January 2016 ~ Balaji Kripa

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May Baba fullfill all the wishes of the Devotees.

जय श्रीराम

भगवान रामभक्त हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। जहां मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

ॐ हं हनुमंतये नम:

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान म‍ंदिर में जाकर रामभक्त हनुमान का गुणगान करें और उनसे अपने पापों के लिए क्षमायाचना करें।

Sunday, 24 January 2016

क्या आप को पता है भक्ति क्या है !!



" श्री बालाजी  सरकार मैने बहुत सुना है तेरे और तेरे दरबार के बारे में कि मेहदीपुर धाम के बालाजी दरबार में सब कुछ मिलता है आप बालाजी सरकार सबकी मनोकॉमनाये पूर्ण करते हो ,मैं आप के बारे में ज्यादा तो नहीं जनता पर् इतना जानता हूँ कि " विशुद्द भक्ति उसे कहते है जिसमें जरा सी भी कामना न हो ,यदि भक्ति में जरा सी भी कामना रह जाये तो वह भक्ति ,भक्ति ही नही रही वह तो व्यापार बन गयी ,अगर भक्ति के बदले हमने भगवान से कुछ मांगा तो हम भक्त ही कहा रह गये ,हम भक्त नही , हम प्रेमी नही हम तो मजदूर बन गये ,और भगबान से भक्ति के बदले अपनी मजदूरी मांग रहे है ,भक्ति के बदले कुछ मांगा तो समझो हम चूक गये हमने कहा कि जैसे - प्रभु मेरी पत्नि बीमार है ठीक हो जाये या फिर हमारे बेटे की प्रभु अच्छी सी नौकरी लग जाये ,तो समझो हम भक्ति से चूक रहे है ,यह भक्ति नही रही यह तो कामना हो गयी है ,क्यों कि भगबान तो विना मागे ही सब देते है !

भक्ति तो तभी है जिसमे कोई मांग न हो ,जब कोई अपेक्षा न हो जिसमें स्वयं का कोई विचार ही न हो ,सब कुछ मौन में परिवर्तन हो जाये कहने को कुछ भी शेष न रह जाये ,सब कुछ प्रभु की भक्ति में विलीन हो जाये ,भक्ति तो भगवान का विशुद्द धन्यवाद है ,भक्ति में मांग का तो सवाल ही नही उठता है ,भक्ति के बदले मांग कर तो हम उस भक्ति का अपमान कर रहे है ,
भगवान ने जो दिया है वह इतना ज्यादा है कि हम अनुगृहीत है ,भगवान ने जो दिया है वह हमारी पात्रता से कही अधिक है ,जिस संसार सागर में हम डूबे हुऐ है ,हम तो जरा सी कृपा के अधिकारी भी नही है ,फिर भी हम कृपा के अधिकारी हुऐ , यह प्रभु की कृपा नही तो और क्या है ,ऐसी कृतज्ञयता का नाम ही तो भक्ति है ,



भक्ति आग की तरह है और सुमिरन घी की तरह है ,यदि हम चाहते है कि भक्ति की ऑच धीमी न पढ़े तो  सांस सांस में प्रभु के नाम का घी डालते रहियेगा , और यह भी ध्यान में रखना चाहिये कि जिस तरह सुई में धागा डालने से वह सुरक्षित रहती है खोई नही जाती ठीक उसी तरह आत्मा रूपी सुई में सुमिरन रूपी धागा डाला जाये तो वह संसार में कभी भी खोई नही जाती है ,क्यो कि प्रभु जी उस सच्चे धागे को हमेशा पकड कर रखते है , और इस हमारे शरीर के अंत समय वह आत्मा चौरासी लाख यौनियों में न भटक कर प्रभु जी की कृपा से प्रभु जी के अंदर ही विलीन हो जायेगी , क्यो कि भगवान जी सबसे पहले हमारे अंदर ही विराजमान है ,इसी लिऐ किसी के दिल को दुखाने से पहले हमें अपने अंदर बैठे भगवान का ध्यान जरूर कर लेना चाहिये ,जिससे सबका कल्याण हो और सबका उद्धार हो !!

Tuesday, 12 January 2016

भगबान शिव (महाकालेश्वर ) का पंचाक्षरी महामंत्र प्रयोग !!


ये साधना मूल रूप से भगवान् शिव की कृपा प्राप्ति हेतु है और पंचाक्षरी मन्त्र से शिव की प्राप्ति भी संभव है इतिहास और हमारे पुराण प्रमाण हैं कि भगवती पार्वती ने भी इसी मन्त्र के द्वारा भगवान् शिव को प्राप्त करने के लिए पहला चरण बढ़ाया था ! शिव यानि परब्रम्ह और परब्रम्ह की प्राप्ति यानी मूल उत्स से लेकर सहस्त्रार तक पहुँचने कि क्रिया !साधना और प्रयोग में अंतर है यदि इस क्रिया को साधनात्मक रूप में करना है तो समय और श्रम दोनों ही लगेंगे और यदि मात्र प्रयोग करना है तो कृपा तो प्राप्त हो जाती है क्योंकि महादेव तो भोलेनाथ है ही हैं ना !!

