क्या आप को पता है विवाह में कुंडली मिलान कैसे करे !! ~ Balaji Kripa

Tuesday, 8 September 2015

क्या आप को पता है विवाह में कुंडली मिलान कैसे करे !!



सामान्य रूप से कुंडली मिलान आज के कंप्यूटर के युग में बहुत सामान्य की बात हो गयी है हर दूसरा जातक अपने कंप्यूटर पर सॉफ्टवेर के माध्यम से कुंडली मिलान कर बोल देता है की इनके तो २८ गुण मिल गए या ३२ गुण मिल गए अब विवाह में कोई व्यवधान नहीं आएगा आगे बात की जा सकती है मंगल दोष को भी अधिकतर ज्योतिष के सॉफ्टवेर बता ही देते है भकुट और नाडी दोष के बारे में भी सभी सॉफ्टवेर में दिया ही होता है एसे में जातक अपने आप में ही संतुष्ट हो जाता है ये अवस्था तब है जब गुण २५ से ऊपर मिले होते है इसके विपरीत यदि कभी १२ या १४ गुण मिलते है तो जातक आपनी ही बात से पलट जाते है हम कुंडली मिलान को विशेष महत्त्व ही नहीं देते कुंडली कुछ नहीं होती सिर्फ अपनी सोच है एसे में क्या तत्व दर्शन जातक को अपने पार्टनर का सही चुनाव देने में संभव है तो तो आंशिक रूप से खुद को ही छलावा देना हुआ गणितीय आकडे तो हर सॉफ्टवेर से आसानी से निकल आते है आज विषय को कुछ नए ढंग से लेने का प्रयास करते है कुंडली मिलान इतना आसान नहीं होता जितना की एक साधक समझता है हर विषय को गंभीरता से जब तक न लिया जाये सही उत्तर मिलना आसान नहीं होते एसे में विवाह तो हो जाते है पर कितने समय तक चलेगे ये अपने आप में प्रश्न चिन्ह बन जाता है एसे में ज्योतिष  से प्राप्त ज्ञान के क्रम में कुछ महत्त्व पूर्ण बिंदु आप सभी के सामने प्रस्तुत है !
किसी भी कुंडली में हर ग्रह भाव राशि की एक विशेष अवस्था होती है जो जातक की जीवन की प्रकृति का निर्माण करती है एसे में दो जातको की कुंडली को देख कर उसके सामान्य और असामान्य क्रम को देखना और जीवन की अवस्था में बदलव पर दोनों के स्थायित्व को देखने का क्रम ही कुंडली मिलान होता है
चंद्र की अवस्था का आकलन ही ३६ गुणों में अभिव्यक्त किया गया है जो सही मायेने में सही भी है चंद्र जातक के मन का कारक है चंद्र की विशिष्ट अवस्थाओ के आधार पर दो कुंडलियो में गुण दोषों को देखा जाता है ये सामान्य रूप से बहुत हद तक सही भी है ज्योतिष में मंगल को भी विवाह के समय विशेष रूप से देखा जाता है मंगल के अच्छा होने पर विघ्न कम आते है एसा माना गया है जबकि वास्तविकता कितनी है ये अनुभवी जन ही जानते है इस क्रम में कुछ एसे विषयों को जोड़ना चाहुगा जिसको सामान्य जन नहीं जानते और न ही विवाह के समय उतना विचार करते है जातक की कुंडली में सप्तम भाव जीवन साथी का होता है इसके स्वामी का अस्त होना क्रूर ग्रह सूर्य के साथ होना, राहू या केतु के साथ होना सप्तम भाव पर गुरु या शुक्र की द्रष्टि न होना, मंगल या शनि की द्रष्टि होना जातक के वैवाहिक जीवन में नीरसता लाता है कुंडली में चंद्र का सूर्य/राहू/केतु/मंगल/शनि के साथ होना जातक को अपने ही आप से भ्रमित करता है एसा जातक मन का स्थिर नहीं होता अपरिपक्व