क्या आप को पता है जन्माष्टमी पर इन सरल उपायों से करें अपनी समस्या का समाधान !! ~ Balaji Kripa

Thursday, 3 September 2015

क्या आप को पता है जन्माष्टमी पर इन सरल उपायों से करें अपनी समस्या का समाधान !!


सन् 2015 में जन्माष्टमी शनिवार, 5 सितंबर को मानी गई है। समस्या निवारण के लिए यह दिन अत्यंत उपयुक्त है। निम्न तरीके से किए गए जप-अनुष्ठान संलग्न समस्याओं से निजात दिलाते हैं।
 

दारिद्रय निवारण के लिए- '
श्री हरये नम:'
मंत्र का यथाशक्ति जप करें तथा श्रीकृष्ण भगवान के विग्रह का पंचोपचार पूजन कर पंचामृत का नेवैद्य लगाएं।

कस्ट नाश व सुख-शांति के लिए-
'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 
मंत्र का जप करें। श्रीकृष्ण भगवान के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक कर मेवे का नेवैद्य लगाएं। यह मंत्र कल्पतरु है।

 विपत्ति-आपत्ति से बचने के लिए-
'श्रीकृष्ण शरणं मम्' 
इस मंत्र का जप करें।

शांति तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए- '
ॐ क्लीं हृषिकेशाय नम:' 
इस मंत्र का जप करें।

विवाहादि के लिए-
'श्री गोपीजन वल्लभाय स्वाहा' 
मंत्र का जप करें तथा राधाकृष्ण के‍ विग्रह का पूजन करें।

घर में सुख-शांति के लिए-
'ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय स्वाहा'
मंत्र का जप करें तथा कृष्ण-रुक्मणी का चित्र सामने रखें।

 संतान प्राप्ति के लिए-

 'ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।'

 निम्न मंत्र की 1 माला नित्य करें। निश्चित ही संतान प्राप्ति होती है तथा उच्चारण का विशेष ध्यान रखें।

धन-संपत्ति के लिए- 
'ॐ श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नम:'। 
श्री लक्ष्मी-विष्णु की प्रतिमा रखकर पंचोपचार पूजन कर जपें।

शत्रु शांति के लिए -

 'ॐ उग्र वीरं महाविष्णुं ज्वलंतं सर्वतोमुखम्।
नृ‍सिंह भीषणं भद्रं, मृत्युं-मृत्युं नमाम्यहम्।।'


भगवान नृ‍सिंह की सेवा अत्यंत लाभदायक है। निम्न मंत्र की एक माला नित्य करने से शत्रु शांति, टोने-टोटके, भूत-प्रेत आदि से बचाव होता है !

विशेष :=परोल्लिखित मंत्रों में पूजन में तुलसी का प्रयोग अवश्य करें। पूर्वाभिमुख होकर। कुशासन तथा श्वेत वस्त्र का उपयोग करें।

1 comment:

  1. रामभक्त, बजरंगबली, पवन पुत्र, अंजनी पुत्र, ना जाने कितने नामों से पुकारा जाता है हनुमान जी को. हिन्दू धर्म में हनुमान जी को भगवान शिव का ही अवतार माना गया है. लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि भगवान शिव जी की तरह ही हनुमान जी के भी अनगिनत भक्त हैं. उन्हें मानने वालों की गणना करना असंभव है.
    ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान त्रेतायुग से लेकर आने वाले तीन युगों तक जीवित रहे हैं. यानि कि आज के कलयुग में भी वे जीवित हैं, लेकिन कहां हैं यह कोई नहीं जानता.
    त्रेतायुग में श्रीराम के साथ और द्वापर युग में महाभारत के दौरान भीम से मिलना, यह दर्शाता है कि हनुमान जी दो युगों तक हमारे बीच रहे हैं. लेकिन ये वे महारथी हैं जो कलयुग में भी अपना स्थान बनाए हुए हैं.

    ऐसी मान्यता है कि समस्त संसार में जब-जब हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामचरित मानस, रामायण, आदि का पाठ किया जाता है तो हनुमान जी वहां जरूर मौजूद होते हैं.

    हनुमान जी का शक्तिशाली ”बाहुक पाठ”, तुरंत दूर होती है हर समस्या !

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