "जो वर्णन है वह निम्न प्रकार है :-

धर्मसिंधु में अपराजिता की पूजन की विधि संक्षेप में इस प्रकार है‌ :-

"अपराह्न में गाँव के उत्तर पूर्व जाना चाहिए, एक स्वच्छ स्थल पर गोबर से लीप देना चाहिए, चंदन से आठ कोणों का एक चित्र खींच देना चाहिए उसके पश्चात संकल्प करना चहिए :

"मम सकुटुम्बस्य क्षेमसिद्ध्‌यर्थमपराजितापूजनं करिष्ये"

राजा के लिए विहित संकल्प अग्र प्रकार है :

" मम सकुटुम्बस्य यात्रायां विजयसिद्ध्‌यर्थमपराजितापूजनं करिष्ये"

इसके उपरांत उस चित्र (आकृति) के बीच में अपराजिता का आवाहन करना चाहिए और इसी प्रकार उसके दाहिने एवं बायें जया एवं विजया का आवाहन करना चहिए और 'साथ ही क्रियाशक्ति को नमस्कार' एवं 'उमा को नमस्कार' कहना चाहिए।
इसके उपरांत :
"अपराजितायै नम:,
जयायै नम:,
विजयायै नम:, मंत्रों के साथ अपराजिता, जया, विजया की पूजा 16 उपचारों के साथ करनी चाहिए और यह प्रार्थना करनी चाहिए, 'हे देवी, यथाशक्ति जो पूजा मैंने अपनी रक्षा के लिए की है, उसे स्वीकर कर आप अपने स्थान को गमन करें जिससे कि मैं अगली बार पुनः आपका आवाहन और पूजन वंदन कर सकूँ "।

राजा के लिए इसमें कुछ अंतर है।

राजा को विजय के लिए ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए :

"वह अपाराजिता जिसने कंठहार पहन रखा है, जिसने चमकदार सोने की मेखला (करधनी) पहन रखी है, जो अच्छा करने की इच्छा रखती है, मुझे विजय दे"

इसके उपरांत उसे उपर्युक्त प्रार्थना करके विसर्जन करना चाहिए। तब सबको गाँव के बाहर उत्तर पूर्व में उगे शमी वृक्ष की ओर जाना चाहिए और उसकी पूजा करनी चाहिए।

शमी की पूजा के पूर्व या या उपरांत लोगों को सीमोल्लंघन करना चाहिए। कुछ लोगों के मत से विजयादशमी के अवसर पर राम और सीता की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि उसी दिन राम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी। राजा के द्वारा की जाने वाली पूजा का विस्तार से वर्णन हेमाद्रि तिथितत्त्व में वर्णित है। निर्णय सिंधु एवं धर्मसिंधु में शमी पूजन के कुछ विस्तार मिलते हैं।

यदि शमी वृक्ष ना हो तो अश्मंतक वृक्ष की पूजा की जानी चाहिए।

अस्तु मेरे अपने हिसाब से देवी अपराजिता का पूजन शक्ति क्रम में ही किया जाना चाहिए ठीक जैसे अन्य शक्ति साधनाएं संपन्न की जाती हैं -!

    प्रथम गुरु पूजन ,द्वितीय गणपति पूजन ,भैरव पूजन , देवी पूजन

अपनी सुविधानुसार पंचोपचार,षोडशोपचार इत्यादि से पूजन संपन्न करें मन्त्र जप - स्तोत्र जप आदि संपन्न करें और अंत में होम विधि संपन्न करें।


मन्त्र जप : मंत्रों के सम्बन्ध में बहुधा भ्रम की स्थिति रहती है क्योंकि यदि आपने थोड़ा सा भी अध्ययन और खोज आदि पूर्व में की हैं तो उस स्थिति में बहुत से मंत्र ऐसे होते हैं जो आपकी जानकारी से बाहर के होते हैं अर्थात कई बार उनके बीज भिन्न हो सकते हैं और कई बार मंत्र विन्यास भिन्न हो सकता है तो इस दशा में सीमित ज्ञान आपको भ्रमित कर देता है - अस्तु सभी मित्रों को मेरी एक ही सलाह है कि शक्ति मंत्रों में यदि "ह्रीं,क्लीं,क्रीं, ऐं,श्रीँ आदि आते हैं तो उन मंत्रों को भेदात्मक दृष्टि से ना देखें क्योंकि एक परम आद्या शक्ति के तीन भेद भक्तों के हितार्थ बने जिन्हे त्रिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है ( महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती) अन्य शक्ति भेद अथवा क्रम इन्ही तीन मूलों से निःसृत हैं अस्तु समस्त मन्त्र आदि इन्ही कुछ मूल बीजों के आस-पास घूमते हैं इसके अतिरिक्त इस बात पर मंत्र विन्यास निर्भर करता है कि जिस भी मंत्र वेत्ता ने उस मंत्र का निर्माण किया होगा उस समय वास्तव में उनका दृष्टिकोण और आवश्यकता क्या रही होगी ?