साधना विधान और सामग्री—शिव लिंग निर्माण हेतु--- तंत्र साधको के लिए शमशान की मिटटी,और भस्म, श्यामा (काली) गाय का गोबर दूध और घी, गंगा जल, शहद बेलपत्र धतूर फल और फूल स्वेतार्क के पुष्प, भांग रुद्राक्ष की माला, लाल आसन, लाल वस्त्र !
इन सभी सामग्री को पहले ही इकत्रित कर लें ! स्नानादि से निवृत्त होकर जहा पर शिवलिंग का निर्माण करना है उस स्थान को गोबर से लीप कर पवित्र कर लें ! तथा मिटटी भस्म और गोबर को गंगा जल से भिगोकर एक १६ इंच लम्बा और पांच इंच मोटा यानि गोलाई ५ इंच होनी चाहिए, शिवलिंग का निर्माण करें !

साधना विधान—
पीले वस्त्र और पीला आसन उत्तर दिशा की ओर मुख कर आसन ग्रहण करें और संकल्प लेकर जो भी आप चाहते हैं, मैंने पहले ही कहा है कि यदि आप साधना करना चाहते हैं तो संकल्प पूर्ण सिद्धि का और प्रयोग करना चाहते हैं तो उस कार्य का दिन ११ या २१ करके जो आप माला निश्चित करना चाहते हैं जैसे--- ३१,०००, ५१००० आदि ! किन्तु साधना हेतु ५ लाख जप ही आवश्यक है ! मंत्र के पूर्व गुरु पूजन कर चार माला अपने गुरुमंत्र की अवश्य करें जो इस साधना में आपके शरीर को निरंतर उर्जा और सुरक्षा प्रदान करती रहेगी ! गौरी गणेश की स्थापना सुपारी में कलावा लपेटकर करें और पुजन संपन्न करें तथा अपने दाहिने ओर भैरव की स्थापना करें यदि आपके पास भैरव यंत्र या गुटिका हो तो अति उत्तम या फिर सुपारी का भी उपयोग कर सकते हैं  अब भगवान् भैरव का पूजन सिन्दूर और लाल फूल से करें तथा गुड का भोग लगायें ! उनके सामने एक सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें जो मन्त्र जप तक जलता रहे ! अब अपने बायीं ओर एक घी का दीपक प्रज्वलित करें जो कि पूरे साधना काल में अखंड जलता रहे !

ध्यान-
ध्यायेन्नितय् महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रावतंसं ,
रत्नाकल्पोज्ज्व्लाङ्ग परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नम् !
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैव्याघ्रकृत्तिं वसानं,
विश्ववाध्यम विश्ववध्यम निखिल भयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रं !
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्यां नमः आवाहयामि, स्थापयामि पूजयामि !!

इसके शिव का पूजन पंचामृत, गंगाजल और फूल और नैवेध्य आदि से करें और एक पंचमुखी रुद्राक्ष की छोटे दानों की माला शिव को पहना दें और दूसरी माला से जप करें ! सहना के संपन्न होते ही ये माला दिव्य माला हो जाएगी जो जीवनपर्यंत आपके काम आएगी ! अब एक पाठ रुद्राष्टक का करें व मन्त्र जप की सिद्धि हेतु प्रार्थना करें अब अपनी संकल्प शक्तिअनुसार जप करें ! 

मन्त्र— 

!! ॐ नम: शिवाय !!

इसके बाद फिर एक पाठ रुद्राष्टक का और पुनः गुरु मन्त्र ! पूरे दिन आपका यही क्रम होना चाहिए ! किसी भी साधना में नियम संयम का पालन पूरी दृढता होना ही चाहिए न कि अपने अनुसार कम या ज्यादा !

नियम- जो कि अन्य साधना में होते हैं- पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन, भूमि शयन, क्षौर कर्म वर्जित आदि !

विशेष—ये साधना  शैव साधकों की है अतः उनमे कुछ अघोर पद्धति से भी होंगे और कुछ वामपंथ से भी अतः उनके लिए उनका तीनों संध्या अर्थात क्रम पूजन अति आवश्यक है और यदि उन्हें शिव का अघोर पूजन क्रम आता हो तो प्रतिदिन उसी पूजन को करें क्योंकि मूलतः ये अघोर साधना ही है किन्तु शौम्यता का समावेश लिए हुए ! इस साधना क्रम को पूर्णिमा से प्रारम्भ कर पूरे संकल्प तक संपन्न करना है अतः जो भी साधना का संकल्प लें अच्छे से सोच समझकर करें ताकि बीच में क्रम टूटे न !
तो, जो साधक हैं वे तैयारी करें और हो जाएँ शिवमय !

इस बर्ष 15 जनबरी को सूर्य करेगा मकर में प्रवेश, क्या होगा 12 राशियों पर असर !!


इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी, शुक्रवार हाथी पर सवार होकर गर्दभ उपवाहन के साथ मुकुट का आभूषण पहनकर पशुजाति की मकर संक्रांति गोरोचन का लेप लगाकर लाल वस्त्र और बिल्वपत्र की माला पहनकर हाथ में धनुष धारण कर हाथ में लोहै का पात्र लिए दुग्धपान करती हुई प्रोढअवस्था में रहेगी ! इस वर्ष सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी को सूर्यास्त के बाद शाम 7 बजकर 27 मिनिट पर प्रवेश करेगा | संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी की दोपहर 1 बजकर 3 मिनिट पर प्राम्भ होगा जो अगले दिन 15 जनवरी को 11 बजकर 27 मिनिट तक रहेगा ! संक्रांति के बाद स्नान , दान और पूजा का महत्व है |

क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति ---

भगवान भुवन भास्कर के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति कहते है ! पूरे वर्ष में 12 संक्रांतिया होती है जब मेष ,वृषभ , आदि राशि में भगवान सूर्य प्रवेश करते है तो उसे ही मेषादि संक्रांति कहा जाता है लेकिन सबसे ज्यादा मकर संक्रांति का महत्व होता है इसे उत्तरायण भी कहा जाता है क्योकि इस दिन से सूर्य आने वाले 6 माह के लिए उत्तरायण हो जाते है | शास्त्रों में उतरायण को देवताओं दिन माना जाता है और कर्क संक्रांति के बाद के 6 माह को दक्षिणायन कहा जाता है जिसे देवताओं की रात मानी जाती है , जबकि मान्यता है दक्षिणायन पितरो की दिन होता है और उत्तरायण पितरो की रात होती है ! सूर्य के मकर राशि में आने के बाद दिन बड़े होने लगते है , नये प्रकाश का उदय होता है ,प्रकाश उन्नति ,जीवंत शक्ति , सकारात्मकता , का प्रतिक होने से इसका महत्व बहुत ज्यादा होता है | यही बेला होती है जब शिशिर ऋतु की विदाई और वसंत का आगमन होता है !