सोच वाला होता है दो कुंडलियो में सामंजस्य देखने के लिए ये जरुर देखे की दोनों में सप्तम भाव या सप्तमेश पीड़ित न हो एसा होने पर भले ही ३३ गुण ही क्यों न मिल जाये विवाह के स्थायित्व की सम्भावना कम हो जाती है यदि कुंडली में जाच के समय नाडी दोष हो और दोनों ही कुंडलीयो में पंचम भाव बलि हो और पंचमेश अपनी पूर्ण शुभता के साथ हो तो नाडी दोष उतना खराब नही होता पंचम से नवम का बलि होना यहाँ पर नाडी दोष को हर लेता है यदि नाडी दोष है और पंचम में राहू /मंगल /शनि बैठे है तो आगे संतान के होने में विशेष समस्या देखने को मिलती है सूर्य या गुरु का पंचम भाव में होना संतान की हानि करवा देता है
यदि किसी जातक की कुंडली में सप्तमेश अस्त हो तो धनेश और पंचमेश के कारक ग्रह को बलि करते हुए विवाह से पूर्व उपाय करने चाहिए एसे में अस्त ग्रह को बलि करने पर वो ग्रह अपने नकारात्मक भाव के फल पूर्व में देना शुरू कर देता है यदि किसी कुंडली में चंद्र नीच का है किन्तु सूर्य के ठीक सामने १८० अंश पर है तो वो चंद्र पूर्ण बलि होता है एसा अशुभ चंद्र होने पर भी विवाह के लिए शुभ कारक हो जाता है शनि के साथ सूर्य और मंगल के साथ चंद्र की युति होने पर जीवन में कई बार विवाह के बाद मतभेद देखने को मिलते है एसा जातक अपने परिवार से कभी संतुस्ट नहीं होता अपने सुख को घर के बहार ढूढने का प्रयास करता है एसी अवस्था में मात्र एक ग्रह चंद्र को देख कर गुणों का आकलन कर लेना गलत है बहुत से ग्रह चंद्र के युग्म से बने दोष को हर लेते है और एसे में १२-१५ गुणों वाले मिलान भी एक अच्छे समय तक शुभता देते है और कई बार बाकि ग्रहों का शुभता न देना मात्र चन्द्र के कारण ३२-३६ गुण मिल जाना विवाह के प्रथम वर्ष में ही सम्बन्ध विच्छेद करवा देता है एसे में सॉफ्टवेर की अपनी सीमांए होती है ये विकास का क्रम है पूर्ण विकसित नहीं ज्योतिष का क्षेत्र ही विकास का क्षेत्र है हर किसी को पूर्ण ज्ञान हो ये जरुरी नहीं हा एक निश्चित ज्ञान की अवस्था तक ही हो देख सकता है जितना उसने अपने ज्ञान के आधार पर अनुभव किया है अब जिस प्रोग्रामर से सॉफ्टवेर बनाया है उसकी सीमाए उस ज्ञान पुंज के अनुभव तक ही सिमित है जब की इस विषय को देखना इतना आसान नहीं है मै ये मानता हू भविष्य में एसे सॉफ्टवेर बन सकते है जो डाटा बैंक की जगह ज्ञान बैंक पर आधारित होगे उस अवस्था के आने में समय है तब तक कंप्यूटर को ही आधार मान कर उसके फलित पर विश्वास कर दो लोगो की जीवन में अँधेरा कर देना अल्प ज्ञान है वैसे तो हर किसी की सोच अपने आप ज्ञान उस अवस्था को ला ही देती है जो होना होता है एसे में कई बार ज्ञानी जन के पास जाने पर भी सफलता नहीं मिलती है फिर भी अज्ञानी इन विषय पर भी साधक का ध्यान केंद्रित कर सकते है जिससे काफी हद तक तत्व दर्शन की तरफ जाने में आसानी हो जाती है और जीवन में स्थायित्व आ जाता है सभी के साथ शुभ हो इस कामना के साथ !!

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