हालंकि यह सब बातें तो बहुत दूर की और लम्बी सोच की हैं अस्तु ज्यादा ना भटकते हुए बस इतना ही कहूँगा कि यदि कभी भी मंत्रों का संसार समझ में ना आये तो सबसे आसान उपाय है कि उस देवता या देवी के गायत्री मंत्र का प्रयोग करें।

यथा :

"ॐ सर्वविजयेश्वरी विद्महे शक्तिः धीमहि अपराजितायै प्रचोदयात"

अपनी सामर्थ्यानुसार उपरोक्त गायत्री का जप करें और देवी अपराजिता का वरदहस्त प्राप्त करें - देवी आपको सदा अजेय और संपन्न रखें यही मेरी कामना है।

।।अथ श्री अपराजिता स्तोत्र ।।
 

ॐ नमोऽपराजितायै ।।
ॐ अस्या वैष्णव्याः पराया अजिताया महाविद्यायाः वामदेव-बृहस्पति-मार्केण्डेया ऋषयः ।
गायत्र्युष्णिगनुष्टुब्बृहती छन्दांसि ।
श्री लक्ष्मीनृसिंहो देवता ।
ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं बीजम् ।
हुं शक्तिः ।
सकलकामनासिद्ध्यर्थं अपराजितविद्यामन्त्रपाठे विनियोगः ।।
ध्यान:

ॐ निलोत्पलदलश्यामां भुजङ्गाभरणान्विताम् ।।
शुद्धस्फटिकसङ्काशां चन्द्रकोटिनिभाननाम् ।।१।।

शङ्खचक्रधरां देवी वैष्ण्वीमपराजिताम् ।।
बालेन्दुशेखरां देवीं वरदाभयदायिनीम् ।।२।।

नमस्कृत्य पपाठैनां मार्कण्डेयो महातपाः ।।३।।

मार्ककण्डेय उवाच :

शृणुष्वं मुनयः सर्वे सर्वकामार्थसिद्धिदाम् ।।
असिद्धसाधनीं देवीं वैष्णवीमपराजिताम् ।।४।।

ॐ नमो नारायणाय,
नमो भगवते वासुदेवाय,
नमोऽस्त्वनन्ताय सहस्रशीर्षायणे,
क्षीरोदार्णवशायिने,
शेषभोगपर्य्यङ्काय,
गरुडवाहनाय,
अमोघाय
अजाय
अजिताय
पीतवाससे ।।

ॐ वासुदेव सङ्कर्षण प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, हयग्रिव, मत्स्य कूर्म्म, वाराह नृसिंह, अच्युत, वामन, त्रिविक्रम, श्रीधर राम राम राम ।
वरद, वरद, वरदो भव, नमोऽस्तु ते, नमोऽस्तुते, स्वाहा ।।

ॐ असुर-दैत्य-यक्ष-राक्षस-भूत-प्रेत -पिशाच-कूष्माण्ड-सिद्ध-योगिनी-डाकिनी-शाकिनी-स्कन्दग्रहान् उपग्रहान्नक्षत्रग्रहांश्चान्या हन हन पच पच मथ मथ विध्वंसय विध्वंसय विद्रावय विद्रावय चूर्णय चूर्णय शङ्खेन चक्रेण वज्रेण शूलेन गदया मुसलेन हलेन भस्मीकुरु कुरु स्वाहा ।।

ॐ सहस्रबाहो सहस्रप्रहरणायुध, जय जय, विजय विजय, अजित, अमित, अपराजित, अप्रतिहत, सहस्रनेत्र, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, विश्वरूप बहुरूप, मधुसूदन, महावराह, महापुरुष, वैकुण्ठ, नारायण, पद्मनाभ, गोविन्द, दामोदर, हृषीकेश, केशव, सर्वासुरोत्सादन, सर्वभूतवशङ्कर, सर्वदुःस्वप्नप्रभेदन, सर्वयन्त्रप्रभञ्जन, सर्वनागविमर्दन, सर्वदेवमहेश्वर, सर्वबन्धविमोक्षण, सर्वाहितप्रमर्दन, सर्वज्वरप्रणाशन, सर्वग्रहनिवारण, सर्वपापप्रशमन, जनार्दन, नमोऽस्तुते स्वाहा ।।

विष्णोरियमनुप्रोक्ता सर्वकामफलप्रदा ।।
सर्वसौभाग्यजननी सर्वभीतिविनाशिनी ।।५।।

सर्वैंश्च पठितां सिद्धैर्विष्णोः परमवल्लभा ।।
नानया सदृशं किङ्चिद्दुष्टानां नाशनं परम् ।।६।।

विद्या रहस्या कथिता वैष्णव्येषापराजिता ।।
पठनीया प्रशस्ता वा साक्षात्सत्त्वगुणाश्रया ।।७।।

ॐ शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ।।८।।

अथातः सम्प्रवक्ष्यामि ह्यभयामपराजिताम् ।।
या शक्तिर्मामकी वत्स रजोगुणमयी मता ।।९।।

सर्वसत्त्वमयी साक्षात्सर्वमन्त्रमयी च या ।।
या स्मृता पूजिता जप्ता न्यस्ता कर्मणि योजिता ।।
सर्वकामदुधा वत्स शृणुष्वैतां ब्रवीमि ते ।।१०।।

