!! वैदिक प्रश्न आप के उत्तर हमारे !! ~ Balaji Kripa

Sunday, 16 August 2015

!! वैदिक प्रश्न आप के उत्तर हमारे !!


  ॐ  क्या है !
ॐ यह मुख्य परमेश्वर का निज नाम है, जिस नाम के साथ अन्य सब नाम लग जाते हैं। 

प्र.1-  वेद किसे कहते है ?
उत्तर- ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।

प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने दिया।

प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए।
प्र.5-  वेद कितने है ?
उत्तर- चार प्रकार के ।
1-ऋग्वेद
2 - यजुर्वेद 
3- सामवेद
4 - अथर्ववेद


प्र.6-  वेदों के ब्राह्मण ।
     वेद         ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद      -  ऐतरेय
2 - यजुर्वेद     -   शतपथ
3 - सामवेद     -   तांड्य
4 - अथर्ववेद    -   गोपथ

 
प्र.7-  वेदों के उपवेद कितने है।
उत्तर -  वेदों के चार उप वेद है ।
      वेद              उपवेद
    1- ऋग्वेद       -   आयुर्वेद
    2- यजुर्वेद       -   धनुर्वेद
    3 -सामवेद     -     गंधर्ववेद
    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद


प्र 8-  वेदों के अंग हैं कितने होते है ।
उत्तर -  वेदों के छः अंग होते है ।
1 - शिक्षा
2 - कल्प
3 - निरूक्त
4 - व्याकरण
5 - छंद
6 - ज्योतिष
 

प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?
उत्तर- वेदों का ज्ञान चार ऋषियों को दिया ।
   वेद                 ऋषि
1- ऋग्वेद        -      अग्नि
2 - यजुर्वेद      -       वायु
3 - सामवेद      -      आदित्य
4 - अथर्ववेद     -     अंगिरा


प्र.10-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?
उत्तर- वेदों का ज्ञान ऋषियों को समाधि की अवस्था में दिया

प्र.11-  वेदों में कैसे ज्ञान है ?
उत्तर-  वेदों मै सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान है ।

प्र.12-  वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-   वेदों के चार विषय है।
    ऋषि        विषय
1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान
2-  यजुर्वेद   -    कर्म
3-  सामवेद    -  उपासना
4-  अथर्ववेद -    विज्ञान


प्र.13-  किस वेद में क्या है।
     ऋग्वेद में।
1-  मंडल      -  10
2 - अष्टक     -  08
3 - सूक्त     -  1028
4 - अनुवाक  -    85
5 - ऋचाएं   -  10589
  यजुर्वेद में।
1- अध्याय    -  40
2- मंत्र      - 1975

     सामवेद में।
1-  आरचिक     -  06
2 - अध्याय     -   06
3-  ऋचाएं       -  1875

      अथर्ववेद में।
1- कांड      -    20
2- सूक्त     -   731
3 - मंत्र     -   5977
         

प्र.14-  वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?                                                                                          
उत्तर- मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

प्र.15-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?
उत्तर-  वेदों में मूर्ति पूजा का विधान बिलकुल भी नहीं।

प्र.16-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?
उत्तर- वेदों मै अवतारवाद का प्रमाण नहीं है।

प्र.17-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?
उत्तर-  सबसे बड़ा वेद ऋग्वेद है।

प्र.18-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?
उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व ।

प्र.19-  वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?
उत्तर-
1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।

प्र.20-  शास्त्रों के विषय क्या है ?
उत्तर-  आत्मा,  परमात्मा, प्रकृति, जगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।

प्र.21-  प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?
उत्तर-  प्रामाणिक उपनिषदे केवल ग्यारह है।

प्र.22-  उपनिषदों के नाम बतावे ?
उत्तर- 
1-ईश ( ईशावास्य )  2- केन  3-कठ  4-प्रश्न  5-मुंडक  6-मांडू  7-ऐतरेय  8-तैत्तिरीय 9- छांदोग्य
10-वृहदारण्यक 11- श्वेताश्वतर ।


प्र.23-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?
उत्तर- उपनिषदों के विषय वेदों से लिए गए है !

प्र.24- चार वर्ण कोन कोन से होते हैं।
उत्तर-
1- ब्राह्मण
2- क्षत्रिय
3- वैश्य
4- शूद्र


प्र.25- चार युग कोन -कोन से होते है और कितने वर्षों के ।
 उत्तर- 
1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।
2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।
3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।
4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।
कलयुग के  4,976  वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक।
4,27024 वर्षों का भोग होना बाकी है।


प्र.  पंच महायज्ञ कोन -कोन से होते है !      
उत्तर-        
       1- ब्रह्मयज्ञ  
       2- देवयज्ञ
       3- पितृयज्ञ
       4- बलिवैश्वदेवयज्ञ
       5- अतिथियज्ञ


स्वर्ग  -  जहाँ सुख है।
नरक  -  जहाँ दुःख है।

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