मकर संक्रांति पर बनेंगे ये योग--
 

मकर संक्राति से देवताओं का दिन आरंभ होता है, ऐसा मान्यता है। इस बार मकर संक्राति अर्की है। मकर संक्रांति उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में आरंभ होगी, जो पशुओं के लिए सुखदायी रहेगी। पाखंड करने वालों का नाश करेगी व व्यापार के लिए फलदायी रहेगी। सूर्य मकर राशि में एवं नवांश में भी मकर में रहेगा। साथ ही, मंगल भी उच्च का होकर नवांश में मकर का रहेगा। इस योग से पूरा वर्ष अच्छा रहेगा। वर्षा जोरदार रहेगी एवं खेती में लाभ होगा।
मेष--
मकर संक्रांति मामूली चिंताजनक है। अज्ञात भय रहेगा। जोखिम भरे कामों को टालने का प्रयास करें। परिवार में खुशियों भरा माहौल रहेगा। इस दिन आपको लाल रंग के वस्त्र धारण करना श्रेष्ठ रहेगा तथा मच्छरदानी एवं तिल का दान करना उचित होगा। शुभ रंग लाल, अंक- 8
वृषभ--
मकर संक्रांति आपके लिए खुशियों को बढ़ाने वाली होगी। विशेषकर विद्यार्थियों को बहुत लाभ होगा। हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। व्यापार में तरक्की होगी। इस दिन आप सफेद रंग के कपड़े पहनें व ऊनी कपड़े व तिल का दान करें। शुभ रंग सफेद, अंक- 7
मिथुन--
शनि-रवि से युक्त मकर संक्रांति आपको मामूली परेशान कर सकती है। ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं, यह मात्र कुछ घंटों के लिए ही होगा। शाम तक प्रसन्नता प्राप्त होगी। इस दिन हरे रंग के कपड़े श्रेष्ठ होगा। तिल एवं मच्छरदानी का दान करें। शुभ रंग हरा, अंक-6
कर्क--
मकर संक्रांति से आपके व्यापार में लाभ एवं परिवार में खुशियां होंगी। अब तक हुए नुकसान की भरपाई होगी। अटके धन की प्राप्ति होगी। समस्याओं का समाधान होगा। इस दिन आपको सफेद रंग के कपड़े पहनने चाहिए। तिल, साबूदाने एवं ऊन का दान करें। शुभ रंग सफेद, अंक-4
सिंह--
मकर संक्रांति पर आपको संतोष एवं सुख का अहसास होगा। नए काम करने के अवसर मिलेंगे। मान-सम्मान एवं प्रसिद्धि बढ़ेगी। नए संपर्क बनेंगे। इस दिन आप केसरिया कपड़े पहनें तो शुभ रहेगा। तिल, कंबल, मच्छरदानी अपनी क्षमतानुसार दान करें। शुभ रंग केशरी, अंक- 5
कन्या--
यह पर्व आपके लिए विशेष खुशियां लेकर आ रहा है। व्यापार एवं व्यवसाय में लाभ होगा। परिवार में आ रहा दबाव खत्म होगा। सम्मानित लोगों से मिलना-जुलना होगा। इस दिन आपके लिए हरे कपड़े पहनना शुभ रहेगा। तिल, कंबल, तेल, उड़द दाल का दान करें। शुभ रंग हरा, अंक- 3
तुला--
मकर संक्रांति आपको सावधान रहकर मनाना है। किसी अनजान की बातों पर विश्वास नही करें। निवेशादि से बचने का प्रयास करें। संतान पर ध्यान दें। इस दिन आप सफेद पहनें। तेल, रुई, वस्त्र, राई, मच्छरदानी का दान करें। शुभ रंग सफेद, अंक- 2
वृश्चिक--
मकर संक्रांति पर लाभ एवं खुशी के समाचार मिल सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में लाभ होगा। संबंधियों एवं सहयोगियों से सहायता प्राप्त होगी। इस दिन आप लाल कपड़े पहनें तो शुभ रहेगा। कंबल, ऊनी वस्त्र ब्राह्मण को या किसी जरूरतमंद को दान कीजिए। शुभ रंग लाल, अंक- 1
धनु--
मकर संक्राति का पर्व आपके लिए महत्वपूर्ण है। आपकी साधनाओं को सफलता मिलेगी। कई दिनों से जो काम करना चाह रहे थे, वह पूरा होगा। ट्रांसपोर्ट एवं आयात-निर्यात वालों को फायदा होगा। इस दिन पीले या केसरी रंग के कपड़े पहनना आपके लिए शुभ रहेगा। तिल व चने की दाल का दान करें। शुभ रंग केशरी, अंक-12
मकर--
मकर संक्रांति का पर्व आप धार्मिक तरीके से मनाएंगे। धार्मिक कामों में सम्मिलित होंगे। व्यापार-व्यवसाय में तरक्की होगी। शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी। संतान के लिए सोचे गए काम पूरे होंगे। इस दिन आप नीले या आसमानी रंग के कपड़े पहनें। तेल, तिल, कंबल, पुस्तक का दान करें। शुभ रंग नीला, अंक- 11
कुंभ--
मकर संक्रांति का पर्व सचेत रहने का संकेत करता है। अनजानों पर विश्वास नहीं करें। जोखिम भरे कामों को टालने का प्रयास करें। इस दिन आप नीले या काले कपड़े पहनें। तिल, साबुन, वस्त्र, कंघी, अन्न का दान कीजिए। शुभ रंग काला, अंक-10
मीन--
मकर संक्रांति पर्व आपके कामों को सम्मान दिलाने वाला होगा। नए लोगों से संपर्क होगा। कार्यक्षेत्र का विकास होगा। इस दिन आपको पीले या गुलाबी कपड़े पहनना चाहिए। व्यापार शुभ होगा। तिल, चना, साबूदाना, कंबल, मच्छरदानी का दान करें। शुभ रंग गुलाबी, अंक- 9

Saturday, 9 January 2016

क्या आप को पता है करोड़पति होने के 10 भाग्यशाली योग !!


जन्मकुंडली में करोड़पति होने के योग कैसे पहचानें? कुंडली के ग्रह की स्थिति और भाव विशेष से व्यक्ति जान सकता है कि उसे धन कब, कैसे और किस मार्ग से प्राप्त होगा।
1- मंगल चौथे, सूर्य पांचवें और गुरु ग्यारहवें या पांचवें भाव में होने पर व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से, कृषि या भवन से आय प्राप्त होती है, जो निरंतर बढ़ती जाती है। इसे करोड़पति योग कहते हैं।
2- गुरु जब दसवें या ग्यारहवें भाव में और सूर्य और मंगल चौथे और पांचवें भाव में हो या ग्रह इसकी विपरीत स्थिति में हो तो व्यक्ति प्रशासनिक क्षमताओं के द्वारा धन अर्जित करता है।
3- गुरु जब कर्क, धनु या मीन राशि का और पांचवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति पुत्र और पुत्रियों के द्वारा अपार धन लाभ पाता है।
4- बुध, शुक्र और शनि जिस भाव में एक साथ हो वह व्यक्ति को व्यापार में बहुत उन्नति कर धनवान बना देता है।
5- दसवें भाव का स्वामी वृषभ राशि या तुला राशि में और शुक्र या सातवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति विवाह के द्वारा और पत्नी की कमाई से बहुत धन पाता है।
6 -शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है, तब अकाउंटेंट बनकर धन अर्जित करता है।
7- बुध, शुक्र और गुरु किसी भी ग्रह में एक साथ हो तब व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धनवान होता है। जिनमें पुरोहित, पंडित, ज्योतिष, कथाकार और धर्म संस्था का प्रमुख बनकर धनवान हो जाता है।
8- कुंडली के त्रिकोण घरों या केन्द्र में यदि गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध बैठे हो या फिर 3, 6 और ग्यारहवें भाव में सूर्य, राहु, शनि, मंगल आदि ग्रह बैठे हो तब व्यक्ति राहु या शनि या शुक्र या बुध की दशा में असीम धन प्राप्त करता है।
9- यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हो और ग्यारहवें भाव में केतु को छोड़कर अन्य कोई ग्रह बैठा हो, तब व्यक्ति व्यापार-व्यवसाय के द्वारा अतुलनीय धन प्राप्त करता है। यदि केतु ग्यारहवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति विदेशी व्यापार से धन प्राप्त करता है।
10- यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में शनि या मंगल या राहु बैठा हो तो व्यक्ति खेल, जुआ, दलाली या वकालात आदि के द्वारा धन पाता है।

क्या आप को पता है पियोनिया के फूल करवा सकते हैं शादी !!


