नरक चतुर्दशी 10 नवम्बर को इस विधि से करें यम पूजन और तर्पण !! ~ Balaji Kripa

Sunday, 8 November 2015

नरक चतुर्दशी 10 नवम्बर को इस विधि से करें यम पूजन और तर्पण !!

  

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी व रूप चतुर्दशी कहते हैं। इस बार यह पर्व 10 नवंबर, मंगलवार को है। इस दिन यमराज की पूजा व व्रत का विधान है। नरक चतुर्दशी पर इस विधि से यम तर्पण करना चाहिए-

पूजन विधि :-
इस दिन शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके सूर्योदय से पहले स्नान करने का विधान है। स्नान के दौरान अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) को शरीर पर स्पर्श करना चाहिए। अपामार्ग को निम्न मंत्र पढ़कर मस्तक पर घुमाना चाहिए-
सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्।
हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:।।

नहाने के बाद साफ वस्त्र पहनकर, तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके निम्न मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देनी चाहिए। यह यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं-
मंत्र :- 

'ॐ गणेशाय नम:'  'ॐ ह्रीं ह्रों सूर्याय नम:, ''ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:, 'ॐ हूं श्री मंगलाय नम:, ''ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नम:, ''ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नम:, ''ॐ ह्री श्रीं शुक्राय नम:, ''ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:, ''ॐ ऐं ह्रीं राहवे नम:, ''ॐ ह्रीं ऐं केतवे नम: ' ऊं यमाय नम:, ऊं धर्मराजाय नम:, ऊं मृत्यवे नम:, ऊं अन्तकाय नम:, ऊं वैवस्वताय नम:, ऊं कालाय नम:, ऊं सर्वभूतक्षयाय नम:, ऊं औदुम्बराय नम:, ऊं दध्राय नम:, ऊं नीलाय नम:, ऊं परमेष्ठिने नम:, ऊं वृकोदराय नम:, ऊं चित्राय नम:, ऊं चित्रगुप्ताय नम:।
 

इस प्रकार तर्पण कर्म सभी पुरुषों को करना चाहिए, चाहे उनके माता-पिता गुजर चुके हों या जीवित हों। फिर देवताओं का पूजन करके शाम के समय यमराज को दीपदान करने का विधान है।नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी करनी चाहिए, क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था। इस दिन जो भी व्यक्ति विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करता है, उसके मन के सारे पाप दूर हो जाते हैं और अंत में उसे वैकुंठ में स्थान मिलता है।
 

पूजन की शुभ मुहूर्त :-
सुबह 05:22 बजे से 06:40 बजे तक (अभ्यंग स्नान के लिए)
शाम को 6:00 बजे से 7:20 बजे तक (दीपदान के लिए)

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