January 2015 ~ Balaji Kripa

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May Baba fullfill all the wishes of the Devotees.

जय श्रीराम

भगवान रामभक्त हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। जहां मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

ॐ हं हनुमंतये नम:

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान म‍ंदिर में जाकर रामभक्त हनुमान का गुणगान करें और उनसे अपने पापों के लिए क्षमायाचना करें।

Tuesday, 27 January 2015

शिव दारिद्रयदहन स्तोत्र से धन-संपन्नता और भौतिक सुखों को बटोरे !!

शास्त्रों के अनुसार शिव ही सांसारिक सुखों का आधार हैं। शिव उपासना तन, मन व धन से जुडी कामनाओं में आने वाली बाधाओं को भी दूर करती है। सांसारिक इच्छाओं का मूल है धन-धान्य और ऐश्वर्य भरा जीवन। हर व्यक्ति के मन में धन संपन्नता और भौतिक सुखों को बंटोरने का भाव आता है, जिसे पूरा करने के लिए वह धार्मिक उपाय चुनता है। ऐसे ही उपायों में फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि पर विशिष्ट शिव पूजा में शिव की विशेष मंत्र स्तुति दु:ख, दरिद्रता और धन के अभाव को दूर कर धन, संतान, निरोगी शरीर द्वारा वैभवशाली और संपन्न बना देती है। जानिए यह शिव मंत्र स्तुति, जो दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌ के नाम से प्रसिद्ध है।द्रारिदय दहन स्त्रोत का अर्थ है-द्रारिद्रता का दहन करने वाला स्त्रोत। द्ररिद्रता अर्थात् गरीबी। जिस स्तुति को सुनकर शिव आनंदित हो उठंते है । ऐसे प्रभाव वाला द्रारिद्रय दहन शिव स्त्रोत है। शिव पूजन के बाद इस स्त्रोत का पाठ किया जाना शिव को प्रसन्न करता है। इस स्त्रोत के पाठ से द्ररिद्रता से छुटकारा मिलने लगता है। जैसे कि अग्नि में जलकर कोई चीज जलकर राख हो जाती है। शिव की प्रसन्नता जीवन में सौभाग्य लाती है।
कैसे करें महाशिवरात्रि पर दारिद्रयदहन शिव पूजन: -
सर्वप्रथम शिवरात्रि को प्रदोष काल में शिवलिंग को जल, दूध, बिल्वपत्र और सफेद आंकड़ा समर्पित कर इस मंत्र का 16 बार उच्चारण करते हुए जलाभिषेक करेंl

मंत्र: ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं॥ 
तत्पश्चात शिवलिंग पर धूप, दीप गंध, पुष्प  दूध, अक्षत, धतूरा, बिल्वपत्र व नैवेद्य अर्पित कर पंचोउपचार पूजन करें। पुष्प और अक्षत हाथ में लेकर दारिद्रयदहन शिव स्तोत्र का पाठ कर कर्पूर चंदन जलाकर शिवलिंग की आरती करेंl तत्पश्चात हाथ में लिए हुए फूल और पुष्प शिवलिंग पर अर्पित कर दें।
 स्त्रोत :=
विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय।
कर्पूरकांतिधवलाय जटाधराय
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय।।1।।

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय
कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय।
गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय ।।2।।

भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय
उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय ।।3।।
चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।
मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय ।।4।।

फणिराजविभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।
आनंतभूमिवरदाय तमोमयाय ।।5।।

भानुप्रियाय भवसागरतारणाय
कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय ।।6।।

रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय ।।7।।

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।
मातङग्चर्मवसनाय महेश्वराय ।।8।।

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्।
सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्।
त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात् ।।9।।

एक मंत्र से करे नवग्रह शांति की शान्ति !!

शास्त्रों में नवग्रह शांति के कई मंत्र दिए हैं। जिनका जप ग्रहों की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। ये मंत्र उच्चारण में कठिन होते हैं जिसके कारण ही हर किसी के लिए इनका जप आसान नहीं होता है। गलत उच्चारण का परिणाम भी सही नहीं मिलता है। इसलिए यहां नवग्रह का सरल मंत्र दिया जा रहा है। जिसका जप करने से ग्रहों को अपने अनुकूल करने में मदद मिल सकती है।

नवग्रह शांति मंत्र

ऊँ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शान्तिकरा भवन्तु ।।
मंत्र का अर्थ
अर्थात् हे ब्रह्मा, विष्णु और शिव, मैं आपको नमस्कार करता/करती हूं। हे त्रिदेव आप सूर्य, चंद्र, मंगल ,बुध गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु सभी ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत कर दो। ये ग्रह मेरे जीवन में शुभ प्रभाव दें।

Saturday, 24 January 2015

द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्र- हिन्दी अर्थ सहित !!

द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्र में शिवजी के 12 प्रमुख स्थान का वर्णन है। जहां पर  दिव्य ज्योतिर्लिंग रुप स्थित हैं। शिव का ज्योतिर्मय स्वरुप का दर्शन सभी पापों से मुक्ति दिलाने वाला व मन को निर्मल करने वाला कहा गया है। इस पावन स्त्रोत के जप से इन 12 प्रमुख तीर्थ स्थान के दर्शन का फल प्राप्त होता है।जिन लोगो को संस्कृत नहीं आती वो हिन्दी में भी कर सकते है !
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।1।।

जो भगवान् शंकर अपनी भक्ति प्रदान करने के लिए परम रमणीय व स्वच्छ सौराष्ट्र प्रदेश गुजरात में कृपा करके अवतीर्ण हुए हैं।  मैं उन्हीं ज्योतिर्मयलिंगस्वरूप, चन्द्रकला को आभूषण बनाए हुए भगवान् श्री सोमनाथ की शरण में जाता हूं।
श्रीशैलशृंगे विबुधातिसंगे तुलाद्रितुंगेऽपि मुदा वसन्तम्।
तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम्।। 2।।

ऊंचाई की तुलना में जो अन्य पर्वतों से ऊंचा है। जिसमें देवताओं का समागम होता रहता है। ऐसे श्री शैलश्रृंग में जो प्रसन्नतापूर्वक निवास करते हैं। जो संसार सागर को पार करने के लिए सेतु के समान हैं। उन्हीं एकमात्र श्री मल्लिकार्जुन भगवान् को मैं नमस्कार करता हूँ।
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।। 3।।

जो भगवान् शंकर संतजनों को मोक्ष प्रदान करने के लिए अवन्तिकापुरी उज्जैन में अवतार धारण किए हैं, अकाल मृत्यु से बचने के लिए उन देवों के भी देव महाकाल नाम से विख्यात महादेव जी को मैं नमस्कार करता हूं।
कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।। 4।।

जो भगवान् शंकर सज्जनों को इस संसार सागर से पार उतारने के लिए कावेरी और नर्मदा के पवित्र संगम में स्थित मान्धता नगरी में सदा निवास करते हैं, उन्हीं अद्वितीय ‘ओंकारेश्वर’ नाम से प्रसिद्ध श्री शिव की मैं स्तुति करता हूं।
पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्।
सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।। 5।।

जो भगवान् शंकर पूर्वोत्तर दिशा में चिताभूमि वैद्यनाथ धाम के अन्दर सदा ही पार्वती सहित विराजमान हैं। देवता व दानव जिनके चरणकमलों की आराधना करते हैं। उन्हीं ‘श्री वैद्यनाथ’ नाम से विख्यात शिव को मैं प्रणाम करता हूं।
याम्ये सदंगे नगरेतिऽरम्ये विभूषितांगम् विविधैश्च भोगैः।
सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये।। 6।।

जो भगवान् शंकर दक्षिण दिशा में स्थित अत्यन्त रमणीय सदंग नामक नगर में अनेक प्रकार के भोगों तथा नाना आभूषणों विभूषित हैं। जो एकमात्र सुन्दर पराभक्ति तथा मुक्ति को प्रदान करते है। उन्हीं अद्वितीय श्री नागनाथ नामक शिव की मैं शरण में जाता हूं।
महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यैरू केदारमीशं शिवमेकमीडे।। 7।।

