क्या आप को पता है रत्नों का इतिहास क्या है !! ~ Balaji Kripa

Monday, 31 August 2015

क्या आप को पता है रत्नों का इतिहास क्या है !!

रत्नों का इतिहास अत्यंत ही प्राचीन है। भारत की तरह अन्य देशों में भी इनके जन्म सम्बंधी अनगिनत कथाएं प्रचलित हैं। हमारे देश में इस तरह की जो कथाएं विख्यात हैं, वे पुराणों से ली गई हैं। पुराणों में रत्नों की उत्पत्ति से सम्बंधित अनेक कथाएँ हैं। 'अग्निपुराण' के अनुसार - महाबली असुरराज वृत्रासुर ने देवलोक पर आक्रमण किया। तब भगवान विष्णु की सलाह पर इन्द्र ने महर्षि दधीचि से वज्र बनाने हेतु उनकी हड्डियों का दान मांगा। फिर इसी वज्र से देवताओं ने वृत्रासुर का संहार किया। अस्त्र (वज्र) निर्माण के समय दधीचि की अस्थियों के, जो सूक्ष्म अंश पृथ्वी पर गिरे, उनसे तमाम रत्नों की खानें बन गईं।इसी तरह एक दूसरी कथा है।  समुद्र मंथन के समय जब अमृत कलश प्रकट हुआ तो असुर उस अमृत को लेकर भाग गए। देवताओं ने उनका पीछा किया। आपस में छीना-झपटी हुई और इस प्रक्रिया में अमृत की कुछ बूंदें छलक कर पृथ्वी पर जा गिरीं। कालांतर में अमृत की ये बूंदें अनगिनत रत्नों में परिवर्तित हो गईं।तीसरी कथा राजा बलि की है। जब वामन रूपी श्री विष्णु ने बलि से साढ़े तीन पग पृथ्वी मांगी तो उसने इसे देना स्वीकार कर लिया। तब भगवान विष्णु ने विराट स्वरूप धारण कर तीन पगों में तीनों लोकों को नाप लिया और आधे पग के लिए उसके शरीर की मांग की थी। राजा बलि ने अपना सम्पूर्ण शरीर वामन को समर्पित कर दिया। भगवान विष्णु के चरणस्पर्श से बलि रत्नमय और वज्रवत् हो गया। इसके बाद इन्द्र ने उसे अपने वज्र से पृथ्वी पर मार गिराया। पृथ्वी पर खंड- खंड होकर गिरते ही बलि के शरीर के सभी अंगों से अलग-अलग रंग, रूप व गुण के रत्न प्रकट हुए। भगवान शिव ने उन रत्नों को अपने चार त्रिशूलों पर स्थापित करके फिर उन पर नौ ग्रहों एवं बाहर राशियों का प्रभुत्व स्थापित किया। इसके बाद उन्हेँ पृथ्वी पर चार दिशाऑं में गिरा दिया। फलस्वरूप पृथ्वी पर विभिन्न रत्नों की खानें उत्पन्न हुईं।हो सकता आप इन कथाओ को कपोल कल्पना, झूठी बोले लेकिन इस बात से आप इंकार नहीं कर सकते कि प्राचीनकाल में लोगों को इन रत्नों के रूप, गुण व उपयोग के बारे में अधिक ज्ञान था। केवल इतना ही नहीं, वे इन रत्नों का उत्पादन प्राकृतिक व कृत्रिम तौर पर करने लगे थे। इस सच्चाई को आज के आधुनिक इतिहासकार भी मानते हैं। शोध कार्य में लगे वैज्ञानिक भी इस बात से सहमत हैं।

क्या आप जानते है ग्रन्थों के अनुसार रत्न क्या है !!
प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार उच्च कोटि में 84 प्रकार के रत्न आते हैं। इनमें से बहुत से रत्न अब अप्राप्य हैं तथा बहुत से नए-नए रत्नों का आविष्कार भी हुआ है। रत्नों में मुख्यतः नौ ही रत्न ज़्यादा पहने जाते हैं। वर्तमान समय में प्राचीन ग्रंथों में वर्णित रत्नों की सूचियाँ प्रामाणिक नहीं रह गई है। रत्नों के नामों की सूची निम्न प्रकार है -
ग्रंथो के अनुसार रत्नों की सूची-
अजूबा रत्न      अहवा रत्न      अबरी रत्न      अमलिया रत्न      अलेमानी रत्न     उपल रत्न     उदाऊ रत्न     एक्वामेरीन रत्न  कर्पिशमणि रत्न     कटैला रत्न     कसौटी रत्न     कांसला रत्न     कुरण्ड रत्न     क्राइसोबेरिल रत्न     गुदड़ी रत्न     गोदन्ती रत्न     गोमेद रत्न     गौरी रत्न     चकमक रत्न     चन्द्रकांत रत्न  चित्तो रत्न     चुम्बक रत्न     जजेमानी रत्न     जबरजद्द रत्न     ज़हर मोहरा रत्न     झरना रत्न     टेढ़ी रत्न   डूर रत्न     तिलियर रत्न     तुरमली रत्न     तुरसावा रत्न     तृणमणि रत्न       दाँतला रत्न     दाने फिरग रत्न दारचना रत्न     दुर्रेनजफ़ रत्न     धुनला रत्न     नरम रत्न     नीलम रत्न     नीलोपल रत्न     पनघन रत्न     पारस रत्न     पुखराज रत्न     पन्ना रत्न     पाइरोप रत्न     फ़ाते ज़हर रत्न     फ़ीरोज़ा रत्न     बसरो रत्न
बांसी रत्न     बेरुंज रत्न     मकड़ी रत्न     मरगज रत्न     माक्षिक रत्न     माणिक्य रत्न     मासर मणि रत्न     मूँगा रत्न     मूवेनजफ रत्न     मोती रत्न     रक्तमणि रत्न     रक्ताश्म रत्न     रातरतुआ रत्न     लहसुनिया रत्न     लालड़ी रत्न     लास रत्नलूधिया रत्न     शेष मणि रत्न     शैलमणि रत्न     शोभामणि रत्न    संगमरमर रत्न     संगमूसा रत्न     संगसितारा रत्न     संगिया रत्न   संगेसिमाक रत्न     संगेहदीद रत्न     सिन्दूरिया रत्न     सिफरी रत्न     सींगली रत्न     सीजरी रत्न     सुनहला रत्न    सुरमा रत्न  सूर्यकान्त रत्न     सेलखड़ी रत्न     सोनामक्खी रत्न     स्पाइनेल रत्न     स्फटिक रत्न     हकीक रत्न     हजरते ऊद रत्न     हजरते बेर रत्न    हरितमणि रत्न     हरितोपल रत्न     हीरा रत्न        पुखराज के विभिन्न रंग

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