September 2015 ~ Balaji Kripa

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May Baba fullfill all the wishes of the Devotees.

जय श्रीराम

भगवान रामभक्त हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। जहां मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

ॐ हं हनुमंतये नम:

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान म‍ंदिर में जाकर रामभक्त हनुमान का गुणगान करें और उनसे अपने पापों के लिए क्षमायाचना करें।

Wednesday, 30 September 2015

क्या आप को पता है नवरात्रि में कैसे करें देवी मां की पूजा !



नवरात्रि आराधना का श्रेष्ठ फल पाने का अवसर होता है। हर राशि के लोगों के लिए नवरात्रि में अलग-अलग देवी की उपासना बताई गई है। जिससे वे अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए सही पूजा पाठ कर सकें।हर राशि के ग्रह और नक्षत्रों के आधार पर उनकी अलग-अलग देवियां मानी गई हैं। दश महाविद्या के मुताबिक हर राशि के लिए एक अलग महाविद्या की उपासना करने से, उनके बीज मंत्रों के जप से किसी भी काम में आसानी से सफलता पाई जा सकती है।
मेष- मेष राशि के जातक शक्ति उपासना के लिए द्वितीय महाविद्या तारा की साधना करें। ज्योतिष के अनुसार इस महाविद्या का स्वभाव मंगल की तरह उग्र है। मेष राशि वाले महाविद्या की साधना के लिए इस मंत्र का जप करें।
मंत्र-ह्रीं स्त्रीं हूं फट्

वृषभ- वृषभ राशि वाले धन और सिद्धि प्राप्त करने के लिए श्री विद्या यानि षोडषी देवी की साधना करें और इस मंत्र का जप करें।
मंत्र-ऐं क्लीं सौ:

मिथुन- अपना गृहस्थ जीवन सुखी बनाने के लिए मिथुन राशि वाले भुवनेश्वरी देवी की साधना करें। साधना मंत्र इस प्रकार है। 

मंत्र- ऐं ह्रीं

कर्क- इस नवरात्रि पर कर्क राशि वाले कमला देवी का पूजन करें। इनकी पूजा से धन व सुख मिलता है। नीचे लिखे मंत्र का जप करें।
मंत्र- ऊं श्रीं

सिंह – ज्योतिष के अनुसार सिंह राशि वालों को मां बगलामुखी की आराधना करना चाहिए। जिससे शत्रुओं पर विजय मिलती है।
मंत्र- ऊं हृी बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिहृं कीलय कीलय बुद्धिं विनाशाय हृी ऊं स्वाहा
कन्या- आप चतुर्थ महाविद्या भुवनेश्वरी देवी की साधना करें आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।
मंत्र- ऐं ह्रीं ऐं


तुला- तुला राशि वालों को सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए षोडषी देवी की साधना करनी चाहिए।
मंत्र- ऐं क्लीं सौ:

वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले तारा देवी की साधना करें। इससे आपको शासकीय कार्यों में सफलता मिलेगी।
मंत्र- श्रीं ह्रीं स्त्रीं हूं फट्

धनु – धन और यश पाने के लिए धनु राशि वाले कमला देवी के इस मंत्र का जप करें।
मंत्र- श्रीं

मकर- मकर राशि के जातक अपनी राशि के अनुसार मां काली की उपासना करें।
मंत्र- क्रीं कालीकाये नम:

कुंभ- कुंभ राशि वाले भी काली की उपासना करें इससे उनके शत्रुओं का नाश होगा।
मंत्र- क्रीं कालीकाये नम:
 

मीन- इस राशि के जातक सुख समृद्धि के लिए कमला देवी की उपासना करें।
मंत्र- श्री कमलाये नम:

क्या आप को पता है आत्मा और मन की सफाई कैसे करे !!



हम घर और आसपास की सफाई की बात तो कर लेते हैं लेकिन आत्मा और मन की सफाई कैसे होगी, इस पर हमारा ध्यान कम ही जाता है। आत्मा और मन की सफाई के लिए ज्ञान स्नान की जरूरत है। बिना ज्ञान स्नान के कभी भी आत्मा और मन की सफाई नहीं हो सकती है। ज्ञान स्नान का मतलब केवल वेद, ग्रंथ, धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तकों का पढ़ लेना नहीं है बल्कि उसे जीवन में अभ्यास कर उतारने की जरूरत है। हर वक्त अपने मन के संकल्पों पर पहरा देना पड़ेगा,उसकी ज्ञान रूपी झाड़ू लगाकर सफाई करनी पड़ेगी तब जाकर इसकी धीरे-धीरे सफाई होने लगेगी। जैसे-जैसे मन की सफाई होगी, आत्मा में निखार आएगा और मन स्वस्थ, खुश और शक्तिशाली होता जाएगा। इसके लिए ज्ञान का सान्निध्य भी जरूरी है। जितना हम परमात्मा के सान्निध्य में रहेंगे उतनी ही जल्दी परमात्मा की शक्तिशाली किरणों से हमारी अंतरात्मा का कीचड़ सूखेगा और हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगेगा। आत्मा और मन की सफाई के लिए ज्ञान स्नान करते रहना बेहद आवश्यक है। ज्ञान स्नान का मतलब केवल वेद, ग्रंथ, धार्मिक और आध्यत्मिक पुस्तकों को पढ़ लेना नहीं है बल्कि उसे जीवन में उतारने की जरूरत है। जब मन की सफाई होगी आत्मा में निखार आएगा और मन स्वस्थ रहेगा। विचार- जब कभी भी मन में किसी तरह का नकारात्मक और दुर्भावना पूर्ण विचार आए तो उसे ज्ञान की कसौटी पर उतारें।थोड़े धैर्य के साथ समय बिताएं। पूरी तरह सकारात्मक सोच के साथ काम करें। मन में आने वाले व्यर्थ और नकारात्मक संकल्पों का हमेशा आकलन कर अपने मन से ही दृढ़तापूर्वक संकल्प कर उस पर पाबंदियां लगाएं ताकि वह दुबारा प्रवेश ना कर सकें। जब कभी भी मन में किसी तरह का नकारात्मक और दुर्भावनापूर्ण विचार आए तो उसे ज्ञान की कसौटी पर उतारें। थोड़े धैर्य के साथ समय बिताएं। पूरी तरह सकारात्मक सोच के साथ काम करें। कर्मों पर निगरानी रखते हुए जब हम कर्म करेंगे तो व्यर्थ व बुरी चीजें मन में इकट्ठी नहीं हो पाएंगी। इससे धीरे-धीरे आत्मा शुद्ध, सात्विक, आनन्दमयी और सुखदायी बन जाएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण बन जाएगा। सद्गुणों की सुगंध हर किसी को मूल्यों से सुगन्धित करेगी। परमात्मा शिव की शक्तियां मन में प्रवेश होने लगेगी। सफाई- मन की सफाई के लिए ध्यान, राजयोग, ज्ञान का मनन, चिंतन और साधना पर ध्यान देना होगा। जितनी खतरनाक बाहर की गंदगी है उससे ज्यादा आंतरिक गंदगी है, जो जीवन को बर्बाद कर देती है। मनुष्य का यह प्रयास आत्मा की मलिनता को साफ कर देगा। जब मलिनता समाप्त हो जाएगी तो उससे सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास होने लगेगा। जब व्यक्ति देखेगा, बोलेगा, सोचेगा तो उसका दायरा सीमित न होकर विशाल हो जाएगा। हर कोई अपना लगेगा, सबका भला और शुभ सोचने की मशीनरी पूर्ण रूप से सही दिशा में काम करेगी। ज्ञान का तीसरा नेत्र खुल जाएगा और जीवन में सुख और शांति का विस्तार होगा। मन की सफाई के लिए ध्यान, राजयोग, ज्ञान का मनन, चिंतन और साधना पर ध्यान देना होगा। सही बात यह है कि जितनी खतरनाक बाहर की गंदगी है उससे ज्यादा आंतरिक गंदगी है,जो पूरे जीवन को बर्बाद कर देती है।

क्या आप को पता है हनुमान जी के चमत्कारी उपाय मंगलवार और शनिवार को किए जाने चाहिए।


यदि आप हनुमानजी के भक्त हैं तो आपके लिए मंगलवार और शनिवार बहुत खास दिन हैं। इन दो दिनों मे की गई हनुमान पूजा विशेष फल देने वाली होती है। बजरंग बली को प्रसन्न करने के लिए यहां 7 चमत्कारी उपाय बताए जा रहे हैं, जो कि मंगलवार और शनिवार को किए जाने चाहिए।
 

सुबह-सुबह पीपल के कुछ पत्ते तोड़ लें और उन पत्तों चंदन या कुमकुम से श्रीराम नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की एक माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
 

अगर आपको कड़ी मेहनत के बाद भी किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता नहीं मिल पा रही है तो किसी हनुमान मंदिर जाएं और नींबू का ये उपाय करें। उपाय के अनुसार अपने साथ एक नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में हनुमानजी के सामने नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमानजी के मंत्रोंका जप करें। मंत्र जप के बाद हनुमानजी से सफलता दिलवाने की प्रार्थना करें और वह नींबू अपने साथ रखकर कार्य करें। मेहनत के साथ ही कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
 

यदि आपके कार्यों में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या धन प्राप्त करने में देरी हो रही है या किसी की बुरी नजर बार-बार लगती है तो नारियल का यह उपाय करें। उपाय के अनुसार किसी सिद्ध हनुमान मंदिर में जाएं और अपने साथ एक नारियल लेकर जाएं। मंदिर में हनुमानजी की प्रतिमा के सामने नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके साथ हनुमान चालीसा का जप करते रहें। सिर पर वारने के बाद नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।
 

यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो रात के समय दीपक का यह उपाय करें। रात में किसी हनुमान मंदिर जाएं और वहां प्रतिमा के सामने में चौमुखा दीपक लगाएं। चौमुखा दीपक यानी दीपक चार ओर से जलाना है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा प्रतिदिन करेंगे तो बहुत ही जल्द बड़ी- बड़ी परेशानियां भी आसानी से दूर हो जाएंगी।
 

यदि आपके कार्यों में परेशानियां अधिक आ रही हैं और बनते हुए काम भी बिगड़ जाते हैं तो शनिवार को यह उपाय करें। उपाय के अनुसार आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान आदि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद घर से एक नींबू अपने साथ लें और किसी चौराहे पर जाएं। अब वहां नींबू के दो बराबर टुकड़ें करें। एक टुकड़े को अपने से आगे की ओर फेंकें और दूसरे टुकड़े को पीछे की ओर। इस समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद आप अपने काम पर जा सकते हैं या पुन: घर लौटकर आ सकते हैं।
 

हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
 

हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

Tuesday, 29 September 2015

क्या आप को पता है कैसे हनुमान जी को उनकी अदभुत शक्तियों का स्मरण !!


बचपन में हनुमान जी बड़े ही नटखट थे। प्रायः वे ऋषियों के आसन उठाकर पेड़ पर टांग देते, उनके कमंडल का जल गिरा देते, उनके वस्त्र फाड़ डालते, कभी उनकी गोद में बैठकर खेलते और एकाएक उनकी दाढ़ी नोचकर भाग खड़े होते। उन्हें कोई रोक नहीं सकता था। अंजना और केसरी ने कई उपाय किए परंतु हनुमान जी राह पर नहीं आए। अंत में ऋषियों ने विचार करके यह निश्चय किया कि हनुमान को अपने बल का घमंड है अतः उन्हें अपने बल भूलने का शाप दिया जाए और जब तक कोई उन्हें उनके बल का स्मरण नहीं कराएगा वह भूले रहेंगे। केसरी ने हनुमान को सूर्य के पास विद्याध्ययन के लिये भेजा और वह शीघ्र ही सर्वविद्या पारंगत होकर लौटे।सीता का पता लगाने के समय जाम्बवन्त के याद दिलाने पर उन्हें अपनी अपार शक्ति की पुनः याद आ गई। सीता माता की खोज में वानरों का एक दल दक्षिण तट पे पँहुच गया। मगर इतने विशाल सागर को लांघने का साहस किसी में भी नहीं था। स्वयं हनुमान भी बहुत चिन्तित थे कि कैसे इस समस्या का समाधान निकाला जाये। उसी समय जामवन्त और बाकी अन्य वानरों ने हनुमान को उनकी अदभुत शक्तियों का स्मरण कराया। और उन्होंने समुद्र को लांघ कर अशोक वाटिका में सीता जी का पता लगाया तथा लंका दहन किया। उनका बल पौरुष देखकर सीताजी को बड़ा संतोष हुआ और उन्होंने हनुमानजी को अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के स्वामी होने का वरदान दिया। इस प्रकार हनुमान जी सर्वशक्तिमान देवता बने और श्री राम की सेवा में रत रहे।हनुमान जी अपने भक्तों के संकट क्षण में हर लेते हैं। वह शिवजी के समान अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हीं की भांति अपने उपासकों को भूत-पिशाच के भय से मुक्त रखते हैं। चाहे कैसे भी दुर्गम कार्य हैं उनकी कृपा से सुगम हो जाते हैं। उनकी उपासना से सारे रोगों और सभी प्रकार के कष्टों का निवारण हो जाता है।

क्या आप को पता है समस्त कष्टों का निवारण करें हनुमान यंत्र !!