जो भगवान् शंकर पर्वतराज हिमालय के समीप मन्दाकिनी के तट पर स्थित केदारखण्ड नामक श्रृंग में निवास करते हैं। मुनीश्वरों के द्वारा हमेशा पूजित हैं। देवता-असुर, यक्ष-किन्नर व नाग आदि भी जिनकी हमेशा पूजा किया करते हैं। उन्हीं अद्वितीय कल्याणकारी केदारनाथ नामक शिव की मैं स्तुति करता हूं।​
सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे।
यद्दर्शनात् पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्रयम्बकमीशमीडे।। 8।।

जो भगवान् शंकर गोदावरी नदी के पवित्र तट पर स्थित स्वच्छ सह्याद्रिपर्वत के शिखर पर निवास करते हैं। जिनके दर्शन से शीघ्र सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्हीं त्रयम्बकेश्वर भगवान् की मैं स्तुति करता हूं।
सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः।
श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि।।9।।

जो भगवान् शंकर सुन्दर ताम्रपर्णी नामक नदी व समुद्र के संगम में श्री रामचन्द्र जी के द्वारा अनेक बाणों से या वानरों द्वारा पुल बांधकर स्थापित किये गए हैं। उन्हीं श्रीरामेश्वर नामक शिव को मैं नियम से प्रणाम करता हूं।
यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च।
सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं तं शंकरं भक्तहितं नमामि।।10।।

जो भगवान् शंकर डाकिनी और शाकिनी समुदाय में प्रेतों के द्वारा सदैव सेवित होते हैं, अथवा डाकिनी नामक स्थान में प्रेतों द्वारा जो सेवित होते हैं, उन्हीं भक्तहितकारी भीमशंकर नाम से प्रसिद्ध शिव को मैं प्रणाम करता हूं।
सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये।। 11।।

जो भगवान् शंकर आनन्दवन काशी क्षेत्र में आनन्दपूर्वक निवास करते हैं। जो परमानन्द के निधान एवं आदिकारण हैं, और जो पाप समूह का नाश करने वाले हैं। ऐसे अनाथों के नाथ काशीपति श्री विश्वनाथ की मैं शरण में जाता हूं।
इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्।
वन्दे महोदारतरं स्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये।। 12।।

यदि मनुष्य क्रमपूर्वक कहे गये इन बारह ज्योतिर्लिंगों के स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करे तो इनके दर्शन से होने वाले फल को प्राप्त कर सकता है।
ज्योतिर्मयद्वादशलिंगकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण।
स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च।।13।।

जो इलापुर के सुरम्य मंदिर में विराजमान होकर समस्त जगत के आराधनीय हो रहे हैं। जिनका स्वभाव बड़ा ही उदार है। मैं उन घृष्णेश्वर नामक ज्योतिर्मय भगवान शिव की शरण में जाता हूं।

Friday, 23 January 2015

ज्योतिष के अनुसार आपका कैरक्टर बताए आपके नाम का पहला अक्षर !!!

A- अक्षर से नाम वाले लोग काफी मेहनती और धैर्य वाले होते हैं। इन्हें अट्रैक्टिव दिखना और अट्रैक्टिव दिखने वाले लोग ज्यादा पसंद होते हैं। ये खुद को किसी भी परिस्थिति में ढाल लेने की गजब की क्षमता रखते हैं। इन्हें वैसी चीज ही भाती है, जो भीड़ से अलग दिखता हो।अध्ययन या करियर की बात करें तो किसी भी काम को अंजाम देने के लिए चाहे जो करना पड़े ये करते हैं, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ये कभी हारकर बैठते नहीं।ए से नाम वाले लोग रोमांस के मामले में जरा पीछे रहना ही पसंद करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे प्यार और अपने करीबी रिश्तों को अहमियत नहीं देते। बस, इन्हें इन चीजों का इजहार करना अच्छा नहीं लगता।चाहे बात रिश्तों की हो या फिर काम की, इनका विचार बिल्कुल खुला होता है। सच और कड़वी बात भी इन्हें खुलकर कह दी जाए तो ये मान लेते हैं, लेकिन इशारों में या घुमाकर कुछ कहना-सुनना इन्हें पसंद नहीं।ए से नाम वाले लोग हिम्मती भी काफी होते हैं, लेकिन यदि इनमें मौजूद कमियों की बात करें तो इन्हें बात-बात पर गुस्सा भी आ जाता है।

B- जिनका नाम बी अक्षर से शुरू होता है वे अपनी जिंदगी में नए-नए रास्ते तलाशने में यकीन रखते हैं। अपने लिए कोई एक रास्ता चुनकर उसपर आगे बढ़ना इन्हें अच्छा नहीं लगता।बी अक्षर वाले लोग ज़रा संकोची स्वभाव के होते हैं। काफी सेंसिटिव नेचर के होते हैं ये। जल्दी अपने मित्रों से भी नहीं घुलते-मिलते। इनकी लाइफ में कई राज होते हैं, जो इनके करीबी को भी नहीं पता होता। ये ज्यादा दोस्त नहीं बनाते, लेकिन जिन्हें बनाते हैं उनके साथ सच्चे होते हैं।रोमांस के मामले में ये थोड़े खुले होते हैं। प्यार का इजहार ये कर लेते हैं। प्यार को लेकर ये धोखा भी खूब खाते हैं। इन्हें खुद पर कंट्रोल रखना आता है। खूबसूरत चीजों के ये दीवाने होते हैं।
 

C- सी नाम के लोगों को हर क्षेत्र में खूब सफलता मिलती है। एक तो इनका चेहरा-मोहरा भी काफी आकर्षक होता है और दूसरा कि काम के मामले में भी लक इनके साथ हमेशा रहता है। इन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है। अच्छी सूरत तो भगवान देते ही हैं इन्हें, अच्छे दिखने में ये खुद भी कभी कोई कसर नहीं छोड़ते।सी नाम वाले दूसरों के दुख-दर्द के साथ-साथ चलते हैं। खुशी में ये शरीक हों या न हों, लेकिन किसी के ग़म में आगे बढ़कर ये उनकी मदद करते हैं।सी नाम वालों के लिए प्यार के महत्व की बात करें तो ये जिन्हें पसंद करते हैं उनके बेहद करीब हो जाते हैं। यदि इन्हें अपने हिसाब के कोई न मिले तो मस्त होकर अकेले भी रह लेते हैं। वैसे स्वभाव से ये काफी इमोशनल होते हैं।

D- डी नाम वाले लोगों को हर मामले में अपार सफलता हाथ लगती है। कभी भाग्य साथ न भी दे तो उन्हें विचलित नहीं होना चाहिए, क्योंकि उनकी जिंदगी में आगे चलकर सारी खुशियां लिखी होती हैं। लोगों की बात पर ध्यान न देकर अपने मन की करना ही इन्हें भाता है। जो ठान लेते हैं ये, उसे कहके ही मानते हैं। इन्हें सुंदर या आकर्षक दिखने के लिए बनने-संवरने की जरूरत नहीं होती। ये लोग बॉर्न स्मार्ट होते हैं।किसी की मदद करने में ये कभी पीछे नहीं रहते। यहां तक ये भी नहीं देखते कि जिनकी मदद के लिए उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया है वह उनके दुश्मन की लिस्ट में हैं या दोस्त की लिस्ट में।डी नाम के लोग प्यार को लेकर काफी जिद्दी होते हैं। जो इन्हें पसंद हो, उन्हें पाने के लिए या फिर उनसे रिश्ता निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। रिश्तों के मामले में इनपर अविश्वास करना बेवकूफी होगी।

