क्या आप को पता है जन्माष्टमी पर बना शुभ संयोग बना रहा है इस द‌िन को करे खाश पूजा !! ~ Balaji Kripa

Thursday, 3 September 2015

क्या आप को पता है जन्माष्टमी पर बना शुभ संयोग बना रहा है इस द‌िन को करे खाश पूजा !!


शन‌िवार 5 स‌ितंबर को पूरी दुन‌‌िया में भगवान श्री कृष्‍ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी मनाया जाएगा। ज्योत‌िषीय गणना के अनुसार इस वर्ष भगवान श्री कृष्‍ण 5,241 वर्ष के हो जाएंगे। ज्योत‌िषशास्‍त्र की गणना के अनुसार इस साल जन्माष्टमी के मौके पर कुछ दुर्लभ योग बन रहे हैं। आइये देखें इस साल जन्माष्टमी पर कौन-कौन से खास और अच्छे योग बन रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव इस बार और भव्य होगा क्‍योंक‌ि इस साल जन्मअष्टमी के पूरे द‌िन अष्टमी त‌िथ‌ि और लगभग पूरे समय रोहिणी नक्षत्र का योग बना रहेगा ज‌िससे जयंती योग बना है। इस योग ने जन्माष्टमी के दिन को और भी खास बना दिया है। इस योग के साथ बन रहे हैं और भी खास योग।जयंती योग के साथ इी इस बार जन्माष्टमी के द‌िन बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग। ज्योत‌िषशास्‍त्री मानते हैं ‌क‌ि इन तीनों योगों का एक साथ होना बड़ा ही दुर्लभ होता है। इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 5 सितंबर को मनाया जाएगा। दृश्य गणित के अनुसार इस दिन आधी रात को 12:26 बजे से रोहिणी नक्षत्र और 3:56 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। रोहिणी नक्षत्र छह सितंबर आधी रात को 12:10 बजे तक और अष्टमी तिथि तड़के 3:02 बजे तक रहेगी। सभी ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि कई दशकों बाद रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी जन्म के दिन लगभग पूरे दिन साथ रहेगी। इसी दुर्लभ योग से जयंती योग बन रहा है। भगवान श्रीकृष्ण को चंद्रमा का वंशज माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से ठीक पहले 11: 51 बजे पर चंद्रमा का उदय सोने पर सुहागा की तरह है।इस बार की जन्माष्टमी की सबसे अच्छी बात यह है क‌ि इस बार के योग द्वापर में श्रीकृष्ण जन्म के समय से मिल रहे हैं। भगवान सूर्य नारायण का दक्षिणायन होना, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु, भाद्र पद, कृष्ण पक्ष अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा, जन्म के समय वृष लगन, सिंह राशि के सूर्य, कन्या राशि के राहु और मीन राशि के केतु का संयोग इस बार भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय का बन रहा है। जों भी पूजा करेगे सब सिद्ध होगे !!
 

हर समस्या का करे अंत, श्रीकृष्ण के विशेष मंत्र !!
 

बाल-गोपाल श्रीकृष्ण के मंत्र ना सिर्फ आर्थिक समस्या दूर करते हैं बल्कि जीवन की हर परेशानी में कान्हा के चमत्कारी मंत्र सहायक सिद्ध होते हैं। चाहे संतान प्राप्ति हो या घर में होने वाले कलह, लव मैरिज हो या विजय प्राप्ति की अभिलाषा, हर समस्या का अंत करते हैं श्रीकृष्ण के प्रस्तुत मंत्र :

घर में होता हो कलह तो पढ़ें यह मंत्र !!

कृष्णाष्टमी का व्रत करने वालों के सब क्लेश दूर हो जाते हैं। दुख-दरिद्रता से उद्धार होता है। जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण अशांति का वातावरण हो, वहां घर के लोग जन्माष्टमी का व्रत करने के साथ इस मंत्र का अधिकाधिक जप करें :

कृष्णायवासुदेवायहरयेपरमात्मने। प्रणतक्लेशनाशायगोविन्दायनमोनम:॥
इस मंत्र का नित्य जप करते हुए श्रीकृष्ण की आराधना करें। इससे परिवार में खुशियां वापस लौट आएंगी।

लव मै‍रिज के इच्छुक लड़के पढ़ें यह मंत्र !!

जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए-

क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।' !!

जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा हो या विवाह में विलंब हो रहा हो, उन कन्याओं को श्रीकृष्ण जैसे सुंदर पति की प्राप्ति के लिए माता कात्यायनी के इस मंत्र का जप वैसे ही करना चाहिए जैसे द्वापर युग में श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोकुल की गोपियों ने किया था।

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरू ते नम:।।


जिन व्यक्तियों के कोई गुरु न हो या किसी पारंपरिक वैदिक संप्रदाय में दीक्षित न हो, उन्हें गुरुभक्ति प्राप्त करने के लिए जन्माष्टमी के शुभ समय में इस मंत्र का जप करना चाहिए-

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरूम्।।


शीघ्र संतान प्राप्ति के लिए घर में श्रीकृष्ण के बालस्वरूप लड्डूगोपालजी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। अनेक पुराणों में वर्णित संतान प्राप्ति का यह सबसे सहज उपाय है। कान्हा जैसी सुंदर संतान के लिए इस मंत्र का उच्चारण करें-

सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच।।


जिन परिवारों में संतान सुख न हो कुंडली में बुध और गुरू संतान प्राप्ति में बाधक हों तब पति-पत्नी दोनों को तुलसी की शुद्ध माला से पवित्रता के साथ 'संतान गोपाल मंत्र' का नित्य 108 बार जप करना चाहिए या विद्वान ब्राह्मणों से सवा लाख जप करवाने चाहिए-

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।


जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों में विजय प्राप्त करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक को पढ़ना चाहिए-

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।


सभी प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन इस मंत्र का उच्चारण करें-

यत्र योगेश्वर: श्रीकृष्ण: यत्र पार्थो धनुर्धर:।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।


दुख या क्लेश के निवारण के लिए श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए 11 बार निम्नलिखित मंत्र का जप एकाग्रचित्त होकर करना चाहिए-

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशय गोविंदाय नमो नम।।

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