य इमामपराजितां परमवैष्णवीमप्रतिहतां पठति सिद्धां स्मरति सिद्धां महाविद्यां जपति पठति शृणोति स्मरति धारयति कीर्तयति वा न तस्याग्निवायुवज्रोपलाशनिवर्षभयं, न समुद्रभयं, न ग्रहभयं, न चौरभयं, न शत्रुभयं, न शापभयं वा भवेत् ।।

क्वचिद्रात्र्यन्धकारस्त्रीराजकुलविद्वेषि-विषगरगरदवशीकरण-विद्वेष्णोच्चाटनवधबन्धनभयं वा न भवेत् ।।
एतैर्मन्त्रैरुदाहृतैः सिद्धैः संसिद्धपूजितैः ।।

।। ॐ नमोऽस्तुते ।।

अभये, अनघे, अजिते, अमिते, अमृते, अपरे, अपराजिते, पठति, सिद्धे जयति सिद्धे, स्मरति सिद्धे, एकोनाशीतितमे, एकाकिनि, निश्चेतसि, सुद्रुमे, सुगन्धे, एकान्नशे, उमे ध्रुवे, अरुन्धति, गायत्रि, सावित्रि, जातवेदसि, मानस्तोके, सरस्वति, धरणि, धारणि, सौदामनि, अदिति, दिति, विनते, गौरि, गान्धारि, मातङ्गी कृष्णे, यशोदे, सत्यवादिनि, ब्रह्मवादिनि, कालि, कपालिनि, करालनेत्रे, भद्रे, निद्रे, सत्योपयाचनकरि, स्थलगतं जलगतं अन्तरिक्षगतं वा मां रक्ष सर्वोपद्रवेभ्यः स्वाहा ।।

यस्याः प्रणश्यते पुष्पं गर्भो वा पतते यदि ।।
म्रियते बालको यस्याः काकवन्ध्या च या भवेत् ।।११।।

धारयेद्या इमां विद्यामेतैर्दोषैर्न लिप्यते ।।
गर्भिणी जीववत्सा स्यात्पुत्रिणी स्यान्न संशयः ।।१२।।

भूर्जपत्रे त्विमां विद्यां लिखित्वा गन्धचन्दनैः ।।
एतैर्दोषैर्न लिप्येत सुभगा पुत्रिणी भवेत् ।।१३।।

रणे राजकुले द्यूते नित्यं तस्य जयो भवेत् ।।
शस्त्रं वारयते ह्योषा समरे काण्डदारुणे ।।१४।।

गुल्मशूलाक्षिरोगाणां क्षिप्रं नाश्यति च व्यथाम् ।।
शिरोरोगज्वराणां न नाशिनी सर्वदेहिनाम् ।।१५।।

इत्येषा कथिता विध्या अभयाख्याऽपराजिता ।।
एतस्याः स्मृतिमात्रेण भयं क्वापि न जायते ।।१६।।

नोपसर्गा न रोगाश्च न योधा नापि तस्कराः ।।
न राजानो न सर्पाश्च न द्वेष्टारो न शत्रवः ।।१७।।

यक्षराक्षसवेताला न शाकिन्यो न च ग्रहाः ।।
अग्नेर्भयं न वाताच्व न स्मुद्रान्न वै विषात् ।।१८।।

कार्मणं वा शत्रुकृतं वशीकरणमेव च ।।
उच्चाटनं स्तम्भनं च विद्वेषणमथापि वा ।।१९।।

न किञ्चित्प्रभवेत्तत्र यत्रैषा वर्ततेऽभया ।।
पठेद् वा यदि वा चित्रे पुस्तके वा मुखेऽथवा ।।२०।।

हृदि वा द्वारदेशे वा वर्तते ह्यभयः पुमान् ।।
हृदये विन्यसेदेतां ध्यायेद्देवीं चतुर्भुजाम् ।।२१।।

रक्तमाल्याम्बरधरां पद्मरागसमप्रभाम् ।।
पाशाङ्कुशाभयवरैरलङ्कृतसुविग्रहाम् ।।२२।।

साधकेभ्यः प्रयच्छन्तीं मन्त्रवर्णामृतान्यपि ।।
नातः परतरं किञ्चिद्वशीकरणमनुत्तमम् ।।२३।।

रक्षणं पावनं चापि नात्र कार्या विचारणा ।
प्रातः कुमारिकाः पूज्याः खाद्यैराभरणैरपि ।।
तदिदं वाचनीयं स्यात्तत्प्रीत्या प्रीयते तु माम् ।।२४।।

ॐ अथातः सम्प्रवक्ष्यामि विद्यामपि महाबलाम् ।।
सर्वदुष्टप्रशमनीं सर्वशत्रुक्षयङ्करीम् ।।२५।।

दारिद्र्यदुःखशमनीं दौर्भाग्यव्याधिनाशिनीम् ।।
भूतप्रेतपिशाचानां यक्षगन्धर्वरक्षसाम् ।।२६।।

डाकिनी शाकिनी-स्कन्द-कूष्माण्डानां च नाशिनीम् ।।
महारौद्रिं महाशक्तिं सद्यः प्रत्ययकारिणीम् ।।२७।।