E- ई या इ से नाम वाले मुंहफट किस्म के होते हैं। हंसी-मजाक की जिंदगी जीना इन्हें पसंद है। इन्हें अपने इच्छा अनुरूप सारी चीजें मिल जाती हैं। जो इन्हें टोका टाकी करे, उनसे किनारा भी तुरंत हो लेते हैं।ई या इ नाम वाले लोग जिंदगी को बेतरतीव जीना पसंद नहीं करते। इन्हें सारी चीजें सलीके और सुव्यवस्थित रखना ही पसंद है।ई या इ से नाम वाले लोग प्यार को लेकर उतने संजीदा नहीं रहते, इसलिए इनसे रिश्ते पीछे छूटने का किस्सा लगा ही रहता है। शुरुआत में ये दिलफेंक आशिक की तरह व्यवहार करते हैं, क्योंकि इनका दिल कब किसपर आ जाए कह नहीं सकते। लेकिन एक सच यह भी है कि जिन्हें ये फाइनली दिल में बिठा लेते हैं उनके प्रति पूरी तरह से सच्चे हो जाते हैं।

F- नाम वाले लोग काफी जिम्मेदार किस्म के होते हैं। हां, इन्हें अकेले रहना काफी भाता है। ये स्वभाव से काफी भावुक होते हैं। हर चीज को लेकर ये बेहद कॉन्फिडेंट होते हैं। सोच-समझकर ही खर्च करना चाहते हैं ये। जीवन में हर चीज इनका काफी बैलेंस्ड होता है।Fसे शुरू होने वाले नाम के लोगों के लिए प्यार की काफी अहमियत होती है। ये खुद भी सेक्सी और आकर्षक होते हैं और ऐसे लोगों को पसंद भी करते हैं। रोमांस तो समझिए कूट-कूटकर इनमें भरा होता है।

G- से शुरू होनेवाले नाम वाले लोग दूसरों की मदद के लिए हमेशा ही खड़े होते हैं। ये खुद को हर परिस्थितियों में ढाल लेते हैं। ये चीजों को गोलमोल करके पेश करना पसंद नहीं करते, क्योंकि इनका दिल बिल्कुल साफ होता है। अपने किए से जल्द सबक लेते हैं और फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ाते हैं ये।G से नाम वाले प्यार को लेकर ईमानदार होते हैं। प्यार के मामले में ये समझदारी और धैर्य से काम लेते हैं। कमिटमेंट से पहले किसी पर बेवजह खर्च करना इनके लिए बेकार का काम है।

H- से नाम वाले लोगों के लिए पैसे काफी मायने रखते हैं। ये काफी हंसमुख स्वभाव के होते हैं और अपने आसपास का माहौल भी एकदम हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं। ये लोग दिल के सच्चे होते हैं। काफी रॉयल नेचर के होते हैं और मस्त मौला होकर जीवन गुजारना पसंद करते हैं। झटपट निर्णय लेना इनकी काबिलियत है और दूसरों की मदद के लिए आधी रात को भी ये तैयार होते हैं।प्यार का इजहार करना इन्हें नहीं आता, लेकिन जब ये प्यार में पड़ते हैं तो जी जीन से प्यार करते हैं। उनके लिए कुछ भी कर गुजरते हैं ये। इन्हें अपने मान-सम्मान की भी खबह चिंता होती है।

I- से शुरू होने वाले नाम के लोग कलाकार किस्म के होते हैं। न चाहते हुए भी ये लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने रहते हैं। हालांकि मौका पड़े तो इन्हें अपनी बात पलटने में पल भर भी नहीं लगता और इसके लिए वे यह नहीं देखते कि सही का साथ दे रहे हैं या फिर गलत का। इनके हाथ तो काफी कुछ लगता है, लेकिन उन चीजों के हाथ से फिसलने में भी देर नहीं लगती।I से नाम वाले लोग प्यार के भूखे होते हैं। आपको वैसे लोग अपनी ओर खींच पाते हैं जो हर काम को काफी सोच-विचार के बाद ही करते हैं। स्वभाव से संवेदनशील और दिखने में बेहद सेक्सी होते हैं।

J- से नाम वाले लोगों की बात करें तो ये स्वभाव से काफी चंचल होते हैं। लोग इनसे काफी चिढ़ते हैं, क्योंकि इनमें अच्छे गुणों के साथ-साथ खूबसूरती का भी सामंजस्य होता है। जो करने की ठान लेते हैं, उसे करके ही मानते हैं ये। पढ़ने-लिखने में थोड़ा पीछे ही रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी की बात करें तो सबसे आगे खड़े रहेंगे ये।
j से नाम वाले लोगों के चाहने वाले कई होते हैं। हमसफर के रूप में ये जिन्हें मिल जाएं समझिए खुशनसीब हैं वह। जीवन के हर मोड़ पर ये साथ निभानेवाले होते हैं।

K- से नाम वाले लोगों को हर चीज में परफेक्शन चाहिए। चाहे बेडशीट के बिछाने का तरीका हो या फिर ऑफिस की फाइलें, सारी चीजें इन्हें सेट चाहिए। दूसरों से हटकर चलना बेहद भाता है इन्हें। ये अपने बारे में पहले सोचते हैं। पैसे कमाने के मामले में भी ये काफी आगे चलते हैं।स्वभाव से ये रोमांटिक होते हैं। अपने प्यार का इजहार खुलकर करना इन्हें खूब आता है। इन्हें स्मार्ट और समझदार साथी चाहिए और जबतक ऐसा कोई न मिले तब तक किसी एक पर टिकते नहीं ये।

L- से शुरू होने वाले नाम के लोग काफी चार्मिंग होते हैं। इन्हें बहुत ज्य़ादा पाने की तमन्ना नहीं होती, बल्कि छोटी-मोटी खुशियों से ये खुश रहते हैं। पैसों को लेकर समस्या बनती है, लेकिन किसी न किसी रास्ते इन्हें हल भी मिल जाता है। लोगों के साथ प्यार से पेश आते हैं ये। कल्पनाओं में जीते हैं और फैमिली को अहम हिस्सा मानकर चलते हैं ये।प्यार की बात करें तो इनके लिए इस शब्द के मायने ही सबकुछ हैं। बेहद ही रोमांटिक होते हैं ये। वैसे सच तो यह है कि अपनी काल्पनिक दुनिया का जिक्र ये अपने हमसफर तक से करना नहीं चाहते। प्यार के मामले में भी ये आदर्शवादी किस्म के होते हैं।

M- नाम से शुरू होनेवाले लोग बातों को मन में दबाने वाली प्रवृत्ति के होते हैं। कहते हैं ऐसा नेचर कभी-कभी दूसरों के लिए खतरनाक भी साबित हो जाता है। चाहे बात कड़वी हो, यदि खुलकर कोई कह दे तो बात वहीं खत्म हो जाती है, लेकिन बातों को मन रखकर उस चलने से नतीजा अच्छा नहीं रहता। ऐसे लोगों से उचित दूरी बनाए रखना बेहतर है। इनका जिद्दी स्वभाव कभी-कभार इन्हें खुद परेशानी में डाल देता है। वैसे अपनी फैमिली को ये बेहद प्यार करते हैं। खर्च करने से पहले ज्यादा सोच-विचार नहीं करते। सबसे बेहतर की ओर ये ज्यादा आकर्षित होते हैं।प्यार की बात करें तो ये संवेदनशील होते हैं और जिस रिश्ते में पड़ते हैं उसमें डूबते चले जाते हैं और इन्हें ऐसा ही साथी भी चाहिए जो इनसे जी जीन से प्यार करे।

N- से शुरू होनेवाले नाम के लोग खुले विचारों के होते हैं। ये कब क्या करेंगे इसके बारे में ये खुद भी नहीं जानते। बेहद महत्वाकांक्षी होते हैं। काम के मामले में परफेक्शन की चाहत इनमें होती है। आपके व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण होता है, जो सामने वालों को खींच लाता है। ये दूसरों से पंगे लेने में ज्यादा देर नहीं लगाते। इन्हें आधारभूत चीजों की कभी कोई कमी नहीं रहती और आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होते हैं ये।कभी-कभार फ्लर्ट चलता है, लेकिन प्यार में वफादारी करना इन्हें आता है। स्वभाव से रोमांटिक और रिश्तों को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं ये।
 

