क्या आप को पता है २५ वर्ष की उम्र तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए !! ~ Balaji Kripa

Tuesday, 7 July 2015

क्या आप को पता है २५ वर्ष की उम्र तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए !!



हिंदू धर्म अनुसार इंसान की १०० वर्ष की आयु के चार भाग हैं। २५-२५ वर्ष में विभाजित इन चार भागों को चार आश्रमों में बांटा गया है ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। इसमें पहला आश्रम है ब्रह्मचर्य आश्रम, जिसे जीवन के पहले २५ साल तक माना गया है। २५ वर्ष की आयु तक हर व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का प्रथर्म अर्थ संभोग की शक्ति का संचय करना। दूसरा अर्थ शिक्षा और भक्ति का संचय करना और तीसरा अर्थ ब्रह्म की राह पर चलना। हिन्दू धर्मानुसार जन्म से लेकर ७ वर्ष की उम्र तक व्यक्ति अपने माता पिता के पास ही रहता है उसके बाद उसका विद्याआरंभ संस्कार होता है। इस दौरान वह किसी श्रेष्ठ गुरु के आश्रम में २५ वर्ष की उम्र तक रहकर शिक्षा, विद्या और भक्ति का पाठ पढ़ता है। उपरोक्तानुसार बताए गए ब्रह्मचर्य के पालन से व्यक्ति के वीर्य का, शिक्षा का, विद्या का और भक्ति का संचय होता है। उक्त संचय से ही व्यक्ति का गृहस्थ जीवन पुष्ट और सफल बनता है। इसीलिए २५ वर्ष की आयु तक व्यक्ति को अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता बढ़ाना चाहिए क्योंकि इसी दौरना इनका विकास होता है। व्यक्ति के शरीर में अधिकांश बदलाव और विकास २५ वर्ष की आयु तक हो जाता है। अगर इसके पहले ही व्यक्ति अपनी शक्ति को बरबाद करने लगेगा तो उसका गृहस्थ जीवन कई तरह के रोग और शोक से घिर जाएगा। २५ वर्ष की आयु तक चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक शरीर में वीर्य और रक्तकणों का विकास बहुत तेजी से होता है, उस समय अगर इसे शरीर में संचित किया जाए तो यह काफी स्वास्थ्यप्रद होता है। इससे शरीर पुष्ट बनता है। 25 वर्ष की उम्र के पहले ही ब्रह्मचर्य तोडऩे से समय पूर्व बुढ़ापा आना और नपुंसकता या संतान उत्पत्ति में परेशानी की आशंका प्रबल हो जाती है। इससे मानसिक विकास, शिक्षा, कैरियर आदि में रुकावट भी शुरू हो जाती है। और पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है !!

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