समस्त कष्टों के निवारण के लिए हनुमान जी को यंत्र साधना के द्वारा भी प्रसन्न किया जा सकता है। क्योंकि इनमें स्वयं हनुमान जी विराजमान रहते हैं। इसके लिए प्रातः नित्यकर्मों से निवृत होकर एवं स्नान करने के बाद लाल वस्त्र पहनें। तत्पश्चात कुश या ऊन के आसन पर बैठकर हनुमान जी की मूर्ति पर या यंत्र को सामने रखें और सिंदूर, चावल, लाल पुष्प, धूप, दीप आदि से पूजन करें। इसके अलावा बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।

फिर पुष्प हाथ में लेकर निम्न श्लोक पढ़ें-

अतुलित बलधामं हेम शैलाभदेहं, दनुज-वन कृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।
सकल गुणानिधानं वानराणामधीशं, रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि॥


इसके पश्चात हनुमान जी को पुष्प अर्पित कर दें। अब हनुमान जी का ध्यान करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करें।अंत में लाल चंदन की माला से 108 बार 'हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्' मंत्र का नित्य जाप करें।

Monday, 28 September 2015

जानिए, ऐसी ही कुछ और वस्तुओं के बारे में जो शकुन-अपशकुन की तरफ इशारा करती हैं :::-


1- अगर कपड़े पहनते समय कोट या शर्ट के बटन गलत लग जाएं तो माना जाता है कि इससे बनते काम बिगड़ जाते हैं। वहीं अगर रास्ते में गिरा हुआ बटन मिल जाए तो यह इशारा नए दोस्त बनने की तरफ है।

2- कहा जाता है कि पर्स कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए। कपड़े की हर जेब में पैंसे रखें। यह एक अच्छा शकुन है।

3- दूध का उबलकर गिरना शुभ माना जाता है। वहीं दूध का बिखर जाना अशुभ संकेत है। यह किसी दुर्घटना की ओर संकेत करता है।

4- चाकू के बिना रसोई नहीं चल सकती है इसलिए इससे कई शकुन-अपशकुन जुड़े हैं। खाने की मेज पर अगर चाकू क्रॉस करके रखा गया है तो यह अशुभ संकेत है। चाकू का मेज से गिरना भी शुभ नहीं माना जाता।

5- चाबियों का सीधा संबंध घर और गृहणी से है। अगर गृहणी के पास ऐसा चाबियों का गुच्छा है जिसमें बार-बार सफाई के बाद भी जंग लग जाता है तो इसका मतलब उसे धन प्राप्त होने वाला है। बच्चों के तकिए के नीचे चाबियों का गुच्छा रखने से उन्हें रात को बुरे सपने नहीं डराते।

6- आटे का संबंध घर की रसोई से होता है अगर आटा गूंथते समय थोड़ा सा आटा बाहर गिर जाए तो इसका मतलब है कि आपके घर कोई मेहमान आने वाला है। यह एक अच्छा संकेत है।

7- घर में टूटा हुआ आईना रखना अपशकुन माना जाता है। अगर हाथ से छूटकर आईना टूट जाए तो यह भी अपशकुन की ओर संकेत करता है।

8- कहा जाता है कि रुई एक अच्छा शकुन है। रुई अगर किसी व्यक्ति के कपड़ों से चिपकी हुई मिले तो इसका मतलब है कि उस व्यक्ति को कहीं से शुभ समाचार मिलने वाला है।
 

9- सुबह-सुबह पानी या दूध से भरी हुई बाल्टी देखना अच्छा शकुन माना जाता है। कहा जाता है कि भरी बाल्टी देखने से काम पूरे होते हैं वहीं खाली बाल्टी देखना अपशकुन समझा जाता है।

10- झाड़ू को लक्ष्मी जी का प्रतीक माना जाता है। झाड़ू पर पांव रखना मतलब आई हुई लक्ष्मी को ठुकराना है, इसलिए यह एक अपशकुन है। दिवाली के दिन नया झाड़ू लेना शुभ संकेत है।

क्या आप को पता है ये उपाय,घर की कलह से बचाते है !!


घरों में छोटा-मोटा तनाव तो चलता है लेकिन जब यह हद से ज्यादा बढ़ जाए तो जीवन की शांति चली जाती है। कई बार लोग तनाव, कलह और झगड़ों से तंग आकर गलत कदम भी उठा लेते हैं। कई बार इनकी वजह आपसी समझ नहीं बल्कि घर का वास्तु दोष या अन्य दोष होता है। आइए जानें क्या करें कलहपूर्ण वातावरण से छुटकारा पाने के लिए !

सरल उपाय-

घर के पूजा स्थान पर घी का पंचमुखी दीपक हर मंगलवार जलाएं। कपूर और अष्टगंध की सुगंध प्रतिदिन घर में फैलाएं।
गुरुवार और रविवार को गुड़ और घी मिलाकर उसे कंडे पर जलाएं, इससे वातावरण सुगंधित होगा।
रात्रि में सोने से पहले पीतल के बर्तन में घी में भीगा हुआ कपूर जला दें। इसे तनावमुक्ति होगी और गहरी नींद आएगी। शरीर को हमेशा साफ-सुथरा बनाए रखें।
हफ्ते में 1 बार किसी भी दिन घर में कंडे जलाकर गूगल की धूनी देने से गृहकलह शांत होता है।

क्या आप को पता है क्यों करते हैं श्राद्ध, जानिए पितृपूजा का महत्व !!



श्राद्ध पक्ष का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। प्राचीन सनातन धर्म के अनुसार हमारे पूर्वज देवतुल्य हैं  और इस धरा पर हमने जीवन प्राप्त किया है और जिस प्रकार उन्होंने हमारा लालन-पालन कर हमें  कृतार्थ किया है उससे हम उनके ऋणी हैं। समर्पण और कृतज्ञता की इसी भावना से श्राद्ध पक्ष प्रेरित  है, जो जातक को पितर ऋण से मुक्ति मार्ग दिखाता है। 
 

गरूड़ पुराण के अनुसार पितर ऋण मुक्ति मार्ग -

कल्पदेव कुर्वीत समये श्राद्धं कुले कश्चिन्न सीदति। आयुः पुत्रान् यशः स्वर्गं कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम्।।  पशून् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात्। देवकार्यादपि सदा पितृकार्यं विशिष्यते।। देवताभ्यः  पितृणां हि पूर्वमाप्यायनं शुभम्।।

अर्थात ‘समयानुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु,  पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी  पितृकार्य का विशेष महत्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है।’

'श्राद्ध' शब्द 'श्रद्धा' से बना है, जो श्राद्ध का प्रथम अनिवार्य तत्व है अर्थात पितरों के प्रति श्रद्धा तो  होनी ही चाहिए। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय  पक्ष कहलाता है। इस अवधि के 16 दिन पितरों अर्थात श्राद्ध कर्म के लिए विशेष रूप से निर्धारित  किए गए हैं। यही अवधि पितृ पक्ष के नाम से जानी जाती है।

क्यों की जाती है पितृपूजा :-


पितृ पक्ष में किए गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है  तथा कर्ता को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। आत्मा की अमरता का सिद्धांत तो स्वयं भगवान श्री  कृष्ण गीता में उपदेशित करते हैं। आत्मा जब तक अपने परम-आत्मा से संयोग नहीं कर लेती, तब  तक विभिन्न योनियों में भटकती रहती है और इस दौरान उसे श्राद्ध कर्म में संतुष्टि मिलती है।शास्त्रों में देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी कहा गया है। यही कारण है  कि देवपूजन से पूर्व पितर पूजन किए जाने का विधान है।

श्राद्ध पक्ष में यह दान देने से पितृ होंगे प्रसन्न !!
 

विष्णुपुराण में कहा गया है- श्रद्धा तथा भक्ति से किए गए श्राद्ध से पितरों के साथ ब्रह्मा, इन्द्र, रुद्र दोनों अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, आठों बसु, वायु, विश्वेदेव, पितृगण, पक्षी, मनुष्य, पशु, सरीसृप, ऋषिगण तथा अन्य समस्त भूत प्राणी तृप्त होते हैं। श्राद्ध पक्ष के दौरान हर गृहस्थ को द्रव्य से देवताओं को, कव्य से पितरों को, अन्न से अपने बंधुओं, अतिथियों तथा भिक्षुओं को भिक्षा देकर प्रसन्न करें। इससे उसे यश, पुष्टि तथा उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है।गौ-दान, भूमि दान या इनके खरीदने के लिए धन देने का विधान है। दानों में गौ-दान, भूमि दान, तिल दान, स्वर्ण दान, घृत दान, धान्य दान, गुड़ दान, रजत दान, लवण दान। भोजन-दा‍नादि कृत्य के पश्चात 'ॐ विष्णवे नम:, ॐ विष्णवे नम:, ॐ विष्णवे नम:' कहकर समापन करें।

Saturday, 26 September 2015

क्या आप को पता है इस वर्ष 15 दिन का होगा श्राद्ध पक्ष, सूर्य-राहु की युति से बनेगा ग्रहण योग !


कल (28 सितंबर, सोमवार) से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है, जो 12 अक्टूबर, सोमवार तक रहेगा। हिंदू धर्म के अनुसार, इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाता है। आमतौर पर श्राद्ध पक्ष 16 दिनों का होता है, लेकिन इस बार प्रतिपदा (प्रथम) तिथि क्षय होने के कारण यह 15 दिन का रहेगा। श्राद्ध पक्ष के दौरान अनेक शुभ योग बनेंगे।

ग्रहण में शुरू होगा श्राद्ध पक्ष -
इस बार श्राद्धपक्ष की शुरूआत चंद्रग्रहण में होगी और सूर्य व राहु की युति होने से 15 दिन तक ग्रहण योग रहेगा। भारतीय समय के अनुसार, 28 सितंबर की सुबह चंद्रग्रहण का प्रारंभ सुबह 07.40 से होगा, जो 08.53 तक रहेगा। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई न देने से जनसामान्य पर इसका कोई बुरा असर नहीं रहेगा। पहले भी बना था ऐसा योग 1977 में भी 27 सितंबर, मंगलवार को चंद्रग्रहण के साथ पितृ पक्ष की शुरूआत हुई थी, साथ ही उस समय सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्यग्रहण का योग भी बना था। उस समय श्राद्ध पक्ष में दो ग्रहण होने से उसे अशुभ माना गया था, जबकि इस बार श्राद्ध पक्ष में तर्पण, श्राद्ध आदि से शुभ फल प्राप्त होंगे।

इस बार 19 साल बाद बनेगा गजछाया योग -
इस बार 19 साल बाद श्राद्ध पक्ष में सूर्य व राहु की युति से गजछाया योग बन रहा है। इसके पहले 1996 में यह योग बना था। प्रमुख श्राद्ध ग्रंथ मदन पारीजात, कौस्तुभ, अग्नि, लिंग, मत्स्य, पद्म आदि पुराण के अनुसार श्राद्ध में जब सूर्य-केतु की युति होती है तो गजछाया योग बनता है। ऐसे योग में पितृकर्म (श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान) करने से उसका पांच गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस योग में पितरों के निमित्त श्राद्ध आदि करने से वे पूर्णतः तृप्त होंगे व श्राद्ध करने वाले को धन-धान्य, पुत्र-पौत्र, सुख-संपत्ति आदि का सुख प्राप्त होगा।
 

इस अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग भी -
श्राद्ध पक्ष के पहले दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। शुभ नक्षत्र व तिथि में श्राद्ध पक्ष की शुरू होना शुभ फल में वृद्धि करेगा। श्राद्ध पक्ष में 29 सितंबर तथा 3 अक्टूबर को अमृत सिद्धि योग बन रहा है। 11 अक्टूबर को दिन भर सर्वार्थ सिद्धि तथा रात में अमृत सिद्ध योग रहेगा। यह दिन पितृ पूजा के लिए विशेष रहेंगे।

इस बार वर्षों बाद पितृविसर्जन पर सोमवती का योग -
सालों बाद इस बार 12 अक्टूबर को पिृतविसर्जन अमावस्या पर सोमवती का संयोग बन रहा है। इस दिन कन्या राशि में चतुर्ग्रही योग रहेगा। हस्त नक्षत्र में चंद्रमा के साथ सूर्य का संयुक्त होना दिव्य योग बना रहा है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान करने से उन्हें विष्णु लोग की प्राप्ति होगी।

इस बार इसलिए खास है ये पितृ पक्ष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य व राहु पितृ दोष के प्रमुख कारण माने गए हैं। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य व राहु एक ही भाव में होते हैं या फिर किसी विशेष स्थिति में होते हैं तो उस व्यक्ति को पितृ दोष से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष की समस्याओं को कम करने के लिए श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण आदि किया जाता है। सूर्य को पितरों का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिषियों की मानें तो 28 सितंबर से शुरू हो रहे श्राद्ध पक्ष में पूरे समय सूर्य व राहु की युति रहेगी, जिसके कारण ग्रहण योग बनेगा। इसलिए इस दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए जाने उपाय विशेष फल देंगे। वर्तमान में ग्रहों की स्थिति भी पितृ दोष निवारण के लिए उपयुक्त बन रही है। इसलिए इस बार का श्राद्ध पक्ष पितरों को प्रसन्न करने वाला तथा श्राद्ध करने वाले को सुख-संपत्ति देने वाला रहेगा।

Wednesday, 23 September 2015

क्या आप को पता है जिस घर में ये चीजें हमेशा विद्यमान रहती हैं उस घर में दरिद्रता कभी नहीं आती !!