O- अक्षर से नाम के लोगों के स्वभाव की बात करें तो बता दें कि इनका दिमाग काफी तेज दौड़ता है। ये बोलते कम हैं और करते ज्यादा हैं, शायद यही वजह है कि ये जल्दी ही उन हर ऊंचाइयों को छू लेते हैं जिनका ख्वाब ये देखा करते हैं। इन सबके बावजूद समाज के साथ चलना इन्हें पसंद है। जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं।प्यार की बात करें तो ये ईमानदार किस्म के होते हैं। साथी को धोखा देना इन्हें पसंद नहीं और ऐसा ही उनसे भी अपेक्षा रखते हैं। जिससे कमिटमेंट हो गया, बस पूरी जिंदगी उसपर न्योछावर करने को तैयार रहते हैं ये।

P- से शुरू होनेवाले नाम के लोग उलझनों में फंसे रहते हैं। वैसे, ये चाहते कुछ हैं और होता कुछ अलग ही है। काम को परफेक्शन के साथ करते हैं। इनके काम में सफाई और खरापन साफ झलकती है। खुले विचार के होते हैं ये। अपने आसपास के सभी लोगों का ख्याल रखते हैं और सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं। हां, कभी-कभार अपने विचारों के घोड़े सबपर दौड़ाने की इनकी कोशिश इन्हें नुकसान भी पहुंचाती है।प्यार की बात करें तो सबसे पहले ये अपनी छवि से प्यार करते हैं। इन्हें खूबसूरत साथी खूब भाता है। कभी-कभार अपने साथी से ही दुश्मनी भी पाल लेते हैं, लेकिन चाहे लड़ते-झगड़ते सही साथ उनका कभी नहीं छोड़ते।

Q- से नाम वाले लोगों को जीवन में ज्यादा कुछ पाने की इच्छा नहीं होती, लेकिन नसीब इन्हें देता सब है। ये स्वभाव से सच्चे और ईमानदार होते हैं। नेचर से काफी क्रिएटिव होते हैं। अपनी ही दुनिया में खोए रहना इन्हें अच्छा लगता है।प्यार की बात करें तो ये अपने साथी के साथ नहीं चल पाते। कभी विचारों में तो कभी काम में असमानता इन्हें झेलना ही पड़ता है। वैसे, आपके प्रति आकर्षण आसानी से हो जाता है।

R- से नाम वाले लोग ज्यादा सोशल लाइफ जीना पसंद नहीं करते। हालांकि, फैमिली इनके लिए मायने रखती है और पढ़ना-लिखना इन्हें नहीं भाता। जो भीड़ करे, उसे करने में इन्हें मजा नहीं आता। ये तो वह काम करना चाहते हैं, जिसे कोई नहीं कर सकता। R से नाम वाले लोग काफी तेजी से आगे बढ़ते हैं और धन-दौलत की कोई कमी नहीं रहती।अपने से ऊपर सोच-समझ और बुद्धि वाले लोग इन्हें आकर्षित करते हैं। दिखने में खूबसूरत और कोई ऐसा जिसपर आपको गर्व हो उनकी ओर आप खिंचे चले जाते हैं। वैसे वैवाहिक जीवन में उठा-पटक लगा ही रहता है।

S- से नाम वाले लोग काफी मेहनती होते हैं। ये बातों के इतने धनी होते हैं कि सामने वाला इनकी ओर आकर्षित हो ही जाता है। दिमाग से तेज और सोच-विचार कर काम करते हैं ये। इन्हें अपनी चीजें शेयर करना पसंद नहीं। ये दिल से बुरे नहीं होते, लेकिन उनके बातचीत का अंदाज़ इन्हें लोगों के सामने बुरा बना देती है।प्यार के मामले में ये शर्मीले होते हैं। आप सोचते बहुत हैं, लेकिन प्यार के लिए कोई पहल करना नहीं आता। प्यार के मामले में ये सबसे ज्यादा गंभीर होते हैं।

T- से शुरू होनेवाले नाम के लोग खर्च के मामले में एकदम खुले हाथ वाले होते हैं। चार्मिंग दिखने वाले ये लोग खुशमिजाज भी खूब रहते हैं। मेहनत करना इन्हें उतना अच्छा नहीं लगता, लेकिन पैसों की कभी कमी नहीं होती इन्हें। अपने दिल की बात किसी से जल्दी शेयर नहीं करते ये।प्यार की बात करें तो रिश्तों को लेकर काफी रोमांटिक होते हैं। लेकिन बातों को गुप्त रखने की आदत भी इनमें होती है।

U- से शुरू होनेवाले नाम के लोग कोशिश तो बहुत-कुछ करने की करते हैं, लेकिन इनका काम बिगड़ते भी देर नहीं लगती। किसी का दिल कैसे जीतना है, वह इनसे सीखना चाहिए। दूसरों के लिए किसी भी तरह ये वक्त निकाल ही लेते हैं। ये बेहद होशियार किस्म के होते हैं। तरक्की के मार्ग आगे बढ़ने पर ये पीछे मुड़कर नहीं देखते।
आप चाहते हैं कि आपका साथी हमेशी भीड़ में अलग नज़र आए। वह साथ न भी हो तो आप हर वक्त उन्ही के ख्यालों में डूबे रहना पसंद करते हैं। अपनी खुशी से पहले साथी की खुशियों का ध्यान रखते हैं ये।

V- से शुरू वाले नाम के व्यक्ति स्वभाव से थोड़े ढीले होते हैं। इन्हें जो मन को भाता है वही काम करते हैं। दिल के साफ होते हैं, लेकिन अपनी बातें किसी से शेयर करना इन्हें अच्छा भी नहीं लगता। बंदिशों में रखकर इनसे आप कुछ नहीं करा सकते।
बात प्यार की करें तो ये ये अपने प्यार का इजहार कभी नहीं करते। जिन बातों का कोई अर्थ नहीं या यूं कहिए कि हंसी-ठहाके में कही गई बातों से भी आप काफी गहरी बातें निकाल ही लेते हैं। कभी-कभीर ये बाते आपके लिए ही मुसीबत खड़ी कर देती हैं।

W- से शुरू होनेवाले नाम के लोग संकुचित दिल के होते हैं। एक ही ढर्रे पर चलते हुए ये बोर भी नहीं होते। ईगो वाली भावना तो इनमें कूट-कूटकर भरी होती है। ये जहां रहते हैं वहीं अपनी सुनाने लग जाते हैं, जिससे सामने वाला इंसान इनसे दूर भागने लगता है। हालांकि, हर मामले में सफलता इनकी मुट्ठी तक पहुंच ही जाती है।
प्यार की बात करें तो ये न न करते हुए ही आगे बढ़ते हैं। हालांकि, इन्हें ज्यादा दिखावा भी पसंद नहीं और अपने साथी को उसी रूप में स्वीकार करते हैं जैसा वह वास्तव में है।

X- से नाम वाले लोग जरा अलग स्वभाव के होते हैं। ये हर मामले में परफेक्ट होते हैं, लेकिन न चाहते हुए भी गुस्से के शिकार हो ही जाते हैं ये। इन्हें काम को स्लो करना पसंद नहीं, फटाफट निपटाने में ही यकीन रखते हैं ये। बहुत जल्दी चीजों से बोरियत हो जाती है इन्हें। ये क्या करने वाले हैं इस बात का पता इन्हें खुद भी नहीं होता।प्यार के मामले में फ्लर्ट करना इन्हें ज्यादा पसंद है। कई रिश्तों को एकसाथ लेकर आगे चलने की हिम्मत इनमें होती है।

Y- से शुरू होनेवाले नाम के लोगों से कभी भी सलाह लें, आपकी सही रास्ता दिखाएंगे वह। खर्च के लिए कभी सोचते नहीं, बस खाना अच्छा मिले तो हमेशा खुश रहेंगे। अच्छी पर्सनैलिटी के बादशाह होते हैं। लोगों को दूर से ही पढ़ लेते हैं ये। इन्हें ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं। धन-दौलत नसीब तो होती है, लेकिन इन्हें पाने में वक्त लग जाता है।
बात प्यार की करें तो इन्हें अपने साथी की कोई बात याद नहीं रहती। हालांकि सच्चे, खुले दिल और रोमांटिक नेचर के होने के कारण इनकी हर गलती माफ भी हो जाती है।