गोपनीयं प्रयत्नेन सर्वस्वं पार्वतीपतेः ।।
तामहं ते प्रवक्ष्यामि सावधानमनाः शृणु ।।२८।।

एकान्हिकं द्व्यन्हिकं च चातुर्थिकार्द्धमासिकम् ।।
द्वैमासिकं त्रैमासिकं तथा चातुर्मासिकम् ।।२९।।

पाञ्चमासिकं षाङ्मासिकं वातिक पैत्तिकज्वरम् ।।
श्लैष्पिकं सात्रिपातिकं तथैव सततज्वरम् ।।३०।।

मौहूर्तिकं पैत्तिकं शीतज्वरं विषमज्वरम् ।
द्व्यहिन्कं त्र्यह्निकं चैव ज्वरमेकाह्निकं तथा ।।
क्षिप्रं नाशयेते नित्यं स्मरणादपराजिता ।।३१।।

ॐ हॄं हन हन, कालि शर शर, गौरि धम्, धम्, विद्ये आले ताले माले गन्धे बन्धे पच पच विद्ये नाशय नाशय पापं हर हर संहारय वा दुःखस्वप्नविनाशिनि कमलस्तिथते विनायकमातः रजनि सन्ध्ये, दुन्दुभिनादे, मानसवेगे, शङ्खिनि, चाक्रिणि गदिनि वज्रिणि शूलिनि अपमृत्युविनाशिनि विश्वेश्वरि द्रविडि द्राविडि द्रविणि द्राविणि केशवदयिते पशुपतिसहिते दुन्दुभिदमनि दुर्म्मददमनि ।।

शबरि किराति मातङ्गि ॐ द्रं द्रं ज्रं ज्रं क्रं क्रं तुरु तुरु ॐ द्रं कुरु कुरु ।।

ये मां द्विषन्ति प्रत्यक्षं परोक्षं वा तान् सर्वान् दम दम मर्दय मर्दय तापय तापय गोपय गोपय पातय पातय शोषय शोषय उत्सादय उत्सादय ब्रह्माणि वैष्णवि माहेश्वरि कौमारि वाराहि नारसिंहि ऐन्द्रि चामुन्डे महालक्ष्मि वैनायिकि औपेन्द्रि आग्नेयि चण्डि नैरृति वायव्ये सौम्ये ऐशानि ऊर्ध्वमधोरक्ष प्रचण्डविद्ये इन्द्रोपेन्द्रभगिनि ।।

ॐ नमो देवि जये विजये शान्ति स्वस्ति-तुष्टि पुष्टि-विवर्द्धिनि ।
कामाङ्कुशे कामदुधे सर्वकामवरप्रदे ।।
सर्वभूतेषु मां प्रियं कुरु कुरु स्वाहा ।
आकर्षणि आवेशनि-, ज्वालामालिनि-, रमणि रामणि, धरणि धारिणि, तपनि तापिनि, मदनि मादिनि, शोषणि सम्मोहिनि ।।
नीलपताके महानीले महागौरि महाश्रिये ।।
महाचान्द्रि महासौरि महामायूरि आदित्यरश्मि जाह्नवि ।।
यमघण्टे किणि किणि चिन्तामणि ।।
सुगन्धे सुरभे सुरासुरोत्पन्ने सर्वकामदुघे ।।
यद्यथा मनीषितं कार्यं तन्मम सिद्ध्यतु स्वाहा ।।

ॐ स्वाहा ।।
ॐ भूः स्वाहा ।।
ॐ भुवः स्वाहा ।।
ॐ स्वः स्वहा ।।
ॐ महः स्वहा ।।
ॐ जनः स्वहा ।।
ॐ तपः स्वाहा ।।
ॐ सत्यं स्वाहा ।।
ॐ भूर्भुवः स्वः स्वाहा ।।

यत एवागतं पापं तत्रैव प्रतिगच्छतु स्वाहेत्योम् ।।
अमोघैषा महाविद्या वैष्णवी चापराजिता ।।३२।।

स्वयं विष्णुप्रणीता च सिद्धेयं पाठतः सदा ।।
एषा महाबला नाम कथिता तेऽपराजिता ।।३३।।

नानया सद्रशी रक्षा. त्रिषु लोकेषु विद्यते ।।
तमोगुणमयी साक्षद्रौद्री शक्तिरियं मता ।।३४।।

कृतान्तोऽपि यतो भीतः पादमूले व्यवस्थितः ।।
मूलधारे न्यसेदेतां रात्रावेनं च संस्मरेत् ।।३५।।

नीलजीमूतसङ्काशां तडित्कपिलकेशिकाम् ।।
उद्यदादित्यसङ्काशां नेत्रत्रयविराजिताम् ।।३६।।

शक्तिं त्रिशूलं शङ्खं च पानपात्रं च विभ्रतीम् ।।
व्याघ्रचर्मपरीधानां किङ्किणीजालमण्डिताम् ।।३७।।

धावन्तीं गगनस्यान्तः तादुकाहितपादकाम् ।।
दंष्ट्राकरालवदनां व्यालकुण्डलभूषिताम् ।।३८।।