जिस घर में ये चीजें हमेशा विद्यमान रहती हैं उस घर में दरिद्रता कभी नहीं आती। आईए जानें कौन सी हैं वह चीजें-

गाय का घी-
 

प्रतिदिन घर के मंदिर में गाय के घी का दीप अर्पित करना और प्रसाद भोग लगाने से देवी-देवता आति शीघ्र अपनी कृपा बरसाते हैं। काफी किस्म का घी बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है लेकिन गाय के दूध से बना घी ही देवी- देवताओं को अर्पण किया जाना चाहिए और घर में भी रखें।
 

पानी-
 

कम कमाई में भी पैसा जोड़ना चाहते हैं तो अपने वॉश रूम में हमेशा एक बाल्टी पानी भर कर रखें। घर में मेहमान आने पर सबसे पहले उन्हें पानी दें ऐसा करने से अशुभ ग्रह शुभ होते हैं।
 

शहद-
 

वास्तुनुसार घर में जो भी नकारात्मक ऊर्जा होती है वह शहद की पॉजिटिव एनर्जी से मिल कर समाप्त हो जाती है। जिससे परिवार के सभी सदस्यों को फ़ायदा होता है इसलिए बहुत से घरों में इसे आवश्यक रूप से रखा जाता है। शहद को किसी साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें। इससे घर में बरकत बनी रहेगी और फिजूल खर्चों में कमी आएगी।

चंदन-
 

ज्योतिषाचार्य मानते हैं की सप्ताह वार के अनुसार तिलक लगाने से ग्रहों को अपने अनुकुल बनाया जा सकता है और उन से श्रेष्ठ एवं शुभ फलों की प्राप्ति की जा सकती है। चंदन तिलक को धारण करने का विशेष महत्व है। चंदन का तिलक शीतल होता है उसे धारण करने से पापों का नाश होता है। इसकी खुशबू से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
 

वीणा-
 

विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती के हाथों में सदा वीणा रहती है। पुराणों में मां सरस्वती को कमल पर बैठा दिखाया जाता है। कीचड़ में खिलने वाले कमल को कीचड़ स्पर्श नहीं कर पाता। इसीलिए कमल पर विराजमान मां सरस्वती हमें यह संदेश देना चाहती हैं कि हमें चाहे कितने ही दूषित वातावरण में रहना पड़े, परंतु हमें खुद को इस तरह बनाकर रखना चाहिए कि बुराई हम पर प्रभाव न डाल सके। घर में सदा देवी सरस्वती का रूप और वीणा रखें।

क्या आप को पता है राधा जी जब भगबान श्री कृष्ण ने नाराज हुई तो भगबान कृष्ण ने क्या किया !!



एक समय की बात है, जब किशोरी जी को यह पता चला कि कृष्ण पूरे गोकुल में माखन चोर कहलाता है तो उन्हें बहुत बुरा लगा उन्होंने कृष्ण को चोरी छोड़ देने का बहुत आग्रह किया पर जब ठाकुर अपनी माँ की नहीं सुनते तो अपनी प्रियतमा की कहा से सुनते। उन्होंने माखन चोरी की अपनी लीला को उसी प्रकार जारी रखा। एक दिन राधा रानी ठाकुर को सबक सिखाने के लिए उनसेरूठ कर बैठ गयी। अनेक दिन बीत गए पर वो कृष्ण से मिलने नहीं आई। जब कृष्णा उन्हें मनाने गया तो वहां भी उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। तो अपनी राधा को मनाने के लिए इसलीलाधर को एक लीला सूझी। ब्रज में लील्या गोदने वाली स्त्री को लालिहारण कहा जाता है। तो कृष्ण घूंघट ओढ़ कर एक लालिहारण का भेष बनाकर बरसाने की गलियों में घूमने लगे। जब वो बरसाने की ऊंचीअटरिया के नीचे आये तो आवाज़ देने लगे: -

मै दूर गाँव से आई हूँ, देख तुम्हारी ऊंची अटारी
दीदार की मैं प्यासी हूँ मुझे दर्शन दो वृषभानु दुलारी
हाथ जोड़ विनती करूँ, अर्ज ये मान लो हमारी
आपकी गलिन में गुहार करूँ, लील्या गुदवा लो प्यारी ...


जब किशोरी जी ने यह करुण पुकार सुनी तो तुरंत विशाखा सखी को भेजा और उस लालिहारण को बुलाने के लिए कहा। घूंघट में अपने मुह को छिपाते हुए कृष्ण किशोरी जी के सामने पहुंचे और उनका हाथ पकड़ कर बोले कि कहो सुकुमारी तुम्हारे हाथ पे किसका नाम लिखूं। तो किशोरी जी ने उत्तर दिया कि केवल हाथ पर नहीं मुझे तो पूरे श्री अंग पर लील्या गुदवाना है और क्या लिखवाना है, किशोरी जी बता रही हैं: -

माथे पे मदन मोहन, पलकों पे पीताम्बर धारी
नासिका पे नटवर, कपोलों पे कृष्ण मुरारी
अधरों पे अच्युत, गर्दन पे गोवर्धन धारी
कानो में केशव और भृकुटी पे भुजा चार धारी...
छाती पे छलिया, और कमर पे कन्हैया
जंघाओं पे जनार्दन, उदर पे ऊखल बंधैया
गुदाओं पर ग्वाल, नाभि पे नाग नथैया
बाहों पे लिख बनवारी, हथेली पे हलधर के भैया....
नखों पे लिख नारायण, पैरों पे जग पालनहारी
चरणों में चोर माखन का, मन में मोर मुकुट धारी
नैनो में तू गोद दे, नंदनंदन की सूरत प्यारी
और रोम रोम पे मेरे लिखदे, रसिया रणछोर वो रास बिहारी.....


जब ठाकुर जी ने सुना कि राधा अपने रोम रोम पे मेरा नाम लिखवाना चाहती है, तो ख़ुशी से बौरा गए प्रभु। उन्हें अपनी सुध न रही, वो भूल गए कि वो एक लालिहारण के वेश में बरसाने के महल में राधा के सामने ही बैठे हैं। वो खड़े होकर जोर जोर से नाचने लगे और उछलने लगे। उनके इस व्यवहार से किशोरी जी को बड़ा आश्चर्य हुआ की इस लालिहारण को क्या हो गया। और तभी उनका घूंघट गिर गया और ललिता सखी ने उनकी सांवरी सूरत का दर्शन हो गया और वो जोर से बोल उठी कि ये तो वही बांके बिहारी ही है....!!!
अपने प्रेम के इज़हार पर किशोरी जी बहुत लज्जित हो गयी और अब उनके पास कन्हैया को क्षमा करने के आलावा कोई रास्ता न था। उधर ठाकुर भी किशोरी का अपने प्रति अपार प्रेम जानकार गद्गद गद्गद हो गए !

Sunday, 20 September 2015

क्या आप को पता है ज्योतिष के अनुसार कौन से ग्रह से व्यक्ति में किस गुण का विकास होता है !!


आजिविका के क्षेत्र में सफलता व उन्नति प्राप्त करने के लिये व्यक्ति में अनेक गुण होने चाहिए, सभी गुण एक ही व्यक्ति में पाये जाने संभव नहीं है. किसी के पास योग्यता है तो किसी व्यक्ति के पास अनुभव पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. कोई व्यक्ति अपने आजिविका क्षेत्र में इसलिये सफल है कि उसमें स्नेह पूर्ण व सहयोगपूर्ण व्यवहार है. कोई अपनी वाकशक्ति के बल पर आय प्राप्त कर रहा है. तो किसी को अपनी कार्यनिष्ठा के कारण सफलता की प्राप्ति हो पाई है. अपनी कार्यशक्ति व दक्षता के सर्वोतम उपयोग करने पर ही इस गलाकाट प्रतियोगिता में आगे बढने का साहस कर सकता है. आईये देखे की ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कौन से ग्रह से व्यक्ति में किस गुण का विकास होता है.

1. कामकाज की जानकारी व समझ -
 

काम छोटा हों या बडा हों, उसे करने का तरीका सबका एक समान हों यह आवश्यक नहीं, प्रत्येक व्यक्ति कार्य को अपनी योग्यता के अनुसार करता है. जब किसी व्यक्ति को अपने कामकाज की अच्छी समझ न हों तो उसे कार्यक्षेत्र में दिक्कतों का सामना करना पड सकता है. व्यक्ति के कार्य को उत्कृ्ष्ट बनाने के लिये ग्रहों में गुरु ग्रह को देखा जाता है.
कुण्डली में जब गुरु बली होकर स्थिति हो तथा वह शुभ ग्रहों के प्रभाव में हों तो व्यक्ति को अपने क्षेत्र का उतम ज्ञान होने की संभावनाएं बनती है गुरु जन्म कुण्डली में नीच राशि में वक्री या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हों तो व्यक्ति में कामकाज की जानकारी संबन्धी कमी रहने की संभावना रहती है. सभी ग्रहों में गुरु को ज्ञान का कारक ग्रह कहा गया है. गुरु ग्रह व्यक्ति की स्मरणशक्ति को प्रबल करने में भी सहयोग करता है. इसलिये जब व्यक्ति की स्मरणशक्ति अच्छी होंने पर व्यक्ति अपनी योग्यता का सही समय पर उपयोग कर पाता है.
 

2. कार्यक्षमता व दक्षता -
 

किसी भी व्यक्ति में कार्यक्षमता का स्तर देखने के लिये कुण्डली में शनि की स्थिति देखी जाती है कुण्डली में शनि दशम भाव से संबन्ध रखते हों  तो व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में अत्यधिक कार्यभार का सामना करना पड सकता है. कई बार ऎसा होता है कि व्यक्ति में उतम योग्यता होती है. परन्तु उसका कार्य में मन नहीं लगता है.
इस स्थिति में व्यक्ति अपनी योग्यता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाता है. या फिर व्यक्ति का द्वादश भाव बली हों तो व्यक्ति को आराम करना की चाह अधिक होती है. जिसके कारण वह आराम पसन्द बन जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति अपने उतरदायित्वों से भागता है. यह जिम्मेदारियां पारिवारिक, सामाजिक व आजिविका क्षेत्र संबन्धी भी हो सकती है. शनि बली स्थिति में हों तो व्यक्ति के कार्य में दक्षता आती है.

3. कार्यनिष्ठा -
 

जन्म कुण्डली के अनुसार व्यक्ति में कार्यनिष्ठा का भाव देखने के लिये दशम घर से शनि का संबन्ध देखा जाता है अपने कार्य के प्रति अनुशासन देखने के लिये सूर्य की स्थिति देखी जाती है. शनि व सूर्य की स्थिति के अनुसार व्यक्ति में अनुशासन का भाव पाया जाता है. शनि व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाता है. कुण्डली में शनि जब बली होकर स्थित होंने पर व्यक्ति अपने कार्य को समय पर पूरा करने का प्रयास करता है.

4. स्नेह, सहयोगपूर्ण व्यवहार -
 

कई बार व्यक्ति योग्यता भी रखता है उसमें दक्षता भी होती है. परन्तु वह अपने कठोर व्यवहार के कारण व्यवसायिक जगत में अच्छे संबध नहीं बना पाता है. व्यवहार में मधुरता न हों तो कार्य क्षेत्र में व्यक्ति को टिक कर काम करने में दिक्कतें होती है. चन्द्र या शुक्र कुण्डली में शुभ भावों में स्थित होकर शुभ प्रभाव में हों तो व्यक्ति में कम योग्यता होने पर भी उसे सरलता से सफलता प्राप्त हो जाती है. अपनी स्नेहपूर्ण व्यवहार के कारण वह सबका शीघ्र दिल जीत लेता है. बिगडती बातों को सहयोगपूर्ण व्यवहार से संभाल लेता है. चन्द्र पर किसी भी तरह का अशुभ प्रभाव होने पर व्यक्ति में सहयोग का भाव कम रहने की संभावनाएं बनती है.

5. यान्त्रिक योग्यता -
 

आज के समय में सफलता प्राप्त करने के लिये व्यक्ति को कम्प्यूटर जैसे: यन्त्रों का ज्ञान होना भी जरूरी हो. किसी व्यक्ति में यन्त्रों को समझने की कितनी योग्यता है. यह गुण मंगल व शनि का संबन्ध बनने पर आता है. केतु को क्योकि मंगल के समान कहा गया है. इसलिये केतु का संबन्ध मंगल से होने पर भी व्यक्ति में यह योग्यता आने की संभावना रहती है. इस प्रकार जब जन्म कुण्डली में मंगल, शनि व केतु में से दो का भी संबन्ध आजिविका क्षेत्र से होने पर व्यक्ति में यन्त्रों को समझने की योग्यता होती है!

6.  वाकशक्ति-
 

बुध जन्म कुण्डली में सुस्थिर बैठा हों तो व्यक्ति को व्यापारिक क्षेत्र में सफलता मिलने की संभावनाएं बनती है. इसके साथ ही बुध का संबन्ध दूसरे भाव / भावेश से भी बन रहा हों तो व्यक्ति की वाकशक्ति उतम होती है. वाकशक्ति प्रबल होने पर व्यक्ति को इस से संबन्धित क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में सरलता रहती है.

परमात्मा एक है या अनेक,क्या विष्णु और शिव मे भेद है भगबान के समस्त अबतार भारत भूमि पर ही क्यों हुए जब कि ये सम्पूर्ण जगत के पालक एबं रक्षक है:-





ब्रह्मा ,बिष्णु ,शिव ,यम, इन्द्र ,दुर्गा आदि परमात्मा के अनेक नाम है कोई विष्णु रूप मे परमात्मा की पूजा करता है तो कोई शिव रूप मे ! कही उन परमब्रह्म परमात्मा को दुर्गा रूप मे पूजते है कही काली के रूप में तात्पर्य यह है की परमात्मा एक है किन्तु अलग-अलग अनेक रूपों में पूजा होती है !
भगबान श्री हरि विष्णु और त्रिशूलधारी भगबान शिव एक दूसरे के पूरक है रामेश्वरम सेतु बांध बांधने से पहले भगवान श्री विष्णु के अंशावतार भगबान श्री रामचंद्र जी ने सागर तट पर बालू रेत के शिवलिंग की स्थापना करके भगवान शिव की पूजा की ! भस्मासुर दैत्य को लेकर शिव जी पर जब विपत्ति आई उस समय पार्वती का रूप धारण करके विष्णु जी ने उनकी रक्षा की शिव जी हमेशा विष्णु जी के ध्यान में मग्न रहते है ! और विष्णु जी भी शिव की स्तुति पूजा करते रहते है ! इस तरह इनमे कोई भेद नहीं है जो प्राणी इनके बीच में भेद समझता है ! उसका कभी कल्याण नहीं हो सकता है !
भगवान को अवतरित होने के लिए पवित्र भूमि चाहिए अर्थात जहा यज्ञ , पूजा-पाठ , आराधना-उपासना नित्य होती है ! ऐसी ही पवित्र भूमि पर नारायण का अवतरण होता है ! जहा ऋषि-मुनियो एबं वेदज्ञ ब्राम्हण सदेव मंत्रोच्चाररण करते हो ऐसी पवित्र एबं पुण्यमयी भारत भूमि ही है| भारतबासियो को इसका गौरव होना चाहिए भारत भूमि में अवतरित होकर भी भगवान ने अन्य देशो में रहने वाले अपने भक्तो की रक्षा की ! भगवान श्री कृष्ण जी ने यूनान के कालयवन का चीन में भगदत्त का वध करके पृथ्वी पर शांति की स्थापना की| भगवती दुर्गा ने यूरोप के विदालाक्षा और अमेरिका के रक्तबीज का संहार किया !