पियोनिया के फूल को फूलों की रानी कहा जाता है। पियोनिया के फूल सौंदर्य, प्रेम एवं रोमांस के प्रतीक माने जाते हैं। यह फूल सामान्यत: स्‍त्रियों से संबंधित माना जाता है। अगर किसी परिवार में विवाह योग्य लड़कियां हैं तो उन्हें चाहिए कि वह अपनी बैठक (ड्राइंग रूम) में पियोनिया के फूल की पेंटिंग लटका दें। इससे परिवार के सौभाग्य में वृद्धि होती है तथा लड़कियों को योग्य वर की प्राप्ति होती है। इसे प्राय: बैठक के दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में रखना चाहिए। ऐसा करने से फूल की भांति घर में जल्द ही प्रसन्नता की लहर दौड़ जाती है। शुभ परिणाम प्राप्ति के पश्चात इस पेंटिंग को हटा देना चाहिए। इसे किसी को उपहार में देना शुभ है जहां इसकी जरूरत है। घर के बगीचे में पियोनिया के फूल प्रवेश द्वार के दाहिनी और लगाना चाहिए।

क्या आप को पता है दिशा शूल क्या है ! दिशा शूल से बचाव के उपाय !!


दिशा शूल ले जाओ बामे, राहु योगिनी पूठ।
सम्मुख लेवे चंद्रमा, लावे लक्ष्मी लूट।
यात्रा सभी लोग करते हैं। कोई व्यापार के लिए, कोई धार्मिक कार्य के लिए, कोई मांगलिक कार्य के लिए अथवा कोई किसी महत्वपूर्ण खरीददारी के लिए। कभी-कभी यात्रा सुखमय होती है, तो कभी यह कष्टमय या असफलता से भरी होती है। इस यात्रा के विषय में दिशा शूल का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। किन्हीं कारणों से दिशा शूल के दौरान उक्त दिशा की यात्रा नहीं टाली जा सकती, तो उससे बचने के उपाय किसी ज्योतिष से पूछकर करने चाहिए।

*पूर्व दिशा- सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन पूर्व दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : सोमवार को दर्पण देखकर या पुष्प खाकर और शनिवार को अदरक, उड़द या तिल खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम उल्टे पैर चलें।
*पश्चिम दिशा- रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन पश्‍चिम दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : रविवार को दलिया, घी या पान खाकर और शुक्रवार को जौ या राईं खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।
* उत्तर दिशा- मंगलवर और बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन उत्तर दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : मंगलवार को गुड़ खाकर और बुधवार को तिल, धनिया खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।
*दक्षिण दिशा- गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन दक्षिण दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : गुरुवार को दहीं या जीरा खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।
*दक्षिण-पूर्व दिशा- सोमवार और गुरुवार को दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन इस दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : सोमवर को दर्पण देखकर, गुरुवार को दहीं या जीरा खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।
*नैऋत्य दिशा- रविवार और शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन इस दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : रविवार को दलिया और घी खाकर और शुक्रवार को जौ खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।
*वायव्य दिशा- मंगलवार को उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन इस दिशा में दिशा शूल रहता है।
*बचाव : मंगलवार को गुड़ खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।
*ईशान दिशा- बुधवार और शनिवार को उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है। इस दिन इस दिशा में दिशाशूल रहता है।
*बचाव : बुधवार को तिल या धनिया खाकर और शनिवार को अदरक, उड़द की दाल या तिल खाकर घर से बाहर निकलें। इससे पहले पांच कदम पीछे चलें।

नोट : नासिका का जो स्वर चलता हो उसी तरफ का पैर आगे बढ़ाकर यात्रा शुरू करनी चाहिए। कदम बढ़ाने से पहले पांच कदम उल्टे पीछे चलें। दिशा शूल पीठ का व बायां लेना ठीक रहता है। सम्मुख और दाहिना वर्जित रहता है।

Friday, 8 January 2016

क्या आप को पता है शनि देता है आने से पहले सावधान होने के संकेत !!


