हनुमान साठिका ~ Balaji Kripa

Friday, 14 August 2015

हनुमान साठिका


हनुमान साठिका का पाठ करने से सभी प्रकार के दुःख दूर होते है !!  
।। सियावर राम चन्द्र की जय, पवनपुत्र हनुमान की जय ।।
जय जय जय हनुमान अड़न्गी । महावीर विक्रम बजरंगी ।1।
जय कपीश जय पवन कुमारा । जय जय वंदन शील अगारा ।2।
जय आदित्य अमर अविकारी । अरि मरदन जय जय गिरधारी ।3।
अंजनी उदर जन्म तुम लीन्हो । जय जय कार देवतन कीन्हो ।4।
बाजै दुंदिभी गगन गंभीरा । सुर मन हरष असुर मन पीरा ।5।
कपि के डर गढ़ लंक समानी । छूटि बंदि देव तन जानी ।6।
ऋषी समूह निकट चलि आये । पवन तनय के पद सिर नाए ।7।
बार बार स्तुति कर नाना । निर्मल नाम धरा हनुमाना ।8।
सकल ऋषिन मिलि अस मत ठाना । दीन बताये लाल फल खाना ।9।
सुनत वचन कपि मन हर्षाना । रवि रथ उदय लाल फल जाना ।10।
रथ समेत कपि कीन्ह अहारा । सूर्य बिना भयो अति अँधियारा ।11।
विनय तुम्हार करैं अकुलाना । तब कपीश की स्तुति ठाना ।12।
सकल लोक वृतांत सुनावा । चतुरानन तब रवि उगिलावा ।13।
कहा बहोरि सुनहु बलशीला । रामचन्द्र करिहैं बहु लीला ।14।
तब तुम उनकर करब सहाई । अबहि बसहु कानन में जाई ।15 ।
असि कहि विधि निज लोक सिधारे । मिले सखा संग पवन कुमारे ।16।
खेलें खेल महा तरु तोड़ें । ढेर करें बहु पर्वत फौड़ें ।17।
जेहि गिरि चरण देहि कपि धाई । गिरि समेत पातालाहिं जाई ।18।
कपि सुग्रीव बाली की त्रासा । निरखत रहे राम मगु आशा ।19।
मिले राम तँह पवन कुमारा । अति आनंद सप्रेम दुलारा ।20।
मणि मुंदरी रघुपति सो पाई । सिया खोज ले चलि सिर नाई ।21।
सत जोजन जल निधि विस्तारा । अगर अपार देवतन हारा ।22।
जिमि सर गोखुर सरिस कपीशा । लाँघि गए कपि कहि जगदीशा ।23।
सीता चरण शीश तुम नाए । अजर अमर के आशिष पाए ।24।
रहे दनुज उपवन रखवारी । एक से एक महाभट भारी ।25।
तिन्हे मारि पुनि कहेउ कपीसा । दहेऊ लंक कोप्यो भुज बीसा ।26।
सिया बोध दै पुनि फिर आये । रामचंद्र के पाद सिर नाए ।27।
मेरु उपार आप छिन माहीं । बांध्यो सेतु निमिष एक मांही ।28।
लक्ष्मण शक्ति लागी जबहीं । राम बुलाय कहा पुनि तबहीं ।29।
भवन समेत सुषेण को लाये । तुरत संजीवन को पुनि धाये ।30।
मग मँह कालनेमि को मारा । अमिट सुभट निशचर संहारा ।31।
आनि संजीवन गिरि समेता । धरि दीन्हो जंह कृपानिकेता ।32।
फनपति केर शोक हरि लीन्हा । हरषि सुरन सुर जय जय कीन्हा ।33।
अहिरावन हरि अनुज समेता । लै गयो तहाँ पाताल निकेता ।34।
जहां रहे देवी अस्थाना । दीन चहै बलि काढि कृपाना ।35।
पवन तनय प्रभु कीन गुहारी । कटक समेत निशाचर मारी ।36।
रीछ कीशपति सबै बहोरी । राम लखन कीने एक ठौरी ।37।
सब देवतन की बंदि छूडाये। सो कीरति नारद मुनि गाये ।38।
अक्षय कुमार को मार संहारा । लूम लपेटी लंक को जारा ।39।
कुम्भकरण रावण को भाई । ताहि निपाति कीन्ह कपिराई ।40।
मेघनाद पर शक्ति मारा । पवन तनय सब सो बरियारा ।41।
तंहा रहे नारान्तक जाना । पल में हते ताहि हनुमाना ।42।
जंह लगि मान दनुज कर पावा । पवन तनय सब मारि नसावा ।43।
जय मारुत सूत जय अनुकूला । नाम कृशानु शोक सम तूला ।44।
जंह जीवन पर संकट होई । रवि तम सम सो संकट खोई ।45।
बंदी परै सुमरि हनुमाना । संकट कटे धरे जो ध्याना ।46।
यम को बांधि वाम पाद लीन्हा । मारुतसुत व्याकुल सब कीन्हा ।47।
सो भुज बल को दीन्ह कृपाला । तुम्हरे होत मोर यह हाला ।48।
आरत हरण नाम हनुमाना । सादर सुरपति कीन्ह बखाना ।49।
संकट रहे न एक रती को । ध्यान धरे हनुमान जती को ।50।
धावहु देख दीनता मोरी । कहौ पवनसुत युग कर जोरी ।51।
कपिपति बेगि अनुग्रह करहूँ । आतुर आय दुसह दुःख हरहूँ ।52।
राम सपथ मैं तुमहि सुनावा । जवन गुहार लाग सिय जावा ।53।
शक्ति तुम्हार सकल जग जाना । भव बंधन भंजन हनुमाना ।54।
यह बंधन कर केतिक बाता । नाम तुम्हार जगत सुख दाता ।55।
करौ कृपा जय जय जग स्वामी । बारि अनेक नमामि नमामी ।56।
भौमवार करि होम विधाना । धूप दीप नैवेद्य सुजाना ।57।
मंगल दायक को लौ लावे । सुर नर मुनि वांछित फल पावै ।58।
जयति जयति जय जय जग स्वामी । समरथ पुरुष सुअंतर जामी ।59।
अंजनि तनय नाम हनुमाना । सो तुलसी के प्राण समाना ।60।
जय कपीश सुग्रीव तुम, जय अंगद हनुमान ।

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