व्यात्तवक्त्रां ललज्जिह्वां भृकुटीकुटिलालकाम् ।।
स्वभक्तद्वेषिणां रक्तं पिबन्तीं पानपात्रतः ।।३९।।

सप्तधातून् शोषयन्तीं क्रुरदृष्टया विलोकनात् ।।
त्रिशूलेन च तज्जिह्वां कीलयनतीं मुहुर्मुहः ।।४०।।

पाशेन बद्ध्वा तं साधमानवन्तीं तदन्तिके ।।
अर्द्धरात्रस्य समये देवीं धायेन्महाबलाम् ।।४१।।

यस्य यस्य वदेन्नाम जपेन्मन्त्रं निशान्तके ।।
तस्य तस्य तथावस्थां कुरुते सापि योगिनी ।।४२।।

ॐ बले महाबले असिद्धसाधनी स्वाहेति ।।
अमोघां पठति सिद्धां श्रीवैष्ण्वीम् ।।४३।।

श्रीमदपराजिताविद्यां ध्यायेत् ।।
दुःस्वप्ने दुरारिष्टे च दुर्निमित्ते तथैव च ।।
व्यवहारे भेवेत्सिद्धिः पठेद्विघ्नोपशान्तये ।।४४।।

यदत्र पाठे जगदम्बिके मया, विसर्गबिन्द्वऽक्षरहीनमीडितम् ।।
तदस्तु सम्पूर्णतमं प्रयान्तु मे, सङ्कल्पसिद्धिस्तु सदैव जायताम् ।।४५।।

तव तत्त्वं न जानामि कीदृशासि महेश्वरि ।।
यादृशासि महादेवी तादृशायै नमो नमः ।।४६।।

इस स्तोत्र का विधिवत पाठ करने से सब प्रकार के रोग तथा सब प्रकार के शत्रु और बन्ध्या दोष नष्ट हो जाते हैं ।
विशेष रूप से मुकदमादि में सफलता और राजकीय कार्यों में अपराजित रहने के लिये यह पाठ रामबाण है ।

Monday, 23 November 2015

क्या आप को पता है माता भद्रकाली षोडशोपचार पूजन विधि सम्पूर्ण मंत्रों सहित !!




माता भद्रकाली काली का पूजन किस विधि से करना चाहिए सम्पूर्ण विधि नीचे दी जा रही है 

ध्यान:======

महामेघ प्रभां देवी कृष्णवस्त्रोसिधारिणीम् ।
ललज्जिह्वां घोरदंष्ट्रां कोटराक्षीं हसन्मुखीम् ॥
नागहारलतोपेतां चन्द्रार्द्धकृत शेखराम् ।
द्यां लिखन्तीं जटामेकां लेलिहानासवं पिबम् ॥
नाग यज्ञोपवीताङ्गी नागशय्या निषेदुषीम् ।
पञ्चाशन्मुण्डसंयुक्तं वनमाला महोदरीम् ॥
सहस्त्रफण संयुक्तमनन्तं शिरसोपरि ।
चतुर्दिक्षु नागफणा वेष्टितां भद्रकालिकाम् ॥
तक्षक सर्पराजेन वामकङ्कण भूषिताम् ।
अनन्त नागराजेन कृतदक्षिण कङ्कणम् ॥
नागेन रसनाहार कक्पितां रत्न नूपुराम् ।
वामे शिव स्वरूपं तत्कल्पितं वत्स्‌रूपकम् ॥
द्विभुजां चिन्तयेद्देत्नीं नागयज्ञोपवीतिनीम् ।
नरदेह समाबद्ध कुण्डल श्रुति मण्डिताम् ॥
प्रसन्नवदनां सौम्यां शिवमोहिनीम् ॥
अट्टहासां महाभीमां साधकाभीष्टदायिनीम् ॥

=========
पुष्प समर्पण :-
=========

ॐ देवेशि भक्ति सुलभे परिवार समन्विते
यावत्तवां पूजयिष्यामि तावद्देवी स्थिरा भव

========
नमस्कार
========
शत्रुनाशकरे देवि ! सर्व सम्पत्करे शुभे
सर्व देवस्तुते ! भद्रकालिके ! त्वां नमाम्यहम

१. आसन :- प्रथम दिन कि पूजा में माँ को काले रंग के कपडे का / आम कि लकड़ी का सिंहासन जो काले रंग से रंगा गया हो समर्पित करें एवं माँ को उस पर विराजित करने इसके बाद फिर प्रत्येक दिन माँ के चरणों में निम्न मंत्र को बोलते हुए पुष्प / अक्षत समर्पित करें

ॐ आसनं भास्वरं तुङ्गं मांगल्यं सर्वमंगले
भजस्व जगतां मातः प्रसीद जगदीश्वरी

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा आसनं समर्पयामि )

२. पाद्य :- इस क्रिया में शीतल एवं सुवासित जल से चरण धोएं और ऐसा सोचें कि आपके आवाहन पर माँ दूर से आयी हैं और पाद्य समर्पण से माँ को रास्ते में जो श्रम हुआ लगा है उसे आप दूर कर रहे हैं

