" आज पढ़िय़े भक्त और बालाजी भगवान के मिलन बारे में " !! ~ Balaji Kripa

Tuesday, 9 June 2015

" आज पढ़िय़े भक्त और बालाजी भगवान के मिलन बारे में " !!

बालाजी में आरती लगभग 40 मिनट तक चलती है। आरती सम्पन्न होते ही भक्त और भगवान का मिलन प्रारम्भ हो जाता है। जो रात्रि लगभग नौ बजे तक लगातार चलता रहता है। केवल दोपहर एवं रात्री भोग के समय आधा-आधा घंटे के लिए श्री बालाजी महाराज के पट बंद होते हैं। वह भी पर्दे डालकर। सुबह आरती के बाद पहले बालाजी का बाल भोग लगता है जिसमें बेसन की बूंदी होती है। फिर राजभोग का भोग लगता है। यह मंदिर में स्थित बालाजी रसोई में ही तैयार किया जाता है। इसमें चूरमा मेवा, मिष्ठान आदि होता है। भोग बाद में दर्शनार्थी भक्तों में वितरित किया जाता है। भक्तों तो दिया जाने वाला  राज भोग डिब्बे में पैक होता है। जबकि अभिषेक का गंगाजल भक्तों को चरणामृत के रूप में वितरित किया जाता है। दोपहर के समय श्री बालाजी महाराज का विशेष भोग लगाया जाता है। इसे दोपहर का भोजन भी कहा जा सकता है। बालाजी के भोग से पहले उनके प्रभु श्रीराम और माता सीता अर्थात मुख्य मंदिर के सामने सड़क पार बने श्री सीताराम मंदिर में भोग लगता है, तत्पश्चात बालाजी का भोग लगता है। बालाजी केबड  श्री गणेश जी महाराज , श्री प्रेतराज सरकार, श्री भैरव जी, श्री कोतवाल जी आदि का भी भोग लगता है। इस भोग के दौरान आधा घंटे के लिए दर्शन बंद रहते हैं। शाम पांच बजे श्री बालाजी का पुन: अभिषेक होता है। इसमें लगभग एक घंटे का समय लगता है। तत्पश्चात नंबर आता है शाम की आरती का। सबसे अंत में शयन भोग लगता है। यह चौथा भोग होता है। दूध,मेवा का यह भोग भी बाद में प्रसाद के रूप में दर्शानार्थी भक्तों को बांटा जाता है।।घाटा मेंहदीपुर वाले बाबा के मंदिर में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ का जहां तक सवाल है। अब यह बारहमासी है। अर्थात प्रतिदिन यहां भक्तों की भीड़ रहती है। देश के सुंदर क्षेत्रों से यहां दर्शानार्थी भक्त आते हैं। लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ होती है। आस-पास के क्षेत्रों में श्री बालाजी के दर्शन लोगों के लिए ठीक वैसी ही दिनचर्या का अंग है जैसा कि सुबह-शाम का भोजन। डेढ़ से दो घंटे तक लाईन में लगने के बाद भक्त और भगवान का मिलन आम बात है, मगर इस मिलन के बाद दर्शनार्थी भक्तों के चेहरों पर जो संतोष भाव होता है उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता ।।

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