क्या आप को पता है मोक्ष केसे मिलता है !! ~ Balaji Kripa

Friday, 9 October 2015

क्या आप को पता है मोक्ष केसे मिलता है !!

  



एक बार कुम्भ और उसका मेला चल रहा था.भीड़ को देख कर पार्बती जी ने भगबान भोलेनाथ से पूछा प्रभु ये भीड़ कहा जा रही है.भगबान भोलेनाथ बोले ये लोग कुम्भ मै गंगा नहाने जा रहे है तो पार्बती ने पूछा प्रभु गंगा नहाने से क्या होता है भगबान भोलेनाथ बोले गंगा नहाने से मोक्ष प्राप्त होता है तो पार्बती बोली प्रभु मोक्ष प्राप्त करके क्या होता है तो भोलेनाथ बोले कैलाश  प्राप्त होता है.तो पार्बती सुन कर घबरा गयी क्यों कि कैलाश पर तो बहुत भीड़ है जो हम को दिन भर परेशान किये रहते है अगर ये सब आगये तो मेरा क्या होगा ये सोच कर भगबान भोलेनाथ से बोली प्रभु इन सब को मोक्ष प्राप्त हो जायेगा ये सुन कर भगबान भोलेनाथ बोले ये अभी तो नहीं बता सकता हूँ समय आने पर बता दूगा सुन कर पार्बती चुप होगयी जब अन्तिम पर्ब पड़ा तो भगबान भोलेनाथ ने पार्बती से पूछा कि गंगा नहाने चलोगी तो पार्बती बोली प्रभु इच्छा तो बहुत थी लेकिन डर की बजह से आप से कह नहीं पायी.तो भगबान भोलेनाथ बोले चलो पार्बती गंगा नहाने चलते है तो पार्बती चल दी पार्बती को देख कर भगबान भोलेनाथ बोले अगर हम लोग इसी रूप मै पहुच जायेगे तो लोगो को हम लोगो के दर्शन से बिना गंगा नहाये ही मोक्ष मिल जायेगा और लोग हम लोगो को परेशान कर देगे गंगा नहीं नहाने देगे तो पार्बती बोली प्रभु क्या करे बोले तुम रूप बदल लो अति सुन्दरी का रूप धारण कर लो और हम कोडी का रूप धारण करते है दोनों लोग गंगा से थोड़ी दुर जा कर भगबान भोलेनाथ ने कहा पार्बती तुम बैठ जाओ और हम आप की गोद में सिर रखकर लेटजाता हूँ और कोई भी निकले उस से बोलना भाई ये मरे पति है इन को कोड हो गया है पंडितों ने कहा है कि अगर गंगा नहा लेगे तो ठीक हो जायेगे मेरी मदत करो ये कह कर शंकर जी लेट गये थोड़ी देर बाद भीड़ निकलना शुरु तो होगयी तो पार्बती ने सब से बोलना शुरु कर दिया लोग पार्बती को देख कर बोलने लगे तुमने अपना रूप शीशा मै देखा है कितनी सुन्दर हो इस को यही पड़ा रहने दो हमारे साथ चलो हम से सादी कर लेना और कुछ लोग तो बोले हम इस को मार देते है और तुम को अपने साथ ले चलते है तो कुछ लोग बोले हम महारानी बनाके रखेगे कुछ पटरानी कुछ दिल की रानी बनाने को तैयार हो गये ये देख कर पार्बती को बहुत क्रोध आया लेकिन शंकर जी ने रोक दिया बोले तुम चुपचाप लोगो से मदत के लिये बोलते रहो किसी से कुछ बोलोगे नहीं एक समय एसा भी आया कि कुछ लोग  तो बोले चलो इस को उठा ले चलते है तो शंकर जी ने सोचा अगर इन लोगो ने पार्बती को हाथ लगा दिया तो अभी प्रलय हो जाएगी पार्बती किसी को नहीं छोड़ेगी तो भोलेनाथ ने उन का दिमाग घुमा दिया तो बोले चलो गंगा नहा के आते है तब उठा के ले चलेगे अन्त मै दो बुजुर्ग पति-पत्नी जा रहे थे गँगा नहाने पार्बती ने उन से नहीं कहा तो शंकरजी बोले