क्या आप जानते है भगवान विष्णु के सिर पर शेषनाग क्यों है? ~ Balaji Kripa

Saturday, 2 May 2015

क्या आप जानते है भगवान विष्णु के सिर पर शेषनाग क्यों है?

नागराज अनंत को ही शेष भी कहा गया है। जो भगवान विष्णु के प्रिय और स्वयं भगवत स्वरूप माने गए हैं। प्रलयकाल में नई सृष्टि से पूर्व विश्व का जो शेष या मूल अव्यक्त रह जाता है। हिंदू धर्मकोश के अनुसार वे उसी के प्रतीक माने गए हैं। भविष्य पुराण में इनका ध्यान एक हजार फन वाले सर्प के रूप में किया गया है। ये जीव तत्व के अधिष्ठाता हैं और ज्ञान व बल नाम के गुणों की इनमें प्रधानता होती है। इनका आवास पाताल लोक के मूल में माना गया है। प्रलयकाल में इन्हीं के मुखों से संवर्तक अग्नि प्रकट होकर पूरे संसार को भस्म करती है। ये भगवान विष्णु के पलंग के रूप में क्षीर सागर में रहते हैं और अपने हजार मुखों से भगवान का गुणानुवाद करते हैं।भक्तों के सहायक और जीव को भगवान की शरण में ले जाने वाले भी शेष ही हैं, क्योंकि इनके बल, पराक्रम और प्रभाव को गंधर्व, अप्सरा, सिद्ध, किन्नर, नाग आदि भी नही जान पाते, इसलिए इन्हें अनंत भी कहा गया है। ये पंचविष ज्योति सिद्धांत के प्रवर्तक माने गए हैं। भगवान के निवास शैया, आसन, पादुका, वस्त्र, पाद पीठ, तकिया और छत्र के रूप में शेष यानी अंगीभूत होने के कारण् इन्हें शेष कहा गया है। लक्ष्मण और बलराम इन्हीं के अवतार हैं जो राम व कृष्ण लीला में भगवान के परम सहायक बने।

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