क्या आप को पता है पति पत्नी के बीच अनबन दूर करने और प्यार बढ़ाने के मंत्र :- ~ Balaji Kripa

Sunday, 18 October 2015

क्या आप को पता है पति पत्नी के बीच अनबन दूर करने और प्यार बढ़ाने के मंत्र :-


पति पत्नी का रिश्ता बहुत ही अटूट और बहुत ही नाज़ुक होता है ये दुनिया का एक ऐसा सम्बन्ध होता है जहाँ सारे रिश्ते मिल जाते है चाहे वह दोस्त के जैसा लड़ना हो या, एक माँ पापा की जैसा प्यार, या फिर एक बच्चे जैसे जिद्द, पति पत्नी दोनों एक दूसरे के लिए ये सारे भूमिका निभाते है. जहाँ इतना प्यार होता है वहाँ लड़ाई झगडे भी आम बात है पर ये पति पत्नी के सूझ भुझ और समझदारी पर निर्भर करता है की वो कैसे उस समस्या का समाधान निकालते है !कई बार होता है की समस्याए सुलझ ही नहीं पाती है और काफी बढ़ जाती है जिसका परिणाम होता है तलाक या आत्महत्या जो शायद कोई भी परिवार नहीं चाहता है !हम आपको कुछ ऐसे तरीके और मंत्र बताते है जिससे आपका रिश्ता कभी खराब नही होगा ना टूटेगा !!

सबसे पहले बात तो यह की कभी भी आज की लड़ाई को कल पर ना छोड़े आज की लड़ाई को आज ही खत्म करके सोये ताकि नए सुबह की सुरुआत नए किरण से हो ना की कल के झगड़े से !
कभी भी एक दूसरे को कमिया ना गिनाते रहे, कमिया सबमें होती है पर महत्वपूर्ण बात ये है की आप उसे कैसे उस इंसान की खूबी बना कर अपनाते करते है ।
जब भी मौका मिले हमेशा एक दूसरे की अच्छाइयों की तारीफ करे और एक दूसरे के नजदीक ज्यादा रहे ! इससे आप दोनों की नज़दीकियां बढ़ेगी।
परिवार और अन्य लोगो के कहने के अनुसार ना चले खुद सोचे क्या अच्छा है हमारे खुद के लिए ! कभी परिवार की गलतियों की बजह से तनाब पैदा होजाता है !
अगर आप लोगो में कलेश बहुत ज्यादा रहता है तो सूर्योदय से पहले इस्नान करके शिव जी के मदिर में जाये और वहाँ शिवलिंग पर जल चढ़ाये और निचे लिखे मंत्र का जाप करे !

ॐ नमः समभवाय च मयो भवाय च नमः
शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च । ।

पति पत्नी के बीच मतभेद को दूर करने का दूसरा तरीका है मंत्र जाप । अगर आप इस जप विधि को विधि विधान से करेंगे तो कभी अनबन नहीं होगी साथ ही आपके बीच प्रेम भी बढ़ेगा

अक्ष्यो नौ मधुसंकाशे अनीक नौ समंजनम् ।
अंतः कृणुष्व मां ह्रदि मन इन्नो सहासति । ।

इस जप को करने के लिए किसी एकांत जगह पर आसन बिछा ले और पूर्व दिशा की और मुँह करके बैठे और अपने सामने मां पार्वती की प्रतिमा या चित्र रखे और श्रद्धापूर्वक उनकी इस्तुति करते हुए मंत्र का जाप १०८ बार जाप करे ।



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