क्या आप को पता है भगबानश्रीकृष्ण के पूजन की विधि !! ~ Balaji Kripa

Saturday, 5 September 2015

क्या आप को पता है भगबानश्रीकृष्ण के पूजन की विधि !!



भगबानश्रीकृष्ण के पूजन की विधि !!

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 5 सितंबर, शनिवार को है। जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद सभी देवताओं को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लें (जैसा व्रत आप कर सकते हैं वैसा संकल्प लें यदि आप फलाहार कर व्रत करना चाहते हैं तो वैसा संकल्प लें और यदि एक समय भोजन कर व्रत करना चाहते हैं तो वैसा संकल्प लें)। इसके बाद माता देवकी और भगवान श्रीकृष्ण की सोने, चांदी, तांबा, पीतल अथवा मिट्टी की (यथाशक्ति) मूर्ति या चित्र पालने में स्थापित करें। भगवान श्रीकृष्ण को नए वस्त्र अर्पित करें। पालने को सजाएं। इसके बाद सोलह उपचारों से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी आदि के नाम भी बोलें। अंत में माता देवकी को अर्घ्य दें। भगवान श्रीकृष्ण को फूल अर्पित करें। रात में 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं। पालने को झूला करें। पंचामृत में तुलसी डालकर व माखन मिश्री का भोग लगाएं।
 
शुभ मुहूर्त :-
5 सितंबर को सूर्योदय से रात लगभग 12:10 तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा। शनिवार को अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है इसलिए पूरा दिन शुभ रहेगा।    
 
पूजन सामग्री :-
देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध। तुलसीदल, तिल, जनेऊ। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो।
 
सकंल्प :-
किसी विशेष मनोकामना के पूरी होने की इच्छा से किए जाने वाले पूजन में संकल्प की जरुरत होती है। निष्काम भक्ति बिना संकल्प के भी की जा सकती है। पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों में जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।
 
श्री कृष्ण पूजन की सरल विधि :-
सर्वप्रथम श्री कृष्ण की मूर्ति या सालिगराम को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद फूलों के आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। अब तिलक करें। ‘‘श्री कृष्णाय नमः’’ कहते हुए श्री कृष्ण को अष्टगंध का तिलक लगाएं। अब धूप व दीप अर्पित करें। फूल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें।

 
श्री कृष्ण स्तुति :-
नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।
विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नम:॥1॥
नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।
कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नम:॥2॥
नम: कमलनेत्राय नम: कमलमालिने।
नम: कमलनाभाय कमलापतये नम:॥3॥
बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।
रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नम:॥4॥
कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने।
कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥5॥
वृषभध्वज-वन्द्याय पार्थसारथये नम:।
वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥6॥
बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने।
नम: प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नम:॥7॥
नम: पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च।
पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥8॥
निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नम:॥9॥
प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर।
आधि-व्याधि-भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥10॥
श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर।
संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥11॥
केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन।
गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥12॥

 
राशि अनुसार भोग :-   
ज्योतिष के अनुसार, अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को राशि अनुसार भोग लगाया जाए भक्त की हर मनोकामना पूरी हो सकती है। जानिए राशि अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की किस चीज का भोग लगाएं-
 

मेष- इस राशि के लोग भगवान श्रीकृष्ण को लड्डू और अनार का भोग लगाएं तो अच्छा रहेगा।
वृषभ- इस राशि के लोग श्रीकृष्ण को रसगुल्ले का भोग लगाएं तो उनकी मनोकामना पूरी हो सकती है।
मिथुन- इस राशि के लोग काजू की मिठाई भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें।
कर्क- इस राशि के लोग श्रीकृष्ण को मावे की बर्फी और नारियल का भोग लगाएं।
सिंह- सिंह राशि के लोग गुड़ व बेल का फल भगवान श्रीकृष्ण को भोग में अर्पण करें।
कन्या- इस राशि के लोग प्रभु श्रीकृष्ण को तुलसी के पत्ते और नाशपाती अथवा कोई भी हरे फल का भोग लगाएं।
तुला- इस राशि के लोग श्रीकृष्ण को कलाकंद और सेबफल का भोग लगाएं तो उनकी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले गुड़ की रेवड़ी व अन्य कोई गुड़ की मिठाई का भोग लगाएं।
धनु- इस राशि के लोग श्रीकृष्ण को बेसन की चक्की या अन्य कोई बेसन की मिठाई का भोग लगाएं। इससे इनके सौभाग्य में वृद्धि होने के योग बन सकते हैं।
मकर- इस राशि के लोग भगवान श्रीकृष्ण को गुलाब जामुन या काले अंगूर का भोग लगाएं।
कुंभ- इस राशि के लोग श्रीकृष्ण को चॉकलेटी रंग की बर्फी और चीकू चढ़ाएं।
मीन- मीन राशि के लोग भगवान श्रीकृष्ण को जलेबी या केले का भोग लगाएं। इससे इनके रुके हुए काम पूरे होने की संभावना बन सकती है।

 
भगवान श्रीकृष्ण की आरती :-
आरती कुंजविहारी की। श्रीगिरधर कृष्णमुरारी की।।
गले में बैजंतीमाला, बजावै मुरली मधुर वाला।
श्रवन में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। श्री गिरधर ..
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,
लतन में ठाढ़े बनमाली।
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सो झलक,
ललित छवि स्यामा प्यारी की। श्री गिरधर ..
कनकमय मोर-मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसे,
गगन सो सुमन राशि बरसै,
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालनी संग,
अतुल रति गोपकुमारी की। श्री गिरधर ..
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा,
स्मरन ते होत मोह-भंगा,
बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अध कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की। श्री गिरधर ..
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू,
चहूं दिसि गोपी ग्वाल धेनू,
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव-फंद,
टेर सुनु दीन भिखारी की। श्री गिरधर ..
आरती कुंजबिहारी की। श्री गिरधर कृष्णमुरारी की।

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