Saturday, 19 September 2015

क्या आप को पता है जीवनसाथी चुनें तो जरुर ध्यान रखें इन खास बातों का !!


आपने अक्सर हमारे बढ़े-बुजूर्गो को कहते सुना होगा कि शादी के लिए जो लड़की चुनी जाए उसका मुंह नहीं पैर देखना चाहिए। ये बात सिर्फ एक धारणा मात्र ही नहीं है बल्कि इस बात का वर्णन हमारे धर्मग्रंथ भविष्यपुराण जिसे हमारे अठारह पुराणों में से एक महत्वपूर्ण पुराण माना गया है।उसमें भी कही गई है कि आप चाहते हैं कि आपका जीवन खुशहाल हो तो इसके लिए पत्नी सुलक्षणा होनी चाहिए। इसके अनुसार सुमंत मुनि राजा शतानी को कथा सुना रहे हैं वो कह रहे हैं कि वेदाध्ययन कर गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना चाहिए। तब राजा शतानीक ने पूछा- हे मुनीश्वर स्त्रियों के लक्षणों का वर्णन करें। यह भी बताएं कि किन लक्षणों से युक्त कन्या से विवाह करना चाहिए।तब मुनि ने उन्हें बताया कि पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने स्त्रियों के जो उत्तम लक्षण कह रहे हैं उनमें सबसे पहले सुलक्षण स्त्री के पैर देखे जाने चाहिए। विवाह के निर्णय से पूर्व ये जरूर देखना चाहिए कि जीवनसंगिनी सुलक्षणा हो। जिस स्त्री के पैर कोमल और कांतिवाले होते हैं। बीच में से ऊंचे नहीं होते ऐसी स्त्रियां सुख देने वाली होती हैं।जिस स्त्री के चरण रूखे फटे हुए और मांस रहित होते हैं उसे दुर्भाग्या माना गया है।यदि पैर की अंगुलियां परस्पर मिली हुई सीधी और गोल हों तो ऐसी स्त्री के घर में आने से ऐश्वर्य बना रहता है। पैरों की छोटी अंगुलियां आयु बढ़ाती है। छोटी और दूर-दूर होने वाली अंगुलिया धन का नाश करने वाली होती हैं। पैरों के रुखे व टेड़े-मेड़े नाखूनों को भी शुभ  नहीं माना गया है।

क्या आप को पता है मांगलिक कार्यों में सफेद कपड़े स्त्रियों के लिए क्यों वर्जित !!




हिन्धू  धर्म में सगाई से लेकर विदाई तक, जन्म से लेकर मौत तक सभी तरह की रस्मों को कर्मकांड में बांधा गया है। इन कर्मकांड और परंपराओं के पीछे कारण क्या है, यह तो कम ही लोग जानते होंगे। एक ऐसी ही परंपरा है कि किसी भी शुभ कार्य में स्‍त्रियों के लिए सफेद वस्त्र पहनना वर्जित है।अब आप को बताते हैं कि किसी मंगल या शुभ कार्य में स्त्रियां सफेद कपड़े क्यों नहीं पहन सकती हैं हालांकि यह परंपरा शास्त्रोक्त मान्यताओं के बिलकुल विरुद्ध है।सफेद वस्त्र को हिन्दू विधवा स्त्रियां ही पहनती हैं इसलिए सफेद वस्त्र का मांगलिक कार्यों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन शास्त्रों में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा गया है कि मांगलिक कार्यों के दौरान सफेद वस्त्र न पहनें।

हिन्दू विधवा क्यों पहनती है सफेद वस्त्र-

दरअसल, सफेद रंग को रंगों की अनुपस्थिति वाला रंग माना जाता है अर्थात जिसके जीवन में कोई रंग नहीं रहे। संन्यासी भी सफेद वस्त्र धारण करते हैं। जब महिला का पति मर जाता है तो उसके लिए यह सबसे बड़ी घटना होती है। इसका मतलब कि अब उसके जीवन में कोई रंग नहीं रहा।शास्त्रों के अनुसार पति की मृत्यु के नौवें दिन उसे दुनियाभर के रंगों को त्यागकर सफेद साड़ी पहननी होती है, वह किसी भी प्रकार के आभूषण एवं श्रृंगार नहीं कर सकती। स्त्री को उसके पति के निधन के कुछ सालों बाद तक केवल सफेद वस्त्र ही पहनने होते हैं और उसके बाद यदि वह रंग बदलना चाहे तो बेहद हल्के रंग के वस्त्र पहन सकती है। हालांकि कोई स्त्री पुनर्विवाह का निर्णय लेती है, तो इसके लिए वह स्त्रतंत्र है।
 

वेदों में एक विधवा को सभी अधिकार देने एवं दूसरा विवाह करने का अधिकार भी दिया गया है। वेदों में एक कथन शामिल है-

'उदीर्ष्व नार्यभि जीवलोकं गतासुमेतमुप शेष एहि।
हस्तग्राभस्य दिधिषोस्तवेदं पत्युर्जनित्वमभि सम्बभूथ।'


अर्थात पति की मृत्यु के बाद उसकी विधवा उसकी याद में अपना सारा जीवन व्यतीत कर दे, ऐसा कोई धर्म नहीं कहता। उस स्त्री को पूरा अधिकार है कि वह आगे बढ़कर किसी अन्य पुरुष से विवाह करके अपना जीवन सफल बनाए।
सफेद साड़ी पहनने से महिला की एक अलग ही पहचान बन जाती है। सभी लोग उसके प्रति संवेदना रखने लगते हैं। इस मनोवैज्ञानिक प्रभाव के चलते वह सामाजिक सुरक्षा के दायरे में रहती है।दूसरी ओर एक विधवा के सफेद वस्त्र पहनने के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि सफेद रंग आत्मविश्वास और बल प्रदान करता है। वह कठिन से कठिन समय को पार करने में सहायक बनता है। इसके साथ ही सफेद वस्त्र विधवा स्त्री को प्रभु में अपना ध्यान लगाने में मदद करते हैं। सफेद कपड़ा पहनने से मन शांत रहता है।इसलिए सफेद रंग हर तरह से शुभ माना गया है, लेकिन वक्त के साथ लोगों ने इस रंग का मांगलिक कार्यों में इस्तेमाल बंद कर दिया। हालांकि प्राचीनकाल में सभी तरह के मांगलिक कार्यों में इस रंग के वस्त्रों का उपयोग होता था। पुरोहित वर्ग इसी तरह के वस्त्र पहनकर यज्ञ करते थे।सच तो यह है कि सफेद रंग सभी रंगों में अधिक शुभ माना गया है इसीलिए कहते हैं कि लक्ष्मी हमेशा सफेद कपड़ों में निवास करती है। 15-20 वर्षों पहले तक लाल जोड़े में सजी दुल्हन को सफेद ओढ़नी ओढ़ाई जाती थी। इसका यह मतलब कि दुल्हन ससुराल में पहला कदम रखे तो उसके सफेद वस्त्रों में लक्ष्मी का वास हो। आज भी ग्रामीण क्षेत्र में सफेद ओढ़नी की परंपरा का पालन किया जाता है।

Friday, 18 September 2015

क्या आप को पता है घर में होने लगे कुछ ऐसा तो समझ जाएं मां लक्ष्मी छोड़ने वाली हैं आपका घर !!






घर से सोने का चोरी हो जाना।
घर की महिला का बार-बार गर्भपात होना।
नमकीन प्रदार्थों में काली चींटियों का पड़ जाना।
बार-बार दूध का उबल कर जमीन पर बह जाना।
घर में अचानक से घड़ियों का चलते-चलते बंद हो जाना।
 
घर की पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में सीलन आना।
घर में आए हुए अतिथियों को निराश होकर घर से चले जाना।
शुभ कार्य में घर आए हुए किन्नरों का घर से रूठ कर चले जाना।
घर के पालतू पशुओं की बेवजह या समय से पहले मृत्यु हो जाना।
घर में पड़े हुए कांच या चीनि मिट्टी के बर्तनों का बार-बार तड़क कर टूट जाना।
टॉइलेट या वाशरूम नियमित साफ करने के बावजूद भी घर में दुर्गंध का फैलना।
घर में त्यौहार, पर्व या पूजा अनुष्ठान के वक्त आकस्मिक घर की महिलाओं का रजस्वला हो जाना।

क्या आप को पता है सूर्य कर रहे हैं कन्या राशि में प्रवेश राशिनुसार जानें क्या पड़ेगा आपकी राशि पर प्रभाव !!


पृथ्वी के वायुमंडल व जनजीवन पर सूर्य का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य को आत्मा का कारक व ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्यदेव गुरुवार दिनांक 17.09.15 को बुध की कन्या राशि में प्रवेश कर रहा है। वर्तमान में सूर्यदेव बृहस्पति और मंगल के साथ स्व्यराशि सिंह में स्थित हैं तथा अपने ही नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में गोचर कर रहे हैं। सूर्यदेव गुरुवार दिनांक 17.09.15 को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे तथा सूर्य की युति बुध और राहू के साथ कन्या राशि में होगी। सूर्य के कन्या में प्रवेश से अतिशुभ बुधादित्य योग का निर्माण होगा। सूर्य व बुध का मिलन प्रजा हेतु समृद्धिदायक रहेगा। आर्थिक पक्ष को भी मजबूत करेगा। सूर्यदेव के इस राशि परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहेंगे। संक्रांति पुण्यकाल दिन 12 बजकर 29 मिनट से शाम 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। पुण्यकाल की अवधि 5 घंटे 51 मिनट हैं। महापुण्यकाल दिन 12 बजकर 29 मिनट से दिन 12 बजकर 53 मिनट रहेगा। महापुण्यका की अवधि 24 मिनट है।
सूर्य व बुध का मिलन आम जनमानस के सुखों में वृद्धि करेगा। राजकीय योजनाएं जनता के हिसाब से बनेंगी। राजनेता जनता के बारे में सोचेंगे परंतु सूर्य व राहू के योग बनने से व्यापारिक जगत में उठा-पटक रहेगी। बाजार में अकस्मात तेजी व मंदी का दौर रहेगा। जब तक सूर्य कन्या में रहेंगे, प्राकृतिक आपदाएं आने के संकेत हैं। सूर्य व राहू के मिलन से प्रजा भी अशांत रहेगी, प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने में असफल होगा। सीमा पर विवाद बढ़ सकता है। सरकार के लिए भी अत्यधिक परेशानियों भरा समय रहेगा। सूर्य के इस परिवर्तन से सभी राशि के जातकों के जीवन में भी कुछ न कुछ सकारात्मक या नकारात्मक परिवर्तन आएगा। यह परिवर्तन जातक की जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति तथा वर्तमान में ग्रहों की दशा तथा उससे सूर्य के संबंध पर भी निर्भर करता है। इस लेख के माध्यम से हम अपने पाठकों को उनके जन्मराशि अनुसार बताने जा रहे हैं की सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश उनके लिए कैसा रहेगा। व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती है, पहनावे पर नहीं !
 