ॐ गंगादि सलिलाधारं तीर्थं मंत्राभिमंत्रिम
दूर यात्रा भ्रम हरं पाद्यं तत्प्रति गृह्यतां

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा पाद्यं समर्पयामि )

३. उद्वर्तन :- इस क्रिया में माँ के चरणों में सुगन्धित / तिल के तेल को समर्पित करते हैं

ॐ तिल तण्डुल संयुक्तं कुश पुष्प समन्वितं
सुगंधम फल संयुक्तंमर्ध्य देवी गृहाण में

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा उद्वर्तन तैलं समर्पयामि )

४. आचमन :- इस क्रिया में माँ को आचमनी से या लोटे से आचमन जल प्रदान करते हैं ( याद रहे कि जल समर्पित करने का क्रम आप मूर्ति और यदि जल कि निकासी कि सुगम व्यवस्था है तो कर सकते हैं किन्तु यदि आपने कागज के चित्र को स्थापित किया हुआ है तो चित्र के सम्मुख एक पात्र रख लें और जल से सम्बंधित सारी क्रियाएँ करके जल उसी पात्र में डालते जाएँ )

ॐ स्नानादिक विधायापि यतः शुद्धिख़ाप्यते
इदं आचमनीयं हि कालिके देवी प्रगृह्यताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा आचमनीयम् समर्पयामि )

५. स्नान :- इस क्रिया में सुगन्धित पदार्थों से निर्मित जल से स्नान करवाएं ( जल में इत्र , कर्पूर , तिल , कुश एवं अन्य वस्तुएं अपनी सामर्थ्य या सुविधानुसार मिश्रित कर लें यदि सामर्थ्य नहीं है तो सदा जल भी पर्याप्त है जो पूर्ण श्रद्धा से समर्पित किया गया हो )

ॐ खमापः पृथिवी चैव ज्योतिषं वायुरेव च
लोक संस्मृति मात्रेण वारिणा स्नापयाम्यहम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा स्नानं निवेदयामि )

६. मधुपर्क :- इस क्रिया में ( पंचगव्य मिश्रित करें प्रथम दिन ( गाय का शुद्ध दूध , दही , घी , चीनी , शहद ) अन्य दिनों में यदि व्यवस्था कर सकें तो बेहतर है अन्यथा सिर्फ शहद से काम लिया जा सकता है

ॐ मधुपर्क महादेवि ब्रह्मध्धे कल्पितं तव
मया निवेदितम् भक्तया गृहाण गिरिपुत्रिके

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा मधुपर्कं समर्पयामि )

विशेष :- ध्यान रखें चन्दन या सिन्दूर में से कोई भी चीज मस्तक पर समर्पित न करें बल्कि माँ के चरणों में समर्पित करें

७. चन्दन :- इस क्रिया में सफ़ेद चन्दन समर्पित करें

ॐ मळयांचल सम्भूतं नाना गंध समन्वितं
शीतलं बहुलामोदम चन्दम गृह्यतामिदं

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा चन्दनं समर्पयामि )

८. रक्त चन्दन :- इस क्रिया में माँ को रक्त / लाल चन्दन समर्पित करें

ॐ रुक्तानुलेपनम् देवि स्वयं देव्या प्रकाशितं
तद गृहाण महाभागे शुभं देहि नमोस्तुते

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा रक्त चन्दनं समर्पयामि )

९. सिन्दूर :- इस क्रिया में माँ को सिन्दूर समर्पित करें

ॐ सिन्दूरं सर्वसाध्वीनाम भूषणाय विनिर्मितम्
गृहाण वर दे देवि भूषणानि प्रयच्छ में

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा सिन्दूरं समर्पयामि )


१०. कुंकुम :- इस क्रिया में माँ को कुंकुम समर्पित करें

ॐ जपापुष्प प्रभम रम्यं नारी भाल विभूषणम्
भाष्वरम कुंकुमं रक्तं देवि दत्तं प्रगृह्य में

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा कुंकुमं समर्पयामि )

११. अक्षत :- अक्षत में चावल प्रयोग करने होते हैं जो काले रंग में रंगे हुए हों

ॐ अक्षतं धान्यजम देवि ब्रह्मणा निर्मितं पुरा
प्राणंद सर्वभूतानां गृहाण वर दे शुभे

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा अक्षतं समर्पयामि )

१२. पुष्प :- माता के चरणो में पुष्प समर्पित करें ( फूलों एवं फूलमालाओं का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि यदि आपको काला गुलाब मिल जाये तो बहुत बढ़िया यदि नहीं मिलता तो लाल गुलाब उपयुक्त होगा किन्तु यदि स्थानीय या बाजारीय उपलब्धता के हिसाब से जो उपलब्ध हो वही प्रयोग करें )

ॐ चलतपरिमलामोदमत्ताली गण संकुलम्
आनंदनंदनोद्भूतम् कालिकायै कुसुमं नमः

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा पुष्पं समर्पयामि )