Z- से नाम वाले लोग दूसरों से काफी जल्दी घुल-मिल जाते हैं। गंभीरता इनके स्वभाव में है, लेकिन बड़े ही कूल अंदाज में ये सारे काम करते हैं। जो बोलते हैं साफ बोलते हैं और जिंदगी को इंजॉय करना इन्हें आता है। न मिलने वाली चीजों पर रोने की बजाय उसे छोड़कर आगे बढ़ना इन्हें पसंद है। इन्हें दिखावा नहीं पसंद। इनकी सादगी को देख इन्हें बेवकूफ समझना बहुत बड़ी बेवकूफी होगी।स्वभाव से ये रोमांटिक होते हैं। आपकी ओर कोई भी बड़ी आसानी से अट्रैक्ट हो जाता है। अपने प्यार के सामने आप किसी को अहमियत नहीं देते।

Thursday, 22 January 2015

वसंत पंचमी पर ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा, ये हैं शुभ मुहूर्त !!

(24 जनवरी, शनिवार) वसंत पंचमी का पर्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है। व्यावहारिक रूप से विद्या तथा बुद्धि व्यक्तित्व विकास के लिए जरुरी है।शास्त्रों के अनुसार विद्या से विनम्रता, विनम्रता से पात्रता, पात्रता से धन और धन से सुख मिलता है। वसंत पंचमी के दिन यदि विधि-विधान से देवी सरस्वती की पूजा की जाए तो विद्या व बुद्धि के साथ सफलता भी निश्चित मिलती है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा इस प्रकार करें-

पूजन विधि ::::=

सुबह स्नान कर पवित्र आचरण, वाणी के संकल्प के साथ माता सरस्वती की पूजा करें।पूजा में गंध, अक्षत (चावल) के साथ खासतौर पर सफेद और पीले फूल, सफेद चंदन तथा सफेद वस्त्र देवी सरस्वती को चढ़ाएं।प्रसाद में पीले चावल, खीर, दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, घी, नारियल, शक्कर व मौसमी फल चढ़ाएं।इसके बाद माता सरस्वती से बुद्धि और कामयाबी की कामना कर, घी के दीप जलाकर आरती करें।
 

सरस्वती  माता की आरती :::::::::::=

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।। जय सरस्वती...।।
चंद्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।। जय सरस्वती...।।
बाएँ कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला।। जय सरस्वती...।।
देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया।। जय सरस्वती...।।
विद्या ज्ञान प्रदायिनि ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह, अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो।। जय सरस्वती...।।
धूप दीप फल मेवा, मां स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो।।।। जय सरस्वती...।।
मां सरस्वती जी की आरती, जो कोई नर गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे।। जय सरस्वती...।।

पूजन के शुभ मुहूर्त:::::=

सुबह 09:30 से 11:40 बजे तक !
दोपहर 01:00 से शाम 5:00 बजे तक !

वसंत पंचमी पर इस स्तुति से करें मां सरस्वती की उपासना !!::::=

जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में नहीं लगता है, वे यदि मां सरस्वती का नित्य पूजन करें तो उन्हें अतिशीघ्र लाभ होता है। विद्यार्थी यदि नीचे लिखी स्तुति का पाठ मां सरस्वती के सामने करे तो उसकी स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

सरस्वती स्तुति !:::::::=

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।

इस मूल मंत्र से करें देवी सरस्वती का पूजन, मिलेंगे शुभ फल !!::::::::=

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक देवी व देवताओं का एक मूल मंत्र होता है, जिससे उनका आवाहन किया जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से देवी-देवताओं के आवाहन के लिए बने होते हैं। यह मंत्र विशेष सिद्ध होते हैं। वेदों के अनुसार अष्टाक्षर मंत्र देवी सरस्वती का मूल मंत्र है- श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा। जब भी आप देवी सरस्वती की पूजा करें तथा भोग अर्पित करें तो इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। सरस्वती पूजन के समय  


निम्नलिखित श्लोकों से भगवती सरस्वती का ध्यान करें-

सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्र्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।
वन्दे भक्तया वन्दिता च मुनीन्द्रमनुमानवै:।

Saturday, 17 January 2015

भृगु संहिता के अनुसार जानिए किस-किस उम्र में हो सकता है आपका भाग्योदय !!

भाग्य या किस्मत ऐसे शब्द हैं, जिनका हमारे जीवन पर काफी अधिक प्रभाव माना जाता है। किसी भी प्रकार के सुख-दुख, सफलता-असफलता, अमीरी-गरीबी को भाग्य से जोड़कर ही देखा जाता है। सभी लोग जानना चाहते हैं कि हमारा अच्छा समय कब आएगा? कब हमारे पास बहुत सारा पैसा होगा? इन प्रश्नों के उत्तर भृगु संहिता में बताए गए हैं। ये एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें ज्योतिष संबंधी समस्त जानकारियां दी गई हैं। इस संहिता में कुंडली के लग्न के अनुसार भी बताया गया है कि व्यक्ति का भाग्योदय कब होगा?
कुंडली में होते हैं बारह भाव !!
कुंडली में बारह भाव होते हैं और ये 12 राशियों (मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन) का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुंडली का प्रथम भाव यानी कुंडली के केंद्र स्थान में पहला घर जिस राशि का होता है, उसी राशि के अनुसार कुंडली का लग्न निर्धारित होता है। लग्न के आधार पर कुंडलियां बारह प्रकार की होती हैं।अपनी कुंडली का पहला भाव यानी लग्न देखिए और यहां जानिए किस-किस उम्र में आपका भाग्योदय हो सकता है !
मेष लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली मेष लग्न की है, सामान्यत: उनका भाग्योदय 16 वर्ष की आयु में या 22 वर्ष की आयु, 28 वर्ष की आयु, 32 वर्ष की आयु या 36 वर्ष की आयु में हो सकता है।
वृष लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली वृष लग्न की है, उनका भाग्योदय 25 वर्ष की आयु, 28 वर्ष की आयु, 36 वर्ष की आयु या 42 वर्ष की आयु में भाग्योदय हो सकता है।
मिथुन लग्न की कुंडली:=
मिथुन लग्न की कुंडली वाले लोगों का भाग्योदय करने वाली आयु है 22 वर्ष, 32 वर्ष, 35 वर्ष, 36 वर्ष या 42 वर्ष। इन वर्षों में मिथुन राशि के लोगों का भाग्योदय हो सकता है।
कर्क लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली कर्क लग्न की है, उनका भाग्योदय 16 वर्ष की आयु, 22 वर्ष की आयु, 24 वर्ष की आयु, 25 वर्ष की आयु, 28 वर्ष की आयु या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है।
सिंह लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली सिंह लग्न की है, उनका भाग्योदय 16 वर्ष की आयु में, 22 वर्ष की आयु में, 24 वर्ष की आयु में, 26 वर्ष की आयु में, 28 वर्ष की आयु में या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है।
कन्या लग्न की कुंडली:=
कन्या लग्न की कुंडली वाले लोगों का भाग्योदय इन आयु वर्ष में हो सकता है- 16 वर्ष, 22 वर्ष, 25 वर्ष, 32 वर्ष, 33 वर्ष, 35 वर्ष या 36 वर्ष।
तुला लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली तुला लग्न की है, उनके भाग्य का उदय 24 वर्ष की आयु में हो सकता है। यदि 24 वर्ष की आयु में भाग्योदय न हो तो इसके बाद 25 वर्ष की आयु में, 32 वर्ष की आयु में, 33 वर्ष की आयु में या 35 वर्ष की आयु में भाग्योदय हो सकता है।
वृश्चिक लग्न की कुंडली:=
वृश्चिक लग्न की कुंडली वाले लोगों का भाग्योदय 22 वर्ष की आयु में, 24 वर्ष की आयु में, 28 वर्ष की आयु में या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है।
धनु लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली धनु लग्न की है, उनका भाग्योदय 16 वर्ष की आयु में, 22 वर्ष की आयु में या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है।
मकर लग्न की कुंडली:=
मकर लग्न की कुंडली वाले लोगों का भाग्योदय 25 वर्ष की आयु में या 33 वर्ष की आयु में या 35 वर्ष की आयु में या 36 वर्ष की आयु में हो सकता है।
कुंभ लग्न की कुंडली:=
जिन लोगों की कुंडली कुंभ लग्न की है, उनका भाग्योदय 25 वर्ष की आयु में, 28 वर्ष की आयु में, 36 वर्ष की आयु में या 42 वर्ष की आयु में हो सकता है।
मीन लग्न की कुंडली:=
मीन लग्न की कुंडली वाले लोगों का भाग्योदय 16 वर्ष की आयु में, 22 वर्ष की आयु में, 28 वर्ष की आयु में या 33 वर्ष की आयु में हो सकता है।