मेष: पंचमेश सूर्य का छठे भाव में गोचर से मानसिक उलझने बढ़ेंगी। संतान तथा पिता से मतभेद हो सकता है। मात्र कठिन परिश्रम से प्रतियोगिता में भी सफलता मिलेगी। धन सम्बंधित जोखिम से बचें। उच्च अधिकारियों से मतभेद टालें।

वृष: चतुर्थेश सूर्य का पंचम भाव में गोचर गलत निर्णय दिलवाएगा। परिवार में वाद-विवाद संभव है। संतान की सेहत हेतु परेशानी हो सकती है। यात्रा में सावधानी आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होगी।

मिथुन: तृतेश सूर्य के चौथे भाव में गोचर से पारिवारिक सुख में कमी आएगी। वाहन से परेशानी होगी। माता का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। कार्यक्षेत्र में हानि के योग हैं, अतः सावधानी बरतें। अनिद्रा व बेचैनी बढ़ेगी। तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।

कर्क: धनेश सूर्य के तीसरे भाव में गोचर से पराक्रम और उत्साह बढ़ेगा। जन संपर्क तेज़ी से बढ़ेगा। संचार माध्यमों से शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। दूसरों को दबाने की प्रवृत्ति हावी रहेगी। आत्म प्रंशसा, अति उत्साह तथा अहंकार से बचें।

सिंह: लग्नेश सूर्य का धन भाव में गोचर धन हानि देगा। आवेश में लिए गए निर्णय नुकसानदेह सिद्ध होंगे। वाणी-क्रोध पर नियंत्रण रखें। यात्रा कष्टकारी होगी। सेवकों व मित्रों से सावधान रहें। सिर, नेत्र व दांतों में दर्द संबंधित परेशानी रहेगी।

कन्या: व्येश सूर्य का लग्न में गोचर मानसिक रूप से विचलित करेगा। शारीरिक कष्ट व व्यर्थ भ्रमण के योग हैं। सांझेदारी से विवाद होगा। कार्य-व्यवहार में सावधानी बरतें। जीवनसाथी के साथ दांपत्य संबंध ठीक रखने की पूरी कोशिश करें।

तुला: लभेश सूर्य के द्वादश भाव में गोचर से आय में कमी आएगी। सुदूर यात्रा होगी। बुद्धिबल से शत्रुओं परास्त होंगे। बाहरी संबंधों से लाभ मिलेगा। अधिकारिगण से संबंध बेहतर बनाने का प्रयास करें। वीरान स्थान पर अकेले जाने से बचें।

वृश्चिक: कार्मेश सूर्य के लाभ भाव में गोचर से पैतृक संपत्ति में विवाद होगा। अकस्मात धन लाभ व हानि दोनों का ही योग है। आर्थिक निर्णय लेते समय सावधान रहें। प्रेग्नेंट महिलाएं अत्यधिक सतर्क रहें। संतान हेतु परेशानी के योग हैं।

धनु: भागेश सूर्य के दशम भाव में गोचर से भाग्य वश आय होने की संभावना है। पिता व अधिकारिगणो से विवाद होगा सावधान रहें। माता-पिता को कष्ट का योग बन रहा है अतः सतर्क रहें। निरर्थक यात्रा होने के संकेत बन रहे हैं।

मकर: अष्टमेश सूर्य के भाग्य भाव में गोचर से दुर्भाग्य प्रबल होगा। जुआ-सट्टा से दूर रहें, भाग्य भरोसे कोई कार्य न करें। भाई-बहनों व किसी करीबी मित्र से बेवजह विवाद होगा। आर्थिक हानि व कार्यस्थल पर परेशानी के योग बन रहे हैं।

कुंभ: सप्तमेश सूर्य के अष्टम भाव में गोचर से वैवाहिक जीवन में मतभेद आएंगे। जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रहेगा। वाहन से दुर्घटना का योग है अतः ड्राइविंग के दौरान सतर्क रहें। आर्थिक मामलों में भी अत्याधिक सतर्कता अपेक्षित है।

मीन: षष्ठेश सूर्य के सप्तम भाव में गोचर से दांपत्य कलहकारी रहेगा। जीवनसाथी से बेवजह विवाद होगा। कार्य-व्यापार में सांझेदार धोखा दे सकते हैं। आर्थिक जोखिम उठाने से बचें। पेट संबंधित रोग के योग हैं खान-पान में सावधानी बरतें।

क्या आप आप को पता है शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है !!


प्राचीन मान्यता है कि शनि देव की कृपा पाने के लिए हर शनिवार को उनको तेल चढ़ाना चाहिए। जो लोग ऐसा करते हैं, उसे साढ़ेसाती और ढय्या में भी शनि की कृपा मिलती है। शनि देव को तेल क्यों चढ़ाते इसको लेकर हमारे ग्रंथो में कथाएं मिलती हैं।कथा के अनुसार, रामायण काल में एक समय शनि देव को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था। उस काल में भगवान हनुमान के बल और पराक्रम की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी। जब शनि देव को भगवान हनुमान के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई तो शनि देव भगवान हनुमान से युद्ध करने के लिए निकल पड़े। एक शांत स्थान पर हनुमानजी अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन बैठे थे, तभी वहां शनिदेव आ गए और उन्होंने भगवान हनुमान को युद्ध के ललकारा।युद्ध की ललकार सुनकर भगवान हनुमान ने शनिदेव को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। अंत में भगवान हनुमान भी युद्ध के लिए तैयार हो गए। दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ। युद्ध में भगवान हनुमान ने शनि देव को बुरी तरह हरा दिया।युद्ध में भगवान हनुमान के किए गए प्रहारों से शनिदेव के पूरे शरीर में भयंकर पीड़ा होने लगी। इस पीड़ा को दूर करने के लिए भगवान हनुमान ने शनि देव को तेल दिया। इस तेल को लगाते ही शनिदेव की सभी पीड़ा दूर हो गईं। तभी से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। शनिदेव पर जो भी व्यक्ति तेल चढ़ाता है, उसके जीवन की समस्त परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन का अभाव खत्म हो जाता है।

Thursday, 17 September 2015

क्या आप को पता है गणेश चतुर्थी आज पूरे दिन जानिए शुभ योग, ये है पूजन विधि !!


धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इसीलिए इस चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, सिद्धिविनायक चतुर्थी और श्रीगणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व आज 17 सितंबर, गुरुवार को है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो स्नान, उपवास और दान किया जाता है, उसका फल भगवान श्रीगणेश की कृपा से सौ गुना हो जाता है। व्रत करने से मनोवांछित फल मिलता है। इस दिन श्रीगणेश भगवान का पूजन व व्रत इस प्रकार करें ! और पूरे वर्ष भी व्रत कर सकते है विशेष आवश्कता अनुसार कभी भी गणेश की प्रतिमा स्थापित कर सकते है !

पूजन विधि-
 

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें (शास्त्रों में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की स्थापना को ही श्रेष्ठ माना है)। संकल्प मंत्र के बाद षोडशोपचार पूजन व आरती करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। मंत्र बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास रखें और 5 ब्राह्मण को दान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद रूप में बांट दें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देने के बाद शाम के समय स्वयं भोजन करें। पूजन के समय यह मंत्र बोलें- ऊं गं गणपतये नम:

दूर्वा दल चढ़ाने का मंत्र -
 

गणेशजी को 21 दूर्वा दल चढ़ाई जाती है। दूर्वा दल चढ़ाते समय नीचे लिखे मंत्रों का जाप करें-
ऊं गणाधिपतयै नम:
ऊं उमापुत्राय नम:
ऊं विघ्ननाशनाय नम:
ऊं विनायकाय नम:
ऊं ईशपुत्राय नम:
ऊं सर्वसिद्धप्रदाय नम:
ऊं एकदन्ताय नम:
ऊं इभवक्त्राय नम:
ऊं मूषकवाहनाय नम:
ऊं कुमारगुरवे नम:

इस तरह पूजन करने से भगवान श्रीगणेश अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं।
 

मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की ही स्थापना क्यों की जाती है -
 

श्रीगणेश प्रतिमा का निर्माण मिट्टी से करना ही श्रेष्ठ होता है क्योंकि ये न केवल पर्यावरण के लिए उपयुक्त है बल्कि शास्त्र सम्मत भी है। इसका रहस्य गणेशजी के जन्म की कथा में ही छुपा हुआ है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने मिट्टी से एक बालक गढ़ा। (कई ग्रंथों में यह उबटन से निर्मित भी बताया जाता है।) उसमें प्राण फूंके और देवी स्नान के लिए चली गईं।यह बालक मां की आज्ञा से द्वार पर पहरा देने लगा। शिवजी का आगमन हुआ और बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोका तो क्रोध में शिवजी ने बालक का सिर काट दिया। पार्वतीजी की गंभीर आपत्ति और क्रोध के बाद हाथी का मस्तक जोड़ा गया और उसमें प्राण भी फूंके गए। इस तरह गणेशजी पुनर्जीवित होकर एक नए और दिव्य स्वरूप में भक्तों के सामने आए। यह कथा उनके जन्म में पार्थिव तत्व अर्थात मिट्टी के महत्व को सामने लाती है। इस आग्रह के साथ कि इस बार जब प्रतिमाएं स्थापित की जाएं तो वे मिट्टी से निर्मित ही हों न कि अन्य कृत्रिम सामग्री से।

Tuesday, 15 September 2015

क्या आप का जन्म 1 से लेकर 31 तारीख तक हुआ तो जानिए अपनी और दूसरों की खास बातें !!


ज्योतिष से किसी भी व्यक्ति के स्वभाव को जानने की कई विधियां बताई गई हैं। इन विधियों में से एक विधि अंकशास्त्र भी है। व्यक्ति का जन्म जिस दिन होता है, उस तारीख का असर जीवनभर बना रहता है। हर एक दिन का ग्रह स्वामी अलग होता है। ग्रह स्वामी के स्वभाव के अनुसार ही व्यक्ति का स्वभाव और आदतें भी बनती हैं। यहां जानिए दिनांक 1 से 31 तक की जन्म तारीख वाले लोगों की खास बातें...
 

1 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-
 

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 1 तारीख को हुआ है, उन सभी लोगों का लकी नंबर 1 होता है। अंक 1 का कारक ग्रह सूर्य है। इसलिए अंक 1 वाले सभी लोगों को सूर्य विशेष रूप से प्रभावित करता है। 1 अंक वाले व्यक्ति रचनात्मक, सकारात्मक सोच वाले और नेतृत्व क्षमता के धनी होते हैं। ये लोग जो काम शुरू करते हैं, उसे जब तक पूरा नहीं करते, इन्हें शांति नहीं मिलती। इन लोगों का विशेष गुण यह होता है कि हर काम को योजना बनाकर करते हैं, अपने कार्य के लिए ईमानदार रहते हैं।
अंक 1 वाले लोगों के लिए रविवार और सोमवार विशेष लाभ देने वाले दिन हैं। इनके लिए पीला, सुनहरा, भूरा रंग काफी फायदेमंद है। तांबा और सोना से इन्हें लाभ प्राप्त होता है। इनके लिए पुखराज, पीला हीरा, कहरुवा और पीले रंग के रत्न, आभूषण आदि लाभदायक हैं।
 

2 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-
 

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 2 तारीख को हुआ है, वे सभी अंक 2 वाले लोग माने जाते हैं। इस नंबर का कारक चंद्रमा है। चंद्रमा रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को प्रभावित करता है। चंद्रमा के सभी गुण अंक 2 वाले लोगों में होते हैं।जिस प्रकार चंद्रमा को चंचलता का प्रतीक माना जाता है कि ठीक उसी प्रकार अंक 2 वाले भी चंचल स्वभाव वाले होते हैं। चंद्र के प्रभाव से ये लोग प्रेम-प्रसंग में भी लाभ प्राप्त करते हैं।
 इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शुक्रवार काफी शुभ दिन होते हैं। इनके लिए हरा या हल्का हरा रंग बेहद फायदेमंद है। क्रीम और सफेद रंग भी विशेष लाभ देते हैं। लाल, बैंगनी या गहरे रंग इनके लिए अच्छे नहीं होते। अंक 2 वाले लोगों को मोती, चंद्रमणि, पीले-हरे रत्न पहनना चाहिए।
 

3 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-
 

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 3 तारीख को हुआ है, वे अंक 3 के व्यक्ति माने जाते हैं। अंक 3 वाले लोग काफी महत्वाकांक्षी होते हैं। अंक तीन का ग्रह स्वामी गुरु (बृहस्पति) है, इस कारण इन लोगों को बृहस्पति विशेष रूप से प्रभावित करता है। ये लोग अधिक समय तक किसी के अधीन रहकर काम करना पसंद नहीं करते। इनका मुख्य लक्ष्य उन्नति करते जाना होता है, अधिक समय एक जगह रुककर कार्य नहीं कर सकते। इन्हें बुरी परिस्थितियों से लडऩा बहुत अच्छी तरह से आता है।
इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ होते हैं। हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारीखें इनके लिए लाभदायक हैं। इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है। रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला शुभ होते हैं।
 

4 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-
 

जिस व्यक्ति का जन्म किसी भी माह की 4 तारीख को हुआ है, उसका मूलांक 4 होता है। अंक ज्योतिष के अनुसार ये लोग दूसरों बिल्कुल अलग होते हैं। इस अंक का स्वामी यूरेनस होता है।
अंक 4 के लोग काफी संवेदनशील होते हैं। इन्हें जल्दी गुस्सा आ जाता है। छोटी-छोटी बातों पर बुरा मान जाते हैं। इस स्वभाव से इनके ज्यादा मित्र नहीं बन होते हैं। मित्र कम होने से ये लोग अधिकांश समय अकेलापन महसूस कर सकते हैं। ये किसी को दुखी नहीं देख सकते हैं।
अंक 4 वाले लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शनिवार भाग्यशाली दिन होते हैं। इनके लिए 1, 2, 7, 10, 11, 16, 18, 20, 25, 28, 29 तारीखें लाभ प्रदान करने वाली होती हैं। इन्हें नीला और ब्राउन कलर काफी फायदा पहुंचाता है, इसलिए इन्हें इन रंगों के कपड़े पहनना चाहिए।
 

5 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-
 

जिन व्यक्तियों का जन्म 5 तारीख को हुआ हो, वे सभी मूलांक 5 के लोग होते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार अंक 5 का स्वामी बुध ग्रह है। बुध ग्रह बुद्धि का कारक है। बुध के प्रभाव से इस अंक के लोग काफी बुद्धिमान और तुरंत निर्णय लेने वाले होते हैं।
अंक 5 वाले काफी स्टाइलिश होते हैं और वैसे ही कपड़े पहनना पसंद करते हैं। दूसरों से इनकी दोस्ती बहुत जल्दी हो जाती है और ये लोग दोस्ती अच्छी तरह निभा भी सकते हैं। दोस्तों के लिए जितने उदार और शुभचिंतक होते हैं, ठीक इसके विपरीत दुश्मनों के लिए उतने ही बुरे होते हैं।इन लोगों के लिए बुधवार और शुक्रवार शुभ होते हैं।रंगों में हल्का ब्राउन, सफेद और चमकदार रंग बेहद लाभदायक है।इन्हें गहरे रंग के कपड़े कम से कम पहनना चाहिए।इनके लिए 5, 14, 23 तारीखें भाग्यशाली होती हैं।

