क्या आप जानते है यंत्रों की उपयोगिता क्या है !! ~ Balaji Kripa

Saturday, 1 August 2015

क्या आप जानते है यंत्रों की उपयोगिता क्या है !!




यंत्र भारतीय ज्योतिष का अभिन्न अंग हैं। ये वो शक्तिपुंज हैं जिनसे सकारात्मक ऊर्जा पायी जा सकती है। यंत्रों पर बने चिन्ह ईश्वरीय शक्तियों के परिचायक होते हैं, इनके साथ जब विशिष्ट मंत्रों के उच्चारण के साथ ईश्वर से प्रार्थना की जाती है। इन यंत्रों और मंत्रों की स्वर लहरियों के प्रयोग से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और फलस्वरूप इच्छित फल की प्राप्ति शीघ्र होती है।यंत्र मानव को ईश्वरीय शक्तियों के सम्मुख खड़ा करने के उपकरण हैं। ये हमारे चैतन्य को जागृत करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं। इसमें बने चित्र आध्यात्मिक शक्तियों से हमारा साक्षात्कार करवाते हैं। जिससे हममें सफलता के प्रति आग्रह बढ़ता है, ऊर्जा सकारात्मक रूप से हमारे तय लक्ष्यों में काम आती है। और ईश्वरीय आशीर्वाद स्वरूप सफलता, समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य शीघ्र ही मिलते हैं। विभिन्न ईश्वरीय शक्तियों को पाने के लिए इनकी पूजा और स्थापना की जाती है। कुछ यंत्र विशेष रूप से व्यवसाय में प्रगति के लिए आफिस, फैक्ट्री या कार्यस्थल पर स्थापित किए जाते हैं, तो कुछ यंत्र विशेष रूप से पारिवारिक सुख, शान्ति, समृद्धि और समन्वय बढ़ाने के लिए घर में स्थापित किए जाते हैं।

यंत्रों के साथ मंत्रों की उपयोगिता-
यंत्र से प्राप्त होने वाले शुभ फलों में इनसे संबंद्ध मंत्रों की भूमिका भी बराबर की है। बिना मंत्रों के यंत्रा उसी तरह बेजान हैं जिस तरह प्राणों के बिना शरीर । इसलिए यंत्रों के साथ साथ मंत्रों की सही जानकारी होना बेहद आवश्यक है। मंत्रों की जानकारी ही काफी नहीं होती बल्कि सही लय ताल के साथ उच्चारण विधि भी जाना बेहद आवश्यक होता है। बिना उच्चारण विधि के मंत्र निष्फल रहते हैं, यथेच्छ लाभ मिल पाना संभव नहीं होता है। इसलिए यंत्रों की स्थापना योग्य व्यक्ति के द्वारा करवाने पर ही पूर्ण लाभ की प्राप्ति होती है।
यंत्रों में छिपे हैं गूढ़ रहस्य-
यंत्रों पर विभिन्न आकृतियाँ, अंक और चित्र अंकित होते हैं। हर चित्र, अंक और आकृति का अपना महत्व है। हर आकृति अलग अलग भावों का प्रतिनिधित्व करती है। यंत्रों में शाब्दिक मंत्रों और अंकों के अतिरिक्त चन्द्रमा, सूर्य, मछली, घट और देवताओं की आकृतियाँ, त्रिकोण, वर्ग, आयत, बिन्दु, रेखा, स्वास्तिक, वृत्त, कमल पुष्प के दल, षट्कोण आदि चिन्ह अंकित होते हैं। इनमें मुख्यतया काम में आने वाले चिन्हों का अर्थ इस प्रकार है।
ऊँ ; ॐ - परम् ब्रह्म, रचनात्मक संसार, परम् लक्ष्य, सत्य, चेतना, परम् आनन्द,

कमल दल - दलों की अलग अलग संख्या सुषुम्ना नाड़ी के अलग अलग चक्रों की शक्ति ; जो कि शरीर के शक्तिपुंज हैं 
तिर्यक रेखा - पंचमहाभूतों में से एक वायु तत्व की शक्ति
आड़ी रेखा - पंचमहाभूतों में से एक जल तत्व की शक्ति
खड़ी रेखा - पंचमहाभूतों में से एक अग्नि तत्व की शक्ति
वर्ग - पंचमहाभूतों में से एक पृथ्वी तत्व की शक्ति
वृत्त - पंचमहाभूतों में से एक आकाश तत्व की शक्ति
अधोमुख त्रिकोण - त्रिदेवों में शिव की शक्ति, आध्यात्मिक अभिालाषा, अनि तत्व, ब्रह्माण्ड में स्थिरता देने वाला तत्व स्थिरता
ऊर्ध्वमुख त्रिकोण - शक्ति स्वरूप, ब्रह्माण्ड में रचनात्मकता देने वाला तत्व, जल तत्व
स्वास्तिक - समृद्धि, कल्याण, आध्यात्मिक विजय, शुभता,
बिन्दु - ब्रह्माण्ड का प्रारंभिक बिन्दु
षट्कोण - ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कारक शिव एवम् शक्ति दोनों तत्वों का एकरूप शक्तिपुंज
यंत्रों को स्थापित करने की साधारण विधि-
1. जहां यंत्र को स्थापित करना है, उस जगह को सावधानीपूर्वक स्वच्छ करें।
2. उस स्थान पर एक पवित्र वेदी स्थापित करें, या नया सफेद, पीला या लाल सूती वस्त्र बिछाएं।
3. यंत्र की स्थापना पूर्वी दीवार या फिर उत्तरी दीवार पर करें।
4. यंत्र को दूसरे व्यक्ति के हाथ लगने से रोकें। पवित्रता पूर्वक रखें।
5. यंत्र की स्थापना के समय ऐसे किसी व्यक्ति को वहां आने से रोकें जो आपके प्रति सकारात्मक सोच नहीं रखता है, या किसी भी प्रकार का द्वेष रखता है।
6. यंत्र स्थापना के समय सही मुहुर्त जरूर देखें।
7. यंत्र स्थापना पर यंत्र को गंगा जल से धोकर साफ करें, सूती पवित्र वस्त्र से पौंछें ।
8. यंत्र के चारों कोनों पर रौली और चन्दन से तिलक लगाएं।
9. मिठाई , मिश्री और अन्य फलादि से प्रसाद लगाएं।
10. धूप और दीपक जलाकर यंत्र से संबंधित मंत्रों का जाप करें।
11. जिस उद्देश्य से यंत्र की स्थापना की गई है, वो प्रार्थना पूरी आस्था से ईश्वर से करें।
12. पूजा समाप्ति पर सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करें। उसके बाद उस व्यक्ति से आशीर्वाद लें, जो आपके प्रति पूर्णतः सद्भाव रखता है।
13 अपने मन को नकारात्मकता से दूर रखें।


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