Monday, 12 January 2015

जानिए, किस ग्रह के लिए कोंन सा रत्न कब और कैसे पहनना चाहिए !!!

रत्न यानी जेम्स स्टोन्स का ज्योतिष में काफी अधिक महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि रत्न पहनने से संबंधित ग्रह के दोषों का निवारण हो जाता है और जीवन में चल रही परेशानियां खत्म हो सकती हैं। जानिए कौन सा रत्न किस ग्रह के लिए धारण किया जाता है और कौन से वार को कैसे धारण करना चाहिए...
रत्न और दिन :==
जिन लोगों को शुक्र की महादशा चल रही है, उन्हें हीरा धारण करना चाहिए। इसके लिए शुक्रवार सबसे अच्छा है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच हीरा मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए।
जिनकी कुंडली में सूर्य की महादशा चल रही हो, उन्हें माणिक धारण करना चाहिए। इसे धारण करने के लिए रविवार सर्वश्रेष्ठ है। रविवार को सूर्योदय के समय माणिक अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर में धारण करना चाहिए।
मोती उन लोगों को धारण करना चाहिए, जिन लोगों की कुंडली में चंद्र की महादशा चल रही हो। किसी भी सोमवार को शाम 5 बजे से 7 बजे के बीच अनामिका या कनिष्ठा (सबसे छोटी उंगली) में मोती धारण करना चाहिए।
मंगल की महादशा में मूंगा धारण करना सबसे अच्छा उपाय है। मंगलवार के दिन शाम 5 बजे से 7 बजे के बीच मूंगा अनामिका यानी फिंगर में धारण करने पर श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।
जिन लोगों की कुंडली में बुध की महादशा चल रही हो, उन्हें पन्ना धारण करना चाहिए। पन्ना धारण करने के लिए बुधवार श्रेष्ठ दिन है। दिन के समय 12 बजे से 2 बजे तक सबसे छोटी उंगली में पन्ना धारण कर सकते हैं।
पुखराज उन लोगों को धारण करना चाहिए, जिन लोगों की कुंडली में गुरु की महादशा चल रही हो। इसके लिए गुरुवार श्रेष्ठ दिन है। गुरुवार को सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच तर्जनी उंगली यानी इंडेक्स फिंगर में धारण करना चाहिए।
जिन लोगों की कुंडली में राहु या केतु की महादशा चल रही है, उन्हें गोमेद धारण करना चाहिए। इसके लिए शनिवार श्रेष्ठ दिन है। शनिवार को सूर्यास्त के बाद मिडिल फिरंग यानी मध्यमा उंगली में गोमेद धारण करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को शनि की महादशा चल रही है, उन्हें नीलम धारण करना चाहिए। नीलम धारण करने के लिए शनिवार सबसे अच्छा दिन है। शाम 5 बजे से 7 बजे तक मिडिल फिंगर यानी मध्यमा उंगली में नीलम धारण किया जा सकता है।
 विशेष :==ध्यान रहे, किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए। कभी-कभी रत्न का प्रभाव बहुत जल्दी हो जाता है। कुछ परिस्थितियों में रत्न विपरीत प्रभाव भी दे सकते हैं, अत: बिना ज्योतिषी के परामर्श के रत्न धारण नहीं करना चाहिए।
 

गुप्त नवरात्रि 21 जनवरी से: ये 9 दिन हैं बहुत खास !!

हिंदू धर्म के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है, लेकिन आमजन केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। माघ तथा आषाढ़ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस बार माघ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ माघ शुक्ल प्रतिपदा (21 जनवरी, बुधवार) से हो रहा है, जो 28 जनवरी, बुधवार को समाप्त होगी।  
जानिए, क्यों कहते हैं इसे गुप्त नवरात्रि
माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं, क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है। जबकि चैत्र व शारदीय नवरात्रि में सार्वजििनक रूप में माता की भक्ति करने का विधान है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है, वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है। ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष का विशेष महत्व है।शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। इन्हीं कारणों से माघ मास की नवरात्रि में सनातन, वैदिक रीति के अनुसार देवी साधना करने का विधान निश्चित किया गया है। गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। साधक इन दोनों गुप्त नवरात्रि (माघ तथा आषाढ़) में विशेष साधना करते हैं तथा चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करते हैं। 
साल में कब-कब आती है नवरात्रि, जानिए
हिंदू धर्म के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है। इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्रि होती है। इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवें महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्रि मनाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।अश्विन मास की नवरात्रि सबसे प्रमुख मानी जाती है। इस दौरान गरबों के माध्यम से माता की आराधना की जाती है। दूसरी प्रमुख नवरात्रि चैत्र मास की होती है। इन दोनों नवरात्रियों को क्रमश: शारदीय व वासंती नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इसके अतिरिक्त आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्रि गुप्त रहती है। इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्रि कहते हैं।

Sunday, 11 January 2015

निराशा से बचना हो तो ये तीन है सबसे बेहतर तरीके !!

परमात्मा के हाथ से कभी गलत निर्माण नहीं होता। इसीलिए हमें अपने मनुष्य होने पर गर्व करना चाहिए। परमात्मा ने हमें बनाते समय एक चीज दी है, वह है प्रसन्नता। क्योंकि मनुष्य बनाने के बाद ईश्वर स्वयं बहुत प्रसन्न हुआ। उसने  यह प्रसन्नता मनुष्य में स्थानांतरित कर दी।परमात्मा ने हमें बनाया, अब हमें अपनी परिस्थितियों को बनाना है। इनसे दो चीजें जुड़ी हैं - तकलीफ और सुविधा। जिस परिस्थिति को हम बदल सकते हैं उसे जरूर बदल दें। पर यह समझ में आ जाए कि यह बदली नहीं जा सकती, तो उसे प्रसन्नता से स्वीकार करें। उदास बिल्कुल न हों। उदासी का अर्थ है हाथ में पत्थर लेकर परमात्मा की ओर उछालना। मनुष्य की उदासी, प्रसन्नता देने वाले परमात्मा की अवमानना है।आपने उस पर से भरोसा छोड़ा, तभी उदासी आई। उदासी आने पर तीन काम जरूर करिए - एक तो अपनी शरीर को चुस्त बना लें। शरीर जितना स्फूर्तिभरा होगा, उदासी उतनी भीतर कम फैलेगी। दूसरा, अच्छे विचारों को अंदर लाएं और बुरे विचार बाहर फेंकें। तीसरा, चिंतित बिल्कुल न हों। उदासी घिरने लगे तो सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों और पंजों को चिपका लें, हाथ को जोड़ते हुए छाती से टिका लें।अपना सारा ध्यान मूलाधार चक्र पर जमा लें और सोचें कि आपकी पूरी चेतना वहीं टिक गई है। आपके भीतर समुद्र जैसी लहरें उठ रही हैं। समुद्र अपनी गहराई में सबकुछ उतार लेता है। पांच मिनट बाद आप उदासी से मुक्त होने लगेंगे। उदास रहकर अपने और परमात्मा से रिश्ते का अपमान न करें।

मकर संक्रांति पर करें अपनी राशि अनुसार दान, पूरी होगी आपकी हर मनोकामना !!