ज्योतिषशास्त्र में शनि ग्रह का विशेष स्थान है। शास्त्रों में शनि को संतुलन व न्याय का ग्रह माना गया है। कई ज्योतिशविदों ने शनि को क्रोधी ग्रह भी माना है और यदि किसी व्यक्ति से कुपित हों जाए तो व्यक्ति के हंसते-खेलते संसार को बर्बाद भी कर देता हैं। इस संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो शनि के प्रभाव से अछूता हो। शनिदेव का नाम सुनते ही व्यक्ति में भय उत्पन्न हो जाता है। शनि के प्रति सभी का डर सदैव बना रहता है। शनि के कारण जीवन की दिशा, सुख, दुख आदि सभी बात निर्धारित होती है। वास्तविकता में शनि कुकर्मियों को पीड़ित करता है तथा सुकर्मियों व कर्मठ लोगों का भग्यौदय करता है। यदि किसी व्यक्ति के कर्म अच्छे नहीं हैं तो शनि भाग्य हरकर पापियों को कंगाल बना देता है परंतु किसी भी व्यक्ति पर अपना असर डालने पर व्यक्ति को कुछ संकेत देता है। यह संकेत एक प्रकार की चेतवानी होती है की व्यक्ति अपने कर्म सुधारे और जीवन के मार्ग पर कर्म व धर्म अपनाकर अकर्म व अधर्म का परित्याग करे। शनि व्यक्ति के जीवन में अनेक परेशानियां लाकर निम्नलिखित बदलाव लाता है।

* शनि प्रभावित व्यक्ति के घर की बाहरी दीवारों पर पीपल के पेड़ लगाना शुरू हो जाते हैं। इन्हे उखाड़ने के पश्चात भी पीपल के पेड़ पुनः उग आते हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति के घर की दीवारों में अकस्मात दरारें आना शुरू हो जाती हैं। नियमित सफाई के बावजूद घर की दीवारों पर मकड़ियां अपना जाला बनाना शुरू कर देती हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति के घर पर बने नमकीन प्रदार्थों में भी चींटियां आ जाती हैं। तथा पूरी सफाई के बावजूद भी चींटियां घर के पलायन नहीं करती हैं। इसे खाना खरण होना कहते हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति के घर पर काली बिल्लियां डेरा डाल लेती हैं तथा वहीं बिल्ली अपने बच्चों को जन्म भी देती हैं तथा अक्सर दो बिल्लियां मिलकर एक दूसरे से लड़ती हुई भी पाई जाती हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति के स्वभाव और विचारों में भी बदलाव आता है। व्यक्ति में काम भावना बढ़ जाती है। मन और भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रहता। व्यक्ति के अनैतिक संबंध भी बन जाते हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति की सूझबूझ खो जाती है। व्यक्ति अर्जित किया हुआधन व कीमती समय लंबी दूरी की यात्राओं में लगा देता है। व्यक्ति को अकारण ही लंबी दूरी की असफल यात्राएं करनी पड़ती हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति का झूठ बोलना बढ़ जाना। व्यक्ति आकारण झूठ बोलना शुरू करा देता है। उसके आचरण और विचारों में झूठ का वास हो जाता है। व्यक्ति को लगता ही नहीं है को वो झूठ बोल रहा है।

* शनि प्रभावित व्यक्ति अत्यधिक सुस्त हो जाता है। व्यक्ति गंदगी पसंद करता है तथा खुद को साफ़-सुथरा नहीं रख पता। नित्य स्नान का त्याग करता है। व्यक्ति बाल और नाखून काटने से परहेज करता है।

* व्यक्ति के खानपान की पसंद में अकस्मात बदलाव आता है। व्यक्ति मांसाहार भक्षण में अत्यधिक रुचि लेता है। मदिरा के सेवन में भी व्यक्ति की रुचि बढ़ती है तथा बासी व तला हुआ खाना पसंद करता है।

* शनि प्रभावित व्यक्ति को प्रॉपर्टी के विवादों का सामना करना पड़ता है। सगे-संबंधियों से पैतृक संपत्ति को लेकर मतभेद बढ़ता है। घर की कोई दीवार गिर सकती है। गृह निर्माण में धन खर्च करना पड़ता है।

* शनि व्यक्ति की टांगों पर का बुरा प्रभाव शुरु करता तो। इस समय व्यक्ति के घुटनो में जकड़न शुरू हो जाती है तथा व्यक्ति के चमड़े से बने हुए जूते या चप्पल खोने लगते हैं या जल्दी-जल्दी टूटने लगते हैं।

* शनि प्रभावित व्यक्ति को कर्मक्षेत्र में परेशानी आती है। व्यक्ति को पदोन्नति नहीं मिल पाती है। अधिकारियों से संबंध बिगड़ने लगते हैं व नौकरी छूट जाती है। व्यक्ति का अनचाही जगह पर तबादला होता है।

* शनि सर्वदा व्यक्ति के पेट और पीठ पर अपना वार करता है। व्यक्ति के कार्यक्षेत्र में समस्याएं आती हैं। उसका कामकाज ठप पड़ जाता है। व्यक्ति का चलता हुआ कारोबार बंद हो जाता है। व्यवसाय में कानूनी दावपेच आ जाते हैं। जिसके कारण व्यक्ति को न्यायालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। शनि प्रभावित व्यक्ति के यहां इन्कम टेक्स औरे सेल टेक्स आदि के छापे भी पड़ते हैं। व्यक्ति के जीवनसाथी के चरित्र का हनन भी होता है। शनि प्रभावित व्यक्ति का लाइफ पार्टनर दूसरे लोगों से शारीरिक रूप से अनैतिक संबंध बनाता है। शनि प्रभावित व्यक्ति के भाई-बहन उससे गद्दारी करते हैं तथा पैसे में ठगी भी करते हैं। शनि प्रभावित व्यक्ति के दोस्त और रिश्तेदार भी व्यक्ति का जीवन खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

Wednesday, 6 January 2016

क्या आप जानते है भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है !!


