धनतेरस की शाम को अकाल मृत्यु से से बचने के लिए ऐसे लगाये दीपक !! ~ Balaji Kripa

Sunday, 8 November 2015

धनतेरस की शाम को अकाल मृत्यु से से बचने के लिए ऐसे लगाये दीपक !!


    कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इसी दिन से दीपावली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। स्कंद पुराण के अनुसार, धनतेरस को गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति के साथ- साथ कुछ न कुछ खरीद कर लाना चाहिए और प्रदोष काल (शाम) में यमराज के निमित्त दीप और नैवेद्य समर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
दीपदान की विधि :-
मिट्टी का एक नया बड़ा दीपक लें और उसे साफ पानी से धो लें। इसके बाद साफ रुई लेकर दो लंबी बत्तियां बना लें। उन्हें दीपक में एक-दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुहं दिखाई दें। अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही, उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें। इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली, चावल एवं फूल से पूजन करें। उसके बाद घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी-सी खील अथवा गेहूं की एक ढेरी बनाएं और नीचे लिखे मंत्र को बोलते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यह दीपक उस पर रख दें-
मंत्र :-
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदनात् सूर्यज: प्रीयतामिति।।


इसके बाद हाथ में फूल लेकर नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए यमदेव को दक्षिण दिशा में नमस्कार करें !
मंत्र :- ऊं यमदेवाय नम:। नमस्कारं समर्पयामि।।

अब यह फूल दीपक के समीप छोड़ दें और हाथ में एक बताशा लें तथा नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए उसे भी दीपक के पास रख दें !
मंत्र :- ऊं यमदेवाय नम:। नैवेद्यं निवेदयामि।। 

अब हाथ में थोड़ा-सा जल लेकर आचमन के लिए नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए दीपक के पास छोड़ दें !
मंत्र :- ऊं यमदेवाय नम:। आचमनार्थे जलं समर्पयामि।

अब फिर से यमदेव को ऊं यमदेवाय नम: कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें। इस तरह दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।

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