विरह की पीढा विनाशकं ब्रह्म-शक्ति स्तोत्रम् ~ Balaji Kripa

Monday, 26 October 2015

विरह की पीढा विनाशकं ब्रह्म-शक्ति स्तोत्रम्



।।श्रीशिवोवाच।।

ब्राह्मि ब्रह्म-स्वरूपे त्वं, मां प्रसीद सनातनि ।
परमात्म-स्वरूपे च, परमानन्द-रूपिणि ।।
ॐ प्रकृत्यै नमो भद्रे, मां प्रसीद भवार्णवे।
सर्व-मंगल-रूपे च, प्रसीद सर्व-मंगले ।।
विजये शिवदे देवि ! मां प्रसीद जय-प्रदे ।
वेद-वेदांग-रूपे च, वेद-मातः ! प्रसीद मे ।।
शोकघ्ने ज्ञान-रूपे च, प्रसीद भक्त वत्सले ।
सर्व-सम्पत्-प्रदे माये, प्रसीद जगदम्बिके ।।
लक्ष्मीर्नारायण-क्रोडे, स्रष्टुर्वक्षसि भारती ।
मम क्रोडे महा-माया, विष्णु-माये प्रसीद मे ।।
काल-रूपे कार्य-रूपे, प्रसीद दीन-वत्सले ।
कृष्णस्य राधिके भद्रे, प्रसीद कृष्ण पूजिते ।।
समस्त-कामिनीरूपे, कलांशेन प्रसीद मे ।
सर्व-सम्पत्-स्वरूपे त्वं, प्रसीद सम्पदां प्रदे ।।
यशस्विभिः पूजिते त्वं, प्रसीद यशसां निधेः ।
चराचर-स्वरूपे च, प्रसीद मम मा चिरम् ।।
मम योग-प्रदे देवि ! प्रसीद सिद्ध-योगिनि ।
सर्व-सिद्धि-स्वरूपे च, प्रसीद सिद्धि-दायिनि ।।
अधुना रक्ष मामीशे, प्रदग्धं विरहाग्निना ।
स्वात्म-दर्शन-पुण्येन, क्रीणीहि परमेश्वरि ।।

।।फल-श्रुति।।
एतत् पठेच्छृणुयाच्चन, वियोग-ज्वरो भवेत् ।
न भवेत् कामिनीभेदस्तस्य जन्मनि जन्मनि ।।
इस स्तोत्र का पाठ करने अथवा सुनने वाले को कभी प्रियतमा वियोग-पीड़ा नहीं होती और जन्म-जन्मान्तर तक पत्नी -भेद नहीं होता। इस स्तोत्र का पाठ करने से निम्न लाभ होते हैं !
पारिवारिक कलह की शांति होती है !रोग या अकाल-मृत्यु भय का शमन होता हैं ! प्रणय सम्बन्धों में बाधाएँ आने पर दूर होती है !
पूजन विधि :=

अपनी इष्ट-देवता या भगवती गौरी का विविध उपचारों से पूजन करके उक्त स्तोत्र का पाठ करें
इच्छित फल कि प्राप्ति के लिये कातरता और समर्पण बहुत आवश्यक है।
 

विरह पीढा नाशक पति स्तवन -
 

बहुत से लोगों कि समस्याओं को देखकर और आधुनिक समाज के आकलन के पश्चात् मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि आज के हमारे समाज में १०० में से ४० युग्म ऐसे हैं जो किसी न किसी प्रकार से वैचारिक मतभेद या किसी तीसरे पक्ष कि वजह से अपने हस्ते खेलते पारिवारिक जीवन में बहुत सी विषमताओं का शिकार होकर रह गए हैं जिसकी वजह से हर पल कि घुटन और अनिश्चितता कि वजह से अपना शारीरिक और मानसिक संतुलन खोते चले जा रहे हैं और परिणाम ये होता है कि इन सब वजहों से पारिवारिक सामाजिक और आर्थिक स्तर का ह्रास होता जा रहा है हालाँकि कुछ समय के बाद लोगों को अहसास होता है कि उन्होंने कितना गलत कदम उठाया था लेकिन जब तक समझ में आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है या फिर सब कुछ तहस नहस हो चूका होता है ! इसलिए सबसे पहले तो मेरी सलाह यही है आप सब लोगों को कि छोटी - मोटी वैचारिक भिन्नताओं को अपने रिश्ते पर इतना भरी न पड़ने दें कि वह आपके रिश्ते को ही खा जाये और एक बात हमेशा अपने दिमाग में रखें कि अवैध रिश्तों कि उम्र और विश्वसनीयता बहुत कम होती है चाहे स्त्री हो या पुरुष यदि वह अपने साथी को भूलकर आज आपकी तरफ आकर्षित हुआ है तो इस बात की क्या गारंटी है कि वह कल आपको छोडकर किसी और कि तरफ नहीं भागेगा ! लेकिन इसके बावजूद भी यदि आप हालात का शिकार हो ही चुके / चुकी हैं तो आपके लिए एक तरीका है जिसे अपने जीवन में शामिल करके आप अपने खोये हुए सौभाग्य / प्रेम को वापस पा सकते हैं - !
 