1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर
मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान
विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी
अन्न की कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र
मिलते हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि
होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान
करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

क्या आप को पता है यश,पदोन्नति एवं ज्ञान प्राप्ति सम्बन्धी स्वप्न विचार !!


कुछ सपने हमारे लिए सुखद संकेत लेकर आते हैं , वे इस ओर इशारा करते हैं कि हमारा भाग्योदय होने वाला या हमें उच्च शिक्षा की प्राप्ति होने वाली है या कहीं से मान – सम्मान मिलने वाला है ! आइये देखेत हैं कैसे होते हैं वे सपने और क्या होता है उनका परिणाम !!
 

स्वप्न स्वप्न का फल:-

1 आकाश देखना...... ऐश्वर्य वृद्धि
2 सुगंध लगाना ...... ज्ञान अर्जित करें
3 लाल फूल देखना..... भाग्योदय होना
4 रोटी खाना .........पदोन्नति
5 प्रकाश देखना....... ज्ञान प्राप्ति
6 चश्मा लगाना.......... विद्वत्ता बड़े
7 घर बनाना.......... .......प्रसिद्धि की प्राप्ति
8 घोड़े की सवारी.... ......पदोन्नत्ति
9 बड़ी दीवार देखना ..........सम्मान प्राप्ति
10 ऊँची जगह पर चढ़ना..........पदोन्नति एवं प्रसिद्धी प्राप्ति
11 धूप देखना.......... पदोन्नति
12 समुद्र देखना....... यश प्राप्ति
13 खाई देखना .........प्रसिद्धि प्राप्ति
14 टोपी देखना.............. उन्नत्ति

Friday, 1 January 2016

क्या आप को पता है 2016 में शनिदेव किसे बनाएंगे कंगाल और किसे करेंगे मालामाल !!


ज्योतिषशास्त्र के खगोल खंड अनुसार शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। धार्मिक शास्त्रों में शनि ग्रह के प्रति अनेक आखयान प्राप्त हैं। सूर्य पुत्र शनि को अपने ही पिता सूर्य का शत्रु भी माना जाता है। इन्हें नवग्रहों में दास की उपाधि प्राप्त है।

इन का रंग सांवला है एवं लंगड़ा होने के कारण इसकी गति मंद है। शनि का वाहन कौआ है। शास्त्रनुसार यदि कुण्डली में सूर्य पर शनि का प्रभाव हो तो व्यक्ति के पितृ सुखों में कमी देखी जाती है। शास्त्रनुसार शनि को पापी ग्रह माना गया है। शनि को मारक, अशुभ व दुख का कारक माना जाता है। शास्त्र उत्तर कालामृत के अनुसार शनि कमजोर स्वास्थ्य, बाधाएं, रोग, मृत्यु, दीर्घायु, नंपुसकता, वृद्धावस्था, काला रंग, क्रोध, विकलांगता व संघर्ष का कारक ग्रह माना गया है। वास्तविकता में शनि ग्रह न्यायाधीश है जो प्रकृति में संतुलन पैदा करता है व हर प्राणी के साथ न्याय करता है। जो लोग अनुचित विषमता व अस्वाभाविकता और अन्याय को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्हीं को प्रताड़ित करता है।
शनि भ्रचक्र की एक परीक्रमा 30 वर्षों में पूरी करते हैं। अतः ये ढ़ाई वर्ष तक एक राशि में गोचर करते हैं। शनि ग्रह रविवार दिनांक 02.11.14 को रात 10 बजकर 02 मिनट पर अपनी उच्च राशि तुला को त्यागकर वृश्चिक राशि में आ गए थे। अतः शनि के वृश्चिक राशि में गोचर का प्रभाव ढ़ाई वर्ष तक देखने को मिलेगा। शनि के राशि परिवर्तन से तुला जातकों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम जबकि वृश्चिक जातकों के लिए दूसरा चरण शुरू हो गया है। धनु जातकों के लिए साढ़ेसाती का प्रारंभ समय है। सिंह व मेष जातकों के लिए शनि की छोटी पनौती रहेगी। सन 2016 में शनि ग्रह मंगल की राशि वृश्चिक में गोचर करेंगे तथा अपने मित्र बुध के नक्षत्र जेष्ठा के पहले चरण की ओर अगरसर होंगे। शनि शुक्रवार दिनांक 25.03.16 को वक्र होकर पुनः शनिवार दिनांक 13.08.16 को सक्रिय होंगे। सन 2016 में शनि मंगलवार दिनांक 22.11.16 को अस्त होकर पुनः बुधवार दिनांक 28.12.16 को उदय होंगे। आइए जानते हैं शनि के द्वादश राशियों पर सन 2016 में क्या प्रभाव रहेंगे।

