क्या आप को पता है चूड़ियाँ पहनने के धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ !! ~ Balaji Kripa

Monday, 5 October 2015

क्या आप को पता है चूड़ियाँ पहनने के धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ !!


हिंदू धर्म में वैदिक काल से महिलाएँ अपने हाथों में चूड़ियाँ पहनती रही हैं। चूड़ियाँ सोलह शृंगारों में से एक हैं तथा महिलाओं के सुहागन होने का प्रतीक हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार जो विवाहित महिलाएँ चूड़ियाँ पहनती हैं, उनके पति की आयु लंबी होती है। इन सबके साथ-साथ चूड़ियाँ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभप्रद हैं। चूड़ियाँ पहनने से होने वाले लाभ चूड़ियों में प्रयुक्त धातु, चूड़ियों की संख्या, चूड़ियों का रंग आदि पर निर्भर करते हैं।
 

1. महिलाएँ शारीरिक दृष्टि से पुरुषों की तुलना में अधिक कोमल होती हैं। चूड़ियाँ पहनने से महिलाओं को शारीरिक रूप से शक्ति प्राप्त होती है। उन्हें कमजोरी और शारीरिक शक्ति का अभाव महसूस नहीं होता।
 

2. आयुर्वेद के अनुसार सोने और चाँदी की भस्म शरीर के लिए बलवर्धक होती है। सोने और चाँदी की चूड़ियाँ पहनने से जब ये शरीर के साथ घर्षण करती हैं, तो इनसे शरीर को इन धातुओं के शक्तिशाली तत्व प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होते हैं और वे अधिक आयु तक स्वस्थ रह सकती हैं।
 

3. जिस धातु से चूड़ियाँ बनी होती हैं, उस धातु का महिला के स्वास्थ्य के साथ-साथउसके आसपास के वातावरण पर भी प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए प्लास्टिक से बनी चूड़ियाँ रज-तम प्रभाव वाली होती हैं और वातावरण में से नकारात्मक ऊर्जा अपनी ओर खींचती हैं। अतः डॉक्टरों के अनुसार प्लास्टिक की चूड़ियाँ पहनने से महिलाएँ अनेक बार स्वयं को बीमार महसूस करती हैं।
 

4. धार्मिक मान्यता के अनुसार कांच की चूड़ियाँ सात्विक होती हैं और उन्हें पहनने से महिला के पति तथा पुत्र का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। वहीं, विज्ञान का मानना है कि कांच की चूड़ियों की ध्वनि से वातावरण में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
 

5. चूड़ियों की संख्या अधिक होने पर उनका महत्व भी कई गुणा अधिक बढ़ जाता है। विज्ञान का भी मानना है कि जब महिलाएँ अपने दोनों हाथों में अधिक संख्या में चूड़ियाँ पहनती हैं तो इससे एक विशेष ऊर्जा उत्पन्न होती है।
 

6. धार्मिक मान्यता के अनुसार चूड़ियाँ टूटना या उनमें दरार आना महिला या उससे जुड़े व्यक्तियों के लिए एक अपशकुन है। विज्ञान का मानना है कि जब महिला के आसपास के वातावरण में साधारण से अधिक नकारात्मक ऊर्जा हो जाती है, तो वह उस महिला को घेरने लगती है और सर्वप्रथम उसकी चूड़ियों पर प्रहार करती है। यह नकारात्मक ऊर्जा चूड़ियों के भीतर प्रविष्ट होकर धीरे-धीरे उन्हें नष्ट करने लगती है। यदि दरार आने पर भी चूड़ियाँ उतारी ना जाएं, तो यह नकारात्मक ऊर्जामहिला के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालने लगती है।
 

7. चूड़ियों के रंग भी महिलाओं के स्वास्थ्य और उसके वैवाहिक जीवन पर अपना प्रभाव डालते हैं। लोकप्रचलित मान्यता के अनुसार नवविवाहित स्त्रियों को हरे एवं लाल रंग की कांच की चूड़ियाँ पहनने के लिए कहा जाता है, क्योंकि हरा रंग प्रकृति देवी का है। जिस प्रकार एक वृक्ष अपनी छाया से लोगों को खुशहाली प्रदान करता है, उसी प्रकार हरे रंग की चूड़ियाँ उनके दाम्पत्य जीवन में खुशहाली लाती हैं। इसी प्रकार लाल रंग उस महिला को आदि शक्ति से जोड़ता है। लाल रंग प्रेम का भी प्रतीक है, अतः लाल रंग की चूड़ियाँ पहनने से दाम्पत्य प्रेम में वृद्धि होती है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।

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