 
हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि के निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है इसीलिए ये पर्व मनाया जाता है।मान्यता है कि इस दिन किए गए दान का फल सौ गुना होकर दानदाता को प्राप्त होता है। ज्योतिष के अनुसार राशि अनुसार दान करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। आप भी जानिए मकर संक्रांति के दिन अपनी राशि अनुसार क्या दान करें-
मेष- इस राशि का स्वामी मंगल है। इस राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन मच्छरदानी एवं तिल का दान करें तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
वृषभ- इस राशि का स्वामी शुक्र है। इस राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन ऊनी वस्त्र एवं तिल का दान करें तो शुभ रहेगा।
मिथुन-इस राशि का स्वामी बुध है। इस राशि के लोग यदि मकर संक्रांति के दिन तिल एवं मच्छरदानी का दान करें तो बहुत अच्छा रहता है।
कर्क- इस राशि का स्वामी चंद्र है। इस राशि के लोगों के लिए मकर संक्रांति पर तिल, साबूदाना एवं ऊन का दान करना शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा।
सिंह- इस सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। मकर संक्रांति के दिन इस राशि के लोग तिल, कंबल व मच्छरदानी अपनी क्षमतानुसार दान करें।
कन्या- इस राशि का स्वामी बुध है। इस राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन तिल, कंबल, तेल, उड़द दाल का दान करें।
तुला- इस राशि के स्वामी शुक्र हैं। इस राशि के लोग तेल, रुई, वस्त्र, राई, मच्छरदानी दान करें। 
वृश्चिक-इस राशि का स्वामी मंगल है। इस राशि के लोग गरीबों को चावल और दाल की कच्ची खिचड़ी दान करें साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार कंबल भी।
धनु- इस राशि का स्वामी गुरु है। इस राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन तिल व चने की दाल का दान करें तो विशेष लाभ होने की संभावना बनती है।
मकर- इस राशि का स्वामी शनि है। ये लोग मकर संक्रांति के दिन तेल, तिल, कंबल और पुस्तक का दान करें तो इनकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
कुंभ- इस राशि का स्वामी शनि है। इस राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन तिल, साबुन, वस्त्र, कंघी व अन्न का दान करें।
मीन-इस राशि का स्वामी गुरु है। मकर संक्रांति के दिन ये लोग तिल, चना, साबूदाना, कंबल व मच्छरदानी दान करें।

Tuesday, 6 January 2015

आप के मंदिर से जूते-चप्पल चोरी हो जाए तो जानिए शुभ है या अशुभ !!


मंदिर से जूते-चप्पल चोरी होना आम बात है। इस चोरी को रोकने के लिए सभी बड़े मंदिरों में जूते-चप्पल रखने के लिए अलग से सुरक्षित व्यवस्था की जाती है। इस व्यवस्था के बावजूद भी कई बार लोगों के जूते-चप्पल चोरी हो जाते हैं। किसी भी प्रकार की चोरी को अशुभ माना जाता है, लेकिन पुरानी मान्यता है कि जूते-चप्पल चोरी होना शुभ है।यदि शनिवार के दिन ऐसा होता है तो इससे शनि के दोषों में राहत मिलती है। काफी लोग जो पुरानी मान्यताओं को जानते हैं, वे अपनी इच्छा से ही दान के रूप में मंदिरों के बाहर जूते-चप्पल छोड़ आते हैं। इससे पुण्य बढ़ता है।ज्योतिष शास्त्र में शनि को क्रूर और कठोर ग्रह माना गया है। शनि जब किसी व्यक्ति को विपरीत फल देता है तो उससे कड़ी मेहनत करवाता है और नाम मात्र का प्रतिफल प्रदान करता है। जिन लोगों की राशि पर साढ़ेसाती या ढय्या चली रही होती है या कुंडली में शनि शुभ स्थान पर न हो तो उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।हमारे शरीर के सभी अंग ग्रहों से प्रभावित होते हैं। त्वचा (चमड़ी) और पैरों में शनि का वास माना गया है। पैर और त्वचा से संबंधित चीजें शनि के निमित्त दान की जाए तो कई शुभ फल प्राप्त होते हैं। साथ ही, पैर तथा त्वचा से संबंधित बीमारियों में भी लाभ प्राप्त हो सकता है।शनिवार का कारक ग्रह शनि है और इस वजह से इस दिन जूते-चप्पल चोरी होने पर शनि के अशुभ प्रभावों में राहत मिलती है। यह बहुत पुरानी मान्यता है।
आप के बार-बार जूते-चप्पल टूटते हैं तो...
क्या आपके साथ यह समस्या होती है कि जूते-चप्पल काफी कम समय में ही टूट जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार बार-बार जूते-चप्पल चोरी होना या खो जाना भी शनि के अशुभ होने का संकेत है।
उपाय :=========
शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत्त हो जाएं, इसके बाद पूरे शरीर पर तेल लगाएं। अच्छे से तेल की मालिश करें। नहाने के पानी में थोड़े से काले तिल डाल लें। इसके बाद इस पानी से स्नान करें। स्नान के बाद तेल का दान करें। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय शनि के दोष शांत होते हैं। काले तिल और तेल, शनि की वस्तुएं मानी गई हैं।जिन लोगों को शनि की साढ़ेसाती और ढय्या चल रही है, वे लोग यदि हर शनिवार पीपल की सात परिक्रमा करेंगे और जल अर्पित करेंगे तो शनि के दोषों से मुक्ति मिल सकती है। यह उपाय हर शनिवार को करते रहना चाहिए।शनिवार को सुबह स्नान के बाद एक कटोरी में तेल लें और उसमें अपना चेहरा देखें। फिर यह तेल शनिदेव के निमित्त किसी ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। यह उपाय भी शनि के दोषों को दूर करता है।शास्त्रों के अनुसार शनि उन लोगों को परेशान नहीं करते हैं जो हनुमानजी के भक्त हैं। अत: हर मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी के निमित्त विशेष पूजन किया जाना चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।

Saturday, 3 January 2015

दान कब-कब करें और क्या क्या करे जानिए !!

दान के समय और प्रकार !!
(1) नित्य दान – जो प्राणी नित्य सुबह उठ कर अपने नित्या कर्म में देवता के ही एक स्वरूप उगते सूरज को जल भी अर्पित कर दे उसे ढेर सारा पुण्य मिलता है। उस समय जो स्नान करता है, देवता और पितर की पूजा करता है, अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, पानी, फल, फूल, कपड़े, पान, आभूषण, सोने का दान करता है, उसके फल असीम है। जो भी दोपहर में भोजन कि वस्तु दान करता है, वह भी बहुत से पुण्य इकट्ठा कर लेता है। इसलिए एक दिन के तीनों समय कुछ दान जरूर करना चाहिए। कोई भी दिन दान से मुक्त नहीं होना चाहिए।
(2) नैमित्तिक दान - नैमित्तिक दान के लिए कुछ विशेष नैमित्तिक अवसर और समय होते हैं। अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, संक्रांति, माघ, अषाढ़, वैशाख और कार्तिक पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या, युग तिथि, गजच्छाया, अश्विन कृष्ण त्रयोदशी, व्यतिपात और वैध्रिती नामक योग, पिता की मृत्यु तिथि आदि को नैमित्तिक समय दान के लिए कहा जाता है। जो भी देवता के नाम से कुछ भी दान करता है उसे सारे सुख मिलते हैं।
(3) काम्या दान - जब एक दान व्रत और देवता के नाम पर कुछ इच्छा की पूर्ति के लिए किया जाता है, उसे दान के लिए काम्या समय कहा जाता है।
विशेष := भगबान श्री कृष्ण के अनुसार अगर कोई भी एक पखवाड़े या एक महीने के लिए कुछ भी भोजन या अन्य बस्तु दान नहीं करता है, तो मैं भी उसे उतने ही समय के लिए भूखा रखता हूं। मैं उसे एक ऐसी बीमारी में डाल देता हूं जिसमें कि वह कुछ भी आनंद नहीं ले सकते है। जो कुछ भी नहीं दान नहीं कर पाता है, और उसे कई बृत करने पढते है और धन तथा बस्तुओं के लिए परेशान होना पढता है ।

माघ महीने में नदी में स्नान से होती है स्वर्ग की प्राप्ति !!