6 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 6 तारीख को हुआ है, वे सभी अंक 6 वाले माने जाते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार अंक 6 का स्वामी शुक्र ग्रह है। शुक्र ग्रह से प्रभावित व्यक्ति काफी ग्लैमरस और हाई लाइफ स्टाइल के साथ जीवन जीते हैं। ऐसे लोगों से कोई भी बहुत ही जल्दी आकर्षित हो जाता है। इस वजह से इनके कई मित्र होते हैं और इस अंक के कुछ लोगों के एक से अधिक प्रेम प्रसंग भी हो सकते हैं।

अंक 6 के लोग किसी भी काम को विस्तृत योजना बनाकर ही करते हैं, जिससे इन्हें सफलता मिलती है। ये लोग स्वभाव से थोड़े जिद्दी होते हैं। जो काम शुरू करते हैं, उसे पूरा करने के बाद ही इन्हें शांति मिलती है।इनके लिए मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार शुभ दिन होते हैं। इन दिनों से शुरू किए गए कार्यों में इन्हें सफलता प्राप्त होती है।किसी भी माह की 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27, 30 तारीखें शुभ होती हैं।इन लोगों के लिए बैंगनी और काला रंग अशुभ है। इन्हें लाल या गुलाबी शेड्स के कपड़े पहनने चाहिए।इन लोगों की मित्रता 3, 6, 9 अंक वालों से अच्छी रहती है।ये लोग अंक 5 के लोगों से आगे बढऩे का बहुत प्रयास करते हैं, लेकिन पीछे रह जाते हैं।

7 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन व्यक्तियों का जन्म किसी भी माह की 7 तारीख को हुआ है, वे अंक 7 वाले होते हैं। इस अंक के स्वामी वरुण देव यानी जल के देवता हैं। जल मूल रूप से चंद्रमा से संबंधित है। इसी वजह से इस अंक के लोगों पर चंद्रमा का विशेष प्रभाव रहता है।अंक 7 वाले लोग स्वतंत्र विचारों वाले और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं। ये लोग किसी को भी बड़ी आसानी से प्रभावित कर लेते हैं। चंद्र से संबंधित होने के कारण मन से बड़े ही चंचल होते हैं। इन्हें मस्ती-मजाक करना पसंद होता है। ये लोग अपने मित्रों का मनोरंजन हमेशा करते रहते हैं। सभी को खुश रखते हैं।
अंक 7 वालों के लिए रविवार और सोमवार शुभ दिन होते हैं।इनके लिए 1, 2, 4, 7, 10, 11, 13, 16, 19, 20, 22, 25, 28, 29, 31 तारीखें शुभ फल देने वाली हैं।हरा, पीला, सफेद, क्रीम और हल्के रंग लाभदायक हैं।इन्हें गहरे रंगों के उपयोग से बचना चाहिए।अंक 7 वालों को भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए।

8 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

किसी भी माह की 8 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति अंक 8 वाले होते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार, ये लोग काफी रहस्यमयी स्वभाव के होते हैं। इन्हें समझना काफी मुश्किल होता है अंक 8 के लोगों का व्यवहार अन्य अंक वाले लोगों से बिल्कुल अलग होता है। ये लोग हर बात को बहुत गहराई से सोचते हैं तथा बोलने में स्पष्टवादी होते हैं। इसलिए अपने जीवन में इन्हें कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है।

इस अंक के लोगों में मनोबल एवं आध्यात्मिक शक्ति अधिक होती है। इन लोगों का भगवान पर अधिक विश्वास होता है।इन लोगों के लिए शनिवार का दिन विशेष महत्व रखता है। साथ ही, सोमवार और रविवार भी फायदेमंद रहते हैं।इन लोगों के लिए किसी भी माह की 8, 17 और 26 तारीखें बहुत शुभ रहती हैं।इनके लिए गहरा भूरा रंग, नीला, काला और बैंगनी रंग शुभ रहता है।नीलम या काला मोती धारण करना शुभ होता है।

9 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 9 तारीख को हुआ है, वे अंक 9 के लोग होते हैं। अंक 9 का कारक मंगल ग्रह है और यह अंक मंगल का प्रतीक है। मंगल के प्रभाव से इन लोगों को गुस्सा काफी अधिक आता है। ये लोग जल्दबाजी में निर्णय ले लेते हैं और फिर बाद में बुरा परिणाम झेलना पड़ता है।सामान्यत: अंक 9 के लोग स्वप्रेरित होते हैं यानी खुद की प्रेरणा से कार्य करते हैं। ये लोग अपने गुस्से के कारण कई शत्रु बना लेते हैं। इन लोगों को दूसरों पर नियंत्रण रखना पसंद होता है, लेकिन जब इनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाती है तो संबंधित कार्य से हट जाते हैं।
 अंक 9 वाले लोगों के लिए 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27 और 30 तारीखें विशेष फायदेमंद रहती है।इन लोगों को अपने क्रोध पर काबू रखना चाहिए। गुस्से पर नियंत्रण करने के बाद इन्हें कार्यों में कई उपलब्धियां हासिल हो जाती हैं।इन लोगों के लिए रूबी रत्न फायदेमंद रहता है। यह रत्न ऐसे धारण करना चाहिए कि ये शरीर से हमेशा स्पर्श होता रहे।इनके लिए मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार शुभ होते हैं।

10 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 10 तारीख को हुआ है, वे लोग रचनात्मक और खोज करने वाले होते हैं। इस अंक का कारक ग्रह सूर्य है। सूर्य के कारण इस अंक के लोगों को समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।इस अंक के लोग अपनी सफलता के रास्ते में आने वाली हर परेशानी को दूर कर लेते हैं। ये लोग अति महत्वाकांक्षी होते हैं। ये जिस क्षेत्र में भी काम करते हैं, सफलताएं और ऊंचाइयां प्राप्त करते हैं। अंक 1 वाले लोग सम्मान पाना चाहते हैं।
इस अंक के लोगों के लिए रविवार और सोमवार विशेष लाभ देने वाले दिन हैं।इनके लिए पीला, सुनहरा, भूरा रंग काफी फायदेमंद है।इन्हें तांबा और सोना धारण करना चाहिए, इससे विशेष लाभ प्राप्त होता है।इनके लिए पुखराज, पीला हीरा, कहरुवा और पीले रंग के रत्न, आभूषण आदि लाभदायक हैं।

11 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

अंक ज्योतिष के अनुसार, इस अंक के लोगों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मक क्षमता काफी अच्छी होती है। इस अंक का कारक ग्रह चंद्र है। ये लोग चंद्र के प्रभाव से हर काम को अच्छे और बेहद ही आकर्षक तरीके से करते हैं। हर पल नया करने के लिए उत्सुक रहते हैं। ये लोग काफी रोमांटिक स्वभाव वाले होते हैं और विपरीत लिंग के प्रति बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं। अन्य लोग भी इनके व्यक्तित्व और कार्यशैली से इन पर मोहित हो जाते हैं। इस अंक के कुछ लोग शारीरिक रूप से अधिक बलवान नहीं होते हैं, सामान्य शरीर वाले होते हैं।
इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शुक्रवार काफी शुभ दिन हैं।इनके लिए हरा या हल्का हरा रंग बेहद फायदेमंद है। क्रीम और सफेद रंग भी विशेष लाभ देते हैं।लाल, बैंगनी या गहरे रंग इनके लिए अच्छे नहीं होते।इस अंक वालों को मोती, चंद्रमणि, पीले-हरे रत्न पहनना चाहिए।
 

12 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

इस अंक के लोग बहुत भावुक होते हैं और अनुशासन पसंद करते हैं। इस अंक के लोगों की सोच यही होती है कि इन्हें निरंतर प्रगति करना है। इस अंक का कारक ग्रह बृहस्पति है। इनके लिए जीवन का लक्ष्य हर समय खुश रहना और दूसरों को भी खुश रखना है। ये लोग स्वभाव से बहुत मनमौजी होते हैं। अपने से बड़े लोगों के आदेशों का पालन करते हैं और चाहते हैं कि इनके आदेशों का पालन भी उसी तरह किया जाए।

इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार अधिक शुभ होते हैं।हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारीखें विशेष लाभदायक हैं।इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है।इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला रंग शुभ होता है।

13 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

इस अंक का कारक ग्रह यूरेनस है। ये लोग किसी एक विषय को भी अलग-अलग दृष्टिकोण के साथ देखते हैं। इन्हें बेकार तर्क-वितर्क करना पसंद नहीं होता है। इस अंक के विद्यार्थी प्रतियोगी परिक्षाओं में विशेष उपलब्धियां हासिल करते हैं।सामान्यत: इस अंक के लोगों से मित्रता निभाना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन ये लोग बहुत अच्छे मित्र साबित होते हैं। ये लोग अपने शुभचिंतकों और स्नेहीजनों के लिए कुछ भी अच्छा करने में सोचते नहीं हैं।

इस अंक के लोग सामान्यत: विरोधी स्वभाव वाले होते हैं। दूसरों की बात से आसानी से संतुष्ट नहीं होते हैं। इनसे मिलने वाले लोगों को यही लगता है कि ये रुखे स्वभाव और गुस्से वाले लोग हैं, लेकिन ये लोग दिल से साफ होते हैं। किसी के प्रति मन में कोई बैर नहीं रखते। फिर भी इनके कई शत्रु बन जाते हैं जो इन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहते हैं।इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शनिवार भाग्यशाली दिन होते हैं।इनके लिए 1, 2, 7, 10, 11, 16, 18, 20, 25, 28, 29 तारीखें विशेष लाभ प्रदान करने वाली होती हैं।इन्हें नीला और ब्राउन कलर काफी फायदा पहुंचाता है। इसलिए इन्हें इन रंगों के कपड़े पहनना चाहिए।

14 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

इस अंक का स्वामी ग्रह है बुध। बुध को ज्योतिष में नौ ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। इस अंक वाले लोगों को बुध वैसा ही वैभव और जीवन स्तर प्रदान करता है। अंक 5 (1+4=5) वाले लोग काफी स्टाइलिश होते हैं और वैसे ही डिजाइनर कपड़े पहनना पसंद करते हैं। सामान्यत: इनकी सभी से बहुत जल्दी दोस्ती हो जाती है और ये लोग सभी से अच्छी दोस्ती निभा सकते हैं। दोस्तों के लिए ये जितने उदार और शुभचिंतक होते हैं, दुश्मनों के लिए उतने ही बुरे होते हैं।

इन लोगों के लिए बुधवार और शुक्रवार शुभ होते हैं।रंगों में इनके लिए हल्का ब्राउन, सफेद और चमकदार रंग बेहद लाभदायक है।इन्हें गहरे रंग के कपड़े कम से कम पहनना चाहिए।इनके लिए 5, 14, 23 तारीखें भाग्यशाली होती हैं।

15 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 15 तारीख को हुआ है, वे समाज, ऑफिस और परिवार में सभी से विशेष स्नेह रखते हैं। साथ ही, इनके अधीन कार्य करने वाले लोग भी इनका बहुत सम्मान करते हैं। 

इस अंक का कारक ग्रह शुक्र है। शुक्र के प्रभाव से इनका झुकाव प्रेम प्रसंग और जीवन साथी की ओर अधिक होता है। माता-पिता की ओर भी ये लोग पूरा ध्यान देते हैं।वैसे तो प्रेम में सभी अपने साथी की हर मनोकामना पूरी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस अंक के लोग प्रेम में काफी अधिक डूब जाते हैं। ये लोग अपने प्रेमी की छोटी-छोटी इच्छाओं को भी पूरा करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ दिन होते हैं। इन दिनों से शुरू किए गए कार्यों में इन्हें सफलता अवश्य प्राप्त होती है।किसी भी माह में 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27, 30 तारीख शुभ है।इन लोगों के लिए बैंगनी और काला रंग अशुभ है। इन्हें लाल या गुलाबी शेड्स के कपड़े पहनना चाहिए।इन लोगों की मित्रता 3, 6, 9 अंक वालों से अच्छी रहती है।ये लोग अंक 5 के लोगों से आगे बढऩे का बहुत प्रयास करते हैं, परंतु पीछे रह जाते हैं।

16 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 16 तारीख को हुआ है, वे लोग चंद्र से प्रभावित होते हैं। इस अंक का कारक ग्रह नेपच्यून है। नेपच्यून यानी वरुण ग्रह जल का कारक है और जल पर चंद्र का सीधा असर होता है।

ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा की चाल अन्य ग्रहों में सबसे तेज है। चंद्र किसी भी एक राशि में करीब ढाई दिन ही रुकता है। इसलिए इसे चंचलता का प्रतीक माना जाता है।सामान्यत: इस अंक के लोग चंद्र के प्रभाव से लेखक, चित्रकार या कवि होते हैं। इन्हें हर काम को नए तरीके से करना पसंद होता है।इस अंक वालों के लिए रविवार और सोमवार शुभ होते हैं।किसी भी माह की 1, 2, 4, 7, 10, 11, 13, 16, 19, 20, 22, 25, 28, 29, 31 तारीखें शुभ फल देने वाली हैं।इनके लिए हरा, पीला, सफेद, क्रीम और हल्के रंग लाभदायक है।इन्हें गहरे रंगों के उपयोग से बचना चाहिए।इन्हें भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए।

