क्या आप को पता है इस वर्ष 15 दिन का होगा श्राद्ध पक्ष, सूर्य-राहु की युति से बनेगा ग्रहण योग ! ~ Balaji Kripa

Saturday, 26 September 2015

क्या आप को पता है इस वर्ष 15 दिन का होगा श्राद्ध पक्ष, सूर्य-राहु की युति से बनेगा ग्रहण योग !


कल (28 सितंबर, सोमवार) से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है, जो 12 अक्टूबर, सोमवार तक रहेगा। हिंदू धर्म के अनुसार, इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाता है। आमतौर पर श्राद्ध पक्ष 16 दिनों का होता है, लेकिन इस बार प्रतिपदा (प्रथम) तिथि क्षय होने के कारण यह 15 दिन का रहेगा। श्राद्ध पक्ष के दौरान अनेक शुभ योग बनेंगे।

ग्रहण में शुरू होगा श्राद्ध पक्ष -
इस बार श्राद्धपक्ष की शुरूआत चंद्रग्रहण में होगी और सूर्य व राहु की युति होने से 15 दिन तक ग्रहण योग रहेगा। भारतीय समय के अनुसार, 28 सितंबर की सुबह चंद्रग्रहण का प्रारंभ सुबह 07.40 से होगा, जो 08.53 तक रहेगा। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई न देने से जनसामान्य पर इसका कोई बुरा असर नहीं रहेगा। पहले भी बना था ऐसा योग 1977 में भी 27 सितंबर, मंगलवार को चंद्रग्रहण के साथ पितृ पक्ष की शुरूआत हुई थी, साथ ही उस समय सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्यग्रहण का योग भी बना था। उस समय श्राद्ध पक्ष में दो ग्रहण होने से उसे अशुभ माना गया था, जबकि इस बार श्राद्ध पक्ष में तर्पण, श्राद्ध आदि से शुभ फल प्राप्त होंगे।

इस बार 19 साल बाद बनेगा गजछाया योग -
इस बार 19 साल बाद श्राद्ध पक्ष में सूर्य व राहु की युति से गजछाया योग बन रहा है। इसके पहले 1996 में यह योग बना था। प्रमुख श्राद्ध ग्रंथ मदन पारीजात, कौस्तुभ, अग्नि, लिंग, मत्स्य, पद्म आदि पुराण के अनुसार श्राद्ध में जब सूर्य-केतु की युति होती है तो गजछाया योग बनता है। ऐसे योग में पितृकर्म (श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान) करने से उसका पांच गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस योग में पितरों के निमित्त श्राद्ध आदि करने से वे पूर्णतः तृप्त होंगे व श्राद्ध करने वाले को धन-धान्य, पुत्र-पौत्र, सुख-संपत्ति आदि का सुख प्राप्त होगा।
 

इस अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग भी -
श्राद्ध पक्ष के पहले दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। शुभ नक्षत्र व तिथि में श्राद्ध पक्ष की शुरू होना शुभ फल में वृद्धि करेगा। श्राद्ध पक्ष में 29 सितंबर तथा 3 अक्टूबर को अमृत सिद्धि योग बन रहा है। 11 अक्टूबर को दिन भर सर्वार्थ सिद्धि तथा रात में अमृत सिद्ध योग रहेगा। यह दिन पितृ पूजा के लिए विशेष रहेंगे।

इस बार वर्षों बाद पितृविसर्जन पर सोमवती का योग -
सालों बाद इस बार 12 अक्टूबर को पिृतविसर्जन अमावस्या पर सोमवती का संयोग बन रहा है। इस दिन कन्या राशि में चतुर्ग्रही योग रहेगा। हस्त नक्षत्र में चंद्रमा के साथ सूर्य का संयुक्त होना दिव्य योग बना रहा है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान करने से उन्हें विष्णु लोग की प्राप्ति होगी।

इस बार इसलिए खास है ये पितृ पक्ष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य व राहु पितृ दोष के प्रमुख कारण माने गए हैं। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य व राहु एक ही भाव में होते हैं या फिर किसी विशेष स्थिति में होते हैं तो उस व्यक्ति को पितृ दोष से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष की समस्याओं को कम करने के लिए श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण आदि किया जाता है। सूर्य को पितरों का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिषियों की मानें तो 28 सितंबर से शुरू हो रहे श्राद्ध पक्ष में पूरे समय सूर्य व राहु की युति रहेगी, जिसके कारण ग्रहण योग बनेगा। इसलिए इस दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए जाने उपाय विशेष फल देंगे। वर्तमान में ग्रहों की स्थिति भी पितृ दोष निवारण के लिए उपयुक्त बन रही है। इसलिए इस बार का श्राद्ध पक्ष पितरों को प्रसन्न करने वाला तथा श्राद्ध करने वाले को सुख-संपत्ति देने वाला रहेगा।

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