पुराणों के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास की पूर्णिमा तक माघ मास में पवित्र नदी नर्मदा, गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी सहित अन्य जीवनदायिनी नदियों में स्नान करने से मनुष्य को समस्त पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष का मार्ग खुल जाता है।महाभारत के एक दृष्टांत में उल्लेख करते हुए बताया गया है कि माघ माह के दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है। वहीं पद्मपुराण में बताया गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि माघ मास में नदी तथा तीर्थस्थलों पर स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन पुराणों में भगवान नारायण को पाने का सुगम मार्ग माघ मास के पुण्य स्नान को बतलाया गया है।निर्णय सिंधु में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। भले पूरे माह स्नान के योग न बन सकें लेकिन एक दिन के स्नान से श्रद्धालु स्वर्ग लोक का उत्तराधिकारी बना जा सकता है। इस बात का उदाहरण इस श्लोक से मिलता है।
॥मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌॥
अर्थात् जो लोग लंबे समय तक स्वर्ग लोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर तीर्थ स्नान अवश्य ही करना चाहिए।
तीर्थ स्थान पर यह संकल्प लें !!
॥स्वर्गलोक चिरवासो येषां मनसि वर्तते
यत्र काच्पि जलै जैस्तु स्नानव्यं मृगा भास्करे॥

अर्थात् माघ स्नान का संकल्प शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को ले लेना चाहिए। लेकिन अगर उस समय यह संकल्प नहीं लिया गया हो तो आप माघ में तीर्थ स्नान के दौरान यह संकल्प करके, भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करना चाहिए। साथ ही संभव हो तो एक समय भोजन का व्रत भी करना चाहिए।जिस प्रकार माघ मास में तीर्थ स्नान का बहुत महत्व है, उसी प्रकार दान का भी विशेष महत्व है। इन माह में दान में तिल, गुड़ और कंबल या ऊनी वस्त्र दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

Thursday, 1 January 2015

जनबरी में जिनका जन्म हुआ उनके बारे में जाने !!

आपका जन्म किसी भी साल के जनवरी माह में हुआ है तो ज्योतिष कहती है आप बेहद आकर्षक और कार्यकुशल भी हैं। भाग्य का चमकीला सितारा हमेशा आपके साथ चलता है। आप अपने गम कभी किसी को नहीं बताते यही वजह है कि दुनिया एक खुशमिजाज व्यक्तित्व के रूप में आपको जानती है। आप मेहनत में नहीं बल्कि 'कड़ी' मेहनत में विश्वास रखते हैं। काम और करियर को लेकर आपमें एक तरह की दीवानगी पाई जाती है। आप बेहद संस्कारी और आदर्श बच्चे के रूप में समाज पर अपनी छाप छोड़ते हैं। आपको नहीं पता होगा लेकिन कई लोगों के लिए आप प्रेरणास्त्रोत होते हैं। एक बेहद साफ-सुथरी और गरिमामयी छवि वाले जनवरी के जातक अपने हर काम पर खुद ही बारीक नजर रखते हैं। वाणी की देवी आप पर विशेष प्रसन्न होती है। बातों के आप जादूगर होते हैं। आपको सबको साथ लेकर चलने में खुशी मिलती है। बिखराव आपको पसंद नहीं है। मन आपका कांच की तरह स्वच्छ होता है। आपमें इंसान को पहचानने की विलक्षण शक्ति होती है। बावजूद इसके आप अपने आसपास के लोगों से ही धोखा खा जाते हैं।अगर आपको किसी से काम निकलवाना है तो उसकी कमियों के प्रति जानबूझ कर आंखे बंद किए रहते हैं। जैसे ही आपका काम निकला आप अगले को कुशलता से किनारे पर भी लगा देते हैं। आप पर कोई हावी नहीं हो सकता क्योंकि आपका प्रभुत्व ही इतना प्रखर और प्रभावशाली होता है कि सामने वाला अपनी बात को कहने से पहले दो बार सोचने पर बाध्य हो जाता है। कुछ जनवरी में जन्मे युवाओं में यह कमी पाई जाती है कि पूरी बात सुनने से पहले ही जबाब दे देते हैं। कुछ बंदे कान के कच्चे भी होते हैं। आप यूं तो दोस्तों में शान्त और नियम के पक्के  बंदे के रूप में जाने जाते हैं, मगर अगर सबकुछ आपके अनुसार ना हो तो आपका उत्तेजना सीमाएं तोड़ने में देर नहीं करती। हर काम आपको समय पर चाहिए लेकिन खुद आप दूसरों के समय की उतनी कद्र नहीं कर पाते हैं। दिल से आप मासूम होते हैं किसी के प्रति कड़वाहट नहीं पालते लेकिन अगर प्रतिस्पर्धा पर उतर आए तो सामने वाले को पछाड़ कर ही दम लेते हैं। जिंदगी के प्रति आपका नजरिया बेहद स्पष्ट होता है। आपको कब, कितना और कैसे चाहिए यह दिमाग में एकदम साफ होता है। आप परिस्थितियों के अनुसार ढल जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति आपके जीवन में विशेष महत्व रखता है तो उसे सहारा देने में आपका आत्म सम्मान आड़े नहीं आता। धर्मालु इस कदर होते हैं कि कभी-कभी धर्मांध होने की हद तक पहुंच जाते हैं। प्यार के मामले में इनके जैसा कमिटेड बंदा मिलना मुश्किल है। हल्के-फुल्के अफेयर जितने चाहे हो सकते हैं लेकिन जिसे एक बार दिल में बसा लिया, तो बस बसा लिया। कुछ किशोर थोड़े गुमराह पाए जाते हैं और हर किसी से प्यार का वादा कर बैठते हैं, बाद में परिपक्क होने पर बेहद चतुराई से किसी एक के पल्लू से बँध जाते हैं। अक्सर गलत फैसले लेते हैं ले‍किन यह तय है कि समाज इनके गलत फैसले भूल जाता है। जनवरी में जन्में युवा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, आर्मी, चार्टेड अकांउटेंट, लेक्चररशिप या फिर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में जाते हैं। इनकी नेतृत्व क्षमता की दुनिया कायल होती है। इस माह में जन्मी लड़कियां बेहद रोमांटिक और स्मार्ट होती है। मासूम होने का ढोंग करती हैं पर होती नहीं है। कॉलेज कैंपस में इनके अफेयर्स चटखारे लेकर सुने जा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हर किसी से इनका नाम जुड़ता है मगर जिससे जुड़ता है वह बहुत जल्दी गलियारों में आ जाता है। ये अपना प्यार छुपाकर नहीं रख सकतीं। इनके रोमांटिक स्वभाव के कारण पार्टनर इनके दीवाने होते हैं। लड़कों को बस में रखने की अदभुत कला जानती है। जनवरी वाले हर युवा को सलाह है कि थोड़े से स्वार्थी स्वभाव पर कंट्रोल करें। कभी-कभी दूसरों के नजरिये से भी दुनिया देखें। दोस्तों को बेवकूफ समझने की प्रवृत्ति का त्याग करें। किसी का भरोसा ना तोड़ें। भाग्य का सितारा हमेशा आपके साथ है उसे सही वक्त पर पहचानें। जन्म दिन की शुभ कामना !
लकी नंबर : 5, 3, 1
लकी कलर : गहरा नीला , लाल और हल्का पीला !
लकी डे :गुरुबार , शुक्रवार , रविवार !
लकी स्टोन : गोमेद और ब्लू टोपाज