पार्बती आप ने इन से क्यों नहीं कहा तो पार्बती बोली प्रभु जबान तो हम को बुरी द्रष्टि से देखते हुए दिल की रानी,महारानी,पटरानी,जगरानी बनाते चले गये हम को उठाकर ले जा रहे थे ये बुजुर्ग क्या हमारी मदत करेगे तो शंकरजी बोले मदत मागना आप का काम है चाहे जो हो तो पार्बती बोली अम्मा-पिताजी ये मेरे पति है इन को कोड हो गया है पंडितो ने कहा है अगर गंगा नहालेगे तो कोड ठीक हो जायेगा तो दोनों बुजुर्ग बोले ठीक है बेटा आप ने हम को माता-पिता कहा आप हमारी धर्म की बेटी और ये दामाद तो उन्होंने शंकर जी को उठा कर कंधे पर बिठा लिया और ले कर चल दिये थोड़ी दुर चलने के बाद शंकरजी ने बजन बड़ा दिया तो बुजुर्ग लेकर गिर गया थोड़ी देर बाद फिर लेकर चल दिया तो शंकरजी ने फिर बजन बड़ा दिया इस बार ज्यादा वजन बड़ा दिया जिस से बुजुर्ग के शरीर की शक्ति  समाप्त हो गयी वो बोले बेटा बुडापा है इस लिये नहीं ले जा पा रहा हूँ अब हम तीनो लोग लेकर चालते है आदमी ने सिर पकड़ा पार्बती ने कमर और औरत ने पैर पकड कर चल दिए थोड़ी दुर चलने पर शंकरजी ने फिर बजन बड़ा दिया तो पार्बती ने साध लिया शंकरजी ने पार्बती को नोच लिया पार्बती ने छोड़ दिया शंकरजी गिरे धडाम तो बुजुर्ग बोले लगता है दामाद जी एस प्रकार भी नहीं जायेगे अब बुजुर्ग बोले सुन बेटी तुम बैठ जाओ और दामाद का सिर अपनी गोद मै रख लो और सुन बुढ़िया बेटी जबान है एस का ख्याल रखना जमाना बहुत खराब है और साथ में दामाद जी के घाव से बालू साफ करते जाना ,में अभी आता हूँ ,शंकर जी समझे की यह बुजुर्ग लगता है की कोई सवारी लेने जा रहा है ,लेकिन बुजुर्ग गंगा के किनारे पहुंचा और वहां घड़े बिक रहे थे ,बुजुर्ग ने घड़ा उठाया और गंगा जल भर के लेकर चलने लगा तो घड़ा वाले ने पैसे मांगे तो बुजुर्ग बोला में अभी आता हूँ और लौटकर पैसे देता हूँ ,बुजुर्ग ने जल ले जाकर शंकर जी के ऊपर पलट दिया ,पार्वती जी ने पुछा पिताजी यह किया है ,तो बुजुर्ग बोला बेटा अगर गंगा मैय्या और भगवान् भोले नाथ की कृपा होगी तो दामाद जी इसी गंगा जल से ठीक हो जायेंगे नहीं तो गंगा में चाहे जितनी दुबकी लगाओ ठीक नहीं होंगे यह सुनकर शंकर जी और पर्वती जी ने अपना रूप धारण कर लिया यह देखकर दोनों बुजुर्ग और बुढ़िया रोने लगे और बोले प्रभु यह मेरी कैसी परीक्षा है तो भगवान् भोले नाथ बोले यह आपकी अंतिम परीक्षा थी आज आपको मोक्ष प्राप्त होना था ,शंकर जी ने दोनों की आत्मा को उनके शरीर से निकालकर अपने शरीर में समाहित कर लिया और कैलाश लेकर चले गए और पर्वती से पूछने लगे की आप के सवाल का जवाब मिला या नहीं अब आपको पता चल गया होगा की किसको मोक्ष प्राप्त होगा किसको नहीं ?
निष्कर्ष -गंगा नहाने से धर्म- कर्म करने से मोक्ष प्राप्त नहीं होता है यदि आप अपने  विचार क्रिया-कलाप ईश्वरमय रखेंगे तो आपको अवश्य मोक्ष प्राप्त होगा !!

                                                         

0 comments:

Post a Comment