17 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

किसी भी माह की 17 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति के अंक का स्वामी ग्रह शनि है। अंक ज्योतिष के अनुसार ये लोग काफी रहस्यमयी स्वभाव के होते हैं। इन्हें समझना काफी मुश्किल होता है।
 इस अंक के लोगों का व्यवहार दूसरे अंक वाले लोगों से बिल्कुल अलग होता है। ये लोग दूसरो के लिए भाग्यशाली होते हैं और दूसरों पर पूरा प्रभाव रखते हैं। शनि के कारण इन लोगों का व्यवहार थोड़ा रुआबदार होता है। अपने जिद्दी स्वभाव के कारण इन्हें कभी-कभी अकेलेपन का भी सामना करना पड़ता है शनि के कारण इन लोगों को जीवन में कई बार कठिन समय का सामना करना पड़ता है। ये लोग हर बात को बहुत गहराई से सोचते हैं तथा बोलने में स्पष्टवादी होते हैं। इसलिए जीवन में कई प्रकार के कष्टों का सामना करते हैं।इन लोगों के लिए शनिवार लाभदायक होता है। साथ ही, सोमवार और रविवार भी इनके लिए फायदेमंद हैं।इन लोगों के लिए किसी भी माह के लिए 8, 17 और 26 तारीखें बहुत शुभ रहती हैं।रंगों में इनके लिए गहरा भूरा रंग, नीला, काला और बैंगनी शुभ रहता है।इनके लिए नीलम या काला मोती धारण करना शुभ रहता है।

18 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-
 

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 18 तारीख को हुआ है, उनके अंक का कारक मंगल ग्रह है। इस अंक के अधिकतर लोगों का जीवन संघर्ष के साथ व्यतीत होता है। छोटी-छोटी सफलताओं के लिए भी इन्हें कड़ी मेहनत करना होती है।
ये लोग संगठन में कार्य करने में बहुत कुशल होते हैं और दूसरों पर नियंत्रण रखना इनका शौक होता है। मंगल के प्रभाव से इन लोगों को गुस्सा काफी अधिक आता है। ये लोग जल्दबाजी में निर्णय ले लेते हैं और फिर बाद में इन्हें बुरा परिणाम झेलना पड़ता है।इस अंक के लोगों के लिए 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27 और 30 तारीखें विशेष फायदेमंद रहती हैं।इन लोगों को अपने क्रोध पर काबू रखना चाहिए। गुस्से पर नियंत्रण के बाद इन्हें कार्यों में कई उपलब्धियां हासिल हो जाती हैं।इन लोगों के लिए रूबी रत्न फायदेमंद रहता है। यह रत्न ऐसे धारण करना चाहिए कि ये शरीर से हमेशा स्पर्श होता रहे।इनके लिए शुक्रवार, बृहस्पतिवार, मंगलवार शुभ होते हैं।

19 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 19 तारीख को हुआ है, वे रचनात्मक तरीके से किसी कार्य को पूरा करते हैं। इन लोगों का लकी नंबर 1 होता है। इस अंक का कारक ग्रह सूर्य है। इसलिए अंक 1 वाले सभी लोगों को सूर्य विशेष रूप से प्रभावित करता है।

अंक ज्योतिष के अनुसार, इस अंक के लोग रचनात्मक, सकारात्मक सोच वाले और नेतृत्व क्षमता के धनी होते हैं। ये लोग जो काम शुरू करते हैं, उसे पूरा करने के बाद ही शांति से बैठते हैं। इन लोगों का विशेष गुण यह होता है कि ये लोग हर काम को व्यवस्थित योजना बनाकर करते हैं, अपने कार्य के प्रति पूरे ईमानदार रहते हैं।इनके लिए रविवार और सोमवार विशेष दिन हैं।पीला, सुनहरा, भूरा रंग काफी फायदेमंद है।तांबे और सोने की धातु धारण करना लाभदायक है।इनके लिए पुखराज, पीला हीरा, कहरुवा और पीले रंग के रत्न, आभूषण आदि शुभ हैं।

20 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-


जिन लोगों का जन्म 20 तारीख को हुआ है, वे लोग अधिक समय तक एक जैसा जीवन नहीं जी सकते, इन्हें परिवर्तन काफी पसंद होता है। इनके मित्र अधिक होते हैं। मन की चंचलता के कारण इनका मन अस्थिर रहता है। विपरीत परिस्थितियों में बहुत जल्दी दुखी हो जाते हैं और कई बार हिम्मत भी हार जाते हैं। ऐसे में आत्मविश्वास की कमी आ जाती है।
 इस अंक का कारक ग्रह चंद्रमा है। चंद्रमा रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा के सभी गुण अंक 20 वाले लोगों में रहते हैं।जिस प्रकार चंद्रमा को चंचलता का प्रतीक माना जाता है कि ठीक उसी प्रकार अंक 20 वाले भी चंचल स्वभाव के होते हैं। चंद्र के प्रभाव से ये लोग प्रेम प्रसंग में भी लाभ प्राप्त करते हैं।इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शुक्रवार शुभ होते हैं।इनके लिए हरा या हल्का हरा रंग बेहद फायदेमंद है। क्रीम और सफेद रंग भी विशेष लाभ देते हैं।लाल, बैंगनी या गहरे रंग इनके लिए अच्छे नहीं होते।इन्हें मोती, चंद्रमणि, पीले-हरे रत्न पहनना चाहिए।

21 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-


जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 21 तारीख को हुआ है, वे अपनी कार्य शैली के कारण प्रसिद्ध होते हैं। सामान्यत: इस अंक के लोग काफी महत्वाकांक्षी होते हैं। इस अंक का ग्रह स्वामी गुरु है। गुरु के प्रभाव से ये लोग उच्च पद प्राप्त करते हैं। इन्हें किसी भी प्रकार का दबाव पसंद नहीं होता है। यदि काम को लेकर इन पर दबाव बनाया जाता है तो ये लोग गुस्सा हो जाते हैं।
इस अंक के लोग अपने कार्य क्षेत्र में ऊंचाई पर पहुंचते हैं। इन्हें मेहनत अधिक करना होती है, लेकिन सफलता प्राप्त कर ही लेते हैं।इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार अधिक शुभ होते हैं।हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारीखें इनके लिए लाभदायक हैं।इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है।रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला शुभ होते है।


22 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-


जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 22 तारीख को हुआ है, वे लोग अपने आसपास के लोगों में अलग पहचान बनाते हैं। ये लोग तर्क-वितर्क करते रहते हैं, इसी वजह से इनके गुप्त शत्रु होते हैं। पुराने समय से चली आ रही परंपराओं के प्रति इनका झुकाव कम ही होता है।
इस अंक के लोग काफी संवेदनशील होते हैं। ये लोग काफी जल्दी गुस्सा हो जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बुरा मान जाते हैं। इसी स्वभाव की वजह से इनके ज्यादा मित्र नहीं होते हैं। मित्र कम होने की वजह से ये लोग अधिकतर अकेलापन महसूस करते हैं। ये लोग किसी को दुखी नहीं देख सकते।इन लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शनिवार भाग्यशाली होते हैं।इनके लिए 1, 2, 7, 10, 11, 16, 18, 20, 25, 28, 29 तारीखें लाभदायक होती हैं।इन्हें नीला और ब्राउन कलर काफी फायदा पहुंचाता है, अत: इन्हें इन रंगों के कपड़े पहनना चाहिए।


23 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों की जन्म तारीख 23 है, वे लोग उत्तेजक कार्य करने में ज्यादा विश्वास रखते हैं। इनका ज्यादा झुकाव पैसों की ओर होता है। धन की प्राप्ति के लिए ये लोग नए-नए रास्तों की खोज करने में लगे रहते हैं। इसी वजह से अंक 5 के लोग खूब धन भी प्राप्त कर लेते हैं।

इस अंक का स्वामी बुध है। बुध के प्रभाव से ये लोग काफी बुद्धिमान होते हैं और बुद्धि संबंधी कार्यों में विशेष सफलता भी प्राप्त करते हैं। ये लोग किसी भी कार्य के लिए शीघ्र निर्णय कर लेते हैं, इसी आदत की वजह से कई बार नुकसान भी होता है।इन लोगों के लिए बुधवार और शुक्रवार शुभ होते हैं।रंगों में इनके लिए हल्का ब्राउन, सफेद और चमकदार रंग बेहद लाभदायक है।इन्हें गहरे रंग के कपड़े कम से कम पहनना चाहिए।इनके लिए 5, 14, 23 तारीखें भाग्यशाली होती हैं।
 

24 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों की जन्म तारीख 24 है, उनके लिए अपने परिवार और शुभचिंतकों की कोई भी बात किसी आदेश के समान ही होती है। प्रेमी या जीवन साथी के प्रति इन लोगों का स्वभाव काफी समर्पित रहता है। अपने साथी की किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए कोशिश करते रहते हैं।ये लोग अपने इरादों के पक्के होते हैं और जो काम एक बार सोच लेते हैं, उसे पूरा करके ही चैन की सांस लेते हैं। इन लोगों को सुंदर वस्तुएं बहुत जल्दी आकर्षित कर लेती हैं। माता-पिता की ओर भी इनका झुकाव काफी अधिक रहता है।
 अंक ज्योतिष के अनुसार, इस अंक का स्वामी शुक्र ग्रह है। शुक्र ग्रह से प्रभावित लोग काफी ग्लैमरस और हाई लाइफ स्टाइल के साथ जीवन जीते हैं। ऐसे लोगों से कोई भी बहुत ही जल्द आकर्षित हो जाता है।इनके लिए मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार शुभ हैं। इन दिनों में शुरू किए कार्यों में इन्हें सफलता प्राप्त हो सकती है।किसी भी माह की 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27, 30 तारीखें शुभ हैं।इन लोगों के लिए बैंगनी और काला रंग अशुभ है। इन्हें लाल या गुलाबी शेड्स के कपड़े पहनना चाहिए।इन लोगों की मित्रता 3, 6, 9 अंक वालों से अच्छी रहती है।ये लोग अंक 5 के लोगों से आगे बढ़ने का बहुत प्रयास करते हैं, लेकिन पीछे रह जाते हैं।

25 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों की जन्म तारीख 25 हैं, वे लोग आमतौर पर यात्रा के दौरान पढ़ना पसंद करते हैं। इस अंक का कारक ग्रह वरुण है और यह जल का कारक है। जल पर चंद्रमा का सीधा असर होता है। चंद्र के असर से इन लोगों का स्वभाव चंचल हो जाता है। ये लोग विदेश यात्रा पर जाने के लिए प्रयत्न करते रहते हैं। इन्हें समाज की अलग-अलग तरह की जानकारी एकत्र करना भी अच्छा लगता है। घर-परिवार में इन लोगों को मान-सम्मान प्राप्त होता है।

इस अंक पर सीधे असर डालने वाला ग्रह चंद्र हमारे मन का स्वामी भी होता है। हर माह अमावस्या और पूर्णिमा के दिन इस अंक के लोगों को चंद्रमा विशेष रूप से प्रभावित करता है। इन्हें पुरानी परंपराएं पसंद नहीं होती।
इस अंक के लोगों के लिए रविवार और सोमवार शुभ होते हैं।माह की 1, 2, 4, 7, 10, 11, 13, 16, 19, 20, 22, 25, 28, 29, 31 तारीखें शुभ हैं।इनके लिए हरा, पीला, सफेद, क्रीम और हल्के रंग विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं।इन्हें गहरे रंगों के उपयोग से बचना चाहिए।इन्हें भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए शिवलिंग पर रोज जल चढ़ाना चाहिए।

26 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

इस अंक का कारक ग्रह शनि है। ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश माना जाता है। शनि किसी भी व्यक्ति के द्वारा किए गए अच्छे-बुरे कर्मों का फल प्रदान करता है। इस वजह से शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है। शनि के प्रभाव से ही इस अंक के लोग दृढ़ इच्छा शक्ति वाले होते हैं। इन लोगों का दूसरों पर काफी गहरा असर होता है। ये लोग किसी काम की जिम्मेदारी लेते हैं तो उसे पूरा अवश्य करते हैं।

इस अंक के लोगों में मनोबल एवं अध्यात्मिक शक्ति अधिक होती है। इन लोगों का परमात्मा पर विश्वास हमेशा बना रहता है।इन लोगों के लिए शनिवार, सोमवार और रविवार फायदेमंद रहते हैं।इन लोगों के लिए किसी भी माह की 8, 17 और 26 तारीखें शुभ हैं।रंगों में इनके लिए गहरा भूरा, नीला, काला और बैंगनी शुभ है।इनके लिए नीलम या काला मोती धारण करना शुभ रहता है।

27 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

इस अंक के लोग परिश्रमी और साहसी होते हैं। ये लोग किसी भी काम को ईमानदारी के साथ पूरा करते हैं और इसी वजह से इन्हें ऑफिस में प्राथमिकता दी जाती है। इस अंक के लोगों को जीवन में कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

इस अंक का स्वामी मंगल है। मंगल के प्रभाव से ये लोग जल्दी क्रोधित हो जाते हैं। कभी-कभी जल्दबाजी में निर्णय ले लेते हैं। ये लोग अपने उत्साह और साहस से बड़ी-बड़ी परेशानियों को आसानी से दूर कर लेते हैं। इस अंक के लोगों के लिए 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27 और 30 तारीखें फायदेमंद रहती हैं।इन लोगों को अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। गुस्से पर नियंत्रण के बाद इन्हें कई उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं।इन लोगों के लिए रूबी रत्न फायदेमंद रहता है। यह रत्न ऐसे धारण करना चाहिए कि शरीर से स्पर्श होता रहे। इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ होते हैं।

28 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 28 तारीख को हुआ है, उन लोगों पर सूर्य की विशेष कृपा रहती है, क्योंकि इस अंक का स्वामी सूर्य ही है। सूर्य से इन्हें किसी भी कार्य को करने के लिए ऊर्जा मिलती है। जिस प्रकार सूर्य चारों ओर रोशनी फैलाता है, ठीक इसी प्रकार ये लोग भी समाज और घर-परिवार में अपना प्रभाव फैलाते हैं।सामान्यत: इस अंक के लोग महत्वाकांक्षी होते हैं और अपने लक्ष्य के रास्ते में आने वाली सभी परेशानियों को आसानी से दूर कर लेते हैं।जो लोग इनके अधीन काम करते हैं, वे इन्हीं पर निर्भर रहते हैं। इनकी मदद के बिना इनके साथी काम को ठीक से पूरा नहीं कर पाते हैं।
 इस अंक के लोगों के लिए रविवार और सोमवार लाभ देने वाले दिन हैं।इनके लिए पीला, सुनहरा, भूरा रंग काफी फायदेमंद है।तांबे और सोने से इन्हें लाभ प्राप्त होता है।इनके लिए पुखराज, पीला हीरा, कहरुवा और पीले रंग के रत्न, आभूषण आदि लाभदायक हैं।
 