पति-स्तवनम् -

नमः कान्ताय सद्-भर्त्रे, शिरश्छत्र-स्वरुपिणे ।
नमो यावत् सौख्यदाय, सर्व-देव-मयाय च ।।
नमो ब्रह्म-स्वरुपाय, सती-सत्योद्-भवाय च ।
नमस्याय प्रपूज्याय, हृदाधाराय ते नमः ।।
सती-प्राण-स्वरुपाय, सौभाग्य-श्री-प्रदाय च ।
पत्नीनां परनानन्द-स्वरुपिणे च ते नमः ।।
पतिर्ब्रह्मा पतिर्विष्णुः, पतिरेव महेश्वरः ।
पतिर्वंश-धरो देवो, ब्रह्मात्मने च ते नमः ।।
क्षमस्व भगवन् ! दोषान्, ज्ञानाज्ञान-विधापितान्।
पत्नी-बन्धो, दया-सिन्धो ! दासी-दोषान् क्षमस्व वै ।।

।। फल-श्रुति ।।


स्तोत्रमिदं महालक्ष्मि ! सर्वेप्सित-फल-प्रदम् ।
पतिव्रतानां सर्वासां, स्तोत्रमेतच्छुभावहम् ।।
नरो नारी श्रृणुयाच्चेल्लभते सर्व-वाञ्छितम् ।
अपुत्रा लभते पुत्रं, निर्धना लभते ध्रुवम् ।।
रोगिणी रोग-मुक्ता स्यात्, पति-हीना पतिं लभेत् ।
पतिव्रता पतिं स्तुत्वा, तीर्थ-स्नान-फलं लभेत् ।।
पूजन विधि :=

1- विवाहित स्त्रियों के लिए जो अपने पति के साथ कभी मतभेद नहीं चाहती हैं एवं पति को परमेश्वर तुल्य मानती हैं :-
 

पूजन विधि := प्रातः काल उठाकर अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करने के उपरांत धुले हुए वस्त्र धारण करके भक्ति पूर्वक पति को सुगन्धित जल से स्नान करवाकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएं - तत्पश्चात आसन पर बैठकर उनके मस्तक पर चन्दन का तिलक लगाएं ! गले में पुष्प माला पहनाएं ! धुप दीप अर्पित करें !भोजन करवाकर उन्हें शिव स्वरुप मानकर इस स्तोत्र का पाठ करें !
 

2- उन स्त्रियों के लिए जो पति को प्राणवत प्रेम करती हैं लेकिन उनके पति या तो उन्हें प्रेम नहीं करते या फिर किसी अन्य स्त्री के संपर्क में आ गए हैं :- 
पूजन विधि := प्रातः काल उठाकर अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करने के उपरांत धुले हुए वस्त्र धारण करके भक्ति पूर्वक पति के चित्र को सांकेतिक रूप से सुगन्धित जल से स्नान करवाकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएं तत्पश्चात आसन पर बैठकर उनके मस्तक पर चन्दन का तिलक लगाएं गले में पुष्प माला पहनाएं धुप दीप अर्पित करें भोजन करवाकर उन्हें शिव स्वरुप मानकर इस स्तोत्र का पाठ करें -!
 

3- कुवांरी कन्यायें जो मनोवांछित वर कि इच्छा रखती हैं :-
 

पूजन विधि := भगवान शिव को माता गौरी सहित उपरोक्त विधान से पूजा करने के बाद स्तोत्र का पाठ करें
 

4-  प्रेमी वर्ग कि लड़कियों के लिए :-

यदि आप किसी से प्रेम करती हैं किन्तु आपके माता - पिता या प्रेमी पक्ष के माता - पिता अथवा किसी अन्य व्यक्ति कि वजह से आपके सम्बन्धों में बाधा डाली जा रही है तो आप इस स्तोत्र के पाठ से उन सब बाधाओं को पार करके अपने मनोवांछित तक पहुँच सकती हैं !

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