१३. विल्वपत्र :- माता के चरणों में बिल्वपत्र समर्पित करें ( कहीं कहीं पर उल्लेख मिलता कि देवी पूजा में बिल्वपत्र का प्रयोग नहीं किया जाता है तो इस स्थिति में आप अपने लोक/ स्थानीय प्रचलन का प्रयोग करें )

ॐ अमृतोद्भवम् श्रीवृक्षं शंकरस्व सदाप्रियम
पवित्रं ते प्रयच्छामि सर्व कार्यार्थ सिद्धये

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा बिल्वपत्रं समर्पयामि )

१४. माला :- इस क्रिया में माँ को फूलों कि माला समर्पित करें

ॐ नाना पुष्प विचित्राढ़यां पुष्प मालां सुशोभताम्
प्रयच्छामि सदा भद्रे गृहाण परमेश्वरि

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा पुष्पमालां समर्पयामि )

१५. वस्त्र :- इस क्रिया में माता को वस्त्र समर्पित किये जाते हैं ( एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि वस्त्रों कि लम्बाई १२ अंगुल से कम न हो - प्रथम दिन कि पूजा में काले वस्त्र समर्पित किये जाने चाहिए तत्पश्चात [ मौली धागा जिसे प्रायः पुरोहित रक्षा सूत्र के रूप में यजमान के हाथ में बांधते हैं वह चढ़ाया जा सकता है लेकिन लम्बाई १२ अंगुल ही होगी )

अ. ॐ तंतु संतान संयुक्तं कला कौशल कल्पितं
सर्वांगाभरण श्रेष्ठं वसनं परिधीयताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा प्रथम वस्त्रं समर्पयामि )

ब. ॐ यामाश्रित्य महादेवि जगत्संहारकः सदा
तस्यै ते परमेशान्यै कल्पयाम्युत्रीयकम

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा द्वितीय वस्त्रं समर्पयामि )

१५. धूप :- इस क्रिया में सुगन्धित धुप समर्पित करनी है

ॐ गुग्गुलम घृत संयुक्तं नाना भक्ष्यैश्च संयुतम
दशांग ग्रसताम धूपम् कालिके देवि नमोस्तुते

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा धूपं समर्पयामि )

१६. दीप :- इस क्रिया में शुद्ध घी से निर्मित दीपक समर्पित करना है जो कपास कि रुई से बनी बत्तियों से निर्मित हो

ॐ मार्तण्ड मंडळांतस्थ चन्द्र बिंबाग्नि तेजसाम्
निधानं देवि कालिके दीपोअयं निर्मितस्तव भक्तितः

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा दीपं दर्शयामि )

१७. इत्र :- इस क्रिया में माता को इत्र / सुगन्धित सेंट समर्पित करना है

ॐ परमानन्द सौरभ्यम् परिपूर्णं दिगम्बरम्
गृहाण सौरभम् दिव्यं कृपया जगदम्बिके

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा सुगन्धित द्रव्यं समर्पयामि )

१८. कर्पूर दीप :- इस क्रिया में माँ को कर्पूर का दीपक जलाकर समर्पित करना है

ॐ त्वम् चन्द्र सूर्य ज्योतिषं विद्युद्गन्योस्तथैव च
त्वमेव जगतां ज्योतिदीपोअयं प्रतिगृह्यताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा कर्पूर दीपम दर्शयामि )

१९. नैवेद्य :- इस क्रिया में माता को फल - फूल या भोजन समर्पित करते हैं भोजन कम से कम इतनी मात्रा में हो जो एक आदमी के खाने के लिए पर्याप्त हो बाकि सारा कुछ सामर्थ्यानुसार )

ॐ दिव्यांन्नरस संयुक्तं नानाभक्षैश्च संयुतम
चौष्यपेय समायुक्तमन्नं देवि गृहाण में

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा नैवेद्यं समर्पयामि )

२०. खीर :- इस क्रिया में ढूध से निर्मित खीर चढ़ाएं

ॐ गव्यसर्पि पयोयुक्तम नाना मधुर मिश्रितम्
निवेदितम् मया भक्त्या परमान्नं प्रगृह्यताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा दुग्ध खीरम समर्पयामि )

२१. मोदक :- इस क्रिया में माँ को लड्डू समर्पित करने हैं

ॐ मोदकं स्वादु रुचिरं करपुरादिभिरणवितं
मिश्र नानाविधैर्द्रुव्यै प्रति ग्रह्यशु भुज्यतां

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा मोदकं समर्पयामि )

२२. फल :- इस क्रिया में माता को ऋतु फल समर्पित करने होते हैं

ॐ फल मूलानि सर्वाणि ग्राम्यांअरण्यानि यानि च
नानाविधि सुंगंधीनि गृहाण देवि ममाचिरम

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा ऋतुफलं समर्पयामि )

२३. जल :- इस क्रिया में खान - पान के पश्चात् अब माता को जल समर्पित करें

ॐ पानीयं शीतलं स्वच्छं कर्पूरादि सुवासितम्
भोजने तृप्ति कृद्य् स्मात कृपया प्रतिगृह्यतां

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा जलम समर्पयामि )