मेष: शनि के आठवां गोचर से आप पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा। काम धंधे को लेकर तनाव लाएगा परंतु सरकारी संस्थाओं से लाभ भी मिलेगा। देश-विदेश की लम्बी यात्रा भी संभव है। छल व धोखे के योग हैं अतः लेन-देन में सावधानी बरतें।
वृष: शनि के सातवें गोचर से आय वृद्धि के साथ-साथ ख़र्चे भी बढ़ेंगे। सामाजिक जीवन में परेशानी उठानी पड़ेगी। महत्वपूर्ण कार्यों में अवरोध होगा। प्रियजन का वियोग सताएगा। कानूनी विवाद के योग हैं। घर बदलने के योग भी बन रहे हैं।
मिथुन: शनि के छ्ठे गोचर से आजीविका में लाभ होगा। तकनीकी कार्य से जुड़े लोगों को उन्नति मिलेगी। पारिवारिक संबन्धों में कटुता रहेगी। आर्थिक मसले तंग करेंगे। स्थान परिवर्तन के योग हैं। पार्टनर का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। प्रोपेर्टी से लाभ होगा।
कर्क: शनि के पंचवे गोचर से विरोध और अपकीर्ति फैलेगी। विपरीत लिंग से अधिक प्रगाढ़ता नुकसान का कारण बनेगी। पूंजी के संयोजन में धोखाधड़ी भी हो सकती है। संतान पक्ष से चिन्ता बढ़ सकती है। ख़र्च बढ़-चढ़कर रह सकते हैं।
सिंह: शनि के चौथे गोचर से प्रोफेशन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। समय प्रॉपर्टी की ख़रीद-फरोख़्त के लिए बढ़िया है। प्रोफेशन के लिए वर्तमान जगह को बदलना पड़ेगा। घर के बुज़ुर्गों का स्वास्थ्य का बिगड़ेगा। धार्मिक यात्राएं होंगी।
कन्या: शनि के तीसरे गोचर से अप्रतियाशित भय व हानि हो सकती है। संतान पक्ष को लेकर कुछ सुकून का अनुभव करेंगे। पारिवारिक मांगलिक आयोजनों के योग हैं। प्रोफेशन में उन्नति होगी। विदेश जाने के अवसर मिलेंगे। धनार्जन व निवेश होगा।
तुला: शनि के दूसरे गोचर वश आप साड़ेसती के प्रभाव में हैं। शारीरिक पीड़ा के योग हैं। आंखों की तकलीफें रहेगी। चोरी होने का भय रहेगा। वाहन चलाते समय सावधान रहें दुर्घटना के योग हैं। रिश्तेदार पीठ दिखाएंगे। प्रतियोगिता में लाभ मिलेगा।
वृश्चिक: शनि के पहले गोचर वश आप साड़ेसती के प्रभाव में हैं। शारीरिक कमजोरी रहेगी। शत्रुओं के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा बिगड़ेगी। सजग रहें धन हानि के योग हैं। प्रोफेशन में उतार-चढ़ाव रहेगा। पारिवारिक व दांपत्य जीवन बेहतर रहेगा।
धनु: शनि के बारहवें गोचर वश आप साड़ेसती के प्रभाव में हैं। जीवन में उलटफेर होगा। संतान से कष्ट होगा। धन बेकार कार्यों में ख़र्च होगा। विवाद से बचें। स्वास्थ्य बिगड़ेगा। लालच में पड़ने से परेशान होंगे। संतुष्टि व समझदारी से काम लें।
मकर: शनि के ग्यारहवें गोचर से कोई नया काम शुरू होगा। संतान पक्ष को लेकर चिंताएं रहेंगी। आमदनी के अच्छे योग हैं। बड़ा ख़र्चा भी संभव है। धनागमन अच्छी जगह निवेश होगा। स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहेगा। अप्रत्याशित लाभ होने के योग हैं।
कुंभ: शनि के दसवें गोचर से प्रोफेशन में तरक्की मिलेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। राजनीतिज्ञों को मदद मिलेगी। पारिवारिक बुजुर्ग का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। सर्विसमैन के प्रमोशन के योग हैं। स्टूडेंट्स के लिए समय अनुकूल है। प्रोफेशन में सुधार होगा।
मीन: शनि के नवें गोचर से आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। सर्विस में तरक्की मिलेगी। प्रोफेशन हेतु समय अच्छा है। पारिवारिक मांगलिक कार्य होने के योग हैं। निवेश सफल रहेगा। मित्र मददगार साबित होंगे। कानूनी मामलों में विजय मिलेगी।