'आप क्या हनुमानजी को बंदर मानते है !! ~ Balaji Kripa

Monday, 20 July 2015

'आप क्या हनुमानजी को बंदर मानते है !!

हनुमानजी के संबंध में यह प्रश्न प्राय: सर्वत्र उठता है कि 'क्या हनुमानजी बंदर थे? इसके लिए कुछ लोग रामायणादि ग्रंथों में लिखे हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ 'वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम' आदि विशेषण पढ़कर उनके बंदर प्रजाति का होने का उदाहरण देते हैं। वे यह भी कहते हैं कि उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंका-दहन का प्रत्यक्ष चमत्कार इसका प्रमाण है यह भी कि उनकी सभी जगह सपुच्छ प्रतिमाएं देखकर उनके पशु या बंदर जैसा होना सिद्ध होता है।कुछ लोग मानते हैं कि वे ऐसे नहीं थे। इस कपित्व-द्योतक अंश को वे विधर्मी प्रक्षिप्त मानते हैं। वाल्मीकि रामायण ही राम, रावण और हनुमान के होने और उनके चरित्र का सही प्रमाण प्रस्तुत करती है, क्योंकि रामायण को राम के काल में ही रच गया था बाकी सभी रामायण या रामचरित मानस में कहीं-कहीं उनका चित्रण सच्चाई से भिन्न है।वाल्मीकि रामायण अनुसार हनुमानजी का व्याकरण-बेत्तृत्व, शुद्घ-भाषण-कला-कुशलत्व, बुद्घिमता-वरिष्ठता एवं ज्ञानिनामग्रगण्यत्व सिद्घ होता है। ऐसा होना किसी साधारण वानर या मानव में नहीं हो सकता।जैसे- जब भगवान राम को पहले-पहल हनुमान मिले तो उनकी बातचीत से प्रभावित होकर भगवान् ने एकांत में लक्ष्मण से कहा कि- कृत्स्नं व्याकरणं शास्त्रमनेन बहुधा श्रुतम्॥ बहु व्याहरताऽनेन न किञ्चिदपशब्दितम्।। अर्थात्- (हे लक्ष्मण!) मालूम पड़ता है कि इस व्यक्ति ने समस्त व्याकरण शास्त्र का खूब स्वाध्याय किया है तभी तो इस लंबी-चौड़ी बातचीत के दौरान में इसने एक भी अशुद्ध शब्द नहीं बोला।क्या रामायण के इस प्रमाण से यह सिद्ध नहीं होता है कि कोई वानर कैसे शुद्ध उच्चारण कर सकता है और कैसे वह शांतचित्त रहकर बुद्धि का परिचय दे सकता है। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहाँ उन्हें विशिष्ट पण्डित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है।दरअसल, आज से 9 लाख वर्ष पूर्व मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूछ से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है।यह प्राय: सभी पुरातत्ववेत्ता अनुसंधायक एकमत से स्वीकार करते हैं कि पुराकालीन बहुत से प्राणियों की नस्ल अब सर्वथा समाप्त हो चुकी है।हनुमानजी को धर्म की रक्षा के लिए अमरता का वरदान मिला। इस वरदान के कारण आज भी हनुमानजी जीवित हैं और वे भगवान के भक्तों तथा धर्म की रक्षा में लगे हुए हैं। कलयुग में राम का नाम लेने वाले और हनुमान की भक्ति करने वाले ही सुरक्षित रह सकते हैं।वैचारिक स्तर पर धर्मयुद्ध चल रहा है और यह तब तक चलेगा, जब तक कि धरती पर सनातन धर्म की पुन: स्थापना नहीं हो जाती। सनातन हिन्दू धर्म के सभी दुश्मनों के लिए भविष्य सबसे खतरनाक आने वाला है। हनुमानजी अपार बलशाली और वीर हैं और उनका कोई सानी नहीं है।धर्म की स्थापना और रक्षा का कार्य चार लोगों के हाथों में है। दुर्गा, भैरव, हनुमान और कृष्ण। उक्त चारों ही अपने-अपने स्तर पर कार्यरत हैं। जब कल्कि रूप में भगवान विष्णु अवतार लेंगे तब हनुमान, परशुराम, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, विश्वामित्र, विभीषण और राजा बलि सार्वजनिक रूप से प्रकट हो जाएंगे।

1 comment:

  1. Parshuram bhi he
    Lekin ye kaise mumkin hi Sakta he
    Akhir unki aayu kya rhi hogi

    SB bkwas he
    SB kalpnik baate likhi gyi he Ramayana me

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