२४. करोद्वर्तन जल :- इस क्रिया में माता को हाथ धोने के लिए जल प्रदान करें

ॐ कर्पूरादीनिद्रव्याणि सुगन्धीनि महेश्वरि
गृहाण जगतां नाथे करोद्वर्तन हेतवे

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा करोद्वर्तन जलम समर्पयामि )

२५. आचमन :- इस क्रिया में माता को पुनः आचमन करवाएं

ॐ अमोदवस्तु सुरभिकृतमेत्तदनुत्तमम्
गृह्णाचमनीयम तवं माया भक्त्या निवेदितम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा पुनराचमनीयम् समर्पयामि )

२६. ताम्बूल :- इस क्रिया में माता को सुगन्धित पान समर्पित करें

ॐ पुन्गीफलम महादिव्यम नागवल्ली दलैर्युतम्
कर्पूरैल्लास समायुक्तं ताम्बूल प्रतिगृह्यताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा ताम्बूलं समर्पयामि )

२७. काजल :- माता को काजल समर्पित करें

ॐ स्निग्धमुष्णम हृद्यतमं दृशां शोभाकरम तव
गृहीत्वा कज्जलं सद्यो नेत्रान्यांजय कालिके

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा कज्जलं समर्पयामि )

२८. महावर :- इस क्रिया में माँ को लाला रंग का महावर समर्पित करते हैं ( लाल रंग एवं पानी का मिश्रण जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पैरों में लगाती हैं )

ॐ चलतपदाम्भोजनस्वर द्युतिकारि मनोहरम
अलकत्कमिदं देवि मया दत्तं प्रगृह्यताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा महावरम समर्पयामि )

२९. चामर :- इस क्रिया में माँ को चामर / पंखा ढलना होता है

ॐ चामरं चमरी पुच्छं हेमदण्ड समन्वितम्
मायार्पितं राजचिन्ह चामरं प्रतिगृह्यताम्

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा चामरं समर्पयामि )

३० . घंटा वाद्यम् :- इस क्रिया में माँ के सामने घंटा / घंटी बजानी होती है ( यह ध्वनि आपके घर और आपसे सभी नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है एवं आपके मन में प्रसन्नता और हर्ष को जन्म देती है )

ॐ यथा भीषयसे दैत्यान् यथा पूरयसेअसुरम
तां घंटा सम्प्रयच्छामि महिषधिनी प्रसीद में

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा घंटा वाद्यं समर्पयामि )

३१. दक्षिणा :- इस क्रिया में माँ को दक्षिणा धन समर्पित किया जाता है - ( जो कि सामर्थ्यानुसार है )

ॐ काञ्चनं रजतोपेतं नानारत्न समन्वितं
दक्षिणार्थम् च देवेशि गृहाण त्वं नमोस्तुते

( क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरी स्वाहा आसनं समर्पयामि )

३३. पुष्पांजलि :-

ॐ काली काली भद्रकाली कालिके पाप नाशिनी
काली कराली निष्क्रान्ते भद्रकाल्यै तवननमोस्तुते
ॐ उत्तिष्ठ देवी चामुण्डे शुभां पूजा प्रगृह्य में
कुरुष्व मम कल्याणमस्टाभि शक्तिभिः सह
भुत प्रेत पिशाचेभ्यो रक्षोभ्यश्च महेश्वरि
देवेभ्यो मानुषोभ्योश्च भयेभ्यो रक्ष मा सदा
सर्वदेवमयीं देवीं सर्व रोगभयापहाम
ब्रह्मेश विष्णु नमिताम् प्रणमामि सदा उमां
आय़ुर्ददातु में भद्रकाल्यै पुत्रानादि सदा शिवा
अर्थ कामो महामाया विभवं सर्व मङ्गला

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं परमेश्वरि पुष्पांजलिं समर्पयामि

३४. नीराजन :- इस क्रिया में पुनः माँ कि प्राथमिक आरती उतारते हैं जिसमे सिर्फ कर्पूर का प्रयोग होता है

ॐ कर्पूरवर्ति संयुक्तं वहयिना दीपितंचयत
नीराजनं च देवेशि गृह्यतां जगदम्बिके

३५. क्षमा प्रार्थना :-

ॐ प्रार्थयामि महामाये यत्किञ्चित स्खलितम् मम
क्षम्यतां तज्जगन्मातः कालिके देवी नमोस्तुते
ॐ विधिहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं यदरचितम्
पुर्णम्भवतु तत्सर्वं त्वप्रसादान्महेश्वरी
शक्नुवन्ति न ते पूजां कर्तुं ब्रह्मदयः सुराः
अहं किं वा करिष्यामि मृत्युर्धर्मा नरोअल्पधिः
न जाने अहं स्वरुप ते न शरीरं न वा गुणान्
एकामेव ही जानामि भक्तिं त्वचर्णाबजयोः

३६. आरती :- इस क्रिया में माता कि आरती उतारते हैं और यह चरण आपकी उस काल कि साधना के समापन का प्रतीक है -( इसके लिए अलग से कोई आरती जलने कि कोई जरुरत नहीं है आप उसी दीपक का उपयोग करेंगे जो आपने पूजा के प्रारम्भ में घी का दीपक जलाया था )