29 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

इस अंक का स्वामी चंद्र है। चंद्र के प्रभाव से ये लोग सूर्य से संबंधित अंक 1 वाले लोगों से विशेष तालमेल रखते हैं। ये लोग अपनी कल्पना से किसी भी कार्य को नए ढंग से करने में सफल रहते हैं। अपनी इसी योग्यता के कारण इन्हें कार्यालय में भी विशेष स्थान प्राप्त होता है। ये लोग शरीर की अपेक्षा मस्तिष्क से अधिक बलवान होते हैं।जिस प्रकार चंद्रमा को चंचलता का प्रतीक माना जाता है कि ठीक उसी प्रकार इस अंक के लोग भी चंचल होते हैं। चंद्र के प्रभाव से ये लोग प्रेम प्रसंग में भी पारंगत रहते हैं।इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शुक्रवार शुभ होते हैं।इनके लिए हरा या हल्का हरा रंग बेहद फायदेमंद है। इन्हें क्रीम और सफेद रंग भी विशेष लाभ देते हैं।लाल, बैंगनी या गहरे रंग इनके लिए अच्छे नहीं होते।अंक 2 वालों को मोती, चंद्रमणि, पीले-हरे रत्न पहनना चाहिए।

30 तारीख को जन्म लेने वाले लोग:-

जिन लोगों की जन्म तारीख 30 है, वे लोग कभी-कभी तानाशाही भी करने लगते हैं। इसी वजह से इनके कई विरोधी हो जाते हैं। दूसरों के प्रति आभार मानना भी इन्हें पसंद नहीं होता।इस अंक का स्वामी ग्रह बृहस्पति है और इसी ग्रह की वजह से इन्हें भाग्य का पूरा साथ मिलता है। इन लोगों को किसी के नेतृत्व में काम करना पसंद नहीं होता है, लेकिन परिस्थितियो के कारण ये लोग किसी संगठन में भी अच्छे ढंग से काम कर सकते हैं।इनका लक्ष्य उन्नति करते जाना है, ये लोग अधिक समय तक एक जगह रुककर काम नहीं कर सकते। ये लोग बुरी परिस्थितियों में भी सही रास्ता खोज सकते हैं।
इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ हैं।हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारीखें इनके लिए लाभदायक हैं।इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है।रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला रंग शुभ है।

31 तारीख को जन्म लेने वाले:-

जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 31 तारीख को हुआ है, वे गुप्त विरोधियों से परेशान रहते हैं। सामान्यत: इनके स्वभाव में तर्क-वितर्क करना शामिल होता है और इसी वजह से इनके शत्रुओं की संख्या बढ़ती है। इस अंक का स्वामी ग्रह यूरेनस (अरुण) होता है। इसीलिए इन लोगों पर सूर्य का सीधा असर होता है।कुछ लोग इनके स्वभाव को देखते हुए अंदाजा लगाते हैं कि ये लोग झगड़ालू होंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। अपने तर्क-वितर्क के कारण इन्हें वाद-विवाद और कानूनी कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त होती है।किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों को भी ये लोग आसानी से अपने पक्ष में कर लेते हैं।
इन लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शनिवार शुभ हैं।इनके लिए 1, 2, 7, 10, 11, 16, 18, 20, 25, 28, 29 तारीखें विशेष लाभ प्रदान करने वाली होती हैं।इन्हें नीला और ब्राउन कलर काफी फायदा पहुंचाता है, इसीलिए इन्हें इन रंगों के कपड़े पहनना चाहिए।

Monday, 14 September 2015

क्या आप को पता है हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ जरूरी क्यों !!


आज हर व्यक्ति अपने जीवन मे सभी भौतिक सुख साधनो की प्राप्ति के लिये भौतिकता की दौड मे भागते हुए किसी न किसी समस्या से ग्रस्त है। एवं व्यक्ति उस समस्या से ग्रस्त होकर जीवन में हताशा और निराशा में बंध जाता है। व्यक्ति उस समस्या से अति सरलता एवं सहजता से मुक्ति तो चाहता है पर यह सब केसे होगा? उस की उचित जानकारी के अभाव में मुक्त हो नहीं पाते। और उसे अपने जीवन में आगे गतिशील होने के लिए मार्ग प्राप्त नहीं होता। एसे मे सभी प्रकार के दुख एवं कष्टों को दूर करने के लिये अचुक और उत्तम उपाय है हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ ! क्योकि वर्तमान युग में श्री हनुमान जी शिवजी के एक एसे अवतार है जो अति शीघ्र प्रसन्न होते है जो अपने भक्तो के समस्त दुखो को हरने मे समर्थ है। श्री हनुमान जी का नाम स्मरण करने मात्र से ही भक्तो के सारे संकट दूर हो जाते हैं। क्योकि इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है, इसी कारण श्री हनुमान जी जन साधारण मे अत्यंत लोकप्रिय है। इनके मंदिर देश-विदेश सवत्र स्थित हैं। अतः भक्तों को पहुंचने में अत्याधिक कठिनाई भी नहीं आती है। हनुमान जी को प्रसन्न करना अति सरल हैहनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ के माध्यम से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा अर्चना से अपनी दैनिक दिनचर्या से थोडा सा समय निकाल ले तो उसकी समस्त परेशानी से मुक्ति मिल जाती है।

क्या आप को पता है कुंडली में तलाक के कारण और योग!!


  ज्योतिष के अनुसार तलाक के कारण और योग : सातवाँ   भाव :विवाह से सम्बन्ध रखता है।
 
शुभ  ग्रह :चन्द्र, बुध, शुक्र और बृहस्पति  शुभ  ग्रह होते  हैं !
अशुभ  ग्रह :सूर्य, मंगल, शनि, राहू  अशुभ ग्रह होते  हैं !
शुभ और अशुभ  ग्रह : शुभ ग्रह सातवें भाव को शुभता  देते  हैं और अशुभ ग्रह सातवें भाव के लिए बाधक का काम करते हैं !
 

सातवें भाव पर पृथकताजनक ग्रहों का प्रभाव : सूर्य, बुध और राहू पृथकताजनक ग्रह हैं ! बारहवें भाव की  राशि का स्वामी ग्रह भी पृथकतावादी ग्रह होता है ! दो या दो से अधिक पृथकताजनक ग्रह अगर साथ मै  हों तो जहा  पर बैठेंगे उससे सम्बन्धित चीजों से आपको अलग कर देते है ! सातवें भाव में बैठेकर  जातक को अपने जीवन साथी से अलग करने  की कोशिश करते है !  सप्तम भाव, सप्तमेश एवं कारक ग्रहों का पापी ग्रहों से युति या दृष्टि  दाम्पत्य जीवन में कटुता करता है। सूर्य, शनि, मंगल एवं राहु (पापी ग्रह) दाम्पत्य जीवन में अलगाव लाते हैं।  पापी ग्रहों को पृथकता कारक ग्रह होते  है ! सप्तम भाव इन पापी ग्रहों से पीड़ित अथवा पाप प्रभाव में हो, तो वैवाहिक जीवन कष्टदायक एवं दुखमय होता है। 
 


बृहस्पति :बृहस्पति पति सुख का कारक होकर यदि सप्तम भाव में स्थित हो, जातका के पति सुख में कमी रहेगी। सप्तम भाव के दोनों ओर पापकर्तरी योग (पापी ग्रह) होने पर एक दूसरे के प्रति क्रूर व्यवहार के कारण तलाक की स्थिति बनती है।
 

ग्रहों के फल देने का एक निश्चित समय : जन्मकुंडली में विमशोत्तरी महादशा के नाम से एक कालम होता है जिसमे यह सब समय विवरण दिया रहता है
 

दशा अन्तर्दशा या गोचर :अशुभ ग्रहों का सातवें भाव में होना ही तलाक  की वजह बनते  है ! ग्रह जो सातवें घर को नुक्सान पहुंचा रहा है उसकी दशा अन्तर्दशा या गोचर में आपकी राशि से भ्रमण कर रहा हो !
 
उपाय - इष्ट देव,  की आराधना करे। सप्तम स्थान में स्थित क्रूर ग्रह के उपाय करे । मंगल   ग्रह  का दान करें।   गुरुवार का व्रत करें।  माता पार्वती का पूजन करें। सोमवार का व्रत करें। प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।  पीपल की परिक्रमा करें।

क्या आप को पता है संतान बाधा दूर करने के सरल उपाय !!

 जिन लोगो के संतान नहीं बो जाने संतान बाधा दूर करने के सरल उपाय:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं गुरुवे नमः का जाप करें ! तर्जनी में गुरु रत्न पुखराज स्वर्ण में धारण  करें ! संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करे ! हरिवंश पुराण का पाठ या संतान गोपाल मंत्र का जाप कराये  
 ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि में तनयं कृष्ण त्वामहम शरणम गतः !! 
जाप ,हवन. तर्पण ,ब्राह्मणों को भोजन ! गायें की सेवा करे  !गरीब बालक, बालिकाओं को, पढ़ाएं, लिखाएं, वस्त्र, कापी, पुस्तक, दान करे  !आम, बील, आंवले, नीम, पीपल के पौधे लगाना चाहिए ! !क्रूर ग्रह का उपाय करें !दूध   अंजीर, सफेद प्याज का मुरब्बा  सेवन करें !भगवान शिव का पूजन करें !बड़े का अनादर ना करे !धार्मिक आचरण रखना चाहिए  !गरीबों को  खाना खिलाएं, दान , करें !अनाथालय में  दान दें !कुता  को प्यार करे !संतान दोष अथवा पितृ दोष का  उपाय करना चाहिए  ! घर का वास्तुदोष का  उपाय करे। ! बाधक   ग्रहो के उपाय करे ! सोने  का उपयोग न करे !ताबै का उपयोग  करे।ताबै के बर्तन का पानी पीये !मास मदिरा का सेवन ना करे !अनुलोम विलोन ,कपालभाति करना चाहिए  ! खासी सरदी का  उपाय  करे !जब पंचम भाव में का स्वामी सप्तम में तथा सप्तमेश सभी क्रूर ग्रह से युक्त हो तो वह स्त्री मां नहीं बन पाती। क्रूर ग्रह , बाधाकारक ग्रहों  का जाप ,दान ,हवन ,करने से संतान  की प्राप्ति हो सकती  है
 

सूर्य : पितृ पीड़ा पितृ शान्ति के लिए  पिंड दान  ! हरिवंश पुराण का श्रवण करें  !रविवार को  गेंहु,गुड ,केसर ,लाल चन्दन ,लाल वस्त्र ,ताम्बा,दान करे ! गायत्री जाप करे !ताम्बे के पात्र में ,जल में , लाल चन्दन ,लाल पुष्प ड़ाल कर नित्य सूर्य को अर्घ्य  कराना चाहियें !
 

चन्द्र : माता का शाप  है ! गायत्री का जाप करें  ! मोती चांदी की अंगूठी में  अनामिका या कनिष्टिका अंगुली में धारण करें  ! सोमवार के नमक रहित व्रत  ! सोमवार को चावल ,चीनी ,आटा, श्वेत वस्त्र ,दूध दही ,नमक ,चांदी  का दान करें !
 

मंगल : भ्राता का शाप  !रामायण का पाठ करें  !मूंगा  सोने या ताम्बे  की अंगूठी में अनामिका अंगुली में धारण करें  ! मंगलवार के नमक रहित व्रत रखें !मंगलवार को गुड  ,लाल रंग का वस्त्र और फल ,ताम्बे का पात्र ,सिन्दूर , मसूर की दाल  का दान करें !
 

बुध : मामा का शाप  !विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें  ! पन्ना सोने या चांदी की अंगूठी में बुधवार को कनिष्टिका अंगुली में  ! बुधवार  के नमक रहित व्रत ! बुधवार को कर्पूर,घी, खांड, ,हरे  रंग का वस्त्र ,कांसे का पात्र ,साबुत मूंग  का दान करें !
 

बृहस्पति : गुरु ,ब्राह्मण का शाप !पुखराज सोने  गुरुवार को  तर्जनी अंगुली में ! गुरूवार के नमक रहित व्रत ! गुरूवार को घी, हल्दी, चने की दाल , पीत रंग का वस्त्र का दान करें !गुरु का सत्कार करें
 

शुक्र :  स्त्री को कष्ट नहीं देना है ! गौ दान करें ! ब्राह्मण दंपत्ति को दान  करें ! हीरा या (जरकन )प्लैटिनम या चांदी की अंगूठी शुक्रवार को मध्यमा अंगुली में धारण करें ! शुक्रवार  के नमक रहित व्रत ! शुक्रवार को  आटा ,चावल दूध ,दही, मिश्री ,श्वेत चन्दन ,इत्र, श्वेत रंग का वस्त्र ,चांदी का दान करना  चाहियें !
शनि : प्रेत बाधा है ! रुद्राभिषेक करें  ! नीलम या   लाजवर्त मध्यमा अंगुली में धारण करें !कील  का छल्ला पहने ! शनिवार के नमक रहित व्रत रखें !शनिवार को काले उडद ,तिल ,तेल ,लोहा,काले जूते ,काला कम्बल , काले  रंग का वस्त्र का दान करें  ! श्री हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करना करे।